सड़क किनारे ठेले में अंडे बेचने वाला कैसे बना उदयपुर का ‘एग किंग’? | Egg king Of Udaipur Motivational Success Story In Hindi

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Egg King Udaipur Motivational Success Story In Hindi : जब हौसला उड़ान भरता है, तो अंबर भी आपको सलाम करता था. लगता है ये वाक्य जय कुमार वलेचा (Jay Kumar Valecha) के लिए ही बना है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपने हौसलों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया.

बचपन तो मानो उन्होंने देखा ही नहीं. परिस्थियाँ ऐसे बनी कि १२ वर्ष की छोटी उम्र में बीमार पिता, माता, भाई-बहनों और पूरे परिवार का दायित्व अपने कंधों पर उठाने के लिए विवश हो गए.

उस समय जय कुमार के नन्हें कंधे भले ही उतने मजबूत ना थे, पर सपने बड़े थे, हौसले बुलंद थे और जिंदगी में कुछ बड़ा कर गुजरने का ज़ज्बा दिल में भरा पड़ा  था. उसी ज़ज़्बे के बदौलत उदयपुर (Udaipur) में सड़क किनारे ठेले पर अंडा भुर्जी बेचने वाला मामूली सा लड़का जय कुमार वलेचा आज उदयपुर में ‘उदयपुर का एग किंग’ (Egg King Udaipur) के नाम से मशहूर है.

कैसे संभव हो सका ये? क्या सब कुछ इतना आसान था? आखिर ऐसा क्या किया जय कुमार ने कि कभी सड़कों की धूल फांकने वाला आज लाखों की गाड़ी में घूमता है. ये जानने के लिए पढ़िये motivational success story of Egg King of Udaipur :

Egg King Udaipur | Image Source : udaipurbeats.com

ये Story है – Jay Kumar Valecha (जय कुमार वलेचा) की, जिन्हें गरीबी विरासत में मिली थी. पिता उदयपुर में सड़क किनारे ठेले पर अंडा भुर्जी (anda bhurji), आमलेट (omelette) और उबले अंडे (boiled egg) बेचा करते थे. कमाई इतनी नहीं थी कि घर की आर्थिक स्थिति संबल हो पाती.

घर की बिगड़ती आर्थिक स्थिति देख जय कुमार (Jay Kuar Valecha) ने चौथी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया और अपने पिता के धंधे में हाथ बंटाने उनके साथ हो गए. वे पिता के साथ ठेले को धक्का लगाते और सड़क किनारे खड़े करके अंडे बेचते थे. पिता को देख-देखकर जय कुमार ने छोटी सी उम्र में ही अंडा भुर्जी और ऑमलेट बनाना सीख लिया.

यदि ऐसा कहा जाये कि जय कुमार ने बचपन ही नहीं देखा, तो गलत नहीं होगा. उनका बचपन अन्य बच्चों से अलग था. डायबिटीज के रोगी पिता ने जब गुर्दे ख़राब होने पर बिस्तर पकड़ लिया, तब घर चलाने की पूरी जिम्मेदरी जय कुमार के नाज़ुक कंधों पर आ गई.

बीमार पिता, दो छोटी बहनों और भाई को संभालने के साथ घर का खर्च चलाने में माँ की मदद करने वाले घर पर वे ही थे. पिता के बिना ही उनका अंडे का ठेला चलाने का काम उन्होंने अपने हाथों में ले लिया.

सुबह-सुबह रावजी का हाटा (Rao Ji Ka Hata) से ठेला धकेलते हुए वे चेतक सर्किल तक लाते. रात ११-१२ बजे तक अंडा (Egg) बेचने के बाद ठेला धकेलते हुए वापस घर लाते. एक १२ वर्ष के बच्चे के लिए ये सब इतना आसान नहीं था. लेकिन जो भी समस्या सामने आई, जय कुमार ने उसका सामना किया. हर परस्थिति में उनकी एक ही सोच  रही – हौसला रखना है, मेहनत करनी है और जिंदगी में आगे बढ़ना है.

जय कुमार (Jay Kumar Valecha) अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते थे. लेकिन अंडा बनाने के अलावा उन्हें कुछ और नहीं आता था. पिता से वही सीखा था और बचपन से वही करते आ रहे थे.

इसलिए उन्होंने अंडे के साथ ही कुछ नया करने का विचार किया. बाज़ार गए और सॉस (Sauce) की बोतल और साथ में कुछ मसाले (Spices) आदि ख़रीद लाये. फिर अंडे के साथ  प्रयोग कर कुछ नया बनाने में लग गए.

Egg King Udaipur Success Story | Image Source : roadsandkingdoms.com

दूसरे जब उन्हें नए प्रयोग करते देखते, तो उन पर हँसते और उनका मज़ाक उड़ाते. लेकिन जय कुमार ने किसी की परवाह नहीं की और अपने प्रयोग में लगे रहे.

वे जब भी कोई नई डिश बनाते, तो अपने Customers को फ्री में खिलाते और उनसे पूछते कि उन्हें वह डिश कैसी लगी? Customers के feedback के आधार पर वे अपनी डिश में सुधार करते जाते. ऐसा करते-करते उन्होंने अंडे की कई नई डिश (Dishes) ईज़ाद की.

उनके बनाये अंडे की डिश का स्वाद नया और बढ़िया था, जो लोगों को पसंद आने लगा. धीरे-धीरे उनकी चर्चा पूरे उदयपुर शहर (Udaipur City) में होने लगी.

फिर क्या? उनकी बनाई अंडे की नई डिश का स्वाद लेने लोग उनके ठेले में आने लगे. ग्राहकों का विश्वास उन पर बढ़ता गया और साथ ही उनका व्यवसाय भी. उन्होंने उदयपुर में ‘The Egg World’ नाम से अपना एक रेस्टोरेंट खोल लिया, जो दिन-दूनी रात-चौगुनी उन्नति कर रहा है.

वे आज भी रोज़ अंडे के साथ प्रयोग कर कुछ नया बनाने का प्रयास करते हैं. आज उनके पास अंडे की १०० से भी ज्यादा ज्यादा डिश है. जिसमें बॉयल्ड अंडा भुर्जी (Boild Egg Bhurji), एग नाइस (egg nice), तंदूरी आमलेट (tandoori omelette) जैसी कई डिश शामिल हैं.

उनकी बनाई डिश बॉयल्ड अंडा भुर्जी (Boild Egg Bhurji) उनका ट्रेडमार्क (Trademark) बन चुकी है. बॉयल्ड अंडे (Boiled Egg) के साथ प्याज, मसाले और सॉस डालकर वे बॉयल्ड अंडा भुर्जी बनाते हैं. यह डिश ग्राहकों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद की जाती है.

उनकी ख्याति इतनी है कि उन्हें लोग ‘उदयपुर का एग किंग’ (Egg King Udaipur) कहते हैं. देश-विदेश के पर्यटक और शूटिंग के लिए उदयपुर आये फ़िल्मी सितारे (Film Star) भी उनके यहाँ की डिश का स्वाद लेने आने लगे हैं.

जय कुमार ने अपनी किस्मत मास्टर शेफ इंडिया के सीजन ४  (Master Chef India Season 4) में आजमाई और लेवल २ तक पहुँचे थे. इससे उनकी ख्याति और बढ़ी. जिसके बाद वे कई समाचार पत्रों और टीवी चैनल में भी फ़ीचर किये गए.

अब वे अपने बिज़नेस (Business) का विस्तार उदयपुर के साथ ही पूरे भारत (India) में करने की योजना पर काम कर रहे हैं. उदयपुर के साथ ही वे भारत के हर मेट्रो सिटी (Metro City) में “The Egg World” का आउटलेट (Outlet) खोलना चाहते हैं और इस दिशा में कार्य कर रहे हैं. आशा है, बहुत जल्द वे अपना ये सपना पूरा कर लेंगे.

सीख

यदि बड़ा करने की चाह हो, मन में हौसला हो और मेहनत करने का ज़ज़्बा हो. तो एक छोटा सा हुनर भी आपको बुलंदियों पर ले जा सकता है. जय कुमार को बस अंडे बनाना आता था, लेकिन इस हुनर को उन्होंने निखारा और आज वे सफ़लता की सीढ़ियाँ चढ़ते जा रहे हैं.

हमेशा कुछ-न-कुछ नया सीखते का और कुछ नया करने का प्रयास करते रहना चाहिए. ज्ञान कभी व्यर्थ नहीं जाता और नवीनता सदा लोगों को आकर्षित करती हैं. जय कुमार ने अंडों की डिश के साथ नए प्रयोग नहीं किये होते, तो आज जो सफ़लता उन्होंने प्राप्त की है, वो प्राप्त नहीं कर पाते.

लोग चाहे आपको कितना ही हतोत्साहित क्यों ना करें? आपका कितना भी मज़ाक क्यों न उड़ायें? आप सही हैं, तो अपने काम में लगे रहे हैं. आलोचना और मखौल के डर से अपने कदम पीछे ना खींचे. जय कुमार ने जब अंडो के साथ नये प्रयोग करना शुरू किया था, तब लोग उन पर हँसते थे. उनका मजाक उड़ाते थे. आज उनकी सफलता देख वे उन्हीं डिश को कॉपी करने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कभी किसी आलोचकों की परवाह नहीं की और काम में लगे रहे. यही उनकी सफ़लता का राज़ है.

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