काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी

Poetry

काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी
दिल दर्द के मौसम में रोया भी हंसा भी

आने का सबब याद ना जाने की खबर है
वो दिल में रहा और उसे तोड़ गया भी

हर एक से मंज़िल का पता पूछ रहा है
गुमराह मेरे साथ हुआ रहनुमा भी

‘गुमनाम’ कभी अपनों से जो गम हुए हासिल
कुछ याद रहे उन में कुछ भूल गया भी

-सुरेंदर मलिक गुमनाम