जानिए अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी, इसलिए है महान – Statue of Liberty

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Statue of Liberty

हर देश की किसी ना किसी रूप में अपनी ही एक अनोखी पहचान होती है जिसके कारण लोग उस देश को जानने लगते है। और उन देशवासियों के लिए वह एक गर्व की बात होती है जिसका वह दिल से सम्मान करते है। इसी के चलते कई देशों में मशहूर मूर्तियों की भी स्थापना की गयी है और वह मूर्तियां किसी न किसी रूप में सकारात्मक छवि का प्रतीक बन चुकी है। अमेरिका में भी एक प्रतिमा मौज़ूद है जिसका नाम रखा गया है “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” – Statue of Liberty । लोकतंत्र और समानता की प्रतीक है यह भव्य प्रतिमा।

जानिए अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी, इसलिए है महान – Statue of Liberty

अमेरिका, न्यूयॉर्क में यह प्रतिमा एक मशहूर पर्यटक स्थल है, यह विश्व के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। जहाँ आमतौर पर भीड़ दिखना लाज़मी है। हाल ही में अमेरीका में 28 अक्टूबर 2018 को इस प्रतिमा का 133 वां जन्म दिवस बनाया गया था।

इतिहास से वर्तमान तक चली आ रही इस प्रतिमा की स्थिरता के बारें में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य भी हैं जो आपको “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” के और नज़दीक लेकर जायेंगे।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” का इतिहास – Statue of Liberty  History

इस विशालकाय मूर्ति को वर्ष 1886 में फ्रांस ने अमेरिका को भेंट के रूप में दिया था। जिसका मुख्य उद्देश्य था कि दोनों देशो के बीच मित्रता कायम रहे। “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” का पूरा नाम ‘लिबर्टी इनलाईटीएनिंग द वर्ल्ड” (Liberty Enlightening The World) है।  इस महान प्रतिमा का सिर साल 1878 में पेरिस के एक विश्व मेले में लोगो के सामने पेश कर दिया गया था।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” की ऊंचाई – Statue of Liberty Height

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” की प्रतिमा अपनी लम्बाई के लिए दुनिया भर में मशहूर है। इसकी कुल ऊंचाई धरती से लेकर मशाल के नौंक तक 305 फुट 6 इंच है एवं इसकी कमर की चौड़ाई 35 फ़ीट की है। साथ ही इस प्रतिमा का कुल वज़न 226 टन अंकित किया गया है।

इस मूर्ति के सिर पर एक ताज़ है जिसमे सात किरणेकीलें है, जो सातों महाद्वीपों और समुन्दरों को दर्शाती है। ें एक कील की लम्बाई 9 फ़ीट तक की है और साथ ही उसका वज़न 68 किलो का वज़न है। मुकुट पर 25 खिड़कियां भी देखने को मिलती है जो धरती के रत्नो को दर्शाती है।

फ्रांस से अमेरिका लाते वक्त मूर्ति को 350 टुकड़ो में बांटा गया था व 214 संदूको में भरकर इसे अमेरिका तक लाया गया जिसको बाद में एकत्रित कर के पूर्ण रूप से तैयार किया गया था।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” कहा स्थित हैं – Statue of Liberty Location

पर्यटकों को “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” को देखने के लिए लिबर्टी आइसलैण्ड – Liberty Island  पर आना होगा। इस टापू का यह नाम वर्ष 1956 में रखा गया था इससे पहले इसे बैडलॉ आइस लैंड से जाना जाता था।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” बनी जानकारी – Statue of Liberty Information in Hindi

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” को अमेरिका और फ्रांस के दिए हुए दान के पैसो से बनाया गया था। दान एकत्रित करने के लिए 1885 में न्यूयोर्क के एक प्रसिद्ध अखबार में यह घोषणा की गयी थी की मूर्ति के निर्माण के लिए आर्थिक दान की आवश्यकता है।

जिसकी सहायता से उस समय एक लाख दो हज़ार डॉलर का दान आया था। 1886 में पेडेस्टल समेत स्टैच्यू को तैयार करने में पांच लाख डॉलर का खर्चा आया था।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” के शिल्पकार व विचारकर्ता – Who Built the Statue of Liberty

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” कोई धक्के से नहीं बनाई गयी है बल्कि इसके लिए कई लोगो ने प्रयत्न किया है। जिसके लिए विचारकर्ता के रूप में Edouard de Laboulaye ने मुख्य भूमिका निभाई थी। साथ ही इस विशाल प्रतिमा का डिज़ाइन Frederic Auguste Bartholdi ने किया था। एवं इसके रीढ़ की हड्डी का शिल्पकार वही था जिसने आई फिल टॉवर का निर्माण किया था। जिसका नाम गुस्ताव एफिल है।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” से जुड़े कुछ रोचक बातें – Statue of Liberty Facts

मूर्ति की मशाल गयी थी टूट:

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी में एक मशाल भी है। यह मशाल मूर्ति बनाने के दौरान सबसे पहले तैयार की गयी थी। जो की 1876 में बन गयी थी। पर यह मशाल ज्यादा लम्बे समय तक नहीं टिक सकी।

1916 के विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सैनिको द्वारा किये गए बम्ब विस्फोट के बाद यह मशाल दुर्घटना ग्रस्त हो गयी थी। जिसको ठीक करने पर अंदाज़न 1 लाख डॉलर का खर्चा आया था। साथ ही 1984 में पुरानी मशाल को हटाकर इसकी जगह 24 कैरट की सोने की पतली चादर से ढकी ताम्बे की नई मशाल लगा दी गयी।

मूर्ति से उतपन्न होती है बिजली:

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की 92 मीटर की ऊंचाई होने के कारण इससे आकाशी बिजली भी साल में लगभग 300 बार टकराती है। 1980 में यह एक बिजली पैदा करने वाला ढांचा बन गया था। क्योंकि धातु से बने होने के कारण इसके सम्पर्क में नमक और पानी आता है जिससे यह एक बैट्ररी बन गयी थी। अगर इस बिजली को एकत्रित किया जाये तो यह 600 वोल्टस बनती है।

इस देवी से ली थी प्रेरणा:

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को बनाने के लिए रोमन देवी लिबर्ट्स से प्रेरणा ली गयी थी क्योंकि माना जाता है की रोमन देवी स्वंत्रता का प्रतीक है। शिल्पकार ने इसे अपनी माँ के चहरे जैसा बनाया है।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” की प्रतिकृतियां – Replicas of the Statue of Liberty

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” के प्रति लोकप्रियता इस रूप से देखी जा सकती है की दुनिया के कई देशो में इसकी डुबलीकेट मूर्तियां भी है। जिनमे पाकिस्तान, मलेशिया, ताइवान, ब्राज़ील और चीन देश शामिल है।

“स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी” एक पर्यटन – Statue of Liberty Tourism

एक खबर के अनुसार “स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को देखने के लिए हर साल 32 लाख लोग आते है जिन्हे 354 सीढ़ियों से गुज़र कर जाना होता है।

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