Urdu Poetry – Journey through TIME

Urdu Poetry – Journey through TIME

Change and rebirth are inscribed in the D.N.A of Urdu poetry. It has been continuously reinventing itself in every phase of its existence through the last 300 years, both in its content and appearance. It is this adaptability that has enabled it to serve the emotional, intellectual and spiritual needs of poetry lovers at every point of time and space. The moving mirror of Urdu poetry has always reflected every change in the moods and patterns of thought and feeling of people at any particular period of time. It has also been a trend-setter in the way people live life and interprets it. Urdu poetry has given concrete shape to vague feelings and emotions and clearly audible expression to mute voices struggling to find words.

From the second half of the 17th to the first half of the 18th centuries, Urdu poetry …

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Hindi Gazal

अगर आप शायरी और ग़ज़ल प्रेमी हैं तो आपके इस लेख में एक से बढ़कर एक अच्छी अच्छी ग़ज़ल या लम्बी शायरिया पढ़ने को मिलेगी| सभी गज़ले बहुत ही प्रसिद्ध कवियों द्वारा लिखी गयी हैं जो की दिल की गहराईयो को छूती हैं

Hindi Gazal By Famous Poet

Hindi Gazal

1) मुक्कमल किताब हूँ Gazal on Mohabbat

मुक्कमल किताब हूँ
तेरी ही अल्फ़ाज़ हूँ
अधूरा सा खुआब हूँ
पर लाजवाब हूँ
सपनो में जो आई थी
बस जरा सा मुस्कुराई थी
ये देख दिल खुशगवार हुआ
फिर मिलने का जिंदगी भर इंतज़ार हुआ
बे इख़्तेयार प्यार हुआ
न मेरा इज़हार हुआ
न उसका इंकार हुआ
फिर महबूब मेराज हुआ
सारी मोहब्बत एक राज़ हुआ
फिर ये मुकम्मल किताब हुआ||
~Meraj Ibn Sami

2) Kabhi Shabnam Jagjit Singh Gazal

कभी गुंचा कभी शोला कभी शबनम की तरह,
लोग मिलते हैं बदलते हुए मौसम की तरह,

मेरे महबूब मेरे प्यार को इलज़ाम …

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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

सुना है लोग उसे – फ़राज़ अहमद

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है
तो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

सुना है राफत है उसे खराब हालो से
तो अपने आप को बर्बाद कर के देखते है

सुना है दर्द की गाहक है चस्मे नाज़ उसकी
तो हम भी उसकी गली से गुजर के देखते है

सुना है उसको भी है शेयर -ओ -शायरी से सराफ
तो हम भी मोईझे अपने हुनर के देखते है

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है
यह बात है तो चलो बात कर के देखते है

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बामे-ऐ-फलक से उतर के देखते है

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती है
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते है

सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
फूल अपनी कवाएं क़तर के देखते है

रुके तो गर्दिशयें …

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Hindi Urdu Poetry | Charagh Le Ke Tere Shehar Se Guzarna Hai

Hindi Urdu Poetry | Urdu Shayari Ghazal

Charagh le ke tere shehar se guzarna hai
Ye tajurba bhi hame ek baar karna hai

Main woh pahar hu jo cut raha ho pani se
Ye dil nahi hai mere aansuo ka jharna hai

Bohat jadeed hun lekin ye mera wirsa hai
Usi qadeem gali se mujhe guzarna hai

Tumhe khabar nahi suraj bhi aks hai mera
Tamam din ka mujhe intazam karna hai

Wo ek shakhs ke jis ko gazal bhi kehte hain
Usi ke naam se jeena, usi se marna hai

Hindi Urdu Poetry

چراغ لے کے تیرے شہر سے گزرنا ہے
یہ تجربہ بھی ہمیں ایک بار کرنا ہے

میں وہ پھر ہوں جو کٹ رہا ہو پانی سے
یہ دل نہیں ہے میرے آنسوؤں کا جھرنا ہے

بہت جدید ہوں لیکن یہ میرا ورثہ ہے
اسی قدیم گلی سے مجھے گزرنا ہے

تمہیں خبر نہیں سورج …

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Aasan Urdu Shayari in Urdu Hindi : Aa Gai Yaad

Aasan Urdu Shayari in Urdu Hindi

Aagai yaad sham dhalte hi
Bujh gaya dil charagh jalte hi

Khul gaye shehr e gham ke darwaze
Ek zara si hawa ke chalte hi

Kon tha tu ke phir n dekha tujhe
Mit gaya khwab aankh malte hi

Khaof aata hai apne hi ghar se
Mah e shab e tab ke nikalte hi

Tu bhi jaise badal sa jaata hai
Aks e divar ke badalte hi

Khoon sa lag gaya hai hathon mein
Chadh gaya zehr gul masalte hi

Aasan Urdu Shayari in Urdu

آ گئی یاد شام ڈھلتے ہی
بجھ گیا دل چراغ جلتے ہی

کھل گئے شہر غم کے دروازے
اک ذرا سی ہوا کے چلتے ہی

کون تھا تو کہ پھر نہ دیکھا تجھے
مٹ گیا خواب آنکھ ملتے ہی

خوف آتا ہے اپنے ہی گھر سے
ماہ شب تاب کے نکلتے ہی

تو بھی جیسے بدل سا جاتا ہے

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Shiv Kumar Batalvi – नग्मे और शायरी

प्यार तेरे शहर दा

रोग बन के रह गया है प्यार तेरे शहर दा
मैं मसीहा वेख्या बीमार तेरे शहर दा

इसकी गलियां मेरी चढ़दी जवानी खा लायी
क्यों ना करूँ दोस्ता सत्कार तेरे शहर दा

शहर तेरे क़दर नहीं लोकां नू सच्चे प्यार दी
रात नूं खुल्दा है हर बाजार तेरे शहर दा

जिथे मोयां बाद भी कफ़न नहीं होया नसीब
कौन पागल अब करे एतबार तेरे शहर दा

इथे मेरी लाश तक नीलाम कर दीती गयी
लथ्या कर्ज़ा ना फिर भी यार तेरे शहर दा

Pyaar Tere Shahar Da

Rog ban ke reh gayaa hai pyaar tere shahar daa
Main Masiihaa vekhyaa biimaar tere shahar daa

Ehdiyaan galiyan merii charhdi jawaani khaa layii
Kyon karaan naa dostaa satkaar tere shahar daa

Shahar tere qadar nahin lokaan noon suche pyaar dii
Raat noon khuldaa hai har bazaar tere shahar daa

Jithe moyaan baad vii kafan nahin hoyaa nasiib
Kaun …

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आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

आँखें  मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही , सही
क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही

यह सुबह सुबह चेहरे की रंगत उतरी हुई
कल रात तुम कहाँ थे बताना सही ,सही

दिल ले के मेरा हाथ में कहती हैं मुझ से वो
क्या लोगे इसका दाम बताना सही , सही

आँखें  मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम _ऐ _महफ़िल
साक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही , सही

आइमा फरोश भीड़ है तेरी दुकान पर
ग्राहक हैं हम भी माल दिखाना सही , सही

ग़ालिब तो जान _ओ _ दिल से फ़क़त आपका है बस
क्या आप भी हैं उसके बताना सही ,सही..

Ankhen Milao Gair Se – Mirza Galib

Kehna Ghalt Ghalt To Chupana Sahi, Sahi
Qasid Kaha Jo Us Ne Btana Sahi Sahi

Yeh Subah Subah chehre Ki Rangat utri Hui
Kal Raat Tum Kahan The Batana Sahi,Sahi

Dil Le Ke Mera …

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ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

हम तो अकेले रहे

हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ
यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ

सदा चोट पर चोट खाता रहा
मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ

कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में
झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ

ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा
हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ

अकेले थे हम तो अकेले रहे
कोई अपना गमख्वार हो , हमदम कहाँ

जहांगीर-ओ-नौशेरवां चल बसे
रहा डर में अद्ल पैहम कहाँ

ना अय्यूबी कोई ना खालिद कोई
गया रखता अपना परचम कहाँ

Hum To Akele Rahe

Hamesha Rahega Yeh Aalam Kahan
Yeh Mahfil Kahan aur Yeh Humdam Kahan

Sada Chot Par Chot Khata Raha
Muqaddar Mein Is Dil Ke Marham Kahan

Kahan Abr Koi Kadi Dhoop Mein
Jhulaste Bayabaan Mein Shabnam Kahan

Naa Mast Aankhein Hongi Naa Zulfe Rasaa
Hamesha Rahega Yeh Mausam Kahan

Akele The Hum To Akele Rahe
Koi Apna Ghamkhwaar , Humdam Kahan

Jahangeer-O-Nausherwaan …

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हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला – “दाग़” उर्दू शायरी

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला 

तुम्हारे खत मैं नया एक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किस का था

वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं
यह काम किस ने किया है ये काम किस का था

वफ़ा करेंगे निभाएंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ यह कमाल किस का था

रहा न दिल मैं वो बे-दर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था

न पूछ -पाछ थी किसी की न आओ-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतमाम किस का था

गुज़र गया वो ज़माना कहें तो किस से कहें
ख्याल मेरे दिल को सुबह -ओ -शाम किस का था

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला
यह पूछे इनसे कोई वो ग़ुलाम किस का था

Har ek se kahte hain kya “Daagh” bewafa nikla

Tumhare khath main naya ek salam …

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