मुंशी प्रेमचंद की जीवनी Munshi Premchand Biography in Hindi

Munshi Premchand Biography in Hindi

मुंशी प्रेमचंद (Hindi Writer Munshi Premchand) को आधुनिक हिंदी का पितामह कहा जाता है| आसमान में जो स्थान ध्रुव तारे का है वही स्थान हिन्दी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद का है| मुंशी जी हिन्दी के प्रमुख लेखकों में से एक हैं| खासकर हिन्दी और उर्दू में प्रेमचंद जी का विशेष लगाव रहा है| मुंशी जी को उपन्यास सम्राट भी कहा जाता है| आज भी स्कूल और विद्यालयों में मुंशी जी की कहानियां बच्चों को पढ़ाई जाती हैं| प्रेमचंद जी हिंदी के सबसे लोकप्रिय और जाने माने लेखक हैं|

 

मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को बनारस से थोड़ी दूर लमही नामक गाँव में हुआ था| मुंशी जी के पिता अजायब राय जी एक डाकखाने में छोटी नौकरी करते थे| मुंशी जी उस समय मात्र 8 वर्ष के रहे होंगे जब इनकी माँ का देहांत हो गया| बाल्यावस्था में ही इनके ऊपर जिम्मेदारियों का बोझ आ पड़ा| इनके पिता ने घर की देखभाल के लिए दूसरी शादी कर ली लेकिन सौतेली माँ की आँखों में मुंशी जी के लिए कोई प्रेम नहीं था| बचपन में ही गरीबी और बड़ी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा|

उस समय बहुत कम उम्र में ही लोगों की शादियाँ हो जाया करती थीं सो प्रेमचंद जी का विवाह भी मात्र 15 वर्ष की आयु में ही हो गया| मुंशी जी ने खुद अपनी पत्नी के बारे में लिखा है कि वो उम्र में मुंशी जी से बड़ी और कुरूप थीं|

 

विवाह के एक वर्ष बाद ही पिता का देहांत हो गया| प्रेमचंद जी पर मानो मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा| सौतेली माँ के 2 बच्चे, अपनी पत्नी और एक खुद – इस तरह 4 लोगों जिम्मेदारी मुंशी जी के कंधों पर ही आ पड़ी|

मुंशी जी ने परिवार का खर्चा चलाने के लिए अपने कपड़े और किताबें तक बेच दीं| लेकिन पढ़ाई का शौक मुंशी जी को शुरुआत से ही था इसी बीच उन्होंने एक स्कूल में अध्यापक की नौकरी कर ली|

 

मुंशी जी जब छोटे थे तो अपने गाँव से बहुत दूर बनारस में पैदल ही पढ़ने जाते थे| बचपन से ही एक बड़ा वकील बनना चाहते थे| पढ़ाई का शौक भी था लेकिन गरीबी की वजह से सारे सपने दम तोड़ते नजर आ रहे थे| मुंशी जी बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी स्कूल की फीस देते थे| किसी तरह मुश्किल ने मैट्रिक पास किया|

परिस्थितियां कठिन जरूर थीं लेकिन साहित्य के प्रति उनका लगाव लगातार बढ़ता ही …

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गोल्डन गर्ल हिमा दास का जीवन परिचय और सफ़लता की कहानी | Hima Das Biography & Success Story

Hima Das Biography : भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के एक छोटे से गाँव की १९ वर्ष की लड़की का नाम आज हर किसी की जुबान पर है. उसने कारनामा ही ऐसा कर दिखाया है, जो आज तक कोई भारतीय दिग्गज एथलीट नहीं कर पाया है.

मात्र १८ वर्ष की उम्र में World U-20 Championship 2018 में गोल्ड मैडल हासिल करने वाली पहली भारतीय एथलीट बनने के बाद उसने वर्ष २०१९ में १ माह के भीतर ५ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में गोल्ड मैडल जीतकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज कर दिया है.  

हम बात कर रहे हैं ‘Golden Girl‘ और ‘Dhing Express’ के नाम से मशहूर sprint runner हिमा दास (Hima Das) की. हिमा दास ने सीमित संसाधनों के साथ अपनी कड़ी मेहनत और जूनून से जो सफ़लता प्राप्त की है, वो काबिले तारीफ है. लेकिन सफ़लता की ये राह इतनी भी आसान नहीं थी. आइये विस्तार से जानते हैं – हिमा दास के जीवन, उनके संघर्ष और सफ़लता के बारे में :

Hima Das Biography In Hindi
Hima Das Biography In Hindi | Image Source – rediff.com

हिमा दास का संक्षिप्त परिचय | Hima Das Short Bio 

Name Hima Das हिमा दास 
Nick NameDhing Express, Golden Girl
Birth Date9 January 2000
Birth Place Dhing, Nagaon, Assam
NationalityIndian 
Father’s NameRonjit Das
Mother’s NameJonali Das
CoachNipon Das
Height167 cm (5 Ft. 6 Inch)
Weight52 Kg
OccupationAthlete, Sprint Runner

हिमा दास का जन्म और प्रारंभिक जीवन

हिमा दास (Hima Das) का जन्म ९ जनवरी २००० को असम (Assam) के नगाँव (Nagaon) जिले के ढींग (Dhing) कस्बे के कांधूलिमारी (Kandhulimari Village) नामक गाँव में हुआ था. ढींग गाँव की होने के कारण लोग उन्हें ‘ढींग एक्सप्रेस’ (Dhing Express) के नाम से भी पुकारते हैं.

हिमा के पिता का नाम रणजीत दास (Ronjit Das) है, जो एक कृषक है. वे मुख्य रूप से चांवल की कृषि करते हैं. माता जोनाली दास (Jonali Das) है, जो घर संभालने के साथ ही कृषि के कार्यों में हिमा के पिता का हाथ बंटाती है.

६ भाई-बहनों में हिमा सबसे छोटी है. १७ सदस्यों का उनका एक बड़ा परिवार है. परिवार का पूरा खर्च कृषि से होने वाली आमदनी से चलता था. ज़ाहिर है, कृषि की सीमित आय से इतने बड़े परिवार का पालन-पोषण इतना आसान नहीं था.…

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पापड़ बेचने से लेकर ‘सुपर ३०’ तक का सफ़र, “आनंद कुमार” की सफ़लता की प्रेरणादायक कहानी

Anand Kumar Super 30 Biography & Success Story In Hindi : भारत में IIT जैसे टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने का सपना कई छात्र-छात्रायें देखते है. ऐसे में उनका मार्गदर्शक बनती हैं – कोचिंग संस्थायें. लेकिन कोचिंग संस्थाओं की भारी-भरकम फीस वहन कर पाना हर छात्र के लिए संभव नहीं हो पाता. जो आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के छात्र हैं, वे यह मार्गदर्शन प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं और कहीं न कहीं यह उनके इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में सफ़लता प्राप्ति में अडंगा बन जाता है.

ऐसे में आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के लिए मसीहा बनाकर उभरे हैं – आनंद कुमार (Anand Kumar), जो अपने सुपर ३० संस्थान में ऐसे छात्रों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं और उनकी न सिर्फ टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज (Top Engineer College) में प्रवेश का मार्ग, बल्कि उज्जवल भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं.

आनंद कुमार एक गणितज्ञ, शिक्षाविद और स्तंभकार हैं, जिन्होंने आर्थिक विपन्नता का जीवन करीब से से देखा है. उनका संपूर्ण बचपन अभावों में व्यतीत हुआ. लेकिन उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा संबल माना. कैम्ब्रिज युनिवेर्सिटी का कॉल लैटर हाथ में होने के बाद भी आर्थिक तंगी के कारण वे कैम्ब्रिज न जा सके. गली-गली पापड़ बेचने को मजबूर हुए. लेकिन आज वे इस मुकाम पर हैं, जहाँ वे समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के शैक्षिक उत्थान की दिशा सराहनीय कार्य कर रहे हैं.

आनंद कुमार के कार्यों को देश-विदेश में सराहना प्राप्त हुई है और उन्हें कई पुरुस्कारों से नवाज़ा गया है. वे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा श्रोत है. उनके प्रेरणादायक जीवन पर आधारित हिंदी फिल्म ‘सुपर ३०’ (Super 30) का निर्माण भी किया गया है. आइये विस्तार से जानते हैं आनंद कुमार (Anand Kumar) और उनके संस्थान  ‘सुपर ३०‘ (Super 30) के बारे में :      

Anand Kumar Super 30 Biography & Success Story In Hindi
Anand Kumar Super 30 Biography & Success Story In Hindi

 आनंद कुमार का संक्षिप्त परिचय (Short Biography Anand Kumar) 

नाम  आनंद कुमार  (Anand Kumar)
जन्म १ जनवरी १९७३ 
जन्म स्थान पटना. बिहार (Patna, Bihar, India)
माता जयंती देवी 
भाई प्रणव कुमार 
पत्नि ऋतु रश्मि 
बेटा जगत कुमार 
कार्य शिक्षक, गणितज्ञ
उपलब्धि सुपर ३० संस्थान के द्वारा आर्थिक रूप से कमज़ोर विद्यार्थियों को IIT की निशुल्क कोचिंग,  हर वर्ष २६ से ३० बच्चों का चयन. इस सराहनीय कार्य के लिए कई पुरुस्कार और सम्मान से नवाज़ा
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क्या आप जानते हैं भारत की मिसाइल वुमन कौन हैं ? | Story of India Missile Woman Tessy Thomas

Tessy Thomas

हम सभी आज उस दौर में पहुंच चुके हैं जहां पर कुछ भी करना नामुनकिन नहीं है आज हम मंगल में जीवन की खोज कर रहे है। इंसानी दिमाग से भी तेज चलने वाले रॉबोट का अविष्कार भी कर चुके हैं। और तो ओर हमारी देश की महिलाएं जो कभी घूंघट में रहा करती थी अब कुश्ती बॉक्सिंग जैसे खेलों में मेडल भी जीतकर देश का नाम रोशन करने लगी है। हालांकि इतना सबकुछ होने के बावजूद भी कई ऐसे क्षेत्र है जिनमें महिलाओं की जल्दी कल्पना कर पाना मुश्किल लगता है।

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शायद इसलिए क्योंकि आज भी कई लोगों को महिलाओं की काबलियत पर शक है। और इन्ही क्षेत्रों में से एक मिसाइल निर्माण का भी क्षेत्र है जिसे चलाते फिल्मों में आपने अक्सर पुरुषों को ही देखा होंगा हालांकि आजकल महिलाएं भी आर्मी में भर्ती होकर इन मिसाइलों को चलाने लगी है। लेकिन जब भी बात आती है मिसाइल बनाने की तो हमें सबसे पहले अब्दुल कलाम की याद आती है। और यही कारण है कि उन्हें पूरा देश मिसाइल मैन के नाम से भी जानता है। लेकिन क्या आप जानते है हमारे देश की मिसाइल वुमन कौन है, कौन है वो महिला जो मौजूदा समय में देश के लिए मिसाइल बना रही है।

क्या आप जानते हैं भारत की मिसाइल वुमन कौन हैं ? – Story of India Missile Woman Tessy Thomas

वैज्ञानिक टेसी थॉमस भारत की मिसाइल वुमन के नाम से जानी जाती है टेसी थॉमस को भारत की अग्नि पुत्री भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश की शोभा बढ़ाने और बॉर्डर पर विरोधियों के छक्के छुडाने वाले अग्नि मिसाइल वैज्ञानिक टैसी थॉमस ने तैयार किए हैं। टेसी थॉमस साल 1988 से ही अग्नि मिसाइल के परीक्षण से जुड़ी हैं। टेसी थॉमस के सफल परीक्षण में अग्नि -2, अग्नि -3, अग्नि – 4 और अग्नि – 5 की टीम का हिस्सा बना और उसका सफल निरीक्षण शामिल है।

टेसी थॉमस ने कुछ समय पहले ही अग्नि 5 का सफल निरीक्षण किया है। जिसकी रेंज 8000 के आसपास है साथ ही इसकी क्षमता 5 हजार किलोमीटर है। यानी कि इस मिसाइल के जरिए दुश्मन को आसानी से उसी के गढ़ में मारा जा सकता है। टेसी थॉमस ने मिसाइल निर्माण के क्षेत्र में अपने इतने बेहतरीन काम से देश की सुरक्षा और विकास की गति में अहम योगदान दिया है।

अगर हम ये कहें की देश की रक्षा में टेसी थॉमस का भी हमेशा …

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एक बंधुआ मजदूर का बेटा कभी ढोता था ईट पत्थर, आज है बीस कंपनियों का मालिक…

Mannem Madhusudana Rao

आपने अपने आसपास ऐसी कई सारी कहानिया सुनी होगी जो आपको प्रेरित करती होगी और ऐसे कई सारे लोग हुए है जिनसे हमे सीख मिलती है।

लेकिन उन्हें छोड़ बहुत सारे ऐसे लोग है जिनकी जिन्दगी चमत्कार लगती है। ऐसा लगता है जैसा की भगवान् ने साक्षात् इनके ऊपर कृपा की है। खाने की घर में अनाज नहीं था लेकिन कुछ सालो बाद करोडपति बन जाना ये चमत्कार से ज्यादा मेहनत और ईमानदारी पर निर्भर करता है और ऐसी ही कहानी है मधुसुदन राव की जो एक बंधुआ मजदूर के बेटे थे और खुद मजदूरी करते थे लेकिन आज बीस बड़ी बड़ी कम्पनियों के मालिक है।

एक बंधुआ मजदूर का बेटा कभी ढोता था ईट पत्थर, आज है बीस कंपनियों का मालिक – Mannem Madhusudana Rao

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मधुसुदन राव का शुरुआती जीवन- Mannem Madhusudana Rao Biography

मधुसूदन राव का जन्म आँध्रप्रदेश के प्रकाशम जिले में हुआ। पिता का नाम पेरय्या और माँ का नाम रामुलम्मा है। घर में आठ भाई बहन और कमाने वाले माँ बाप, उनका काम था बंधुआ मजदूरी। माँ बीडी की फैक्ट्री में काम करती और बाप भी दिहाड़ी मजदूरी करते थे।

कन्दुकुरु तहसील का पलकुरु नाम का एक ऐसा गाँव जहाँ दलितों को सम्मान की नजरो से नहीं देखा जाता था। उन्हें घुटने के नीचे धोती नहीं पहनने दी जाती थी। मधुसुदन के माँ बाप सुबह जल्दी निकल जाते और देर रात घर आते लेकिन उसमे भी एक वक्त का खाना ही मिल पाता।

मधु हमेशा सोचते थे की आखिर उनके माँ बाप रोजाना कहा जाते है और इतना लेट क्यों आते है लेकिन जैसे जैसे वो बड़े हुए उन्हें समझ में आ गया की उनके माँ बाप एक बंधुआ मजदूर है। सपने तो मधु के भी बहुत बड़े थे लेकिन पेट की भूख के आगे सब धराशयी हो जाते थे।

घर में कोई पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन माँ बाप ने फैसला किया की वो घर में दो बेटों को पढ़ायेगे और इसमें मधु और उनके भाई का दाखिला स्कूल में करवाया गया। शुरुआती पढ़ाई गाँव के स्कूल में ही हुई। वो पढ़ते चले गए और पढाई में हमेशा अब्बल थे। दसवी और बारहवी तक की पढाई की और आगे के बारे में विचार करने लगे।

मधुसुदन राव की पढाई – Mannem Madhusudana Rao Education

मधु खुद बताते है की वो जब बारहवी करके निकले तो उन्हें बी.टेक करना था लेकिन उनके आसपास जुड़े हुए और टीचर्स का कहना था की वो पॉलिटेक्निक …

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Baba Amte Biography in Hindi (बाबा आमटे के बारे में पूरी जानकारी)

Baba Amte Biography in Hindi बाबा आमटे देश के प्रख्यात और सम्माननीय समजकर्ता थे और बाबा आमटे का पूरा नाम डॉ॰ मुरलीधर देवीदास आमटे था। बाबा आमटे के बारे में सम्पूर्ण जानकारी हम इस लेख में आपसे साझा करेंगे तो इस लेख को पूरा जरूर पढ़ें।

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बाबा आमटे का प्रारंभिक जीवन (Baba Amte Initial Life in Hindi)

बाबा आमटे का जन्म महाराष्ट्र में स्थित वर्धा जिले में हिंगणघाट गाँव में 26 दिसंबर 1914 को हुआ था। उनके पिता देवीदास हरबाजी आमटे शासकीय सेवा में लेखपाल थे और वे जमींदार भी थे। बाबा आमटे को विरासत में मिली जमींदारी के कारण उनका जीवन बहुत ही थाट-वाट से बीता था। बाबा ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई नागपुर के मिशन स्कूल में किया और इसके बाद नागपुर विश्विद्यालय से कानूनी पढ़ाई की।

कार्यक्षेत्र

एक दिन बाबा ने एक कुष्ट रोगी को बारिश में भीगते हुए देखा उसकी मदद के लिए कोई भी आगे नही आह रहा था उसी वक्त बाबा ने निर्णय किया कि वे उस कुष्ट रोगी की सहायता करेंगे तो बाबा ने उस कुष्ट रोगी को अपने घर लेकर गए और उनकी मदद की। बाबा आमटे ने जीवनभर कुष्ठरोगियों, और जनजातियों और किसानों के हित में कार्य किया करते थे।

आनन्दवन (Aanandvan)

आनन्दवन बाबा की सबसे बड़ी उपलब्धि थी उन्होंने अछुतो के लिए आनन्दवन आश्रम को बनाया। कम खर्च से बने इस आश्रम में आज धन संपदा अधिक मात्रा में है।

साहित्यिक कृतियाँ (Literary works)

बाबा ने अपने जीवनकाल में दो साहित्यिक रचनाएँ लिखी।

1. ज्वाला आणि फुले
2. उज्ज्वल उद्यासाठी

पुरस्कार और सम्मान (Baba Amte Awards)

  • अमेरिका का डेमियन डट्टन पुरस्कार 1983 में दिया गया।
  • एशिया का नोबल पुरस्कार 1985 में दिया गया।
  • घनश्यामदास बिड़ला अंतरराष्ट्रीय सम्मान 1988 में दिया गया।
  • संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार सम्मान 1988 में दिया गया।
  • 1990 में 8,84,000 अमेरिकी डॉलर का टेम्पलटन पुरस्कार दिया गया।
  • पर्यावरण के लिए किए गए योगदान के लिए 1991 में ग्लोबल 500 संयुक्त राष्ट्र सम्मान दिया गया।
  • 1985-86 में पूना विश्वविद्यालय ने डी-लिट उपाधि दी।
  • 1980 में नागपुर विश्वविद्यालय ने डी-लिट उपाधि दी।
  • 1979 में जमनालाल बजाज सम्मान दिया गया।
  • 2004 के महाराष्ट्र भूषण सम्मान देने की घोषणा को गई और महाराष्ट्र सरकार के यह सर्वोच्च सम्मान उन्हें एक मई 2005 में आनंदवन में दिया।
  • 1999 में गाँधी शांति पुरस्कार दिया गया।

बाबा आमटे निधन (Baba Aamte Death)

बाबा आमटे का निधन 94 वर्ष की आयु में 9 फरवरी 2008 को हुआ था।

आपको बाबा आमटे का जीवन परिचय के बारे में …

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Mahatma Gandhi Biography in Hindi, Essay of Mahatma Gandhi

महात्मा गांधी संक्षिप्त जीवन परिचय
Mahatma Gandhi Brief Biography in Hindi, About Mahatma Gandhi
नाम मोहन दास करम चन्द्र गांधी
जन्म व स्थान 2 अक्टूबर 1869 ,गुजरात के पोरबंदर गांव में
मृत्यु ३० जनवरी 1948
पिता करम चंद्र जी
माता पुतली बाई
पत्नीकस्तूरबा गांधी
संतान हरिलाल, मणिलाल ,रामदास ,देवदास
शिक्षाबैरिस्टर
राष्ट्रीयता भारतीय
उपलब्धियां भारत के राष्ट्रपिता, भारत को आजाद दिलवाने में अहम योगदान, सत्य और अहिंसा के प्रेरणा स्त्रोत, भारत के स्वतंत्रा संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान भारत छोड़ो आंदोलन, स्वदेशी आंदोलन, असहयोग आंदोलन स्वदेशी आंदोलन आदि।
महत्वपूर्ण कार्य सत्या और अहिंसा का महत्व बताकर इसको लोगों तक पहुंचाया, छुआ-छूत जैसी बुराइयों को दूर किया

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महात्मा गांधी का प्रारंभिक जीवन (Early life of Mahatma Gandhi)

महात्मा गाँधी का जन्म गुजरात के पोरबंदर गांव में हुआ था | इनके पिता जी श्री करम चंद्र गाँधी जी पोरबंदर के दीवान थे और माता जी (पुतली बाई) जो एक धार्मिक महिला थी| महात्मा गाँधी को ज्यादातर लोग बापू कह कर पुकारते थे| गांधी जी का विवाह 13 वर्ष की उम्र में कस्तूरबा बाई (14 वर्ष ) के साथ हुआ |

गाँधी जी ने नवंबर सन 1887 में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और सन 1888 में भावनगर के समलदास कॉलेज में दाखिल हुए थे और वहाँ से उन्हें डिग्री प्राप्त हुई थी | इसके बाद वे लंदन गए और वह से बैरिस्टर बन कर लौटे | गाँधी जी द्वारा नमक सत्याग्रह की सुरुवात 12 अप्रैल सन 1930 को गुजरात के अहमदाबाद शहर के पास स्थित साबरमती आश्रम से की गई थी | गाँधी जी अपने परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े लिखे थे |

सत्य और अहिंसा के पुजारी  (Priest of Truth and Nonviolence)

अहिंसा और सत्याग्रह के संघर्ष से उन्होंने भारत को अंग्रेजो से स्वतंत्रता दिलाई उनका यही काम पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया | बापू  का  कहना  था की ” बुरा मत देखो ,बुरा मत सुनो ,बुरा मत कहो ,” और  हमेशा सच्चाई  की राह पर चलो क्योंकि सच्चाई की कभी भी हार नहीं होती |

भारत के राष्ट्रपिता भारत को आजादी दिलाने में अहम् योगदान रहा है |गाँधी जी २४ साल की उम्र में दक्षिण अफ्रीका पहुंचे वह प्रिटोरिया स्थित कुछ भारतीय व्यापारियों के न्यायिक सलाहकार के तौर पर वह गए थे उन्होंने  अपने जीवन के २१ साल दक्षिण अफ्रीका में बिताये जहां उनके राजनैतिक विचार और नेतृत्व कौशल का विकास हुआ |दक्षिण अफ्रीका में गाँधी जी ने भारतीयों को अपने राज नैतिक और सामाजिक अधिकारों …

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Maharana Pratap Biography & Facts In Hindi

Maharana Pratap Biography :

Maharana Pratap Birth Date : 9th May, 1540.

Birth Place : Kumbhalgarh Fort, Rajasthan.

Father’s Name ‎: ‎Udai Singh II

Mother’s Name ‎: ‎Maharani Jaiwanta Bai

Maharana Pratap Ki Talwar Ka Weight : 50KG.

Maharana Pratap Ke Bhale Ka Weight : 81KG.

Maharana Pratap Ke Kavach Ka Weight : 72KG.

Horse Name : Chetak & Hetak.

Height : 7.5

Weight : 110kg

Read Great Facts About Maharana Pratap In Hindi :

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महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

1. महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।

2. जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे ।  तब उन्होने अपनी माँ से पूछा कि- हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर आए ? तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना,  जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ।”
लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था |
“बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘ किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |

3. महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|
कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।

4. आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |

5. अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है, तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे,  पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |

6. हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |

7. महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है,  जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |

8. महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं | इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है|
मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |

9. हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई।…

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मशहूर भारतीय टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप – Anjana Om Kashyap Biography

Anjana Om Kashyap

किसी भी गणतंत्र देश में मीडिया बहुत ही अहम भूमिका निभाती है। देश में क्या चल रहे है, कहा क्या हो रहा है इन सब बातो की जानकारी लोगो को देश का नागरिक होने के नाते पता होनी चाहिए। इसीलिए ऐसे में पत्रकार की सबसे बड़ी भूमिका रहती है की वह किस तरह से लोगो के सामने पेश करता है। कुछ पत्रकारों को अपनी बात को सही ढंग से और आसान भाषा में बताने की खासियत होती है और उनकी इसी बात के कारण वे काफी प्रसिद्ध हो जाते है।

anjana om kashyap - मशहूर भारतीय टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप – Anjana Om Kashyap Biography

एक ऐसे ही पत्रकार की जानकारी हम आपको देनेवाले है जिन्होने अपनी मेहनत और कड़ी लगन से कम समय में कामयाबी हासिल की। हम बात कर रहे है आज तक चैनल पर पत्रकारिता का काम करनेवाली अंजना ओम कश्यप – Anjana Om Kashyap की। इनकी बुलंद आवाज से सभी परिचित है। आज इसी महशूर टीवी एंकर के बारे में हम आपको बताने वाले है।

मशहूर भारतीय टीवी पत्रकार अंजना ओम कश्यप – Anjana Om Kashyap Biography

नामअंजना ओम कश्यप
जन्म (Birth Date)12 जून 1975
जन्मस्थान (Birth Place)राँची, बिहार
पिता (Father’s Name)ओम प्रकाश तिवारी
विवाहमंगेश कश्यप (Anjana Om Kashyap Husband)
शिक्षा (Education)पत्रकारिता में डिपलोमा, वनस्पति विज्ञान में स्नातक (ऑनर्ज़)
व्यवसाय (Occupation)पत्रकार

Anjana Om Kashyap – अंजना ओम कश्यप एक बहुत ही मशहूर टीवी पत्रकार है। वे आज तक चैनल पर न्यूज़ एंकर के रूप में काम करती है। वे आज तक चैनल पर राजतिलक और दिल्ली के दिल में क्या है कार्यक्रमों को चलाती है।

अंजना ओम कश्यप का जन्म 12 जून 1975 को झारखण्ड (अब बिहार) के रांची शहर में हुआ था। वे पूर्व रक्षा अधिकारी ओम प्रकाश तिवारी की बेटी है।

उन्होंने झारखण्ड में रांची में रहकर अपनी पढाई पूरी की। उन्होंने साल 2002 में दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया कॉलेज से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया।

कई साल पहले उनकी शादी हुई है और उन्हें दो बच्चे है। मंगेश कश्यप (Mangesh Kashyap) से उनकी शादी हुई है और उनके पति दिल्ली पुलिस में काम करते है। अंजना कश्यप – Anjana Om Kashyap अभी अपने परिवार के साथ में भारत में ही रहती है।

अंजना ओम कश्यप का करियर – Anjana Om Kashyap Career

उन्होंने अपने करियर की शुरुवात सन 2003 में की थी और उस वक्त उन्होंने दूरदर्शन पर ‘आखो देखी’ कार्यक्रम से शुरुवात की थी और उसके बाद उन्होंने जी न्यूज़ में काम करना शुरू कर दिया था। …

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दीपिका कक्कड़ का जीवन परिचय | Bigboss Contestant Dipika Kakar Ibrahim Biography In Hindi

Air Hostess की जॉब छोड़कर टीवी की दुनिया में कदम रखने वाली दीपिका कक्कड़ इब्राहिम (Dipika Kakar Ibrahim) किसी पहचान की मोहताज़ नहीं हैं. वे छोटे पर्दे की एक स्थापित एक्ट्रेस हैं. इतना ही नहीं इस वर्ष जे.पी. दत्ता की फिल्म ‘पलटन’ से वे पर्दे पर भी डेब्यू कर चुकी हैं. फिलहाल रियलिटी शो ‘Bigg Boss 12’ में वे धूम मचा रही हैं.

दीपिका कक्कड़ की एक्टिंग की जमकर तारीफ़ें हुई. कई अवार्ड्स भी उन्होंने अपने नाम किये. लेकिन विवादों से भी उनका नाता रहा. आइये जानते है दीपिका कक्कड़ के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें:

दीपिका कक्कड़ का जन्म, शिक्षा, प्रारंभिक जीवन और परिवार (Dipika Kakar Birth, Education, Early Life & Family)

Dipika Kakar Biography In Hindi

जन्मदिन (Birth Date) 6 August 1986
जन्म स्थल (Birth place) Pune, Maharashtra, India
दूसरा नाम (Other Name) Faiza
Nick Name Dipi, Dipo
पिता (फ़ादर) Not Known
माता (Mother) Renu Kakar
पूर्व-पति (Ex-Husband) Raunak Samson
पति (Husband) Shoaib Ibrahim
धर्म (Religion) Hindu
जाति (Caste) Khatri
कार्य (Profession) Actress

 

दीपिका कक्कड़ का जन्म ६ अगस्त १९८६ को पुणे, महाराष्ट्र में एक मध्यम वर्गीय खत्री परिवार में हुआ था. उनके पिता आर्मी ऑफिसर थे और माता होम-मेकर. तीन बहनों में वे सबसे छोटी हैं.

स्कूली शिक्षा CBSE Board से पूर्ण करने के बाद उन्होंने University of Mumbai से graduation की degree हासिल की. दीपिका को नृत्य और गायन का बचपन से ही शौक रहा है. शायद यही मनोरंजन की दुनिया में कदम रखने के उनके आधार बने.

दीपिका कक्कड़ का लुक  (Dipika Kakar Look)

Height (approx.)In centimeter – 165 cm

In meters – 1.65 m

In feet inches – 5’5”

Weight (approx.)In kilograms – 55 Kg

In pounds – 121 Ibs

Figure Measurements (approx.)34-26-34
Eye ColorDark Brown
Hair ColorBlack

 

दीपिका कक्कड़ का करियर (Dipika Kakar Career)

पढ़ाई पूरी करने के बाद दीपिका Jet Airways में Air Hostess बन गई. बतौर Air Hostess उन्होंने तीन साल तक काम किया. लेकिन बाद में स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्हें Jet Airways की नौकरी छोड़नी पड़ी. बस यही से शुरूआत हुई उनके एक्टिंग करियर की. Jet Airways की नौकरी छोड़नी के बाद एक्टिंग में हाथ आजमाने की सोच के साथ उन्होंने TV Industries का रुख कर लिया.

दीपिका पहली बार २००८ में टीवी शो Rishta.com में एक cameo role में नज़र आई. लेकिन पहला बड़ा ब्रेक उन्हें २०१० में सीरियल ‘नीर भरे नैना देवी’ (Neer Bhare Tere Naina Devi) में मिला, …

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संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

Sant Eknath Information

महाराष्ट्र महान लोगो की जन्मभूमि है। महाराष्ट्र एक ऐसा महान राज्य है जहा आज तक हजारों महान लोग जन्म ले चुके है। इसे संत लोगो की जन्मभूमि भी कहा जाता है। संत ज्ञानेश्वर से लेकर संत तुकाराम महाराज, संत नामदेव तक, और संत जनाबाई से लेकर संतगाडगे महाराज तक सभी ने लोगो को सुधारने की कोशिश की।

eknath 2 - संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

आज महाराष्ट्र हर क्षेत्र में सबसे आगे है। लेकिन इसका सारा श्रेय उन सब संत लोगो को जाता हैं क्योंकी उन्होंने अपने ग्रंथ और कविताओ के माध्यम से लोगो को मार्गदर्शन किया। इन सबसंत और ऋषि में संत एकनाथ महाराज – Eknath Maharaj  का भी बड़ा महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने समय रहते लोगो को भगवान और भक्ति का महत्व समझाया।

हिन्दू धर्म में भक्ति आन्दोलन को आगे ले जाने में उन्होंने जो योगदान दिया वह बहुमूल्य है। आज इसी महान संत और ऋषि एकनाथ के बारे में हम आपको बतानेवाले है। इस महान संत की सारी महत्वपूर्ण जानकारी निचे दी गयी है।

संत एकनाथ का जीवन परिचय – Sant Eknath Information in Hindi

नामसंत एकनाथ महाराज
जन्म ई. स. 1533
जन्मस्थानपैठन
मातारुक्मिणी
पितासूर्यनारायण
मृत्युई. स. 1599
गुरुजनार्दन स्वामी

संत एकनाथ के जीवन बारे में ज्यादा जानकारी मिल पाना काफी मुश्किल है क्यों की उनके बारे में कहापरभी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं। लेकिन ऐसा कहा जाता है की वे 16 वी सदी में थे और उस वक्त उन्होंने आखिर तक भक्ति आन्दोलन को बढ़ावा दिया।

संत एकनाथ का जन्म महाराष्ट्रके पैठण गाव में एक देशस्थ ऋग्वेदी परिवार में हुआ था। इनके घर के लोग एकविरा देवी के बड़े भक्त थे। संत एकनाथ के बचपन मे ही उनके माता पिता गुजर गए थे जिसकी वजह से वे अपने दादाजी भानुदास के साथ में रहते थे। उनके दादाजी भानुदास भी वारकरी संप्रदाय से थे। ऐसा कहा जाता है की संत जनार्दन एकनाथ के गुरु थे और वे सूफी संत थे।

एक बार की बात है जब एक नीची जाती के व्यक्ति ने संत एकनाथ को उनके घर खाना खाने के लिए बुलाया था। संत एकनाथ उस व्यक्ति के घर गए थे और वहा पर जाकर उन्होंने खाना भी खाया था।

इस पर उन्होंने एक कविता भी लिखी थी और उसमे कहा था की, जो इन्सान नीची जाती के होने के बाद भी जो पुरे मन से भगवान की भक्ति करता है, अपना सब कुछ भगवान को अर्पण करता है, ऐसा व्यक्ति किसी ब्राह्मण से भी बड़ा …

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सुषमा स्वराज के जीवन की वो सारी जानकारी जो आपको पता नहीं होंगी!

Sushma Swaraj

आज के समय में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है, लेकिन एक समय था जब महिलाओं को घर बाहर तक निकलने नहीं दिया जाता था। लेकिन कहते हैं बदलाव जरुर आता है। आज महिलाएं घर के साथ-साथ देश के विकास में भी योगदान दे रही है। भारत की राजनीति में भी महिलाओं का उतना ही योगदान है जितना की पुरुषों का। जिन महिलाओं को घर को भी लड़ाई में नहीं भेजा जाता था। जिन्हें विदेश जाना तो दूर घर से बाहर नहीं जाने दिया जाता था। वो देश संभाल रही है। और इसे बेहतर उदाहरण क्या हो सकता कि आज हमारे देश की रक्षा मंत्री भी एक महिला है और विदेश मंत्री भी महिला है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज – Sushma Swaraj लंबे समय से राजनीति में सक्रिय है। सुषमा स्वराज उन चंद महिलाओं में से एक है जिन्होंने घर और देश की जिम्मदारियों को बखूबी निभाया। साथ ही महिलाओँ के लिए एक उदाहरण बनी।

2 1525856262 - सुषमा स्वराज के जीवन की वो सारी जानकारी जो आपको पता नहीं होंगी!

सुषमा स्वराज के जीवन की वो सारी जानकारी जो आपको पता नहीं होंगी – Sushma Swaraj Biography

सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 में अम्बाला में हुआ था। सुषमा स्वराज के पिता श्री हरदेव शर्मा राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के प्रमुख सदस्य थे। जिस वजह से सुषमा स्वराज ने अपने आसपास संघ और राजनीति का असर शुरु से देखा। हालांकि सुषमा स्वराज ने अपने पिता से अलग अपने दम पर अपनी पहचान बनाई।

सुषमा स्वराज की शिक्षा – Sushma Swaraj Education

सुषमा स्वराज ने अम्बाला छावनी के एस.डी कॉलेज से बीए की पढ़ाई करने के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान अपनी सोच और हर बात को कहने की आदत ने उन्हें सर्वोच्चन वक्ता का सम्मान मिला। यही नहीं सुषमा स्वराज कॉलेज के दिनों में एनसीसी की सर्वोच्च कैडेट भी रही। सुषमा को लगातार 3 साल तक राज्य की सर्वोच्च वक्ता का सम्मान भी मिला।

सुषमा स्वराज राजनैतिक सफ़र – Sushma Swaraj Political Career

उन दिनों देश में आपातकाल लगा था और जयप्रकाश नारायण आपातकाल के पुरजोर विरोधी थे। आपतकाल से लोगों की स्थिति को बहुत खराब थी। इसी को देखते हुए सुषमा स्वराज ने भी जयप्रकाश नारायण के आंदोलन का हिस्सा बने का फैसला लिया। सुषमा स्वराज ने इस आन्दोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसके बाद सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर शुरु हुआ। उन्होनें जनसंघ पार्टी को ज्वाइन किया जिसे आज भारतीय जनता पार्टी के नाम से जाना जाता है।

राजनीति …

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कहानी उस पैरालाईज इंसान की जिसने कोटा को “कोचिंग सिटी” बनाया!

Vinod Kumar Bansal

कोटा एक ऐसा शहर है जहाँ हर गली में आप सपने की उड़ान देख सकते है क्योकि हर साल दो लाख स्टूडेंट्स आइआइटी-मेडिकल के बड़े कालेजो में दाखिला पाने के लिए यहाँ आते है। आज कोटा को देश नहीं बल्कि दुनियाभर में जाना जाता है। पहले कोटा को औद्योगिक नगरी के नाम से जाना जाता था लेकिन एक शख्स के जूनून ने इसे कोचिंग सिटी यानी की शैक्षणिक नगरी बना दिया। वो शख्स चल नहीं सकता था लेकिन उसके सपने उड़ान लेते थे। नाम है वीके बंसल उर्फ़ विनोद कुमार बंसल – Vinod Kumar Bansal  जो की बंसल क्लासेस कोटा – Bansal Classes Kota के फाउंडर है।

कहानी उस पैरालाईज इंसान की जिसने कोटा को “कोचिंग सिटी” बनाया – Founder of Bansal Classes Kota  Vinod Kumar Bansal Biography

Vinod Kumar Bansal – विनोद बंसल का जन्म यूपी के झाँसी जिले में साल 1949 में हुआ। उनके पिता का नाम बीडी अग्रवाल और माता का नाम अंगूरी देवी था। पिता सरकारी नौकर थे लेकिन घर में पैसे अधिक नहीं थे। 1954 में पिता का ट्रान्सफर लखनऊ हो गया और वो भी यही आये और पढने लगे।

घर में लालटेन था तो पिता ने कहा की तुम टॉप करो तो घर में लाइट आ जाएगी बस इस बात ने जूनून डाल दिया और विनोद दिन-रात पढने लगे। कक्षा 6,7 और 8 लगातार टॉप करने के बाद उन्हें 372 रुपये की छात्रवृत्ति मिली जिससे लाइट भी लगी और टेबल फैन भी आया।

इसके बाद 12वीं अच्छे नम्बर आये तो बीएचयू में एडमिशन हो गया और फिर और फिर पहली नौकरी एक कंपनी में मिल गई कोटा में और वो कोटा आ गए।

बीमारी ने बनाया शिक्षक – Vinod Kumar Bansal Career

विनोद बंसल जब कोटा में एक केमिकल कंपनी में नौकरी कर रहे थे तब उन्हें शारीरिक समस्या होने लगी और उनके हाथ पांव कमजोर होने लगे। डॉक्टर से मिले तो उन्होंने कहा यह समस्या गंभीर है और आपका शरीर कुछ दिनों में काम करना बंद कर देगा अच्छा होगा आप कुछ और प्रोफेशन शुरू करे।

1983 में जब वो पूरी तरह से पैरालाइज हो गए तो डॉक्टर ने कहा की आप टीचिंग एट होम शुरू करो नहीं तो आप बोर हो जाओगे। बस तभी से कोटा में शुरू हुई बंसल क्लासेस और चल पड़ा आगे का सफ़र। शुरुआत में बिना किसी के नाम पढ़ा रहे थे लेकिन एक साल बाद इसे बंसल क्लासेस नाम दिया जो की आज दुनिया …

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भारत को विकास के मार्ग पर ले जाने वाले क्रांतिकारी आचार्य जे बी कृपलानी

भारत को विकास के मार्ग पर ले जाने वाले क्रांतिकारी आचार्य जे बी कृपलानी – J. B. Kripalani

17tt10 - भारत को विकास के मार्ग पर ले जाने वाले क्रांतिकारी आचार्य जे बी कृपलानी

J. B. Kripalani

कुछ क्रांतिकारियों ने देश को आजाद करने के लिए पूरी कोशिश की और उनकी कोशिश कामयाब भी हुई। लेकिन जब उनकी कोशिश को कामयाबी मिली ऐसे समय को देखने के लिए वे मौजुद नहीं थे मतलब की आजादी मिलने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गयी थी। कुछ क्रांतिकारी इसके बिलकुल विपरीत थे। देश को आजादी मिलते हुए उन्होंने देखा था और उसके बाद उन्होंने देश के लिए काम करना शुरू कर दिया था।

कहने का मतलब यह है की जिन्होंने गुलाम बने हुए देश को देखा और आजाद भारत को भी देखा और बादमे आजाद भारत को विकास के मार्ग पर ले जाने का काम बड़ी सरलता से किया। एक ऐसे ही क्रांतिकारी के बारे में हम आपको बताने वाले है जिन्होंने देश को आजादी दिलाने में योगदान तो दिया ही साथ ही देश को स्वतन्त्र करने के बाद में देश को सुचारू रूप से चलाने का काम भी किया। इस क्रांतिकारी का नाम है आचार्य जे बी कृपलानी – J. B. Kripalani

इनका पूरा सफ़र कैसा रहा इसकी पूरी जानकारी निचे दी गयी है साथ इन्हें आचार्य नाम कैसे मिला इसकी भी पूरी जानकारी निचे दी गयी है।

राजनीती और सामाजिक क्षेत्र में आचार्य जे बी कृपलानी ने आजादी से पहले और बाद में भी बड़ा योगदान दिया था। वे महात्मा गांधी को आदर्श मानते थे और उनके बताये गए मार्ग पर चलने का काम करते थे।

जे बी कृपलानी  जीवन परिचय – J. B. Kripalani Jivan Parichay

जीवतराम भगवानदास कृपलानी का जन्म 11 नवम्बर 1888 मे हिन्दू क्षत्रिय अमिल परिवार में हैदराबाद के सिंध में हुआ था। काका भगवानदास उनके पिताजी थे। उनके पिताजी एक सरकरी विभाग में राजस्व और न्यायिक अधिकारी थे। उनका परिवार बहुत बड़ा था और उनके घर में आठ बच्चे थे और उनमे आचार्य जी का छटा नंबर था।

जे बी कृपलानी  की शिक्षा – J. B. Kripalani Education

कृपलानी ने अपनी शिक्षा सिंध के स्कूल में पूरी करने के बाद में बॉम्बे के विल्सन कॉलेज में आगे के पढाई की। वहापर पढाई करते समय उन्हें अहसास हुआ की उन्हें इंग्लिश कविताओ में काफी रुची है। लेकिन उनकी एक खास बात यह भी थी की उन्हें इंग्लिश कविताये बहुत अच्छी लगती थी लेकिन उससे भी ज्यादा उन्हें अंग्रेज लोगो से नफ़रत थी।

जब वे कॉलेज के पढाई कर रहे थे तो …

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