shayarisms4lovers mar18 55 - मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी

मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी

Poetry Urdu Poetry

मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी
ये जाम दूर रख दो पी लूँगा फिर कभी

दिल को जला के बज़्म को रौशन ना कीजिए
उस महजबीन को आने में कुछ देर है अभी

हम ने तो अश्क पी के गुज़री है सारी उम्र
हम से खफा है किस लिए आखिर ये ज़िंदगी

जाम-ए-सुबू को दूर ही रहने दे सक़िया
मुझ को उतरना है कल का नशा अभी

-सुरेंदर मलिक गुमनाम