shayarisms4lovers June18 199 - अदभुत रोचक कहानियों का एक संग्रह “मालगुडी डेज़”

अदभुत रोचक कहानियों का एक संग्रह “मालगुडी डेज़”

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अदभुत रोचक कहानियों का एक संग्रह “मालगुडी डेज़” – Malgudi Days Book

विश्वस्तरीय रचनाकार और मशहूर लेखक आर. के. नारायण की ‘मालगुड़ी’ की कहानियां अदभुत रोचक कहानियों का एक संग्रह हैं। आर के नारायण की ‘मालगुडी डेज़’ Malgudi Days सबसे पहले 1943 में छोटी कहानियों के संग्रह के रूप में प्रकाशित हुई थी।

आर. के. नारायण ने अपनी ये पुस्तक अपनी मैसूर और चेन्नई के अनुभवों से लिखी थी। अपनी यात्रा के दौरान ये यहां कई जगहों पर ठहरें जहां उन्होनें आधुनिकता और पारंपरिकता के बीच साधारण चरित्रों को देखा इसी को उन्होनें अपने असाधारण कथा-शिल्प के ज़रिये और अपनी पुस्तक में उतार दिया।

आपको बता दें कि मालगुड़ी दक्षिण भारत के मद्रास से कुछ घंटो की दूरी पर स्थित एक काल्पनिक गाँव है जिसे आर. के. नारायण ने  अपनी कल्पना में बनाया। यह शहर मेम्पी जंगल के पास सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। इस जगह की वास्तविकता के बारे में खुद आर. के. नारायण अनजान थे।

इस पुस्तक में सभी तरह की शक्तिशाली और जादुई चित्रों की 40 साल पुरानी कहानियां हैं। ‘मालगुडी डेज’ पर दूरदर्शन ने धारावाहिक बनाया था जो दर्शक आज तक नहीं भूले हैं। आपको बता दें कि 1986 में सबसे पहले ‘मालगुडी डेज़’ दूरदर्शन पर टेलिकास्ट हुआ था।

वहीं इसका पहला एपिसोड ‘स्वामी एंड फ्रेंड्स’ था और इसका टाइटल सॉन्ग भी लोगों को काफी आर्कषित करता है। वहीं कई सालों बाद भी मालगुडी डेज़’ की कहानियां उतनी ही जीवंत और लोकप्रिय हैं, जितनी पहले कभी थी। इसी खूबी के चलते उन्होनें पाठकों के दिल में अपने लिए जगह बनाई थी।

आपको बता दें कि आर. के नारायण की पुस्तकों की खास बात यह थी कि उनकी कहानियां सकारत्मा ऊर्जा का संचार करती थी। एक बार जो उनकी कहानियां पढ़ लेता है वो उनकी किताबों की तरफ खिंचा चला जाता है। साथ ही उनकी पुस्तकों की तारीफ किए बिना नहीं रह पाता।

आर. के नारायण की मालगुडी डेज़ और बाकी कहानियों में किरदार बड़े आम होते थे। जैसे कि सुबह से लेकर रात तक, एक आम आदमी क्या-क्या करता है और कौन सी छोटी-छोटी चीज़ें उसे खुशी देती हैं। दुख में भी कैसे वो खुशी ढूंढ ही लेता है।

नारायण की हर कहानी का अंदाज़ भावुक और हास्यास्पद है। हर कहानी से ये तो जाहिर है कि महान रचनाकर कोई भी कहानी लिखने से पहले खुद को किरदार में ढालकर सोचते थे और ये अपने विचारों को अपनी पुस्तक में लिखते थे।

आर. के नारायण कई मशहूर उपन्यास भी लिखे थे जिनमें से “द गाइड”(The Guide), “स्वामी एंड फ्रेंड्स” (Swami and friends), “द इंग्लिश टीचर” (The English Teacher) काफी मशहूर हैं।

वहीं उनकी महान रचनाओं के लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स भी दिए गए। 1958 में आर. के नारायण को अपनी नॉवेल ‘द गाइड’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। जबकि 1980 में एसी बेनसन मेडल से नवाजा गया।

इसके अलावा आर.के नारायण की कुशल प्रतिभा को देखते हुए 1989 में इन्हें राज्य सभा के लिए नॉमिनेट किया गया था। वहीं राज्य सभा के उन 6 साल में नारायण ने एजुकेशन सिस्टम को बेहतर करने की कोशिश की भी की। आर.के नारायण को पद्म विभूषण से भी नवाज़ा गया था।