गोल्डन गर्ल हिमा दास का जीवन परिचय और सफ़लता की कहानी | Hima Das Biography & Success Story

Hima Das Biography : भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के एक छोटे से गाँव की १९ वर्ष की लड़की का नाम आज हर किसी की जुबान पर है. उसने कारनामा ही ऐसा कर दिखाया है, जो आज तक कोई भारतीय दिग्गज एथलीट नहीं कर पाया है.

मात्र १८ वर्ष की उम्र में World U-20 Championship 2018 में गोल्ड मैडल हासिल करने वाली पहली भारतीय एथलीट बनने के बाद उसने वर्ष २०१९ में १ माह के भीतर ५ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में गोल्ड मैडल जीतकर अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज कर दिया है.  

हम बात कर रहे हैं ‘Golden Girl‘ और ‘Dhing Express’ के नाम से मशहूर sprint runner हिमा दास (Hima Das) की. हिमा दास ने सीमित संसाधनों के साथ अपनी कड़ी मेहनत और जूनून से जो सफ़लता प्राप्त की है, वो काबिले तारीफ है. लेकिन सफ़लता की ये राह इतनी भी आसान नहीं थी. आइये विस्तार से जानते हैं – हिमा दास के जीवन, उनके संघर्ष और सफ़लता के बारे में :

Hima Das Biography In Hindi
Hima Das Biography In Hindi | Image Source – rediff.com

हिमा दास का संक्षिप्त परिचय | Hima Das Short Bio 

Name Hima Das हिमा दास 
Nick NameDhing Express, Golden Girl
Birth Date9 January 2000
Birth Place Dhing, Nagaon, Assam
NationalityIndian 
Father’s NameRonjit Das
Mother’s NameJonali Das
CoachNipon Das
Height167 cm (5 Ft. 6 Inch)
Weight52 Kg
OccupationAthlete, Sprint Runner

हिमा दास का जन्म और प्रारंभिक जीवन

हिमा दास (Hima Das) का जन्म ९ जनवरी २००० को असम (Assam) के नगाँव (Nagaon) जिले के ढींग (Dhing) कस्बे के कांधूलिमारी (Kandhulimari Village) नामक गाँव में हुआ था. ढींग गाँव की होने के कारण लोग उन्हें ‘ढींग एक्सप्रेस’ (Dhing Express) के नाम से भी पुकारते हैं.

हिमा के पिता का नाम रणजीत दास (Ronjit Das) है, जो एक कृषक है. वे मुख्य रूप से चांवल की कृषि करते हैं. माता जोनाली दास (Jonali Das) है, जो घर संभालने के साथ ही कृषि के कार्यों में हिमा के पिता का हाथ बंटाती है.

६ भाई-बहनों में हिमा सबसे छोटी है. १७ सदस्यों का उनका एक बड़ा परिवार है. परिवार का पूरा खर्च कृषि से होने वाली आमदनी से चलता था. ज़ाहिर है, कृषि की सीमित आय से इतने बड़े परिवार का पालन-पोषण इतना आसान नहीं था.…

Continue Reading

स्कूल में दो बार फेल होने वाले ने कैसे बनाई देश की सबसे बड़ी फ़ूड डिलीवरी कंपनी | Zomato Success Story

Deepinder Goyal Zomato Success Story In Hindi
Zomato Success Story In Hindi | Image Source : hindustimes.com

Deepinder Goyal Zomato Success Story In Hindi : जब भी किसी रेस्टोरेंट का खाना खाने का मन करे, तो हम मोबाइल उठाकर online food order कर देते हैं और कुछ ही समय में हमारा मनपसंद खाना हमारे घर पर होता है. सब कुछ कितना आसान है, क्यों? क्योंकि Zomato है ना!

जीहाँ दोस्तों आज के दौर में घर बैठे food order करना बहुत आसान हो गया है और ऐसा होने के पीछे Zomato का बहुत बड़ा हाथ है. अपने ऑफिस के कैफेटेरिया में ऑफिस के स्टाफ की समस्या का समाधान करने का एक छोटा सा आईडिया दीपेंद्र गोयल (Deepender Goyal) के दिमाग में आया और उस आईडिया ने zomato media pvt ltd company को जन्म दे दिया. इसमें उनके साथी रहे co-founder पंकज चड्ढा (Pankaj Chaddha).

दीपेंद्र गोयल (Deepinder Goyal) ने किस तरह zomato को सफ़लता की बुलंदियों तक पहुँचाया, आइये जानते हैं zomato success story में :

दीपेंद्र गोयल का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

दीपेंद्र गोयल का जन्म पंजाब (Panjab) के मुत्तसर (Muktsar) जिले में हुआ था. उनके माता और पिता दोनों ही शिक्षक थे. लेकिन शिक्षक परिवार से संबंधित होने के बावजूद दीपेंद्र कक्षा छटवीं तक पढ़ाई के प्रति गंभीर नहीं थे. छटवीं कक्षा में फेल होने के बाद उनकी आँखें खुली और उन्होंने पढ़ाई के प्रति अपने नज़रिए में परिवर्तन किया. हालांकि राह इतनी भी आसान नहीं थी.

आठवीं में शिक्षक के द्वारा सारे उत्तर बताये जाने के कारण वे कक्षा में प्रथम आ गए. ९वीं और १० वीं में उनका रिजल्ट अच्छा रहा, जिससे उनके आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी हुई. लेकिन १०वीं के बाद चंडीगढ़ के डीएवी स्कूल में दाखिला लेने के बाद वे फिर से फेल हो गए. जैसे-तैसे उन्होंने अपना आत्मविश्वास बटोरा और दिल लगाकर पढ़ाई करने लगे. फलस्वरूप १२वीं के बाद उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर आईआईटी दिल्ली में प्रवेश ले लिया.

२००५ में IIT Delhi से दीपेंद्र ने ‘मैथ्स एंड कंप्यूटिंग’ में इंटीग्रेटेड एमटेक (Integrated M. Tech. In Mathematics And Computing) की डिग्री हासिल की. एमटेक की डिग्री प्राप्त करने के बाद उन्हें Bain & Company में consultant की जॉब मिल गई. २००७ में उन्होंने कंचन जोशी से शादी कर ली, जो आईआईटी दिल्ली में उनकी सहपाठी थीं.

Foodiebay.com की शुरूवात

अच्छी जॉब के बाद भी दीपेंद्र संतुष्ट नहीं थे. उनका दिमाग हर वक़्त business ideas के बारे में सोचा करता था. एक दिन उन्हें अपने ऑफिस के …

Continue Reading

लोगों के बाल काटने वाला नाई कैसे बना अरबपति, जानिए रमेश बाबू के बिलियनर बार्बर बनने की कहानी

Ramesh Babu Billionaire Barber Inspiring Story In Hindi : कभी एक वक़्त के खाने को तरसने वाले की किस्मत यूं पलटी कि आज वह ३.५ करोड़ की कार Rolls Royce में घूमता है, ४०० से अधिक कारों का मालिक है और पूरे देश में ‘Billionaire Barber’ के नाम से मशहूर है.

ये कहानी है ‘Barber’ से ‘Billionaire Barber’ तक का सफ़र तय करने वाले बैंगलोर के रमेश बाबू (Ramesh Babu) की. गरीबी की चादर में लिपटे उनका बचपन बीता. लेकिन उन्होंने खुद को कभी उस चादर के दायरे में नहीं समेटा. बल्कि अपनी आँखों में सपने सजाये और उन सपनों को अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया. आज वे लोगों के लिए एक प्रेरणास्रोत बन गए हैं.

आइये जानते हैं रमेश बाबू (Ramesh Babu) की सफ़लता की पूरी कहानी :

Ramesh Babu Billionaire Barber Inspiring Story In Hindi
Ramesh Babu Billionaire Barber Inspiring Story | Image Source : economictimes.indiatimes.com

रमेश बाबू (Ramesh Babu) का जन्म कर्नाटक (Karnataka) राज्य के बैंगलोर (Bangalore) शहर में एक गरीब परिवार में हुआ था. पिता नाई (Barber) थे. ब्रिगेड रोड में उनका छोटा सा सैलून (Salon) था. लोगों के बाल काटकर जो आमदनी होती, उससे परिवार की गुजर-बसर होती थी.

आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवार पर दु:खों का पहाड़ टूट पड़ा, जब रमेश बाबू के पिता का देहांत हो गया. उस समय रमेश बाबू की उम्र मात्र ७ वर्ष थी.

पिता के जाने के बाद घर चलाने की ज़िम्मेदारी रमेश बाबू की माँ के  कंधों पर आ गई. वे लोगों के घरों में बर्तन मांजने, साफ़-सफाई और खाना बनाने का काम करने लगी.

सैलून का काम रमेश के चाचा को सौंप दिया गया. सैलून व्यवसाय से होने वाली कमाई में से ५ रुपये रमेश के चाचा उनकी माँ को दिया करते थे. वह एक कठिन दौर था. उनके परिवार को एक वक़्त का खाना भी बड़ी मुश्किल से नसीब हो पाता था.

मिडिल स्कूल में आने के बाद रमेश बाबू माँ का हाथ बंटाने के उद्देश्य से छोटे-मोटे काम करने लगे. सुबह उठकर वे अखबार बांटते, घरों में दूध की सप्लाई करते थे. इसके अलावा भी जो काम मिलता, वे करते. ताकि कुछ पैसे कमा कर माँ को दे सके.   

किसी तरह उन्होंने १०वीं की पढ़ाई पूरी की. जब वे ११वीं कक्षा में थे, तब एक दिन उनकी माँ का किसी बात पर उनके चाचा से झगड़ा हो गया और उनके चाचा के उन्हें रोज़ …

Continue Reading

पापड़ बेचने से लेकर ‘सुपर ३०’ तक का सफ़र, “आनंद कुमार” की सफ़लता की प्रेरणादायक कहानी

Anand Kumar Super 30 Biography & Success Story In Hindi : भारत में IIT जैसे टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने का सपना कई छात्र-छात्रायें देखते है. ऐसे में उनका मार्गदर्शक बनती हैं – कोचिंग संस्थायें. लेकिन कोचिंग संस्थाओं की भारी-भरकम फीस वहन कर पाना हर छात्र के लिए संभव नहीं हो पाता. जो आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के छात्र हैं, वे यह मार्गदर्शन प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं और कहीं न कहीं यह उनके इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में सफ़लता प्राप्ति में अडंगा बन जाता है.

ऐसे में आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के लिए मसीहा बनाकर उभरे हैं – आनंद कुमार (Anand Kumar), जो अपने सुपर ३० संस्थान में ऐसे छात्रों को मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं और उनकी न सिर्फ टॉप इंजीनियरिंग कॉलेज (Top Engineer College) में प्रवेश का मार्ग, बल्कि उज्जवल भविष्य का मार्ग भी प्रशस्त कर रहे हैं.

आनंद कुमार एक गणितज्ञ, शिक्षाविद और स्तंभकार हैं, जिन्होंने आर्थिक विपन्नता का जीवन करीब से से देखा है. उनका संपूर्ण बचपन अभावों में व्यतीत हुआ. लेकिन उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा संबल माना. कैम्ब्रिज युनिवेर्सिटी का कॉल लैटर हाथ में होने के बाद भी आर्थिक तंगी के कारण वे कैम्ब्रिज न जा सके. गली-गली पापड़ बेचने को मजबूर हुए. लेकिन आज वे इस मुकाम पर हैं, जहाँ वे समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर छात्रों के शैक्षिक उत्थान की दिशा सराहनीय कार्य कर रहे हैं.

आनंद कुमार के कार्यों को देश-विदेश में सराहना प्राप्त हुई है और उन्हें कई पुरुस्कारों से नवाज़ा गया है. वे विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा श्रोत है. उनके प्रेरणादायक जीवन पर आधारित हिंदी फिल्म ‘सुपर ३०’ (Super 30) का निर्माण भी किया गया है. आइये विस्तार से जानते हैं आनंद कुमार (Anand Kumar) और उनके संस्थान  ‘सुपर ३०‘ (Super 30) के बारे में :      

Anand Kumar Super 30 Biography & Success Story In Hindi
Anand Kumar Super 30 Biography & Success Story In Hindi

 आनंद कुमार का संक्षिप्त परिचय (Short Biography Anand Kumar) 

नाम  आनंद कुमार  (Anand Kumar)
जन्म १ जनवरी १९७३ 
जन्म स्थान पटना. बिहार (Patna, Bihar, India)
माता जयंती देवी 
भाई प्रणव कुमार 
पत्नि ऋतु रश्मि 
बेटा जगत कुमार 
कार्य शिक्षक, गणितज्ञ
उपलब्धि सुपर ३० संस्थान के द्वारा आर्थिक रूप से कमज़ोर विद्यार्थियों को IIT की निशुल्क कोचिंग,  हर वर्ष २६ से ३० बच्चों का चयन. इस सराहनीय कार्य के लिए कई पुरुस्कार और सम्मान से नवाज़ा
Continue Reading

१२ साल डिप्रेशन से घिरा व्यक्ति कैसे ६० साल की उम्र में बना सुपर मॉडल? (Model Dinesh Mohan Success Story)

Dinesh Mohan Model Inspirational Story In Hindi : मॉडल और एक्टर दिनेश मोहन (Dinesh Mohan) को ६० साल का जवान कहा जाये, तो गलत नहीं होगा. इस उम्र में भी उनकी फ़िटनेस और एनर्जी युवाओं को मात देती नज़र आती है.

देश के नामी-गिरामी फैशन डिज़ाइनर्स के लिए रैंप वाक (Ramp Walk) और मॉडलिंग (Modeling) कर चुके दिनेश मोहन (Dinesh Mohan Model)को देख हर कोई यही सोचता है कि ये बंदा चकाचौंध की दुनिया का ही बाशिंदा रहा होगा. लेकिन उनके जीवन की गहराई में उतरकर झांकने पर एक अलग ही तस्वीर नज़र आती हैं. 

फैशन जगत की चकाचौंध में रहकर भी दिनेश मोहन अपनी जिंदगी के वे साल नहीं भूलते, जो उन्होंने अंधेरे में गुजारे. १२ साल एक लंबा अरसा होता है. १२ साल तक डिप्रेशन के अंधेरे में रहने वाले दिनेश ने फैशन की जगमगाती दुनिया का जो सफ़र तय किया है, वो वास्तव में प्रेरणादायक है.

Dinesh Mohan Model Inspirational Story In Hindi
Dinesh Mohan Model Inspirational Story : Image Source : thehindu.com

आइये जानते हैं १२ साल तक डिप्रेशन (Depression) के शिकार रहे दिनेश मोहन की ६० की उम्र में सुपर मॉडल बनने की प्रेरणादायक कहानी (Motivational Story) :

दिनेश मोहन (Dinesh Mohan) की जिंदगी एक आम व्यक्ति की तरह ही थी. पढ़ाई पूरी कर अच्छी नौकरी, पैसा, शादी और व्यवस्थित जिंदगी. दिनेश ने पढ़ाई पूरी कर एक अच्छी सरकारी नौकरी हासिल की. वे चंडीगढ़ (Chandigarh) में स्वास्थ्य विभाग में प्रथम श्रेणी ऑफिसर थे.

माता-पिता ने अच्छी लड़की देख शादी कर दी और बस यहीं से दिनेश की जिंदगी बदल गई. एक बेहतर शादी-शुदा जिंदगी की उनकी चाहत पूरी नहीं हो पाई. उनके और उनकी पत्नि के विचारों में अक्सर टकराव होता रहा, जो कहीं न कहीं पारिवारिक कलह का कारण बना. इसका असर यह हुआ कि दिनेश तनाव में रहने लगे.

१० साल तक पारिवारिक तनावपूर्ण वातावरण में रहने के बाद आखिरकार उन्होंने अपनी पत्नि से तलाक लेने का फ़ैसला किया. तलाक के बाद उनके बेटे की कस्टडी उनकी पत्नि को मिली और वे अकेले रह गए.

कुछ अरसा गुजरा और एक रोज़ उनका बेटा उनके पास वापस आ गया. कारण, उनकी पत्नि का देहांत. बेटे के मन में पिता के प्रति कड़वाहट भरी हुई थी, जो धीरे-धीरे ही सही पिघलने लगी. दिनेश भी अपने बेटे के साथ ख़ुश रहने लगे.

लेकिन शायद ये ख़ुशी उनकी किस्मत में नहीं थी. होनी को कुछ और ही मंजूर …

Continue Reading

सड़क किनारे ठेले में अंडे बेचने वाला कैसे बना उदयपुर का ‘एग किंग’? | Egg king Of Udaipur Motivational Success Story In Hindi

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

Egg King Udaipur Motivational Success Story In Hindi : जब हौसला उड़ान भरता है, तो अंबर भी आपको सलाम करता था. लगता है ये वाक्य जय कुमार वलेचा (Jay Kumar Valecha) के लिए ही बना है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों को अपने हौसलों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया.

बचपन तो मानो उन्होंने देखा ही नहीं. परिस्थियाँ ऐसे बनी कि १२ वर्ष की छोटी उम्र में बीमार पिता, माता, भाई-बहनों और पूरे परिवार का दायित्व अपने कंधों पर उठाने के लिए विवश हो गए.

उस समय जय कुमार के नन्हें कंधे भले ही उतने मजबूत ना थे, पर सपने बड़े थे, हौसले बुलंद थे और जिंदगी में कुछ बड़ा कर गुजरने का ज़ज्बा दिल में भरा पड़ा  था. उसी ज़ज़्बे के बदौलत उदयपुर (Udaipur) में सड़क किनारे ठेले पर अंडा भुर्जी बेचने वाला मामूली सा लड़का जय कुमार वलेचा आज उदयपुर में ‘उदयपुर का एग किंग’ (Egg King Udaipur) के नाम से मशहूर है.

कैसे संभव हो सका ये? क्या सब कुछ इतना आसान था? आखिर ऐसा क्या किया जय कुमार ने कि कभी सड़कों की धूल फांकने वाला आज लाखों की गाड़ी में घूमता है. ये जानने के लिए पढ़िये motivational success story of Egg King of Udaipur :

Egg King Udaipur | Image Source : udaipurbeats.com

ये Story है – Jay Kumar Valecha (जय कुमार वलेचा) की, जिन्हें गरीबी विरासत में मिली थी. पिता उदयपुर में सड़क किनारे ठेले पर अंडा भुर्जी (anda bhurji), आमलेट (omelette) और उबले अंडे (boiled egg) बेचा करते थे. कमाई इतनी नहीं थी कि घर की आर्थिक स्थिति संबल हो पाती.

घर की बिगड़ती आर्थिक स्थिति देख जय कुमार (Jay Kuar Valecha) ने चौथी कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया और अपने पिता के धंधे में हाथ बंटाने उनके साथ हो गए. वे पिता के साथ ठेले को धक्का लगाते और सड़क किनारे खड़े करके अंडे बेचते थे. पिता को देख-देखकर जय कुमार ने छोटी सी उम्र में ही अंडा भुर्जी और ऑमलेट बनाना सीख लिया.

यदि ऐसा कहा जाये कि जय कुमार ने बचपन ही नहीं देखा, तो गलत नहीं होगा. उनका बचपन अन्य बच्चों से अलग था. डायबिटीज के रोगी पिता ने जब गुर्दे ख़राब होने पर बिस्तर पकड़ लिया, तब घर चलाने की पूरी जिम्मेदरी जय कुमार के नाज़ुक कंधों पर आ गई.

बीमार पिता, दो छोटी बहनों और भाई को संभालने के …

Continue Reading

व्हाट्सअप की सहायता से साड़ियाँ बेचकर ये महिला महीने के लाखों कमा लेती है – Whatsapp Saree Business Success Story

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

Whatsapp Saree Business Success Story

हम सब व्हाट्सअप जरूर इस्तेमाल करते है लेकिन सिर्फ मैसेज करने या फिर अपने ऑफिस के काम के लिए। हम ये भी जान ते है की अधिकतर लोग इसमें अपना समय बर्बाद करते है। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं की इसी अप्प का सही से इस्तेमाल कर आप करोड़ों काम सकते हैं।

जी हाँ एक महिला उद्यमी हैजिनका नाम है शनमुगा प्रिया जो चेन्नई की रहने वाली है। व्हाट्सअप की सहायता से साड़ियाँ बेचकर आज प्रिया करोडो कमाती है। बीते साल उनका टर्नओवर लगभग 2.4 करोड़रुपये रहा और आज अमेरिका और ब्रिटेन में उनकी साड़ियाँ सप्लाई होती है।

व्हाट्सअप की सहायता से साड़ियाँ बेचकर ये महिला महीने के लाखों कमा लेती है – Whatsapp Saree Business Success Story

प्रिया की सास भी साड़ियाँ बेचने का काम करती थी। वो घर घर जाकर साड़ियाँ बेचती और बाकी समय में घर का ध्यान रखती क्योकि प्रिया एक कंपनी में नौकरी कर रही थी। सास की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी प्रिया के ऊपर आ गई और उन्होंने इसके लिए नौकरी छोड़ दी और घर में रहने लगी। अचानक उन्हें अपने सास के बिजनस को आगे ले जाने का आईडिया आया और उन्होंने ऐसा ही किया।

ऐसे की शुरुआत-

जब प्रिया ने इस काम को शुरू करने का विचार बनाया तो वो जहाँ भी जाती तो अपने साथ साड़ियों का थैला लेकर जाती। उस समय लोग उनके ऊपर हसते थे और उन्हें ये ना करने के लिए कहते थे लेकिन प्रिया नहीं मानी।

शुरुआत में उनके ग्राहक उनके रिश्तेदार, आस पड़ोस के लोग थे लेकिन बाद में काम बढने लगा। प्रिया ने इसकेलिए व्हाट्सअप का सहरा लेना शुरू किया। साल 2014 में उन्होंने एक ग्रुप की सहायतासे बीस साड़ियाँ बेचीं। इसके बाद खुद ही साड़ियाँ बनाने लग गई और इसके लिए कुछ लोगभी हायर कर लिए। प्रिया ने घर के छत पर एक गोदाम भी खोल लिया जिससे साड़ी देखने आनेकी चाहत रखने वाले लोग वहां आये और अपना सैंपल देख सके।

अब ये है बिक्री-

प्रिया ने एक के बाद एक अलग अलग व्हाट्सअप ग्रुप्स में अपनी साड़ियों का प्रमोशन जारी रखा। धीरे धीरे उनका व्यापार बढने लगा और पैसे भी आने लगे। साल 2016-17 में प्रिया ने कुल 2.4 करोड़ रुपये का कारोबार किया। वो कहती है की दिवाली और बाकी त्योहारों के समय में उनके पास अधिक आर्डर आते है।

वैसे वो दिन की पचास से अस्सी साड़ियाँ बेचती है लेकिन त्योहारों के …

Continue Reading

मोची के बेटे ने तोड़ी IIT की दीवार : Inspirational Story of Cobbler Son in Hindi

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

Inspirational Story of Cobbler Son in Hindi (IIT 2010)

कहा जाता है कि अगर इंसान में संघर्ष और कठिन मेहनत करने की क्षमता हो तो दुनिया में ऐसा कोई मुकाम नहीं है जिसे हासिल ना किया जा सके । कवि रामधारी सिंह दिनकर ने सही ही कहा है कि “मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है”।

ये कथन कानपुर के रहने वाले अभिषेक पे बिल्कुल सही बैठता है । सोना तपकर ही कुंदन बनता है और इतिहास गवाह है कि जिन लोगों ने अपना जीवन अभावों में गुजारा है वही लोग आगे चलकर सफलता को हासिल करते हैं ।

कोई भी माँ बाप कितने भी गरीब हों पर सबका सपना होता है कि उनका बच्चा खूब पढ़ाई करे । ऐसी ही एक बहुत गरीब परिवार की कहानी है जो दिल को छूते हुए गहरे सन्देश छोड़ती है।

कानपुर के रहने वाले अभिषेक कुमार भारती ने 2010 में भारत के सबसे कठिन इंजीनियरिंग परीक्षा IIT -JEE को पास किया जो अपने आप में एक अद्भुत उपलब्धि है ।

अभिषेक के पिता राजेन्द्र प्रसाद एक जूता सिलने वाले मोची हैं ,ये सुनने में जरूर अजीब लगेगा लेकिन सत्य है और माँ घर में लोगों के फटे कपड़े सिलकर कुछ पैसे इकट्ठे करती हैं । परिवार की रोज की दैनिक आमदनी मुश्किल से 150 रुपये है जिसमें परिवार का खर्चा चलना बहुत ही मुश्किल है । और घर के नाम पर एक छोटा सा कमरा है ।

कई बार अभिषेक खुद पिता की अनुपस्थिति में जूतों की सिलाई करता था । कभी कुछ पैसे कमाने के लिए नगरपालिका के कर्मचारियों के साथ काम भी करता था । लेकिन पढ़ने की चाह अभिषेक में शुरू से ही थी ।

वो रात भर जागकर पढाई करता । घर में बिजली कनेक्शन नहीं था तो लालटेन जला कर ही रात को पढाई करनी पढ़ती थी ।

अच्छी पढाई के लिए ना कोचिंग के पैसे थे और ना ही किताबें खरीदने के, फिर भी अभिषेक जी जान से लगा रहता था । वो कभी हार ना मानने वाले लोगों में से था, अपने दोस्तों से पुरानी किताबें लेकर पढाई किया करता था ।

उसकी लगन के आगे आखिर किस्मत को झुकना ही पड़ा और अभिषेक ने वो उपलब्धि हासिल की जिसका लाखों भारतीय छात्र सपना देखते हैं ।

तो मित्रों , सफलता कोई एक रात का खेल नहीं है जो पलक झपकते किस्मत बदल जाएगी , आपको कठिन मेहनत करनी होगी खुद को संघर्ष …

Continue Reading

कहानी एक कुली के बेटे की जो आज करोड़ों रूपयें की कंपनी का मालक हैं!

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

Success Story of PC Mustafa

हमारे आसपास कितनी ही कहानियां घूमती है जो की अपने आप में अलग होती है और वो हमेशा ही अपने साथ एक बड़ा संघर्ष छुपाकर रखती है। ऐसी ही कहानी है पीसी मुस्तफा – PC Mustafa की जिहोने संघर्ष करते हुए सौ करोड़ की कंपनी बना दी।

कहानी एक कुली के बेटे की जो आज करोड़ों रूपयें की कंपनी का मालक हैं – PC Mustafa

बिजनेस का एक ऐसा आईडिया जो शायद किसी और के दिमाग में नहीं आया। इडली डोसा बनाने में होने वाले मेहनत को कम करके मुस्तफा ने मार्केट में रेडीमेड इटली डोसा लेकर आये और कंपनी को नाम दिया “आईडी फ्रेश फ़ूड”( iD Fresh Food)।

मुस्तफा का जन्म केरल के छोटे से गाँव वनयाड में हुआ और उनके पिता केवल चौथी कक्षा तक पढ़े थे और कॉफ़ी के बगीचों में माल ढोने काम करते थे। मुस्तफा का मन भी पढाई में नहीं लगता था इसीलिए इससे बचने के लिए वो पिता के साथ माल ढोने चले जाते थे।

छठवी के बाद वो पढना नहीं चाहते थे लेकिन जब ऐसा लगा की पिता जैसा जीवन ही जीना पड़ेगा तो खुद की राह बदल दी और फिर से छठवी कक्षा से आगे पढाई शुरू की और पास भी हुए। मुस्तफा जब स्कूल में थे तब उन्हें केवल मैथ्स समझ में आती थी और उनके टीचर उनसे कहते थे की तुम पिता की तरह काम करना चाहते या फिर अच्छी जिन्दगी जीना चाहते हो।

वही से मुस्तफा के मन में अच्छा जीवन जीने की कल्पना साकार हुई और उन्होंने पढ़ाई पूरी की और इंजीनियरिंग भी की और फिर एक कंपनी में नौकरी करने लगे। कंपनी में मुस्तफा ने बढिया काम किया और इस वजह से कंपनी ने उन्हें ब्रिटेन भेज दिया और इसके बाद दुबई लेकिन वो दुबई से वापिस आ गए। वहां से आकर वो एमबीए करने लगे और कुछ अलग ही तरीका देखने लग गये।

ऐसे आया बिजनेस का आईडिया –

जब मुस्तफा एमबीए की पढ़ाई कर रहे थे तब कभी कभार वो अपने भाई के दुकान में चले जाते थे। जिसमे इडली और डोसा बनाने के लिए घोल बेचने का काम था। कई सारी महिलाये वहां आती और घोल खरीद कर ले जाती। मुस्तफा खुद जानते थे की इस घोल से इडली बनाने में काफी समस्या होती है और यही से उन्हें आईडिया आया अपने बिजनेस का जिसने पैक्ड फूड्स की दुनिया में एक नई क्रांति को जन्म दिया।

2005

Continue Reading

जूनून हो तो सफलता जरूर मिलती है | Successful Entrepreneur Story in Hindi

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

Successful Entrepreneur Story in Hindi

कहा जाता है कि अगर कुछ करने की लगन और जज्बा हो तो किस्मत पलटते देर नहीं लगती। कबीरदास जी ने बिलकुल सही कहा है – ‘रसरी आवत जात से सिल पर परत निसान’, लगातार कठोर मेहनत करने से हर कठिन कार्य को आसान किया जा सकता है।

Image Source: Bhaskar.com

वीएसएस मणि, ये नाम है उस शख्स का जिसने देश के युवाओं के लिए एक मिशाल पेश की है और बताया कि कैसे कठिन संघर्षो के बावजूद भी सफलता हासिल की जाती है ।

वीएसएस मणि जी “jusl dial” कंपनी के मालिक हैं और कलकत्ता के रहने वाले हैं । “Just Dial” आज 900 करोड़ की कंपनी है जिसमें हजारों कर्मचारी काम करते हैं।

एक समय था, जब वीएसएस मणि जी कठिन संघर्षों से गुजर रहे थे। बहुत कोशिशों के बावजूद भी कोई कार्य सफल नहीं हो पा रहा था ।

वैसे Just Dial का आइडिया उनके दिमाग में 22 साल की उम्र से ही था और इसी की वजह से उन्होंने Askme नाम की एक कंपनी भी शुरू की थी लेकिन ये कंपनी बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पायी ।

उन संघर्षों के दिनों में वीएसएस मणि जी ने पत्नी के गहने बेच कर Just Dial की शुरूआात की और उनकी कठिन मेहनत का नई नतीजा है कि आज कंपनी 900 करोड़ की हो गयी है ।

यही नहीं , स्वयं अमिताभ बच्चन JustDial के ब्रांड एम्बेसडर हैं और आज ये बहुत विख्यात कंपनी में से एक है । 8888888888 ये नंबर JustDial के लिए प्रयोग किया जाता है। वीएसएस मणि जी आज उस मुकाम पर हैं कि उनका जीवन युवाओं के लिए एक प्रेरणा का स्रोत हो सकता है ।

मित्रों , जीवन में जब कठिन समय आये तो घबराएं नहीं क्यूंकि संघर्ष एक परीक्षा के समान है जिसमें उत्तीर्ण होकर ही आप सफल हो सकते हैं। इस Real कहानी से आपने क्या सीखा ,Comment के माध्यम से हमें जरूर बताएं…

Continue Reading
Sanjay Mishra - Sanjay Mishra Biography in Hindi | संजय मिश्रा जीवन परिचय | Success Story

Sanjay Mishra Biography in Hindi | संजय मिश्रा जीवन परिचय | Success Story

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

नमस्कार दोस्तों “shayarisms4lovers.in” में आपका स्वागत है |

दोस्तों आज हम बात करने जा रहे है हिंदी फिल्म जगत के एक ऐसे कलाकार के बारे में जो हमें अपनी एक्टिंग से रुला सकते हैं, हंसा सकते हैं, और डरा भी सकते हैं आज उन्हें लगभग इंडिया का बच्चा बच्चा जनता है उस मंझे हुए कलाकार का नाम है “संजय मिश्रा” जिन्होंने कई फ़िल्मों तथा टेलीविज़न धारावाहिकों में अभिनय से अमिट छाप छोड़ी है।

“कड़ी से कड़ी जोङते जाओ तो जंजीर बन जाती है॥
मेहनत पे मेहनत करो तो तक़दीर बन जाती है।“

संजय का जन्म 6 अक्टूबर 1963 को दरभंगा, बिहार में एक हिन्दू परिवार में हुआ था। इनके पिता शम्भुनाथ मिश्रा जो कि एक पत्रकार थे। संजय को बचपन से ही एक्टिंग में बहुत ज्यादा रूचि थी | संजय ने अपनी हाई स्कूल की पड़े पटना के ही एक स्कूल से की और उसके बाद इन्होंने बैचलर की डिग्री पूरी कर राष्ट्रीय ड्रामा स्कूल में प्रवेश किया और सन 1989 में स्नातक हो गए।

“National School of Drama” में अपनी एक्टिंग पूरी कर अपना भाग अजमाने के लिए बॉलीवुड में कदम रखा और शुरुवाती दिन में संजय मिश्रा जी को बहुत ही मुस्किलो का सामना करना पड़ा, संजय मिश्रा ने पहला अभिनय जो कि एक टेलीविज़न धारावाहिक चाणक्य (धारावाहिक)” में किया था, इससे पहले इन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ भी कार्य करने का मौका मिला था। शुरुवात में संजय फिल्मो में छोटे मोटे रोले के साथ 2 “Commercial Ads” में भी काम किया करते थे |

Sanjay Mishra ने बॉलीवुड में अपने कैरियर की शुरुवात 1995 में फिल्म “ओह डार्लिंग ये है इंडिया” से की थी,| जिसमें उन्होंने हारमोनियम बजाने वाले की एक छोटी सी भूमिका अदा की थी, इस फिल्म में Sanjay mishra के एक्टिंग की बहुत तारीफ की गई, साथ ही सत्या और दिल से जैसी फ़िल्मों भी में काम किया।

ऑफिस ऑफिस”नाम के सीरियल में उनके द्वारा निभाए गए शुक्ला जी के किरदार से उन्हें काफी पहचान मिली। 2005 में धारावाहिक छोड़ने के बाद उन्होंने “बंटी और बबली” और “अपना सपना मनी मनी” फ़िल्मों में अपनी भूमिका निभाई|

उनके जीवन की सबसे दुर्भाग की बात तो ये थी की उन्होंने १०० से ज्यादा फिल्मो में अभिनय करने के बावजूद उन्हें कोई पहचान नहीं मिल पाई, उन्हें अपने पिता जी से बहुत लगाव था, इसलिए जब उनके पिता का देहांत हुआ तब …

Continue Reading

घर के गैराज से दुनिया की सबसे बड़ी E-commerce कंपनी Amazon बनाने तक का सफर

Amazon Founder Jeff Bezos Success Story in Hindi

Amazon Founder Jeff Bezos Success Story in Hindi

आज हम बात कर रहे हैं, दुनिया की सबसे बड़ी E-commerce कंपनी Amazon.com के बारे में जो कि आज के समय में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा भरोसे वाली Online Shopping Website है|

जिसे Jeff Bezos ने शुरू किया था, आज के समय में Jeff Bezos दुनिया के सबसे Rich Persons में से एक हैं, उनकी Net Worth 125+ Billion Dollar है| Jeff ने amazon को शरू कर के Shopping करने का तरीका ही बदल दिया। Amazon कंपनी अमेरिका की है और इसका Head Office भी USA में ही है तो दोस्तों चलिए Amazon की Success Story को शरू से जानते हैं –

तो कहानी की शुरुआत होती है, जब 12 January,1964 में Mexico (USA) Jeff Bezos का जन्म हुआ था तो उनकी माँ 17 साल की थी और पढ़ाई करती थी और उनके पिता 18 महीने की कम उम्र में उनको और उनकी माँ को छोड़ कर चले गये और फिर कुछ दिनों तक उनकी माँ ने उनको अकेले ही पाला| जब Jeff 4 साल के हुए तो उनकी माँ ने मगुआल बेज़ोस नाम के आदमी से शादी कर ली, उस दिन के बाद उनका सरनेम Bezos हो गया।

फिर शादी करने के बाद उनका पूरा परिवार ह्यूस्टन शिफ्ट हो गया, वहाँ पर उनके पिता ने इंजीनियर के पद पर काम किया और Jeff के अंदर बचपन से ही चीजों को खोलकर देखने का शौक था, इसलिए Jeff चीज़ों को बार-बार खोलकर देखते थे कि कोई कभी चीज़ काम कैसे करती है?

Jeff ने RIVER OAKS ELEMENTARY SCHOOL से अपनी शुरुआती पढ़ाई की और वे अपनी छुट्टियाँ अपने नाना के घर बिताते थे| समय आगे बढ़ता गया, बचपन मे Jeff ने अपने भाई-बहन से बचने के लिए एक Electric अलार्म भी बनाया ताकि कोई कमरे में आए तो Jeff को पता चल जाए|

आगे चल कर उनका परिवार मिआमि शहर में शिफ्ट हो गया, जहाँ Jeff ने PALMETTO HIGH SCHOOL में पढाई शुरू की| दोस्तो Jeff को हमेशा इंटेलिजेंट स्टूडेंट में गिना जाता था।

आगे चलकर उन्होंने PRINGSTON UNIVERCITY से Computer Science में डिग्री ली और फिर उन्होंने आगे चल कर Wall Street में भी काम किया, फिर उन्होंने और भी कई कंपनियों में काम किया और फिर उन्होंने सोचा कि वे कब तक दूसरों का काम करते रहेंगे|

उन्होंने अपना Business करने की सोची और फिर उन्होंने America का रुख किया और लोगों की डिमांड को समझा और …

Continue Reading

Instagram Success Story in Hindi, Kevin Systrom Biography, Instagram VS Snapchat

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

नमस्कार दोस्तों “shayarisms4lovers.in” में आपका स्वागत है |

दोस्तों आज हम बात करने जा रहे है एक ऐसे App के बारे में जो की 6 अक्टूबर 2010 को Launch हुआ और जिसे आज दुनिया के सबसे बड़ी हस्तियों के साथ विश्व के 1 billions से भी अधिक लोगो द्वारा सरहाना मिली है, ये वो app है जिसने Photography और Photo Shearing का सारा रूप ही बदल दिया | शुरुआत में इसका प्रवेश Apple  के Aap Store में हुआ और इस कंपनी का सिर्फ एक ही लक्ष्य था और वो था मोबाइल फोटोग्राफ्स को फ़ास्ट, सिंपल, और खुबशुरत बनाना | आज हम जिस कंपनी के बारे में बात कर रहे है वो कोई और नहीं बल्कि हर युवा का सबसे चहिता “App Instagram” है और ये है Kevin Systrom की सफलता की कहानी |

विश्व प्रसिद्ध इंस्टाग्राम के संस्थापक और “CEO” Kevin Systrom का जन्म 30 दिसंबर 1983 को हुआ था उनकी माता ज़िपकार कंपनी की मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव थी और उनके पिता TJX Companies के HR डिपार्टमेंट्स के वाइज प्रेजिडेंट थे | Middlesex School में पढ़ते समय इनका परिचय Computer Programing से हुआ था, आगे बढ़कर Doom 2 गेम खेलते हुए और खुद के Levels बनाते हुए उनकी Computer Programing में दिलचस्पी और बढ़ गई जैसे जैसे वो बड़े हुए उन्होंने अपने मित्रो के AOL In-stent Messenger Accounts को hake करने जैसा खेल खेलने का प्रोग्राम तैयार किया |

टेक्नोलॉजी के प्रति उनका प्यार उनको अपनी माँ से मिला था जो शुरुवात से ही Tech world में काम कर रही थी, पर केविन का पहला जॉब टेक्नोलॉजी से काफी दूर था, केविन ने कॉलेज में पहले कंप्यूटर साइंस को चुना पर आगे वे मैनेजमेंट साइंस और इंजीनियरिंग प्रोग्राम की और चले गए क्योकि कंप्यूटर साइंस के क्लासेज ज्यादा ज्ञानपूर्वक थे न की प्रायोगिक और मॅनॅग्मेंट साइंस का ध्यान फाइनेंस और इकोनॉमिक्स जैसे व्यवहारिक विषयो पे केंद्रित था | वे उन 12 विद्यार्थियों में से एक थे जिन्हे Stanford University के प्रठिस्तिथ  Mayfield Fellows Program में भाग लेने के लिए चुना गया था | यहाँ पर उन्होंने पहेली बार स्टार्टअप की दुनिया का अनुभव हुआ |

2006 में अपनी डिग्री को पूरा करने के बाद केविन ने Google ज्वाइन किया और वहा तीन साल तक रहे उनके करियर की शुरुवात असोसिएट प्रोजेक्ट मैनेजर के तोर पे हुआ और उन्होंने Gmail, Google Calendar, Docs, Spreadsheets आदि प्रोडक्ट पर काम किया | 2 साल के बाद केविन Corporate Development

Continue Reading

RealShit Success Story in Hindi | India’s Best Viners

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

नमस्कार दोस्तों “shayarisms4lovers.in” में आपका स्वागत है, आज हम बात करने जा रहे है Youtube Channel RealSHIT की सफलता की कहानी के बारे में |

“डरे है जिम करे है“

ऐसे ही डायलाग की वजह से फेमश “RealSHIT Goup“ अपनी वीडियोस से आज हमारे देश को खूब हँसा रहा है,  इस ग्रुप की सफलता की पीछे दिल्ली के तीन लड़के “पियूष गुर्जर ,दीपक चौहान , शुभम गाँधी” की मेहनत है इनके Vines आज पुरे देश मे लोकप्रिय हे और इन्होने हॉल ही में अपने फेसबुक पेज पर 1.9 मिलयन लाइक क्रॉस कर दिए है इस “Article” में आप को मैं इनकी सफलता का पूरा सफर बताऊंगा |

RealSHIT Goup की सफलता का सफर शुरू हुआ 2005 में जब  पियूष, दीपक और शुभम की दोस्ती हुई, जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे इन तीनो की दोस्ती और गहरी होती चली गई और अब ये तीनो बेस्ट फ्रेंड्स है तीनो ही  हमेशा से ही वो बच्चे रहे है जो क्लास में खूब हसी मजाक कर सभी को हसाते रहते थे, दुसरो को हसाने में इन्हे बहुत ही अच्छा लगा करता था स्कूलिंग के बाद दीपक ने एमिटी यूनिवर्सिटी से और  पियूष, शुभम ने दिल्ली यूनिवर्सिटी जॉइन कर ली |

कॉलेज में आने के बाद तीनो एक दूसरे से थोड़ा दूर हो गए और उनका मिलना जुलना भी कम हो गया, तो जब इनके कॉलेज की छुट्टिया शुरू होती थी तब तीनो को  एक दूसरे से मिलने का मौका मिल जाया करता था और छुट्टियों में ये तीनो मिलकर खूब मस्तिया किया करते और पूरा दिन PlayStation और Xbox पर FIFA खेला करते थे जब ऐसा बहुत समय तक चलता रहा तब उन्हे अहसास हुआ की वो किस तरह से अपने समय को गेम्स खेल कर जाया(Waste) कर रहे है, उन्होंने अपने छुट्टियों में कुछ अच्छा और प्रोडक्टिव करने का सोचा और उन्ही दिनों में उन्होने एक फॉरनर लड़की की यूटुब पर वाइन वीडियो भी देखि जो उन्हे बहुत ही अच्छी लगी तो बस उन्होने भी अपना शौक पूरा करने के लिए एक वाइन वीडियो बनाने का सोचा |

उन्होंने अपने इस वीडियो के लिए ज्यादा ठोस Planning नहीं करी थी न ही वो इसके लिए ज्यादा सीरियस थे क्योकि वो रोज Games खेलते ही थे तो उन्होंने कुछ नया करने के लिए एक वाइन वीडियो बनाने का सोचा वैसे उस समय उनके पास कोई कैमरा भी नहीं था तो उन्होंने अपने लैपटॉप के वेबकेम …

Continue Reading