shayarisms4lovers June18 238 - Two Line Shayari on love in Hindi Language – 2 Line Love Shayari Collection

Two Line Shayari on love in Hindi Language – 2 Line Love Shayari Collection

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Read Two line shayari on love

यह दिल की अपनी दुनिया है
यह समझ किसी के आए ना
मैंने ये दुआ हरदम माँगी
कोई छोड़ किसी को जाए ना।

तुम याद करो तक्दीर क हाँ
हम भूल सकें हो सकता नहीं
महफिल की छोड़ो बात ही कया
अब तन्हा भी रो सकता नहीं।

इस बात का दिल को यकीं है मेरे
तुझे अपना बनाऊँगा मैं कभी
भले आज नहीं यह कल होगा
तेरे दिल को भाऊँगा मैं कभी।
जब सामने तुम आ जाते हो।
खुद को मैं भूल ही जाता .
हैं लाखों बातें क हने को
जाने क्यों कह नहीं पाता हूँ।

जैसे मैं तड़ पता हूँ तुम बिन
क्या तुझको याद नहीं आती
ले आए तुझको पास मेरे
क्यों ऐसी रात नहीं आती।

देखा भी नहीं सोचा भी नहीं
बस तुझसे मुहब्बत कर बैठे
अब बात खुदा पे छोड़ ये दी
हम जी बैठे या मर बैठे।

भूलना तो चाहा था मगर
भुला नहीं पाया मैं कभी
अपनी खुशी की खातिर किसी को
रूला नहीं पाया मैं कभी।

तू अपने बारे सोच जरा
ये जीवन युना गुजर जाए
रखना तुम बात ये याद रखना सदा
कभी बीता वक्त ना फिर आए।

वो कहते हैं उन्हें प्यार नहीं
मेरे वादों पर एतबार नहीं
इकरार तो क्या करना छोड़ो
क्यों करते वो इन्कार नहीं ।

प्यार तुम्हें मैं कर तो बैठा
लगता है निभा ना पाऊँ गा
सांसें मेरी कम हैं हमदम
बस जल्दी ही चला जाऊँगा।

चाहता तो हूँ तुमसे मिलना मगर
कुछ रस्मों के हाथों लाचार हूँ में
तुम ख्वाबों में आने का वादा करो
ता उम्र सोने को प्यार हूँ में।

यही तो ज़िन्दगी का सिलसिला है दोस्त।
जिसे भी चाहा वो कब मिला है दोस्त
हमारी चाहत को भी ना मिल सकी मंजिल
इतना सा उस खुदा से गिला है दोस्त।
सब नदियाँ , झार ने ये नाले
सागर न आके समाते हैं

सागर के लिए ना सोचे कोई
सब अपनी प्यास बुझाते हैं ।
सागर की शायरी

हम तो आना चाहते हैं करीब आपके
क्या करें आपको गवारा नहीं है।
मौत ने पहले बुला लिया हमें
हुआ जिन्दगी की तरफ से इशारा नहीं है।

तुम रखना हमको याद सनम
अब लौट के हम नहीं आएंगे
मत करना अब इंतजार हमारा
बस जल्दी हम चले जाएंगे।

इस कदर उलझा हूँ रंजोंमें
कि मुस्कुराहट देखे को एक …

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shayarisms4lovers mar18 71 - यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं – ग़ालिब

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यह इश्क़ वाले

अक़्ल वालों के मुक़द्दर में यह जूनून कहाँ ग़ालिब
यह इश्क़ वाले हैं जो हर चीज़ लूटा देते हैं ….

Yeh Ishq Wale

Aqal Walon ke Muqaddar mein Yeh Junoon Kahan Ghalib,
Yeh Ishq Wale hain Jo Har cheez Luta Deta Hain…..


ज़ाहिर है तेरा हाल

ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार बार अरज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर

Zaahir Hai Tera Haal

Ghalib na kar huzoor mein tu bar bar arz,
Zaahir hai tera haal sab un par kahe baghair !!


वो आये घर में  हमारे

यह जो हम हिज्र में दीवार-ओ -दर को देखते हैं
कभी सबा को कभी नामाबर को देखते हैं

वो आये घर में  हमारे , खुदा की कुदरत है
कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं

नज़र लगे न कहीं उसके दस्त-ओ -बाज़ू को
ये लोग क्यों मेरे ज़ख्म-ऐ -जिगर को देखते हैं

तेरे जवाहीर-ऐ- तरफ ऐ-कुलाह को क्या देखें
हम ओज-ऐ-ताला- ऐ-लाल-ओ-गुहार को देखते हैं

Wo Aaye Ghar Mein Hamaare

Ye jo ham hijr mein diivaar-o-dar ko dekhate hain
kabhii sabaa ko kabhii naamaabar ko dekhate hain

Wo aaye ghar mein hamaare, Khudaa kii kudarat hai
kabhii ham un ko kabhii apane ghar ko dekhate hain

nazar lage na kahii.n usake dast-o-baazuu ko
ye log kyon mere zaKhm-e-jigar ko dekhate hain

tere javaahiir-e- tarf-e-kulah ko kyaa dekhein
ham auj-e-taalaa- e-laal-o- guhar ko dekhate hain…..…

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shayarisms4lovers mar18 29 - Dil ka dard original shayari made by aacky | Latest hindi Shayari

Dil ka dard original shayari made by aacky | Latest hindi Shayari

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Dil ka dard original shayari made by aacky | Latest hindi Shayari video

dil ka dard dikana ni cahate, kisi ko kuch batana ni cahate,
dil me jo aag jal rahi hai, use bi bujana ni cahate,
smma ki sama ronak rahe, usko bi to mitana ni cahate,
bus jalte rahe unhi unki yaad me, jinhe hum bulana bi ni cahate,
jal jal ke katam ho jaaye caahe, par usko ruswa karna bi nahi cahate,
bus dard ko awaj bana ke, sab tak bus pahucaana cahate…………..

(from bottom of my heart)…..

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mere ko gam tha, to kya tere ko bi gam tha,
agar tha bi to kya mera gam tere gam se kam tha,
tha dono ko gam, na kisi ko jayada na kisi ko kam tha,
iska kya pata kisko kya gam tha par tha jo bhi wo dono ko kam tha,
jo bi gam tha usko sunke ankho ka hona tay nam tha,
mere ko gam tha, to kya tere ko bi gam the
mera gam kya tere gam se kam tha, mere ko gam tha, mere ko gam tha…..

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Jab apne hi karne lage dohke,
Fir kya karu roke,
Usse bi to kuch ni hoga,
Fir kya karu roke,
Fir bhi milenge dokhe,
Jab apne hi karne lage dokhe,
Fir kya karu roke……..
Fir kya karu roke…….
Fir kya karu roke.

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दुःख दे कर सवाल करते हो – उर्दू शायरी

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दुःख दे कर सवाल करते हो ,
तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो ..

Dukh Day Kar Sawaal Kartay ho,
Tum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho..

यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर ,
इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ ..

Yeah hum hi jantey hain judaai ke mod par,
Is dil ka jo bhi haal tujhe dekh kar hua..

क्या ज़रूरी है के हम हार के जीतें, ताबिश
इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है…

Kia Zaroori Hai Ke Hum Haar Ke Jeetien Tabish
Ishq Ka Khel Baraber Bhi To Ho Sakta Hai…

तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर ये आजमाइश न बार बार होगी
मैं जनता हूँ मुझे खबर है के कल फ़िज़ा खुशगवार होगी .

Tum Aj Hanste Ho Hans Lo Mujh Par Ye Ajamaish Naa Bar Bar Hogi
Main Janta Hun Mujhe Khabar Hai Ki Kal Faza Khushgawar Hogi.

लगा न दिल को क्या सूना नहीं तूने ,
जो कुछ के मीर का इस आशिक़ी ने हाल किया ..

Laga na dil ko kya sunaa nahin tu ne,
Jo kuch ke Meer ka is aashqi ne haal kiya..

इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है ,
यानी अपना ही मुबतला है इश्क़ .
इश्क़ है तर्ज़ -ओ -तौर इश्क़ के ताईं ,
कहीं बंदा कहीं खुदा है इश्क़ .

Ishq maashuq ishq aashiq hai,
Yaani apna hi mubtala hai ishq.
Ishq hai tarz-o-taur ishq ke taeen,
Kahin banda kahin Khuda hai ishq.

बस के दुस्बार है हर काम का आसान होना ,
आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसान होना ,

मेरे कत्ल के बाद उसने की जफ़ा से तौबा ,
हाय उस जोर पशेमान का पशेमान होना ,

है उस चारगिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब ,
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गिरेवान होना ..!!

Bus ke Dushwaar hai har kaam ka Asaan hona,
Admi ko bhi muyassar nahin insaaN hona,

ki Mere Qatal ke baad Usne jafa se Tauba,
Haye Us zoad pasheman ka pasheman hona,

Haif us chaar girah kaprhe ki Qismat ‘GHalib,
Jis ki Qismat main ho Ashiq ka GarebaN hona..!!

जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा
वफ़ा का काग़ज़ तो भीग जाएगा बदगुमानी की बारिशों में
खतों की बातें तो ख्वाब होंगी पयाम मुमकिन नहीं रहेगा
में जानती हूँ मुझे यक़ीन है अगर कभी तू मुझे भुला दे
तो तेरी आँखो में रौशनी का क़याम मुमकिन …

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shayarisms4lovers June18 176 - Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

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अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे “फराज़
क्यों तन्हा हो गए तेरे जाने के बाद

प्यार में एक ही मौसम है बहारों का  “फ़राज़
लोग कैसे मौसमो की तरह बदल जाते है

वहां से एक पानी की बूँद न निकल सकी
तमाम उम्र जिन आँखों को हम झील देखते रहे

जिसे भी चाहा है शिदद्त से चाहा है
सिलसिला टुटा नहीं दर्द की ज़ंज़ीर का

वो जो शख्स कहता रहा तू न मिला तो मर जाऊंगा
वो जिन्दा है यही बात किसी और से कहने के लिए

कुछ ऐसे हादसे भी ज़िन्दगी में होते है  “फ़राज़
इंसान तो बच जाता है पर ज़िंदा नहीं रहता

 

ऐसा डूबा हूँ तेरी याद के समंदर में
दिल का धड़कना भी अब तेरे कदमो की सदा लगती है

एक ही ज़ख्म नहीं सारा बदन ज़ख़्मी है
दर्द हैरान है की उठूँ तो कहाँ से उठूँ

तुम्हारी दुनिया में हम जैसे हज़ारों है
हम ही पागल थे की तुम को पा के इतराने लगे

तमाम उम्र मुझे टूटना बिखरना था  “फ़राज़
वो मेहरबाँ भी कहाँ तक समेटा मुझे

शायरी – अहमद फ़राज़

Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The “Fazar
Kyon Tanhaa Ho Gaye Tere Jane Ke Baad

Pyar Mein Ek Hi Mausaam Hai Bharoon Ka “Faraz
Log Kaise Mausmoo Ki Tarah Badal Jate Hai

Wahan Se Ek Pani Ki Boond Na Nikal Ski
Tamaam Umar Jin Ankhon Ko Hum Jheel Dekhte Rahe

Jiso Bhi Chaha Hai Chidaadt Se Chaha Hai
Silsila Tuta Nahi Dard Ki Zanzeer Ka

Wo Jo Shakhs Kehta Raha Tu Na Mila To Maar Jaunga
Wo Jinda Hai Yahi Baat Kisi Aur Se Kehne Ke Liye

Kush Aise Hadse Bhi Zindagi Mein Hote Hai “Fazar”
Insan To Bach Jata Hai Par Zindaa Nahi Rehta

Aissa Duba Hun Teri Yaad Ke Samandar Mein
Dil Ka Dhadkna Bhi Ab Tere Kadmoo Ki Sadaa Lagti Hai

Ek Hi Zakham Nahi Saara Badan Zakhmi Hai
Dard Hairan Hai Ki Uutun To Khan Se Uutun

Tumhari Duniya Mein Hum Jaise Hazaron Hai
Hum Hi Pagal The Ki Tum Ko Pa Ke Itrane Lage

Tamam Umar Mujhe Tootna Bikhrna Tha “Faraz
Wo Mehrban Bhi Kahan Tak Sameta Mujhe

Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe Hai “Fazar
Kyon Tanha Ho Gaye Tere Jane Ke Baad

Shayari By- : Ahmad Faraz

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shayarisms4lovers June18 20 - कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग

कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग

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राह -ऐ -जूनून

फ़ना न कर अपनी ज़िन्दगी को ऐ इंसान राह -ऐ -जूनून में
तब करेगा इबादत जब गुनाह करने की ताक़त न होगी

Raah-ae-Junoon

Fana na kar apni zindagi ko ay jawan raah-e-junoon main.
Tab karega ibadat jab gunnah karne ki taqat na hogi


क्यों बेवफा हो जाते हैं लोग

हँसते हैं यूँ ही हंस कर रुला जाते हैं लोग
मिलते हैं यूँ ही मिल कर जुदा हो जाते हैं लोग

पल दो पल की मोहब्बत को उम्र भर का साथ न समझना
मुहबत भी करते हैं और खफा भी हो जाते हैं लोग .

 

नसीब में प्यार न था जो मुझे मिला ही नहीं .
कर के इज़हार-ऐ-मोहब्बत बेपरवाह हो जाते हैं लोग .

अब किस से करें शिकवा अपनी किस्मत का .
कर के वादे वफ़ा क्यों बेवफा हो जाते हैं लोग

Kyon bewafaa ho jate hain log

Hanste hain yun hi hans kar rula jate hain log
Milte hain yun hi mil kar juda ho jate hain log

Pal do pal ki Mohabbat ko umar bhar ka sath na samjhna.
Muhabat bhi karte hain or khafaa bhi ho jate hain log.

Naseeb mein pyar na tha jo mujhe mila hi nhi.
Kar ke izhaar-ae-Mohabbat be parwaah ho jatey hain log.

Ab kis se karen Shikwa apni qismat ka.
Kar ke vaade wafaa kyon bewafaa ho jate hain log


जी -भर के देख लो

यूँ न मुझ को देख की तेरा दिल पिघल न जाये
मेरे आंसुओ से तेरा दामन  जल न जाये

वो मुझ से फिर मिला है आज ख़्वाबों में
ऐ खुदा कहीं मेरी नींद खुल न जाये

जी -भर के देख लो हम को तुम सनम
क्या पता फिर ज़िन्दगी की शाम ढल न जाए

Ji Bhar ke dekh lo

Yun na mujh ko dekh tera dil pighal na jaye
Mere aansuo se tera daman jal na jaye

Wo mujh se phir mila hai aaj khawabon mein
Ae khudaya kahin meri neend khul na jaye

Ji-bhar ke dekh lo hum ko tum sanam
Kya pata phir zindagi ki shaam dhal na jaaye…

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Mirza Ghalib – मिर्ज़ा ग़ालिब

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तू तो वो जालिम है

तू तो वो जालिम है जो दिल में रह कर भी मेरा न बन सका , ग़ालिब
और दिल वो काफिर, जो मुझ में रह कर भी तेरा हो गया..


हजारों ख्वाहिशें

हजारों ख्वाहिशें ऐसी की हर ख्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे अरमान , लेकिन फिर भी कम निकले..


खुदा की कुदरत

वो आये घर में हमारे , खुदा की कुदरत है
कभी हम उन्हें कभी अपने घर को देखते है..


जहाँ खुदा नहीं है

पीने दे शराब मस्जिद में बैठ के , ग़ालिब
या वो जगह बता जहाँ खुदा नहीं है..


यूं होता तो क्या होता

हुई मुद्दत के ग़ालिब मर गया, पर याद आती है
जो हर एक बात पे कहना की यूं होता तो क्या होता..


इश्क़ पर जोर नहीं

इश्क़ पर जोर नहीं , यह तो वो आतिश है,  ग़ालिब
के लगाये न लगे और बुझाए न बुझे..


आह को चाहिए एक उम्र

आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तेरी जुलफ के सर होने तक

हमने माना की तग़ाफ़ुल न करेंगे लेकिन
खाक हो जायगे हम तुम्हे खबर होने तक

आशिक़ी सब्र -तलब और तमना बेताब
दिल का  क्या रंग करू, खून-ऐ-जिगर होने तक…

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shayarisms4lovers mar18 205 - Top 20 Mirza Ghalib Shayari in Hindi & Urdu – Best Ghalib Shayari

Top 20 Mirza Ghalib Shayari in Hindi & Urdu – Best Ghalib Shayari

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Ghalib Shayari Are The Most Demanding Shayaris As Compared to other Urdu Shayari Writers.  Mirza Ghalib is great Shayari Writer. Mirza Ghalib writes All type Of Shayaris. Many People finding Bewafa Shayari By Ghalib, Love Shayari by Ghalib, Ghalib Shayari on Isaq or Many other types of Shayaris by Ghalib. So We Collect Top 20 Best Ghalib Shayari and Ghazals of Ghalib For you. Everyone Who Is Finding Ghalib Shayari In Urdu Or Hindi Can Read This Post Fluently And Can Share best Ghalib Shayaris With Any of Ghalib Shayari Lover Or Your Social Network.

We Hope You Like Collection Of Best Ghalib Shayaris.

Ghalib Shayari In Hindi

Kon kehtaa hai rooh kii Koi khawish nahi..
Jab sanse thii tab Koi azmaish nahii..
Toota hai armaan un awazon ke Liyee..
Jinke naseeb me jeene kii Koi numaish hi nahi…


** Ghalib Shayari Urdu **

Hum Aah Bhii Bharte Hai To Ho Jate Ha Badnamm…
Or Vo Katall Bhi Karte Hai Too Charcha Nahi Hotaa…


** Hindi Shayari by Ghalib **

Dard See Hath Naa Milate To Kya Krtee
Gum Ke Aanso Na Bahate To Kya Karte
Unhoone Kii Thi Roshni Kii Umeed Humse
Khud Ko Naa Jalate Toh Kya Krtee


** Poetry By Ghalib **

Jisne Haq Diyaa Mujhe Muskurane Kaa
Use Shouk Hai Abb Mujhe Rulaanee Kaa
Jisee Lehron Se Cheen Karr Laye The Kinaree Par
Intzaarr Hai Use Ab Meree Doob Jaane Ka


** Hindi Shayari by Ghalib **

Nashe M Log Sach Ugal Dete H,
Ishq M Log Tahjeeb Sikh Jaate H,
Koun Kahta H Ishq Galat H,
Ishq M Log Ek Dusre Par Mar Mitne Ko Raazi Ho Jaate H Galib.


** Ghalib Shayari Hindi **

Aasamaaan Pee Chaand Jal Raha Hoga,
Kisee Kaa Dil Machal Raha Hogaa,
Uff  Yee Mere Pairon Mein Chubhan Kaisee Hai,
Jaroor Voo Kaanton Parr Chal Raha Hoga.


** Shayari On Love by Ghalib in Hindi **

Tujhe Ho Naseeb Ghadaagri Tera
Dast E Naaz Draaz Ho
Yehi Baddua Hai Fitnagar Tera Husn
Sehra Nwaaz Ho
Rahe Farz E Gham Main Tu Mubtila
Na Shafaa Mile Na Dua Mile
Jo Kazaa Ki Woh Teri Aarzoo Thi
Khudaya Teri Umar Aur Draaz Ho


** Urdu Ghalib Shayari **

Es Qadr Mathe Ko Ragda Astane Yaar Par.
K Mit Gaya Likha Hua Bigdi Hui Taqder Ka.


** Shayari In Hindi Ghalib **

Nazar Ko Nazar Ki Nazar Se Na Dekho,
Nazar Ko Nazar …

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shayarisms4lovers mar18 199 - बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’ – Best Collection of “Ghalib”

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खुदा के वास्ते

खुदा के वास्ते पर्दा न रुख्सार से उठा ज़ालिम
कहीं ऐसा न हो जहाँ भी वही काफिर सनम निकले

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – जहाँ भी वही काफिर सनम निकले

Khuda ke Waaste

Khuda ke waaste parda na kaabe se uthaa zaalim
Kaheen aisa na ho yahan bhi wahi kaafir sanam nikle

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – yahan bhi wahi kaafir sanam nikle

वो निकले तो दिल निकले

ज़रा कर जोर सीने पर की तीर -ऐ-पुरसितम् निकले जो
वो निकले तो दिल निकले , जो दिल निकले तो दम निकले

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – वो निकले तो दिल निकले

Wo Nikle To Dil Nikle

Zara kar jor seene par ki teer-e-pursitam niklejo
Wo nikle to dil nikle, jo dil nikle to dam nikle

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – Wo nikle to dil nikle

कागज़ का लिबास

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले
अदल के तुम न हमे आस दिलाओ
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास

Kaagaz ka Libaas

Sabnay pahnaa tha baday shaukk se kaagaz ka libaas
Jis kadarr logg thay baarish me nahaanay walay
Adal ke tum na humay aas dilaaoo
Katl ho jatay hain, zanzeer hilanay walay

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – pahnaa tha baday shaukk se kaagaz ka libaas

शब-ओ-रोज़ तमाशा

बाजीचा-ऐ-अतफाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – शब-ओ-रोज़ तमाशा मेरे आगे

Shab-o-Roz Tamasha

Bazeecha-ae-atfaal hai duniya mere aage
hota hai shab-o-roz tamasha mere aage

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – hota hai shab-o-roz tamasha mere aage

बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब

फिर उसी बेवफा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब

Bekhudi Besabab Nahi “Ghalib”

Phir Usi Bewafa Pe Marte Hain
Phir Wahi Zindagi Hamari Hai
Bekhudi Besabab Nahi ‘ghalib’
Kuch To Hai Jis Ki Pardadari Hai

Mirza Ghalib Shayari – Urdu shayari – Bekhudi Besabab Nahi “Ghalib”

जन्नत की हकीकत

हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन
दिल के खुश रखने को “ग़ालिब” यह ख्याल अच्छा है

मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी – उर्दू शायरी – “ग़ालिब” यह ख्याल अच्छा है
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Love Shayari - Teri Awaaz Sunne Ko

सुना है तड़प रहा है वो मेरी वफ़ा के लिए – Wasi Shah Shayari

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मेरी वफ़ा

शरीक-ऐ-गम हुआ जो मेरे चोट खाने के बाद
खो दिया मैंने उस को पाने के बाद

मुझे नाज़ रहा फ़क़त उस अमल पर सदा
उसने मुझे अपना माना आज़माने के बाद

सुना है तड़प रहा है वो मेरी वफ़ा के लिए
शायद पछता रहा है मुझे ठुकराने के बाद

Meri Wafa

Shareek-ae-Gham hua jo mere chot khane ke baad
Kho diya maine us ko pane ke baad

Muje naaz raha faqat us amal par sada
Usne muje apna mana azmane ke baad

Suna hai tadap raha hai wo meri wafa ke liye
Shayad pachta raha hai mujhe thukhrane ke baad


इलज़ाम बेवफाई का

आज यूं ही सर-ऐ-राह उस से नज़र जा मिली “वासी”
वो रो दिया मुझसे नज़र मिलाने के बाद
किस किस को दूँ मैं इलज़ाम बेवफाई का
हर कोई छोड़ गया मुझको अपनाने के बाद .

ilzaam BEWAFAI ka

Aj youn he Sar-ae-Raah us se nazar ja mili “WASI”
Wo ro Diya mujhse nazar milane ke baad
Kis kis ko doon ilzaam BEWAFAI ka
Har koi chor gaya mujko apnane ke baad.


बिखर जाने दो

मैं यूँ मिलू तुझसे के तेरा लिबास बन जाऊं
तुझे बना के समंदर और खुद प्यास बन जाऊं
अपने पहलूँ में मुझे टूट के बिखर जाने दो
कल को शायद मुमकिन नहीं के मैं तुमको पाऊँ

Bikhar Jane Do

Mein Yun millon Tujhse Ke Tera Libaas Ban Jaon
Tujhe bna Ke Samandar Aur Khud Pyaas Ban Jaon
Apne Pehloon Mein Mujhe Toot Ke Bikhar Jane Do
Kal Ko Shayad Mumkin Nahi Ke Mein Tumko Paon…

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Best shayari of Ghalib (Ghalib's Sher in Hindi)

Best shayari of Ghalib (Ghalib’s Sher in Hindi)

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Kee mire qatl ke baad us ne jafaa se tauba
haaye us zood-pasheemaan ka pasheemaan hona

Koi ummeed bar nahi aati
koi soorat nazar nahi aati

Kaun hai jo nahi hai haazat-mand
kis kee haazat ravaa kare koi

की माइर क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा
हाए उस ज़ूद-पाशीमाँ का पाशीमाँ होना

कोई उम्मीद बार नही आती
कोई सूरत नज़र नही आती

कौन है जो नही है हाज़त-मंद
किस की हाज़त रवा करे कोई

*******

‘Ghalib’ chhuti sharaab par ab bhi kabhi-kabhi
peeta huun roz-e-abra o shab-e-maahtaab mein

‘ग़ालिब’ च्छुटी शराब पर अब भी कभी-कभी
पीटा हुउँ रोज़-ए-आबरा ओ शब-ए-माहताब में

*******

‘Ghalib’ bura na maan jo vaaiz bura kahe
aisa bhi koi hai ki sab achchha kahen jise

‘ग़ालिब’ बुरा ना मान जो वाइज़ बुरा कहे
ऐसा भी कोई है की सब अच्च्छा कहें जिसे

*******

Jab ki tujh bin nahi koi maujood
fir ye hangama ai khuda kya hai

जब की तुझ बिन नही कोई मौजूद
फिर ये हंगामा आई खुदा क्या है

*******

Jaan tum par nisaar karta huun
mai nahi jaanta dua kya hai

जान तुम पर निसार करता हुउँ
मई नही जानता दुआ क्या है

*******

Jee dhoondhta hai fir vahi fursat ke raat din
baithe rahen tasavvur-e-jaanaan kiye huye

जी ढूंढता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन
बैठे रहें तसवउर-ए-जानां किए हुए

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Tum jaano tum ko gair se jo rasm-o-raah ho
mujh ko bhi poochhte raho to kya gunaah ho

तुम जानो तुम को गैर से जो रस्म-ओ-राह हो
मुझ को भी पूचहते रहो तो क्या गुनाह हो

*******

Tire vaade par jiye ham to ye jaan jhoot jaana
ki khushi se mar na jaate agar etibaar hota

टाइयर वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
की खुशी से मार ना जाते अगर एटिबार होता

*******

Thee khabar garm ki ‘Ghalib’ ke udenge purje
dekhne ham bhi gaye the pa tamasha na hua

थी खबर गर्म की ‘ग़ालिब’ के उड़ेंगे पुर्ज़े
देखने हम भी गये थे पा तमाशा ना हुआ

*******

De mujh ko shikaayat kee ijaazat ki sitamgar
kuchh tujh ko mazaa bhi mire aazaar mein aave

दे मुझ को शिकायत की इजाज़त की सिटमगर
कुच्छ तुझ को मज़ा भी माइर आज़ार में आवे…

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Ghalib's Sher in Hindi (Mirza Ghalib famous shayari)

Ghalib’s Sher in Hindi (Mirza Ghalib famous shayari)

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Apni gali men mujhko na kar dafn baad-e-qatl
mere pate se khalq ko kyuun tera ghar mile

अपनी गली में मुझको ना कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल
मेरे पाते से कॉल्क को क्यूउन तेरा घर मिले

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Aaina dekh apna sa munh le ke rah gaye
saahab ko dil na dene pe kitna guruur tha

आईना देख अपना सा मुँह ले के रह गये
साहब को दिल ना देने पे कितना गुरुुर् था

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Aaye hai be-kasi-e-ishq pe rona ‘Ghalib’
kis ke ghar jaayega sailaab-e-balaa mere baad

आए है बे-कसी-ए-इश्क़ पे रोना ‘ग़ालिब’
किस के घर जाएगा सैलाब-ए-बाला मेरे बाद

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Aage aati thi haal-e-dil pe hansi
ab kisi baat par nahi aati

आयेज आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी
अब किसी बात पर नही आती

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Aata hai daagh-e-hasrat-e-dil ka shumaar yaad
mujh se mire gunah ka hisaab ai khuda na maang

आता है दाघ-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद
मुझ से माइर गुनाह का हिसाब आई खुदा ना माँग

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Aashiq hoon pe maashooq-farebi hai mira kaam
majnuun ko bura kahti hai laila mere aage

आशिक़ हूँ पे माशूक़-फरेबी है मीरा काम
मजनूउन को बुरा कहती है लैला मेरे आयेज

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Ishq ne ‘Ghalib’ nikamma kar diya
varna ham bhi aadmi the kaam ke

इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकँमा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

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Ishq par zor nahi hai ye vo aatash ‘Ghalib’
ki lagaaye na lage aur bujhaaye na bane

इश्क़ पर ज़ोर नही है ये वो आताश ‘ग़ालिब’
की लगाए ना लगे और बुझाए ना बने

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Is nazaaqat ka bura ho vo bhale hain to kya
haath aave to unhe haath lagaaye na bane

इस नज़ाक़त का बुरा हो वो भले हैं तो क्या
हाथ आवे तो उन्हे हाथ लगाए ना बने

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Is saadgi pe kaun na mar jaaye ai khuda
ladte hain aur haath mein talwaar bhi nahi

इस सादगी पे कौन ना मार जाए आई खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नही

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Udhar vo bad-gumani hai idhar ye naa-tavaani hai
na poochha jaaye hai us se na bola jaaye hai mujh se

उधर वो बाद-गुमानि है इधर ये ना-तवानी है
ना पूचछा जाए है उस से ना बोला जाए है मुझ से

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Un ke dekhe se jo aa jaati hai munh pe raunak
vo samajhte hain ki beemar ka haal achchha hai

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पे रौनक
वो समझते हैं की बीमार का …

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shayarisms4lovers mar18 218 - Mirza Ghalib - Urdu Shayari -1

Mirza Ghalib – Urdu Shayari -1

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Mirza Ghalib – Qataa kijiye na taluq hum se..

Qataa kijiye na taluq hum se,
Kuch nahi hai to adaavat hi sahi..

Mirza Ghalib – Rahi na taaqat-e-guftaar aur agar ho bhi..

Rahi na taaqat-e-guftaar aur agar ho bhi,
To kis umeed pe kahiye ke arzuu kya hai..

Mirza Ghalib – Baad marne ke mere ghar se yeh samaan niklaa….

Chand tasaveer-e-butaan, chand haseenon ke khatoot*.
Baad marne ke mere ghar se yeh samaan niklaa..

(khatoor;letters)

Mirza Ghalib – Meri kismat mein gham gar itna tha..

Meri kismat mein gham gar itna tha,
Dil bhi yaa rab kayi diye hotay.
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Mirza Ghalib – Na tha kuch to khuda tha, kuch na hota to khuda hota..

Na tha kuch to khuda tha, kuch na hota to khuda hota,
Diboyaa mujhe ko hone ne, na hota mein to kya hota..

Mirza Ghalib – Ronay se aur ishq mein be-baak ho gaye..

Ronay se aur ishq mein be-baak ho gaye,
Dhoye gaye hum itney ke bass paak ho gaye..

Mirza Ghalib – Rahiye ab aesi jagha chal kar jahan koi na ho..

Rahiye ab aesi jagha chal kar jahan koi na ho,
Hum-sukhan koi na ho, aur hum-zubaan koi na ho,

Parriye gar beemar to koi na ho teemar’daaar*,
Aur agar mar jaayiye to noha-khuwaa’n* koi na ho..

(teemar’daaar;caretaker, noha-khuwaa’n;noha reciter)

Mirza Ghalib – Ishq per zor nahin, yeh woh aatish..

Ishq per zor nahin, yeh woh aatish Ghalib,
Ke lagaaye na lage aur bujhaaye na bujhayy..

Mirza Ghalib – Be-Khudi Be-Sabab Nahi’n ‘Ghalib’..

Be-Khudi Be-Sabab Nahi’n ‘Ghalib’,
Kuchh To Hai Jis Ki Parda-Daari Hai…

Mirza Ghalib – Khulta kisi pay kya mery dil ka muamla..

Khulta kisi pay kya mery dil ka muamla,
Shairon k intekhab nay ruswa kia mujhy..!!

Mirza Ghalib – Toote hain sheesha dil haaye dil itne

Toote hain sheesha dil haaye dil itne ke ehl-e-dard,
Rakhte hain paaon khaak par sau baar dekh kar..

Mirza Ghalib – Ye na thi hamari kismat ke visaal-e-yaar hota..

Ye na thi hamari kismat ke visaal-e-yaar hota,
Agar aur jeetey rehtey, yehi intezaar hota,

Tere vaade pr jiye hum to yeh jaan jhoot jaana,
Ke khushi se mar na jaate agar aitbaar hota,

Teri naazuki se jana ke bandha tha ehd-boda,
Kabhi tu na torr sakta agar ustuvaar hota,

Koi mere dil se puuche tere teer-e-neem-kash ko,
Yeh khalish kahaan se hoti jo jigar ke paar hota,

Yeh kahan ki dosti

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Mirza Ghalib – bazicha-e-atfal hai duniya mere age

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bazicha-e-atfal hai duniya mere age
hota hai shab-o-roz tamasha mere age

ik khel hai aurang-e-suleman mere nazdik
ik bat hai ejaz-e-masiha mere age

juz nam nahi surat-e-alam mujhe manzur
juz waham nahi hasti-e-ashiya mere age

hota hai nihan gard mein sehra mere hote
ghista hai jabin khak pe dariya mere age

mat puch k kya hal hai mera tere piche
tu dekh k kya rang hai tera mere age

sach kahte ho khudbin-o-khudara hun na kyon hun
baitha hai but-e-aina sima mere age

phir dekhiye andaz-e-gulafshani-e-guftar
rakh de koi paimana-e-sahba mere age

nafrat ka guman guzre hai main rashk se guzra
kyon kar kahun lo nam na us ka mere age

iman mujhe rok hai jo khinche hai mujhe kufr
kaba mere piche hai kalisa mere age

ashiq hun pe mashuqfarebi hai mera kam
majnun ko bura kahti hai laila mere age

khush hote hain par wasl mein yun mar nahi jate
ai shab-e-hijaran ki tamanna mere age

hai maujzan ik qulzum-e-khun kash! yahi ho
ata hai abhi dekhiye kya-kya mere age

go hath ko jumbish nahi ankhon mein to dam hai
rahne do abhi sagar-o-mina mere age

hampesha-o-hammasharab-o-hamraz hai mera
?ghalib? ko bura kyon kaho acha mere age..…

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shayarisms4lovers mar18 114 - Mirza Ghalib - bas k dushwar hai har kam ka asan hona

Mirza Ghalib – bas k dushwar hai har kam ka asan hona

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bas k dushwar hai har kam ka asan hona
admi ko bhi mayassar nahi insan hona

giriya chahe hai kharabi mere kashane ki
dar-o-diwar se tapak hai bayaban hona

wa-e-diwangi-e-shauq k har dam mujh ko
ap jana udhar aur ap hi hairan hona

jalwa azbas k taqaza-e-nigah karta hai
jauhar-e-aina bhi chahe hai mizagan hona

ishrat-e-qatlgah-e-ahal-e-tamanna mat puch
id-e-nazzara hai shamshir ka uriyan hona

le gaye khak mein ham dag-e-tamanna-e-nishat
tu ho aur ap basadrang-e-gulistan hona

ishrat-e-para-e-dil, zakhm-e-tamannakhana
lazzat-e-rish-e-jigar garq-e-namakdan hona

ki mere qatl k bad us ne jafa se tauba
haye us zodpasheman ka pasheman hona

haif us char girah kapre ki qismat ?ghalib?
jis ki qismat mein ho ashiq ka gareban hona……

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