50 Best Kumar Vishwas Shayari in Hindi 2019 – कुमार विश्वास की शायरी

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Dr. Kumar Vishwas Shayari – पढ़िये कुमार विश्वास की बेस्ट शायरी, और कवितायें हिन्दी मे।

Kumar Vishwas Best Poems, Short Ghazal And Shayari in Hindi

चंद चेहरे लगेंगे अपने से ,खुद को पर बेक़रार मत करना !

आख़िरश दिल्लगी लगी दिल पर? हम न कहते थे प्यार मत करना…!!

 

Kumar Vishwas Shayari in Hindi

ना पाने की खुशी है कुछ,ना खोने का ही कुछ गम है,

ये दौलत और शौहरत सिर्फ कुछ जख्मों का मरहम है !

अजब सी कशमकश है रोज जीने ,रोज मरने में,

मुक्कमल जिंदगी तो है,मगर पूरी से कुछ कम है !!

Kumar Vishwas Shayari

हमने दुःख के महासिंधु से सुख का मोती बीना है,

और उदासी के पंजों से हँसने का सुख छीना है !

मान और सम्मान हमें ये याद दिलाते है पल पल,

भीतर भीतर मरना है पर बाहर बाहर जीना है..!!

 

Kumar Vishwas Ki Shayari

नज़र में शोखिया लब पर मुहब्बत का तराना है,

मेरी उम्मीद की जद़ में अभी सारा जमाना है !

कई जीते है दिल के देश पर मालूम है मुझकों,

सिकन्दर हूं मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है !!

 

Kumar Vishwas Short Poems in Hindi

पनाहों में जो आया हो तो उस पर वार क्या करना,

जो दिल हारा हुआ हो उस पे फिर अधिकार क्या करना !

मुहब्बत का मजा तो डूबने की कशमकश में है,

हो ग़र मालूम गहराई तो दरिया पार क्या करना..!!

 

Koi Diwana Kaheta Hai in Hindi

कितनी दुनिया है मुझे ज़िन्दगी देने वाली,और एक ख्वाब है तेरा की जो मर जाता है 

खुद को तरतीब से जोड़ूँ तो कहा से जोड़ूँ,मेरी मिट्टी में जो तू है की बिखर जाता है !!

 

Kumar Vishwas Love Shayari in Hindi

कोई मंजिल नहीं जंचती, सफर अच्छा नहीं लगता,

अगर घर लौट भी आऊ तो घर अच्छा नहीं लगता !

करूं कुछ भी मैं अब दुनिया को सब अच्छा ही लगता है,

मुझे कुछ भी तुम्हारे बिन मगर अच्छा नहीं लगता..!!

 

Kumar Vishwas Poem Lyrics

जिस्म का आखिरी मेहमान बना बैठा हूँ, एक उम्मीद का उन्वान बना बैठा हूँ !

वो कहाँ है ये हवाओं को भी मालूम है मगर, एक बस में हूँ जो अनजान बना बैठा हूँ !!

Kumar Vishwas Latest Shayari

हिम्मत ए रौशनी बढ़ जाती है, हम चिरागों की इन हवाओं से !

कोई तो जा के बता दे उस को, चैन बढता है बद्दुआओं से…!!

 

Kumar Vishwas All Shayari

स्वंय से दूर हो …

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Hindi Gazal

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अगर आप शायरी और ग़ज़ल प्रेमी हैं तो आपके इस लेख में एक से बढ़कर एक अच्छी अच्छी ग़ज़ल या लम्बी शायरिया पढ़ने को मिलेगी| सभी गज़ले बहुत ही प्रसिद्ध कवियों द्वारा लिखी गयी हैं जो की दिल की गहराईयो को छूती हैं

Hindi Gazal By Famous Poet

Hindi Gazal

1) मुक्कमल किताब हूँ Gazal on Mohabbat

मुक्कमल किताब हूँ
तेरी ही अल्फ़ाज़ हूँ
अधूरा सा खुआब हूँ
पर लाजवाब हूँ
सपनो में जो आई थी
बस जरा सा मुस्कुराई थी
ये देख दिल खुशगवार हुआ
फिर मिलने का जिंदगी भर इंतज़ार हुआ
बे इख़्तेयार प्यार हुआ
न मेरा इज़हार हुआ
न उसका इंकार हुआ
फिर महबूब मेराज हुआ
सारी मोहब्बत एक राज़ हुआ
फिर ये मुकम्मल किताब हुआ||
~Meraj Ibn Sami

2) Kabhi Shabnam Jagjit Singh Gazal

कभी गुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह,
लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह,

मेरे महबूब मेरे प्यार को इलज़ाम न दे,
हिज्र में ईद मनाई है मुहर्रम की तरह,

मैंने खुशबू की तरह तुझको किया है महसूस,
दिल ने छेड़ा है तेरी याद को शबनम की तरह,

कैसे हमदर्द हो तुम कैसी मसीहाई है,
दिल पे नश्तर भी लगाते हो तो मरहम की तरह
~Jagjit Singh

3) Intaha aaj Ishque Ki Kar Di Gazal in Hindi Lyrics

इंतहा आज इश्क़ की कर दी
आपके नाम ज़िन्दगी कर दी

था अँधेरा ग़रीब ख़ाने में
आपने आ के रौशनी कर दी

देने वाले ने उनको हुस्न दिया
और अता मुझको आशिक़ी कर दी

तुमने ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे बिखरा कर
शाम रंगीन और भी कर दी!!
~Jagjit Singh

4) आपके दिल ने हमें आवाज दी Best Hindi Gazal

आपके दिल ने हमें आवाज दी हम आ गए
हमको ले आई मोहब्बत आपकी हम आ गए

अपने आने का सबब हम क्या बताएँ आपको
बैठे बैठे याद आई आपकी हम आ गए

हम है दिलवाले भला हम पर किसी का ज़ोर क्या
जायेंगे अपनी ख़ुशी अपनी ख़ुशी हम आ गए

कहिये अब क्या है चराग़ों की ज़रुरत आपको
लेके आँखों में वफ़ा की रौशनी हम आ गए
~Jagjit Singh

5) Tera Chahera Jagjit Sing Hindi Gazal

तेरा चेहरा है आईने जैसा
क्यों न देखूँ है देखने जैसा

तुम कहो तो मैं पूछ लूँ तुमसे
है सवाल एक पूछने जैसा

दोस्त मिल जाएँगे कई लेकिन
न मिलेगा कोई मेरे जैसा

तुम अचानक मिले थे जब पहले
पल नही है वो भूलने जैसा
~Jagjit Singh

6) Meri Aadat Jagjit Gazal

काँटों से दामन उलझाना …

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shayarisms4lovers June18 248 - ऐ दिल है मुश्किल शायरी – आज जाने की जिद न करो

ऐ दिल है मुश्किल शायरी – आज जाने की जिद न करो

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ऐ दिल है मुश्किल

जब प्यार में प्यार न हो
जब दर्द में यार न हो
जब आँसूओ में मुस्कान न हो
जब लफ़्ज़ों में जुबान न हो
जब साँसे बस यूं ही चले
जब हर दिन में रात ढले
जब इंतज़ार सिर्फ वक़्त का हो
जब याद उस कमबख्त की हो
क्यों वो हो राही जो हो किसी और की मंजिल
जब धड़कनों ने साथ छोड़ दिया
ऐ दिल है मुश्किल , ऐ दिल है मुश्किल

AE Dil Hai Muskil

jab pyar mein pyar na ho
jab dard mein yaar na ho
jab anssooao mein muskan na ho
jab lafzzo main jubaan na ho
jab sanse bas yoon hi chale
jab har din main raat dhale
jab intezaar sirf waqt ka ho
jab yaad us kambaqat ki ho
kyon wo ho raahi jo ho kisi aur ki manjil
jab dhadkno ne sath chod diya
AE dil hai muskil , AE dil hai muskil


जनून हद से बढ़ चला है

बात बस से निकल चली है
दिल की हालत संभल चली है
अब जनून हद से बढ़ चला है
अब तबियत निहाल हो चली है

Janoon Haad se Bhad Chala Hai

Baat bas se nikal chali hai
Dil ki halat sambhal chali hai
Ab janoon haad se bhad chala hai
Ab Tabiyat Nihal ho chali hai


सौ अंधेरों में भी रोशन हूँ

सौ अंधेरों में भी रोशन हो उस हक़ीक़त की तलाश है
तेरी दहलीज़ पर छोड़ आए उस मोहब्बत की तलाश है
झुके तो इबादात समझे जमाने वाले
मिटने पे जो हासिल हो उस ज़नत की तलाश है

Sau Andheron Mein Bhi Roshan Hain

Sau andheron mein bhi roshan ho uss haqiqaat ki talash hai
Teri dehleez par chod aaie us mohabbat ki talash hai
Jhuke to Ibaadaat samjhe jamaane wale
Mitne pe jo hasil ho us janat ki talash hai


एक तरफ़ा प्यार

एक तरफ़ा प्यार की ताक़त ही कुछ और होती है
वो रिश्तों की तरह दो लोगो में नहीं बंटती
सिर्फ मेरा हक़ है इस पर सिर्फ मेरा

Ek Tarfa Pyar

Ek tarfa pyar ki taqat hi kuch aur hoti hai
Wo rishton ki tarah do logo main nahi bantti
sirf mera haq hai is par sirf mera


बाज़ी इश्क़ की

अगर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है
तो जो चाहे लगा लो दिल के सिबा
तो अगर जीत गए तो क्या कहना
अगर हारे भी तो बाज़ी मात नहीं

Baazi Ishq Ki

Agar Baazi ishq ki …

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shayarisms4lovers June18 210 - सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

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सुना है लोग उसे – फ़राज़ अहमद

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है
तो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

सुना है राफत है उसे खराब हालो से
तो अपने आप को बर्बाद कर के देखते है

सुना है दर्द की गाहक है चस्मे नाज़ उसकी
तो हम भी उसकी गली से गुजर के देखते है

सुना है उसको भी है शेयर -ओ -शायरी से सराफ
तो हम भी मोईझे अपने हुनर के देखते है

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है
यह बात है तो चलो बात कर के देखते है

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बामे-ऐ-फलक से उतर के देखते है

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती है
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते है

सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
फूल अपनी कवाएं क़तर के देखते है

रुके तो गर्दिशयें उसका तवाफ़ करते है
चले तो उसे ज़माने ठहर के देखते है

Hindi and Urdu Shayari – हुस्न की तारीफ  (Faraz Ahmed) – सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है

Suna hai Log use – Faraz Ahmed

suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
to uske shehar mein kuch din tehar ke dekhte hai

suna hai raft hai use khrab haalo se
to apne app ko barbaad kar ke dekhte hai

suna hai dard ki gaahak hai chaasme naaz uski
to hum bhi uski gali se gujar ke dekhte hai

suna hai usko bhi hai sher-o-shayari se saraaf
to hum bhi moejhe apne hunar ke dekhte hai

suna hai bole to baaton se phool jharthe hai
yeah baat hai to chaalo baat kar ke dekhte hai

suna hai raat use chand takta rehta hai
sitare bame falak se utaar ke dekhte hai

suna hai din ko use titliya satati hai
suna hai raat ko jungu ther ke dekhte hai

suna hai uske badan ki tarash aisi hai
phhol apni kawayen katar ke dekhte hai

ruke to gardishyein uska tawaf karte hai
chale to use jamane ther ke dekhte hai

Urdu and hindi shayari – Husn – Faraz ki shayari – suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
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shayarisms4lovers June18 250 - Hindi Urdu Poetry | Charagh Le Ke Tere Shehar Se Guzarna Hai

Hindi Urdu Poetry | Charagh Le Ke Tere Shehar Se Guzarna Hai

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Hindi Urdu Poetry | Urdu Shayari Ghazal

Charagh le ke tere shehar se guzarna hai
Ye tajurba bhi hame ek baar karna hai

Main woh pahar hu jo cut raha ho pani se
Ye dil nahi hai mere aansuo ka jharna hai

Bohat jadeed hun lekin ye mera wirsa hai
Usi qadeem gali se mujhe guzarna hai

Tumhe khabar nahi suraj bhi aks hai mera
Tamam din ka mujhe intazam karna hai

Wo ek shakhs ke jis ko gazal bhi kehte hain
Usi ke naam se jeena, usi se marna hai

Hindi Urdu Poetry

چراغ لے کے تیرے شہر سے گزرنا ہے
یہ تجربہ بھی ہمیں ایک بار کرنا ہے

میں وہ پھر ہوں جو کٹ رہا ہو پانی سے
یہ دل نہیں ہے میرے آنسوؤں کا جھرنا ہے

بہت جدید ہوں لیکن یہ میرا ورثہ ہے
اسی قدیم گلی سے مجھے گزرنا ہے

تمہیں خبر نہیں سورج بھی عکس ہے میرا
تمام دن کا مجھے انتظام کرنا ہے

وہ ایک شخص کے جس کو غزل بھی کہتے ہیں
اسی کے نام سے جینا اسی سے مرنا ہے

#Hindi #Urdu #Poetry

चराग़ लेके तेरे शहर से गुज़ारना है
ये तजरुबा भी हमें एक बार करना है

मैं वह पहर हु जो कट रहा हो पानी से
ये दिल नहीं है मेरे आंसुओ का झरना है

बहुत जदीद हूँ लेकिन ये मेरा विरसा है
उसी क़दीम गली से मुझे गुज़रना है

तुम्हे खबर नहीं सूरज भी अक्स है मेरा
तमाम दिन का मुझे इंतज़ाम करना है

वो एक शख्स के जिस को ग़ज़ल भी कहते हैं
उसी के नाम से जीना, उसी से मरना है

♥…

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

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मेरी वेहशत

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

Meri Wehshat

Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi
Meri wehshat teri shohrat hi sahi
kta kijiay na taaluq hum se
kuch nahin hai to adaawat he sahi…


शब-ऐ-इंतज़ार

वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के
कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का
चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी
चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का

Shab-ae-Intezaar

Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke
Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka
Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi
Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka…


तुम्हारे ख्याल

बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं
ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम
यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं
तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम

Tumhare Khyal

Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main
Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal Ka Mausam
Jo bhi Yaqeen hio Baharain Ujar Bhi Sakti Hain
To Aa Ke Deakh Mere Zawaal Ka Mausam…


खुदा बचाए

हमारे हाल पर वो मुस्करा तो देते हैं
चलो यही सही , कुछ तो ख़याल करते हैं
खुदा बचाए तुझे इन वफ़ा के मारों से
जवाब जिस का न हो वो सवाल करते हैं

Khudaa bachaaye

hamaare Haal par wo muskura to dete hain
chalo yahi sahi, kuChh to Khayaal karte hain
Khudaa bachaaye tujhe in wafaa ke maaron se
jawab jis ka na ho wo savaal karte hain……

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shayarisms4lovers June18 275 - Aasan Urdu Shayari in Urdu Hindi : Aa Gai Yaad

Aasan Urdu Shayari in Urdu Hindi : Aa Gai Yaad

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Aasan Urdu Shayari in Urdu Hindi

Aagai yaad sham dhalte hi
Bujh gaya dil charagh jalte hi

Khul gaye shehr e gham ke darwaze
Ek zara si hawa ke chalte hi

Kon tha tu ke phir n dekha tujhe
Mit gaya khwab aankh malte hi

Khaof aata hai apne hi ghar se
Mah e shab e tab ke nikalte hi

Tu bhi jaise badal sa jaata hai
Aks e divar ke badalte hi

Khoon sa lag gaya hai hathon mein
Chadh gaya zehr gul masalte hi

Aasan Urdu Shayari in Urdu

آ گئی یاد شام ڈھلتے ہی
بجھ گیا دل چراغ جلتے ہی

کھل گئے شہر غم کے دروازے
اک ذرا سی ہوا کے چلتے ہی

کون تھا تو کہ پھر نہ دیکھا تجھے
مٹ گیا خواب آنکھ ملتے ہی

خوف آتا ہے اپنے ہی گھر سے
ماہ شب تاب کے نکلتے ہی

تو بھی جیسے بدل سا جاتا ہے
عکس دیوار کے بدلتے ہی

خون سا لگ گیا ہے ہاتھوں میں
چڑھ گیا زہر گل مسلتے ہی

Aasan Urdu Shayari in Hindi

आ गई याद शाम ढलते ही
बुझ गया दिल चराग़ जलते ही

खुल गए शहर-ए-ग़म के दरवाज़े
इक ज़रा सी हवा के चलते ही

कौन था तू कि फिर न देखा तुझे
मिट गया ख़्वाब आँख मलते ही

ख़ौफ़ आता है अपने ही घर से
माह-ए-शब-ताब के निकलते ही

तू भी जैसे बदल सा जाता है
अक्स-ए-दीवार के बदलते ही

ख़ून सा लग गया है हाथों में
चढ़ गया ज़हर गुल मसलते ही

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shayarisms4lovers June18 267 - Shiv Kumar Batalvi – नग्मे और शायरी

Shiv Kumar Batalvi – नग्मे और शायरी

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प्यार तेरे शहर दा

रोग बन के रह गया है प्यार तेरे शहर दा
मैं मसीहा वेख्या बीमार तेरे शहर दा

इसकी गलियां मेरी चढ़दी जवानी खा लायी
क्यों ना करूँ दोस्ता सत्कार तेरे शहर दा

शहर तेरे क़दर नहीं लोकां नू सच्चे प्यार दी
रात नूं खुल्दा है हर बाजार तेरे शहर दा

जिथे मोयां बाद भी कफ़न नहीं होया नसीब
कौन पागल अब करे एतबार तेरे शहर दा

इथे मेरी लाश तक नीलाम कर दीती गयी
लथ्या कर्ज़ा ना फिर भी यार तेरे शहर दा

Pyaar Tere Shahar Da

Rog ban ke reh gayaa hai pyaar tere shahar daa
Main Masiihaa vekhyaa biimaar tere shahar daa

Ehdiyaan galiyan merii charhdi jawaani khaa layii
Kyon karaan naa dostaa satkaar tere shahar daa

Shahar tere qadar nahin lokaan noon suche pyaar dii
Raat noon khuldaa hai har bazaar tere shahar daa

Jithe moyaan baad vii kafan nahin hoyaa nasiib
Kaun paagal hun kare etbaar tere shahar daa

Eithe merii laash tak niilaam kar ditii gayii
Lathyaa karzaa naa fer vii yaar tere shahar daa…


दर्द दा कोई जाम पीतियाँ

आज फिर दिल गरीब इक पाउँदा है वास्ता,
दे जा मेरी अज  कलम नू  इक होर हादसा

मुददत होइ है दर्द दा कोई जाम पीतियाँ ,
पीडां च हन्जू घोल के , दे जा दो आताशा

कागज़ दी कोरी रीझ है चुप चाप वेखदी ,
शब्दां दे थल च भटकदा गीतां दा काफिला

तुरना मैं चौन्दां पैर विच कंडे दी ले के पीड ,
दुःख तो खबर तक दोस्ता जिना भी फासला ,

आ बौड़ शिव नु पीड भी है कंडे दी चली ,
रखी सी जेह्ड़ी उस ने मुददत तो दास्ताँ

Dard Da Koi Jaam Peeteyaan

Aaj Fer Dil Gareeb Ik Paaunda Hai Vaasta,
De Ja Meri Aaj Kalam Nu Ik Hor Haadsa,

Muddat Hoi Hai Dard Da Koi Jaam Peeteyaan,
Peedaan Ch Hanju Ghol Ke, De Ja Do Aatasha,

Kaagaz Di Kori Reejh Hai Chup Chaap Vekhdi,
Shabdaan De Thal Ch Bhatakda Geetaan Da Kaafila,

Turnaa Main chaundaan Pair Vich Kande Di Le Ke Peed,
Dukh To Kabar Tak Dosta Jihna Vi Faasala,

Aa Bahur Shiv Nu Peed Vi Hai Kand De Chali,
Rakhi Si Jihdi Oas Ne Muddat To Daastaan.…

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pexels photo 592772 - आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

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आँखें  मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही , सही
क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही

यह सुबह सुबह चेहरे की रंगत उतरी हुई
कल रात तुम कहाँ थे बताना सही ,सही

दिल ले के मेरा हाथ में कहती हैं मुझ से वो
क्या लोगे इसका दाम बताना सही , सही

आँखें  मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम _ऐ _महफ़िल
साक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही , सही

आइमा फरोश भीड़ है तेरी दुकान पर
ग्राहक हैं हम भी माल दिखाना सही , सही

ग़ालिब तो जान _ओ _ दिल से फ़क़त आपका है बस
क्या आप भी हैं उसके बताना सही ,सही..

Ankhen Milao Gair Se – Mirza Galib

Kehna Ghalt Ghalt To Chupana Sahi, Sahi
Qasid Kaha Jo Us Ne Btana Sahi Sahi

Yeh Subah Subah chehre Ki Rangat utri Hui
Kal Raat Tum Kahan The Batana Sahi,Sahi

Dil Le Ke Mera Hath mei Kehte Hain Mujh Se Wo
Kya Loge Iska Daam Batana Sahi, Sahi

Ankhen Milao Gair Se Do Hum Ko Jaam_AE_mehfil
Saqi Tumhen Qasm Hai Pilana Sahi, Sahi

Aiema Farosh Bheer Hai Teri Dukan Par
Gahak Hain Hum Bhi Maal Dikhana Sahi, Sahi

Ghalib To Jaan_O_Dil Se Faqt Apka Hai Bas
Kya Ap Bhi Hain Uske Btana Sahi,Sahi..…

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shayarisms4lovers mar18 202 - ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

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हम तो अकेले रहे

हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ
यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ

सदा चोट पर चोट खाता रहा
मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ

कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में
झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ

ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा
हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ

अकेले थे हम तो अकेले रहे
कोई अपना गमख्वार हो , हमदम कहाँ

जहांगीर-ओ-नौशेरवां चल बसे
रहा डर में अद्ल पैहम कहाँ

ना अय्यूबी कोई ना खालिद कोई
गया रखता अपना परचम कहाँ

Hum To Akele Rahe

Hamesha Rahega Yeh Aalam Kahan
Yeh Mahfil Kahan aur Yeh Humdam Kahan

Sada Chot Par Chot Khata Raha
Muqaddar Mein Is Dil Ke Marham Kahan

Kahan Abr Koi Kadi Dhoop Mein
Jhulaste Bayabaan Mein Shabnam Kahan

Naa Mast Aankhein Hongi Naa Zulfe Rasaa
Hamesha Rahega Yeh Mausam Kahan

Akele The Hum To Akele Rahe
Koi Apna Ghamkhwaar , Humdam Kahan

Jahangeer-O-Nausherwaan Chal Base
Rahaa Daar Mein Adl Paiham Kahan

Naa Ayyubi Koi Naa Khalid Koi
Gaya Rekhta Apna Parcham Kahan..


दिखाई दिए यूँ

दिखाई दिए यूँ की बेखुद किया
हमें आप से भी जुदा कर चले

जबीं सजदा करते ही करते गए
हक़-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले

गई उम्र दर बंद-ऐ-फ़िक्र-ऐ-ग़ज़ल
वो इस फन को ऐसा बढ़ा कर चले

कहें क्या जो पूछे कोई हम से “मीर”
जहाँ में तुम आए थे , क्या कर चले

Dikhai Diye Yun

Dikhai diye yun ki bekhud kiya
Hamain ap se bhi juda kar chale

Jabin sajda karte hi karte gai
Haq-ae-bandagi ham ada kar chale

Gai umar dar band-ae-fikar-ae-gazal
So is faan ko aisas bada kar chale

Kahen kya jo puche koi ham se “Meer”
Jahan main tum aaye the, kya kar chale..


वफाओं की मोहरें

न सोचा न समझा न सीखा न जाना
मुझे आ गया खुद ब खुद दिल लगाना
ज़रा देख कर अपना जलवा दिखाना
सिमट कर यहीं आ न जाए ज़माना
ज़ुबान पर लगी हैं वफाओं की मोहरें
ख़ामोशी मेरी कह रही है फ़साना
गुलों तक बात आई तो आसान है लेकिन
है दुष्वार काँटों से दामन बचाना
करो लाख तुम मातम -ऐ -नौजवानी
पर ‘मीर’ अब नहीं आएगा वो ज़माना

Wafaon ki Mohrain

Na socha na samajha na sikha na jana
mujhe aa gaya khudbakhud dil lagana
zara dekh kar apna jalwa dikhana
simat kar yahin aa na jaye zamana
zuban par lagi hain wafaon ki mohrain
khamoshi meri keh rahi hai fasana
gulon tak lagayi to aasan …

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हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला – “दाग़” उर्दू शायरी

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हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला 

तुम्हारे खत मैं नया एक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किस का था

वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं
यह काम किस ने किया है ये काम किस का था

वफ़ा करेंगे निभाएंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ यह कमाल किस का था

रहा न दिल मैं वो बे-दर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था

न पूछ -पाछ थी किसी की न आओ-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतमाम किस का था

गुज़र गया वो ज़माना कहें तो किस से कहें
ख्याल मेरे दिल को सुबह -ओ -शाम किस का था

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला
यह पूछे इनसे कोई वो ग़ुलाम किस का था

Har ek se kahte hain kya “Daagh” bewafa nikla

Tumhare khath main naya ek salam kis ka tha
na tha raqeeb to akhir wo nam kis ka tha

Wo qatl kar ke har kisi se puchte hain
ye kaam kis ne kiya hai ye kaam kis ka tha

Wafa karenge nibhayenge baat manenge
tumhen bhi yaad hai kuch ye kalam kis ka tha

Raha na dil main wo be-dard aur dard raha
muqeem kaun hua hai maqam kis ka tha

Na pooch-paach thi kisi ki na aao-bhagat
tumhari bazm main kal ehtamam kis ka tha

Guzar gaya wo zamana kahen to kis se kahen
khayal mere dil ko subah-o-sham kis ka tha

Har ek se kahte hain kya “Daagh” bewafa nikla
ye puche in se koi wo ghulam kis ka tha…

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shayarisms4lovers mar18 12 - उर्दू ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़लें

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मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se Maine Un Jazbaat Se Mohabbat Ki Hai Tujhse Milna To Ab Khawab Sa Lagta Hai Maine Tere Intezaar Se Mohabbat Ki Hai


मुहब्बतों के पयाम लिखना ​

कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़-ऐ-सलाम लिखना ​ वो चाँद चेहरा , वो बहकी बातें , सुलगते दिन थे , सुलगती रातें वो छोटे छोटे से काग़ज़ों पर , मुहब्बतों के पयाम लिखना ​ गुलाब चेहरों से दिल लगाना , वो चुपके चुपके नज़र मिलाना वो आरज़ूओं के ख्वाब बुनना, वो क़िस्सा -ऐ -नाम तमाम लिखना मेरे शहर की हसीं फिज़ाओ , कहीं जो उन का निशान पाओ तो पूछना के कहाँ बसे वो , कहाँ है उन का क़याम लिखना ​ गयी रुतों में रुबाब अपना , बस एक यह ही तो मश्ग़ला था किसी के चेहरे को सुबह लिखना , किसी के चेहरे को शाम लिखना

Kabhi Kitabon Mein Phool Rakhna, Kabhi Darakhton Pe Naam Likhna Hamein Bhi Yaad Hai Aaj Tak Wo , Nazar Say Harf-Ae-Salam Likhna Wo Chand Chehray, Wo Behki Batein, Sulagtay Din The, Sulagti Ratein Wo Chote Chote Se Kaghazon Par, Muhabbaton Key Payaam Likhna Gulab Chehron Say Dil Lagana, Wo Chupkey Chupkey Nazar Milana Wo Arzuon Key Khwaab Bunna , Wo Qissa-Ae-Naam Tamaam Likhna Mere Shahar Ki Haseen Fizaoon, Kaheen Jo Un Ka Nishan Pao To Poochna Ke Kahan Basay Wo ,Kahan Hai Un Ka Qayam Likhna Gayee Ruton Mein Rubab Apna , Bas Ek Yeh Hi To Mashghala Tha

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pexels photo 701816 - दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

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दर्द के फूल 

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं

उस दरीचे में भी अब कोई नहीं और हम भी
सर झुकाए हुए चुप -चाप गुज़र जाते हैं

रास्ता रोके खडी है यही उलझन कब से
कोई पूछे तो कहें क्या की किधर जाते हैं

नरम आवाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे
पहली बारिश में ही यह रंग उतर जाते हैं

Dard ke Phool  – Javed Akhtar

dard ke phool bhi khilate hain bikhar jaate hain
zaKhm kaise bhii hoon kuchh roz mein bhar jaate hain

us dariiche mein bhii ab koi nahin aur ham bhii
sar jhukaae hue chup-chaap guzar jaate hain

raastaa roke khaadi hai yahii ulajhan kab se
koi puuchhe to kahen kyaa ki kidhar jaate hain

narm aavaaz bhalii baate.n mohazzab lahaje
pahalii baarish mein hii ye rang utar jaate hain……

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Urdu Hindi Shayari | Dil Daar ke Aansoo | Shayri Ghazal

Romantic Shayari - Apni nigahon se

Urdu Hindi Shayari

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Baazar-e-muhabbat me baha pyar ke aansoo
Hote hain yahan kharch khareedar ke aansoo

Behte hain shab-o-roz* muhabbat ki gali mien
Dil thaam ke bethe huwe dil-daar ke aansoo
(shab-o-roz = raat din)

Chhup jaate hain shabnam ki har ek boond se dab kar
Jo shab* ke andheroN mein bahe khaar* ke aansoo
(Shab = raat) (khaar = kante)

Aabid ki nigahoN mien ye naapaak ho lekin
Allah ko pyare hain gunehgaar ke aanoo

Kya kya n sitam qeis* pe laila ne kiye hain
Sehra me barste rahe dildar ke aansoo
(qeis = majnuN ka naam)

Seh seh ke sitam husn ke, dete hain duaaeN
Aashiq ke girebaan ke har taar ke aansoo

Woh chheen ke hansta raha muflis* ki muhabbat
AankhoN se jhalak te the magar haar ke aansoo
(muflis = gareeb)

Main bhi to ek insaan hun patthar to nahin hun
Behte hain meri aankh se bhi pyaar ke aansoo

“Sayyid” mein use haal sunaauN bhi to kyun kar
Mein dekh nahin sakta hun ghamkhwar ke aansoo

♥

shayri ghazal in urdu

بازارِ محبّت مے بہا پیار کے آنسو
ہوتے ہیں یھاں خرچ خریدار کے آنسو

بہتے ہیں شب و روز محبّت کی گلی مے
دل تھام کے بیٹھے ہوئے دلدار کے آنسو

چھپ جاتے ہیں شبنم کی ہر ایک بوند مے دب کر
جو شب کے اندھیروں مے بہے خار کے آنسو

عابد کی نگاہوں میں یہ ناپاک ہوں لیکن
اللہ کو پیارے ہیں گنہگار کے آنسو

کیا کیا نہ ستم قیس پے لیلیٰ نے کئے ہیں
صحرا مے برستے رہے دل دار کے آنسو

سہہ سہہ کے ستم حسن کے دیتے ہیں دعائیں
عاشق کے گریبان کے ہر تار کے آنسو

وہ چھین کے ہنستا رہا مفلس کی محبّت
آنکھوں سے چھلکتے تھے مگر ہار کے آنسو

میں بھی تو ایک انسان ہوں پتھر تو نہیں ہوں
بہتے ہیں میری آنکھ سے بھی پیار کے آنسو

“سیؔد” میں اسے حال سناوں بھی تو کیوں کر
میں دیکھ نہیں سکتا ہوں غمخوار کے آنسو

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shayri ghazal in hindi

बाजरे मुहब्बत में बहा प्यार के आंसू
होते हैं यहाँ खर्च खरीदार के आंसू

बहते हैं शब-ओ-रोज़* मुहब्बत की गली मे
दिल थाम के बैठे हुवे दिलदार के आंसू
(शब-ओ-रोज़ = रात दिन)

छुप जाते हैं शबनम की हर एक बूँद से दब कर
जो शब* के अंधेरों मे बहे खार* के आंसू
(शब = रात) (खार = कांटे)

आबिद की निगाहों में ये नापाक हों लेकिन
अल्लाह

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shayarisms4lovers mar18 38 - वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है ​- ग़ज़ल

वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है ​- ग़ज़ल

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वो मुझ से मांगता है उम्र भर की वफ़ा का वादा

वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है
भरी महफ़िल मैं मुझ को रुसवा वो हर बार करता है

यूँ तो करता है ज़माने भर की बातें मुझ से
मगर जब बात मोहबत की हो तो तकरार करता है

सितम् जब अपने सुनाता है भरी महफ़िल मैं वो
बड़े अंदाज़ से अपने गुनाहों का इज़हार करता है

वो मुझ से मांगता है उम्र भर की वफ़ा का वादा
किस मासूमियत से वो मुझ से फरयाद करता है

मालूम है सब को खफा है आज कल मुझ से वो
मगर मैं जानता हूँ के वो मुझ से प्यार करता है

Hindi and urdu Shayari,Gazal,kalam- वो मेरा है मगर इस एहसास से इंकार करता है

Wo Mujh Se Mangta Hai Umar Bhar Ki Wafa Ka Waada

Wo Mera Hai Magar Is Ihsaas Se Inkar Karta Hai
Bhari Mehfil Main Mujh ko Wo Ruswa Har Baar Karta Hai

Yun Tu Karta Hai Zamane Bhar Ki Batain Mujhe Se
Magar Jab Baat Mohabat Ki Ho To Takrar karta Hai

Sitam Jab Apnay Sunata Hai Bhari Mehfil Main wo
bade Andaaz Se Apne Gunahon Ka Izhaar Karta Hai

Wo Mujh Se Mangta Hai Umar Bhar Ki Wafa Ka Waada
Kis Masomiat Se Wo Mujhe Se Faryaad Karta Hai

Maloom Hai Sab Ko Khafa Hai AAj Kal Mujh Se Wo Haris
Magar Main Janta Hoon Ke Wo Mujh Se Pyar Karta Hai

Hindi and urdu Shayari – Gazal -Wo Mera Hai Magar Is Ihsaas Se Inkar Karta Hai
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