shayarisms4lovers June18 60 - Lost in Between

Lost in Between

By SC Under a starry night by the sea looking into shimmering waters I am mesmerized by its colors! Sparkling diamonds embedded on blue mantle emerald waves broken by pure pearls of foam From above a canopy of lights covers me in wonderment as far as my eyes could see! “There” I am lost in […]

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shayarisms4lovers June18 199 - In Her Eyes

In Her Eyes

By JG I see the potential for forever Subtle glimpses of lifetimes spent together I see the heart of a mother Tempered with the mind of a queen I see an intelligent, competent conscious woman Made for nothing less than a king Strength and vulnerability are also there Along with passion and compassion And if […]

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shayarisms4lovers June18 199 - आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ

आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ

आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ चूल्हा नहीं जलाए या बस्ती ही जल गई कुच्छ रोज़ हो गये हैं अब उठता नहीं धुआँ आँखों से पोंछने से लगा आँच का पता यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ आँखों से आँसुओं के मरासिम […]

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shayarisms4lovers June18 199 - काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी

काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी

काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी दिल दर्द के मौसम में रोया भी हंसा भी आने का सबब याद ना जाने की खबर है वो दिल में रहा और उसे तोड़ गया भी हर एक से मंज़िल का पता पूछ रहा है गुमराह मेरे साथ हुआ रहनुमा भी ‘गुमनाम’ कभी अपनों से जो […]

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shayarisms4lovers June18 199 - दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई

दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई

दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई जैसे एहसान उतरता है कोई आईना देख के तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई पक गया है शज़र पे फल शायद फिर से पत्थर उच्छालता है कोई फिर नज़र में लहू के छिन्टे हैं तुम को शायद मुघालता है कोई देर से गूंजतें हैं सन्नाटे […]

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shayarisms4lovers June18 276 - ज़माने ने मुझे चोट दी है – दुःख व् गहराई भरी कविता

ज़माने ने मुझे चोट दी है – दुःख व् गहराई भरी कविता

चले हैं लोग मैं रस्ता हुआ हूं मुद्दत से यहीं ठहरा हुआ हूं ज़माने ने मुझे जब चोट दी है मैं जिंदा था नहीं जिंदा हुआ हूं मैं पहले से कभी ऐसा नहीं था मैं तुमको देखकर प्यारा हुआ हूं मैं कागज सा न फट जाऊं ए लोगो उठाओ ना मुझे भीगा हुआ हूं मेरी […]

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shayarisms4lovers June18 199 - रस्म-ए-उलफत सिखा गया कोई

रस्म-ए-उलफत सिखा गया कोई

रस्म-ए-उलफत सिखा गया कोई दिल की दुनिया पे छा गया कोई ता क़यामत किसी तरह ना बुझे आग ऐसी लगा गया कोई दिल की दुनिया उजाड़ सी क्यूँ है क्या यहाँ से चला गया कोई वक़्त-ए-रुख्ह्सत गले लगा कर “दाग” हँसते हँसते रुला गया कोई -दाग देहलवी

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poppy plant nature macro 65644 - ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा

ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा

ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा मौत जब हम को आवाज़ देगी घर से बाहर निकलना पड़ेगा ढेर मिट्टि का हर आदमी है बाद मरने के होना यही है या ज़मीनों में तुरबत बनेंगे या चिताओं पे जलना पड़ेगा रात के बाद होगा सवेरा देखना है अगर तुम को […]

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