50 Best Kumar Vishwas Shayari in Hindi 2019 – कुमार विश्वास की शायरी

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Dr. Kumar Vishwas Shayari – पढ़िये कुमार विश्वास की बेस्ट शायरी, और कवितायें हिन्दी मे।

Kumar Vishwas Best Poems, Short Ghazal And Shayari in Hindi

चंद चेहरे लगेंगे अपने से ,खुद को पर बेक़रार मत करना !

आख़िरश दिल्लगी लगी दिल पर? हम न कहते थे प्यार मत करना…!!

 

Kumar Vishwas Shayari in Hindi

ना पाने की खुशी है कुछ,ना खोने का ही कुछ गम है,

ये दौलत और शौहरत सिर्फ कुछ जख्मों का मरहम है !

अजब सी कशमकश है रोज जीने ,रोज मरने में,

मुक्कमल जिंदगी तो है,मगर पूरी से कुछ कम है !!

Kumar Vishwas Shayari

हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है,

और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है !

मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल,

भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है..!!

 

Kumar Vishwas Ki Shayari

नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है,

मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है !

कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों,

सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है !!

 

Kumar Vishwas Short Poems in Hindi

पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार क्या करना,

जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना !

मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है,

हो ग़र मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना..!!

 

Koi Diwana Kaheta Hai in Hindi

कितनी दुनिया है मुझे ज़िन्दगी देने वाली,और एक ख्वाब है तेरा की जो मर जाता है 

खुद को तरतीब से जोड़ूँ तो कहा से जोड़ूँ,मेरी मिट्टी में जो तू है की बिखर जाता है !!

 

Kumar Vishwas Love Shayari in Hindi

कोई मंजिल नहीं जंचती, सफर अच्छा नहीं लगता,

अगर घर लौट भी आऊ तो घर अच्छा नहीं लगता !

करूं कुछ भी मैं अब दुनिया को सब अच्छा ही लगता है,

मुझे कुछ भी तुम्हारे बिन मगर अच्छा नहीं लगता..!!

 

Kumar Vishwas Poem Lyrics

जिस्म का आखिरी मेहमान बना बैठा हूँ, एक उम्मीद का उन्वान बना बैठा हूँ !

वो कहाँ है ये हवाओं को भी मालूम है मगर, एक बस में हूँ जो अनजान बना बैठा हूँ !!

Kumar Vishwas Latest Shayari

हिम्मत ए रौशनी बढ़ जाती है, हम चिरागों की इन हवाओं से !

कोई तो जा के बता दे उस को, चैन बढता है बद्दुआओं से…!!

 

Kumar Vishwas All Shayari

स्वंय से दूर हो तुम भी स्वंय से दूर है हम भी,

बहुत मशहूर हो तुम भी बहुत मशहूर है हम भी !

बड़े मगरूर हो तुम भी बड़े मगरूर है हम भी,

अतः मजबूर हो तुम भी अतः मजबूर है हम भी !!

Kumar Vishwas Shayari in Hindi Font

क़लम को खून में खुद के डुबोता हूँ तो हंगामा,

गिरेबां अपना आँसू में भिगोता हूँ तो हंगामा,

नहीं मुझ पर भी जो खुद की ख़बर वो है ज़माने पर,

मैं हँसता हूँ तो हंगामा, मैं रोता हूँ तो हंगामा…!!

 

Kumar Vishwas Ki Kavita in Hindi

हमारे शेर सुन कर भी जो खामोश इतना है,

खुदा जाने गुरूर-ए-हुस्न में मदहोश कितना है !

किसी प्याले से पुछा है सुराही मैं सबब में का,

जो खुद बेहोश हो वो क्या बताये के होश कितना है !!

DR Kumar Vishwas Poetry

उसी की तरहा मुझे सारा ज़माना चाहे,

वो मेरा होने से ज्यादा मुझे पाना चाहे,

मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा तेरा,

ये मुसाफिर तो कोई ठिकाना चाहे..!!

 

Ghazal Lyrics in Hindi

एक दो दिन में वो इकरार कहा आएगा,

हर सुबह एक ही अखबार कहा आएगा !

आज बंधा है जो इन् बातों में तो बहाल जायेंगे,

रोज इन बाहों का त्यौहार कहा आएगा !!

Hasya Kavita Kumar Vishwas

सखियों संग रंगने की धमकी सुनकर क्या डर जाऊँगा?

तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा,

भींग रही है काया सारी खजुराहो की मूरत सी,

इस दर्शन का और प्रदर्शन मत करना, मर जाऊँगा..!!

 

Shayari By Kumar Vishwas

सदा तो धूप के हाथों में ही परचम नहीं होता

खुशी के घर में भी बोलों कभी क्या गम नहीं होता

फ़क़त इक आदमी के वास्तें जग छोड़ने वालो

फ़क़त उस आदमी से ये ज़माना कम नहीं होता।

Kumar Vishwas Ki Hasya Kavita

बदलने को तो इन आखोँ के मंज़र कम नहीं बदले ,

तुम्हारी याद के मौसम,हमारे ग़म नहीं बदले ,

तुम अगले जन्म में हम से मिलोगी,तब तो मानोगी ,

ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले..!!

 

Kumar Vishwas All Poems

बदलने को तो इन आखोँ के मंज़र कम नहीं बदले ,

तुम्हारी याद के मौसम,हमारे ग़म नहीं बदले ,

तुम अगले जन्म में हम से मिलोगी,तब तो मानोगी ,

ज़माने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले..!!

Kumar Vishwas Geet

ये दिल बर्बाद करके सो में क्यों आबाद रहते हो,

कोई कल कह रहा था तुम अल्लाहाबाद रहते हो !

ये कैसी शोहरतें मुझको अता कर दी मेरे मौला,

मैं सभ कुछ भूल जाता हूँ मगर तुम याद रहते हो !!

 

Kumar Vishwas Best Poem

नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है,

मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है,

कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों,

सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है..!!

पनाहों में जो आया हो, तो उस पर वार क्या करना ,

जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना !

मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है,

हो ग़र मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना !!

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है,

कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !

यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं,

जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!

घर भर चाहे छोड़े . . .

सूरज भी मुँह मोड़े . . .

विदुर रहे मौन, छिने राज्य, स्वर्णरथ, घोड़े , माँ का बस प्यार, सार गीता का साथ रहे

पंचतत्व सौ पर है भारी, बतलाना है, जीवन का राजसूय यज्ञ फिर कराना है

पतझर का मतलब है, फिर बसंत आना है !!

राजवंश रूठे तो . . .

राजमुकुट टूटे तो . . .

सीतापति-राघव से राजमहल छूटे तो,आशा मत हार, पार सागर के एक बार !

पत्थर में प्राण फूँक, सेतु फिर बनाना है ,पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है !!

तूफ़ानी लहरें हों . . .

अम्बर के पहरे हों . . .

पुरवा के दामन पर दाग़ बहुत गहरे हों, सागर के माँझी मत मन को तू हारना

जीवन के क्रम में जो खोया है, पाना है . . .

पतझर का मतलब है फिर बसंत आना है !!

अपनों के अवरोध मिले, हर वक्त रवानी वही रही

साँसो में तुफानों की रफ़्तार पुरानी वही रही !

लाख सिखाया दुनिया ने, हमको भी कारोबार मगर

धोखे खाते रहे और मन की नादानी वही रही…!!

जो किए ही नहीं कभी मैंने , वो भी वादे निभा रहा हूँ मैं.

मुझसे फिर बात कर रही है वो, फिर से बातों मे आ रहा हूँ मैं !!

एक दो दिन मे वो इकरार कहाँ आएगा, हर सुबह एक ही अखबार कहाँ आएगा ,

आज जो बांधा है इन में तो बहल जायेंगे,रोज इन बाहों का त्योहार कहाँ आएगा…!!

हर ओर शिवम-सत्यम-सुन्दर, हर दिशा-दिशा मे हर हर है

जड़-चेतन मे अभिव्यक्त सतत, कंकर-कंकर मे शंकर है…”

मैं तुझसे दुर कैसा हूँ , तु मुझसे दुर कैसी है !

ये तेरा दिल समझता है य़ा मेरा दिल समझता है !!

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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !

मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!

वो सब रंग बेरंग हैं जो ढूंढते व्यापार होली में,

विजेता हैं जिन्हें स्वीकार हर हार होली में,

मैं मंदिर से निकल आऊँ तुम मस्जिद से निकल आना,

तो मिलकर हम लगाएंगे गुलाल-ए-प्यार होली में 

इन उम्र से लम्बी सड़को को, मंज़िल पे पहुंचते देखा नहीं,

बस दोड़ती फिरती रहती हैं, हम ने तो ठहरते देखा नहीं..!!

तुमने अपने होठों से जब छुई थीं ये पलकें ,नींद के नसीबों में ख्वा़ब लौट आया था !!

रंग ढूँढने निकले लोग जब कबीले के , तितलियों ने मीलों तक रास्ता दिखाया था !!

रंग दुनियाने दिखाया है निराला, देखूँ .. है अंधेरे में उजाला, तो उजाला देखूँ ,

आईना रख दे मेरे सामने, आखिर मैं भी, कैसा लगता हूँ तेरा चाहने वाला देखूँ  !!

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गम में हूँ य़ा हूँ शाद मुझे खुद पता नहीं, खुद को भी हूँ मैं याद मुझे खुद पता नहीं !

मैं तुझको चाहता हूँ मगर माँगता नहीं, मौला मेरी मुराद मुझे खुद पता नहीं !!

जब भी आना उतर के वादी में ,ज़रा सा चाँद लेते आना तुम !!

मिलते रहिए, कि मिलते रहने से, मिलते रहने का सिलसिला हूँ मैं !!

बतायें क्या हमें किन-किन सहारों ने सताया है,

नदी तो कुछ नहीं बोली, किनारों ने सताया है !

सदा ही शूल मेरी राह से ख़ुद हट गए लेकिन,

मुझे तो हर घडी हर पल बहारों ने सताया है !!

दिलों से दिलों का सफर आसान नहीं होता, ठहरे हुए दरिया में तुफान नहीं होता,

मोहब्बत तो रूह में समा जाती है, इसमें शब्दों का कोई काम नहीं होता,

मैं कवि हूं प्रेम का बांट रहा हूं प्रेम, इससे बड़ा कोई काम नहीं होता !!

अपनी दुनिया अपनी धुन मे खो जाऊ तो क्या होगा ?

जैसी तुम हो मै भी वैसा हो जाऊ तो क्या होगा…?

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बस  उस  पगली  लड़की  के  संग   जीना  फुलवारी  लगता  है ,

और  उस  पगली  लड़की  के   बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है .

उस  पगली  लड़की  पर  अपना  कुछ  अधिकार  नहीं  बाबा ,

ये   कथा -कहानी   किस्से  हैं , कुछ  भी  तो  सार  नहीं  बाबा ,

जो  पगली  लड़की  कहती  है , मैं  प्यार  तुम्ही  से  करती  हूँ ,

लेकिन  मै  हूँ  मजबूर  बहुत , अम्मा -बाबा  से  डरती  हूँ ,

वो   पगली  लड़की  नौ  दिन  मेरे   लिए  भूखी   रहती  है ,

छुप  -छुप  सारे  व्रत  करती  है , पर  मुझसे  कभी  ना  कहती  है ,

दीदी  कहती  हैं  उस  पगली  लड़की  की   कुछ  औकात  नहीं ,

उसके  दिल  में  भैया  , तेरे  जैसे  प्यारे  जज्बात   नहीं ,

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जब  सारे  घर  का   समझाना  हमको  फनकारी  लगता  है ,

तब  एक  पगली  लड़की  के  बिन  जीना  गद्दारी  लगता  है ,

और  उस  पगली  लड़की  के  बिन  मरना  भी  भारी  लगता  है 

जब  साड़ी  पहने  एक  लड़की  का,  एक  फोटो  लाया  जाता  है ,

जब  भाभी  हमें  मनाती  हैं , फोटो  दिखलाया  जाता  है ,

जब  बाबा  वाली  बैठक  में  कुछ  रिश्ते  वाले  आते  हैं ,

जब  बाबा  हमें  बुलाते  हैं , हम  जाते  हैं , घबराते  हैं ,

जब  बड़की भाभी  कहती  हैं , कुछ  सेहत  का  भी  ध्यान  करो ,

क्या  लिखते  हो  दिनभर , कुछ  सपनों  का  भी  सम्मान  करो ,

जब  कमरे  में  सन्नाटे  की  आवाज  सुनाई देती  है ,

जब  दर्पण  में  आँखों  के  नीचे  झाई  दिखाई  देती  है ,

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