poppy plant nature macro 65644 - ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा

ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा

Poetry

ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा
मौत जब हम को आवाज़ देगी घर से बाहर निकलना पड़ेगा

ढेर मिट्टि का हर आदमी है बाद मरने के होना यही है
या ज़मीनों में तुरबत बनेंगे या चिताओं पे जलना पड़ेगा

रात के बाद होगा सवेरा देखना है अगर तुम को दिन सुनेहरा
पावं फूलों पे रखने से पहले तुम को काँटों पे चलना पड़ेगा

ऐतबार उन के वादों का मत कर वरना आई दिल मेरे ज़िंदगी भर
तुझ को भी मोमबत्ती की तरह क़तरा क़तरा पिघलना पड़ेगा

ये जवानी है पल भर का सपना ढूंढ ले कोई महबूब अपना
ये जवानी अगर ढल गई तो उम्र भर हाथ मलना पड़ेगा

-सुरेंदर मलिक गुमनाम