shayarisms4lovers mar18 142 - Hindi Poem on Love

Hindi Poem on Love

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आँखों मे प्यास हुआ करती थी,
दिल में तुफान उठा करते थे,
लोग आते थे गज़ल सुनने को,
हम तेरी बात किया करते थे,
सच समझते थे सब सपनो को,
रात दिन घर में रहा करते थे,
किसी विराने में तुझसे मिलकर,
दिल में क्या फुल खिला करते थे,
घर की दिवार सजाने की खातिर,
हम तेरा नाम लिखा करते थे,
कल तुझ को देखकर याद आया,
हम भी महोब्बत किया करते थे,
हम भी महोब्बत किया करते थे..…

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pexels photo 592772 - आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

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आँखें  मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही , सही
क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही

यह सुबह सुबह चेहरे की रंगत उतरी हुई
कल रात तुम कहाँ थे बताना सही ,सही

दिल ले के मेरा हाथ में कहती हैं मुझ से वो
क्या लोगे इसका दाम बताना सही , सही

आँखें  मिलाओ ग़ैर से दो हम को जाम _ऐ _महफ़िल
साक़ी तुम्हें क़सम है पिलाना सही , सही

आइमा फरोश भीड़ है तेरी दुकान पर
ग्राहक हैं हम भी माल दिखाना सही , सही

ग़ालिब तो जान _ओ _ दिल से फ़क़त आपका है बस
क्या आप भी हैं उसके बताना सही ,सही..

Ankhen Milao Gair Se – Mirza Galib

Kehna Ghalt Ghalt To Chupana Sahi, Sahi
Qasid Kaha Jo Us Ne Btana Sahi Sahi

Yeh Subah Subah chehre Ki Rangat utri Hui
Kal Raat Tum Kahan The Batana Sahi,Sahi

Dil Le Ke Mera Hath mei Kehte Hain Mujh Se Wo
Kya Loge Iska Daam Batana Sahi, Sahi

Ankhen Milao Gair Se Do Hum Ko Jaam_AE_mehfil
Saqi Tumhen Qasm Hai Pilana Sahi, Sahi

Aiema Farosh Bheer Hai Teri Dukan Par
Gahak Hain Hum Bhi Maal Dikhana Sahi, Sahi

Ghalib To Jaan_O_Dil Se Faqt Apka Hai Bas
Kya Ap Bhi Hain Uske Btana Sahi,Sahi..…

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shayarisms4lovers mar18 125 - नए कवियों की शायरी पढ़िए

नए कवियों की शायरी पढ़िए

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Poet – Kautilya Gaurav

कहती सुनती बातों सी…
जैसे गहरी मेरी रातों सी…
ख़ामोशी से भरी भरी…
ख़ाली मेरे हाथों सी…
कभी कभी कहीं जो मिलती थी…
ख़ामोशी सी रातों में…
जाने कहाँ मुझसे गुम हुई…
कुछ बातें तेरी बातों सी…


Poet – Kautilya Gaurav

दरिया सा एक सब्र का…
बहता रहा मुझमें कहीं…
बहोत दिन हुये…
अब न जाने कितने…

 

ख़्वाब कितने थे अब…
जाने क्या कहिये…
कुछ एक बातें कभी कभी…
जैसे लगता है कि…
दोहराती हैं खुद को…

बहोत दिन हुये…
मेरी बातों को…
मुझमें कहीं रूबरू हुये…
बातें मेरी अब…
बड़ी बेनूर सी हैं…

बहोत दिन हुये…
अब न जाने कितने…


Poet – Kautilya Gaurav

लकीरों से भरता रहा हथेलियों को…
जाने कौन सी कहीं किसी मंज़िल तक हो जाती…
मंज़िलों से कहीं आगे तक है जाता…
फिर क्युं ये मेरा रास्ता…

कभी कुछ ज़हन में जो था मैंने सोचा…
एक रास्ता वहाँ से जैसे चल पड़ा…
मंज़िलों के रास्ते बनाता चला…
हथेलीयों पे लकीरें को मिलाता चला…

कभी शायद कहीं किसी मंज़िल के रास्ते पे…
मैं कभी कहीं खुद से मिलूँगा…

लकीरों की हद से कही बहोत आगे…
मंज़िलों से कहीं बहोत आगे तक है जाता…
मेरे ज़हन में ये मेरा रास्त..…

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shayarisms4lovers mar18 39 - आज की रात

आज की रात

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आज की रात

वो कह के चले इतनी मुलाक़ात बहुत है
मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है

आँसू मेरे थम जाएं तो फिर शौक से जाना
ऐसे मैं कहाँ जाओगे बरसात बहुत है

वो कहने लगे जाना मेरा बहुत ज़रूरी है
नहीं चाहता दिल तोडू तेरा पर मजबूरी है

गर हुई हो कोई खता तो माफ़ कर देना
मैंने कहा हो जाओ चुप इतनी कही बात बहुत है

समझ गए हों सब और कुछ कहो ज़रूरी नहीं
बस आज की रात रुक जाओ , जाना इतना भी ज़रूरी नहीं है

फिर कभी न आऊँगी तुम्हारी ज़िन्दगी में लौट के
सारी ज़िन्दगी तन्हाई के लिए , आज की रात बहुत है

Aaj Ki Raat

Wo Keh Ke Chalay Itni Mulaqat bahut hai
Maine Kaha Ruk Jao Abhi Raat bahut hai

Aansoo Mere Thum Jayein To Phir Shoq Say Jana
Aisay Main Kahan JaoGey Barsaat bahut hai

Wo Kehne Lagey Jana Mera Bohot Zaroori Hai
Nahi Chahta Dil Todun Tera Par Majboori Hai

Gar Hui Ho Koi Khata To Maaf Ker Dena
Maine Kaha Ho jao Chup Itni Kahi Baat bahut hai

Samajh Gayi Hon Sab Aur Kuch Kaho Zaroori Nahi
Bas Aaj Ki Raat Ruk Jao, Jana Itna Bhi Zaroori Nahi Hai

Phir Kabhi Na Aaongi Tumhari Zindagi Mein Lot Ke
Saari Zindagi Tanhayee Ke Liye, Aaj Ki Raat bahut hai…

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shayarisms4lovers mar18 52 - तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

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अक्स -ऐ -खुशबू हूँ

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई
और बिखर जाऊं तो मुझे न समेटे कोई

काँप उठती हूँ मैं इस तन्हाई में
मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई

जिस तरह ख्वाब मेरे हो गए रेज़ा-रेज़ा
इस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई

मैं तो उस दिन से हरासां हूँ के जब हुक्म मिले
खुश्क फूलों को किताबों में न रखे कोई

अब तो इस राह से वो शख्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद से दरवाज़े से झांके कोई

कोई आवाज़ ,कोई आहात ,कोई चाप नहीं
दिल की गलिया बड़ी सुनसान हैं आये कोई

Aks-AE-Khushboo

Aks-AE-Khushboo Hoon Bikharne Se Na Roke Koi
Aur Bikhar Jaaun To Mujhe Na Samete Koi

Kaanp Uthti Hoon Main Iss Tanhaai Mein
Mere Chehre Pe Tera Naam Na Padh Le Koi

Jis Tarah Khwaab Mere Ho Gaye Reza-Reza
Is Tarah Se Na Kabhi Toot Ke Bikhre Koi

Main To Us Din Se Harasaan Hoon Ke Jab Hukm Mile
Khushk Phoolon Ko Kitabon Mein Na Rakhe Koi

Ab To Is Raah Se Wo Shakhs Guzarta Bhi Nahin
Ab Kis Ummeed Se Darwaaze Se Jaahnke Koi

Koi Aawaaz,Koi Aahaat,Koi Chaap Nahin
Dil Ki Galyaan Badi Sunsaan Hain Aaye Koi..


खुशबू की तरह आया वो

खुशबू की तरह आया वो तेज़ हवाओं में
माँगा था जिसे हम ने दिन रात दुआओं में
तुम चाट पे नहीं आये मैं घर से नहीं निकल
यह चाँद बहुत भटकता है सावन की घटाओं में

Khushboo ki Tarah Aaya wo

Khushboo ki Tarah Aaya wo tez Hawaaon mein
Manga tha jise hum ne Din Raat Duaaon mein
Tum Chat pe nahi aaye Main Ghar se nahi Nikla
Yeh Chaand bahut bhatka hai Saawan ki Ghataon mein..


खिलावत -ऐ -खुशबू

तेरे हुनर में खिलावत -ऐ -खुशबू सही मगर
काँटों को उम्र भर की चुभन कौन दे गया
“मोहसिन” वो कायनात -ऐ -ग़ज़ल है उससे भी देख
मुझ से न पूछ मुझ को यह फन कौन दे गया

Khilwat-AE-khushboo

Tere hunar mein khilwat-AE-khushboo sahi magar
Kaanton ko umar bhar ki chubhan kaun day gaya
“Mohsin” wo kaayinaat-ae-ghazal hai ussay bhi deikh
Mujh say na pooch mujh ko yeh fun kaun day gaya..


तेरी बात से खुशबु आये

तेरी हस्ती से तेरी ज़ात से खुशबु आये
तू जो बोले तो तेरी बात से खुशबु आये

तुझको देखों तो मेरी आँख महक सी जाये
तुझको सोचूं तो ख्यालात से खुशबु आये

तू चमेली है , …

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shayarisms4lovers mar18 202 - ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

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हम तो अकेले रहे

हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ
यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ

सदा चोट पर चोट खाता रहा
मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ

कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में
झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ

ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा
हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ

अकेले थे हम तो अकेले रहे
कोई अपना गमख्वार हो , हमदम कहाँ

जहांगीर-ओ-नौशेरवां चल बसे
रहा डर में अद्ल पैहम कहाँ

ना अय्यूबी कोई ना खालिद कोई
गया रखता अपना परचम कहाँ

Hum To Akele Rahe

Hamesha Rahega Yeh Aalam Kahan
Yeh Mahfil Kahan aur Yeh Humdam Kahan

Sada Chot Par Chot Khata Raha
Muqaddar Mein Is Dil Ke Marham Kahan

Kahan Abr Koi Kadi Dhoop Mein
Jhulaste Bayabaan Mein Shabnam Kahan

Naa Mast Aankhein Hongi Naa Zulfe Rasaa
Hamesha Rahega Yeh Mausam Kahan

Akele The Hum To Akele Rahe
Koi Apna Ghamkhwaar , Humdam Kahan

Jahangeer-O-Nausherwaan Chal Base
Rahaa Daar Mein Adl Paiham Kahan

Naa Ayyubi Koi Naa Khalid Koi
Gaya Rekhta Apna Parcham Kahan..


दिखाई दिए यूँ

दिखाई दिए यूँ की बेखुद किया
हमें आप से भी जुदा कर चले

जबीं सजदा करते ही करते गए
हक़-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले

गई उम्र दर बंद-ऐ-फ़िक्र-ऐ-ग़ज़ल
वो इस फन को ऐसा बढ़ा कर चले

कहें क्या जो पूछे कोई हम से “मीर”
जहाँ में तुम आए थे , क्या कर चले

Dikhai Diye Yun

Dikhai diye yun ki bekhud kiya
Hamain ap se bhi juda kar chale

Jabin sajda karte hi karte gai
Haq-ae-bandagi ham ada kar chale

Gai umar dar band-ae-fikar-ae-gazal
So is faan ko aisas bada kar chale

Kahen kya jo puche koi ham se “Meer”
Jahan main tum aaye the, kya kar chale..


वफाओं की मोहरें

न सोचा न समझा न सीखा न जाना
मुझे आ गया खुद ब खुद दिल लगाना
ज़रा देख कर अपना जलवा दिखाना
सिमट कर यहीं आ न जाए ज़माना
ज़ुबान पर लगी हैं वफाओं की मोहरें
ख़ामोशी मेरी कह रही है फ़साना
गुलों तक बात आई तो आसान है लेकिन
है दुष्वार काँटों से दामन बचाना
करो लाख तुम मातम -ऐ -नौजवानी
पर ‘मीर’ अब नहीं आएगा वो ज़माना

Wafaon ki Mohrain

Na socha na samajha na sikha na jana
mujhe aa gaya khudbakhud dil lagana
zara dekh kar apna jalwa dikhana
simat kar yahin aa na jaye zamana
zuban par lagi hain wafaon ki mohrain
khamoshi meri keh rahi hai fasana
gulon tak lagayi to aasan …

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shayarisms4lovers mar18 149 - कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

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तुम ही को चाहते है तुम ही से प्यार करते है
यही बरसो से आदत है और आदत कब बदलती है

तुम को जो याद रखा है यही अपनी इबादत है
इबादत जिस तरह की हो इबादत कब बदलती है

कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है
यही कानून-ऐ-फितरत है और फितरत कब बदलती है

जो दिल ही नक़्श कर जाये निगाहों में सिमट आये
अलामत है यह चाहत की तो चाहत कब बदलती है

पुराने ज़ख़्म को अक्सर भुला देना ही अच्छा है
न चाहे आप ही कोई तो क़िस्मत कब बदलती है…

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shayarisms4lovers mar18 56 - तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

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तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है
ज़रा से लफ्ज़ में कितना पैगाम लिखा है

यह तेरी शान के काबिल नहीं लकिन मजबूरी है
तेरी मस्ती भरी आँखों को मैंने जाम लिखा है

मैं शायर हूँ ,मगर आगे न बढ़ पाया रिवायत से
लबों को पंखुड़ी ,ज़ुल्फ़ों को मैंने शाम लिखा है

मुझे मौत आएगी जब भी ,तेरे पहलू में आएगी
तेरे ग़म ने बहुत अच्छा मेरा अंजाम लिखा है

मेरी क़िस्मत मैं है एक दिन ग्रिफ्तार -ऐ -वफ़ा होना
मेरे चेहरे पे तेरे प्यार का इलज़ाम लिखा है क़ातील

वो खूबसूरत बहुत है ,जिसका मैं पूजारी हूँ
मेरे मज़हब के खाने में मगर इस्लाम लिखा हैं

 

Tere Mehndi Lage Hathon Pe Mera Naam Likha Hai
Zra Se Lafz mein Kitna Paigam Likha Hai

Yeh Teri Shan Ke kabil Nahin Lakin Majbori hai
Teri Masti Bhari Ankhon Ko Meine zam Likha Hai

Mein Shayar Hoon, Magar Aage Na Badh Paya Riwayat Se
Labon Ko Pankhudi,Zulfon Ko Meine Sham Likha Hai

Muje Mout Ayegi Jab Bhi,Tere Pehlu Mein Ayegi
Tere Gham Ne Bohat Achaa Mera Anjam Likha Hai

Meri Kismat Mein Hai Ek Din Griftar-AE-Wafa Hona
Mere Chehre Pe Tere Pyar Ka Ilzam Likha Hai Qateel

Ek Khubsurt Boht Hai,Jiska Mein Pojari Hoon
Mere Mazhab Ke Khane Mein Magar Islam Likha Hai…

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shayarisms4lovers mar18 12 - Kush Chalte Chalte Yu Hi 

Kush Chalte Chalte Yu Hi 

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Kalpana Ki Kalpana se Main Kalapata Hi Rahaa
Chah Mai Ek Sadhana Ke Main Bhatakta Hi Rahaa

Kuchh Suman Chun Liye Main Ne Archana Ke Waste
Vandana Na Ho Sahii Khojata Mala Rahaa

Manju Main Dhundhi Surahi Wo Bhee Na Mujhako Mil Sakii
Lee Gayaa Makrand Bhavara Haath Malata Hi Rahaa

Rashami To Lakho Mili Per Koi Na Aapni Ban Sakii
Jal Gayaa Bhola Shalabh Deep Hasta Hi Rahaa

Trashana Hi Mujhako Mili Trapti Na Mujhako Mili
Ghut Bhar Madhu Main Sada Machalata Hi Rahaa

Hai Nahi Rekha Koi Jo Jeevan Rekha Ban Sake
Ek Veena Ke Liye Man Taar Kasata Hi Raha

Bhavna Ki Preet Main Kho Gaya Kuchh Is Tarah
Lut Gaya Sarvsav Aur Main Dekhata Hi Raha

Balvinder Vikas

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shayarisms4lovers mar18 01 - हीर शायरी – वारिस शाह

हीर शायरी – वारिस शाह

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लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी

की मुक जाना सी वारिस शाह दा,
लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी .

वख रूह नालो रूह न हो सकदी ,
न दिल चो वख तस्वीर हुंदी .
नशा अख दा इक वारी चढ़ जावे ,
पूरी इश्क़ दी फिर तासीर हुंदी .

झूठा रब्ब नू तुस्सी केहन वालयो ,
निगाह मेरी नाल ये देख लावो ,

झूठ अख कदे नी कह सकदी ,
निगाह यार दी निगाहे -ऐ -पीर हुंदी .

तेरी अख तो ओहले मैं हुँदा न ,
मंदी ऐनी ये न तक़दीर हुंदी .

Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi

Ki Mukk Jana Si Waris Shah Da,
Likhi Ranjhe Naam Je Heer Hundi.

Vakh Rooh Naalo Rooh na Ho Sakdi,
Nai Dil Cho Vakh Tasveer Hundi.

Nasha Akh Da Ik Vaari Chadh Jave,
Poori Ishq Di Fer Taseer Hundi.

Jhootha Rabb Nu Tussi Kehen Waleyo,
Nigah Meri Naal Je Dekh Lavo,

Jhooth Akh Kade Ni Keh Sakdi,
Nigah Yaar Di Nigahe-E-Peer Hundi.

Teri Akh To Ohle Manu Hunda Na,
Maadi Enni Je Na Taqdeer Hundi.…

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हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला – “दाग़” उर्दू शायरी

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हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला 

तुम्हारे खत मैं नया एक सलाम किस का था
न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किस का था

वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं
यह काम किस ने किया है ये काम किस का था

वफ़ा करेंगे निभाएंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ यह कमाल किस का था

रहा न दिल मैं वो बे-दर्द और दर्द रहा
मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किस का था

न पूछ -पाछ थी किसी की न आओ-भगत
तुम्हारी बज़्म में कल एहतमाम किस का था

गुज़र गया वो ज़माना कहें तो किस से कहें
ख्याल मेरे दिल को सुबह -ओ -शाम किस का था

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला
यह पूछे इनसे कोई वो ग़ुलाम किस का था

Har ek se kahte hain kya “Daagh” bewafa nikla

Tumhare khath main naya ek salam kis ka tha
na tha raqeeb to akhir wo nam kis ka tha

Wo qatl kar ke har kisi se puchte hain
ye kaam kis ne kiya hai ye kaam kis ka tha

Wafa karenge nibhayenge baat manenge
tumhen bhi yaad hai kuch ye kalam kis ka tha

Raha na dil main wo be-dard aur dard raha
muqeem kaun hua hai maqam kis ka tha

Na pooch-paach thi kisi ki na aao-bhagat
tumhari bazm main kal ehtamam kis ka tha

Guzar gaya wo zamana kahen to kis se kahen
khayal mere dil ko subah-o-sham kis ka tha

Har ek se kahte hain kya “Daagh” bewafa nikla
ye puche in se koi wo ghulam kis ka tha…

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shayarisms4lovers mar18 12 - उर्दू ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़लें

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मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है

Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se Maine Un Jazbaat Se Mohabbat Ki Hai Tujhse Milna To Ab Khawab Sa Lagta Hai Maine Tere Intezaar Se Mohabbat Ki Hai


मुहब्बतों के पयाम लिखना ​

कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़-ऐ-सलाम लिखना ​ वो चाँद चेहरा , वो बहकी बातें , सुलगते दिन थे , सुलगती रातें वो छोटे छोटे से काग़ज़ों पर , मुहब्बतों के पयाम लिखना ​ गुलाब चेहरों से दिल लगाना , वो चुपके चुपके नज़र मिलाना वो आरज़ूओं के ख्वाब बुनना, वो क़िस्सा -ऐ -नाम तमाम लिखना मेरे शहर की हसीं फिज़ाओ , कहीं जो उन का निशान पाओ तो पूछना के कहाँ बसे वो , कहाँ है उन का क़याम लिखना ​ गयी रुतों में रुबाब अपना , बस एक यह ही तो मश्ग़ला था किसी के चेहरे को सुबह लिखना , किसी के चेहरे को शाम लिखना

Kabhi Kitabon Mein Phool Rakhna, Kabhi Darakhton Pe Naam Likhna Hamein Bhi Yaad Hai Aaj Tak Wo , Nazar Say Harf-Ae-Salam Likhna Wo Chand Chehray, Wo Behki Batein, Sulagtay Din The, Sulagti Ratein Wo Chote Chote Se Kaghazon Par, Muhabbaton Key Payaam Likhna Gulab Chehron Say Dil Lagana, Wo Chupkey Chupkey Nazar Milana Wo Arzuon Key Khwaab Bunna , Wo Qissa-Ae-Naam Tamaam Likhna Mere Shahar Ki Haseen Fizaoon, Kaheen Jo Un Ka Nishan Pao To Poochna Ke Kahan Basay Wo ,Kahan Hai Un Ka Qayam Likhna Gayee Ruton Mein Rubab Apna , Bas Ek Yeh Hi To Mashghala Tha

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pexels photo 701816 - दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

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दर्द के फूल 

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं

उस दरीचे में भी अब कोई नहीं और हम भी
सर झुकाए हुए चुप -चाप गुज़र जाते हैं

रास्ता रोके खडी है यही उलझन कब से
कोई पूछे तो कहें क्या की किधर जाते हैं

नरम आवाज़ भली बातें मोहज़्ज़ब लहजे
पहली बारिश में ही यह रंग उतर जाते हैं

Dard ke Phool  – Javed Akhtar

dard ke phool bhi khilate hain bikhar jaate hain
zaKhm kaise bhii hoon kuchh roz mein bhar jaate hain

us dariiche mein bhii ab koi nahin aur ham bhii
sar jhukaae hue chup-chaap guzar jaate hain

raastaa roke khaadi hai yahii ulajhan kab se
koi puuchhe to kahen kyaa ki kidhar jaate hain

narm aavaaz bhalii baate.n mohazzab lahaje
pahalii baarish mein hii ye rang utar jaate hain……

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एक तेरे आने से कितनी महक उठी है यह ज़िन्दगी

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एक तेरे आने से कितनी महक उठी है यह ज़िन्दगी ,
सच में , तेरे बिना कितनी अधूरी से थी ये ज़िन्दगी

तेरी एक मुस्कराहट से खिल उठती है यह ज़िन्दगी
तेरी आवाज़ से गूंज उठती है यह ज़िन्दगी

तेरा मासूम चहेरा , तेरी भोली अदाएं , तेरा गुन -गुनाना ,
हाय रब्बा , किस किस पर कुर्बान करू मेरी ये जिंदगी

देखती हूँ तुझमें मैं अपने आप को , तू भी मेरा ही साया
लगता है मेरा ही नया रूप लेकर आई है मेरी ही जिंदगी

 

Ek Tere Aane Se Kitani Mahek Uthi Hai Ye Zindagi,
Sach Mein, Tere Bina Kitani Adhuri Se Thi Ye Zindagi

Teri Ek Muskuraahat Se Khil Uthti Hain Yeh Zindagi,
Teri Aawaaz Se goonj Uthti Hai Yeh Zindagi,

Tera Maasoom Chahera, Teri Bholi Adaaye, Tera Gun-Gunaana,
Hayee Rabba, Kis Kis Par Kurbaan Karu Meri Yeh Zindagi

Dekhati Hoon Tujmein Main Apane Aap Ko, Tu bhi Mera Hi Saaya,
Lagata Hai Mera Hi Naya Roop Lekar Aai hai Meri hi Zindagi

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Urdu Hindi Shayari | Dil Daar ke Aansoo | Shayri Ghazal

Romantic Shayari - Apni nigahon se

Urdu Hindi Shayari

♥

Baazar-e-muhabbat me baha pyar ke aansoo
Hote hain yahan kharch khareedar ke aansoo

Behte hain shab-o-roz* muhabbat ki gali mien
Dil thaam ke bethe huwe dil-daar ke aansoo
(shab-o-roz = raat din)

Chhup jaate hain shabnam ki har ek boond se dab kar
Jo shab* ke andheroN mein bahe khaar* ke aansoo
(Shab = raat) (khaar = kante)

Aabid ki nigahoN mien ye naapaak ho lekin
Allah ko pyare hain gunehgaar ke aanoo

Kya kya n sitam qeis* pe laila ne kiye hain
Sehra me barste rahe dildar ke aansoo
(qeis = majnuN ka naam)

Seh seh ke sitam husn ke, dete hain duaaeN
Aashiq ke girebaan ke har taar ke aansoo

Woh chheen ke hansta raha muflis* ki muhabbat
AankhoN se jhalak te the magar haar ke aansoo
(muflis = gareeb)

Main bhi to ek insaan hun patthar to nahin hun
Behte hain meri aankh se bhi pyaar ke aansoo

“Sayyid” mein use haal sunaauN bhi to kyun kar
Mein dekh nahin sakta hun ghamkhwar ke aansoo

♥

shayri ghazal in urdu

بازارِ محبّت مے بہا پیار کے آنسو
ہوتے ہیں یھاں خرچ خریدار کے آنسو

بہتے ہیں شب و روز محبّت کی گلی مے
دل تھام کے بیٹھے ہوئے دلدار کے آنسو

چھپ جاتے ہیں شبنم کی ہر ایک بوند مے دب کر
جو شب کے اندھیروں مے بہے خار کے آنسو

عابد کی نگاہوں میں یہ ناپاک ہوں لیکن
اللہ کو پیارے ہیں گنہگار کے آنسو

کیا کیا نہ ستم قیس پے لیلیٰ نے کئے ہیں
صحرا مے برستے رہے دل دار کے آنسو

سہہ سہہ کے ستم حسن کے دیتے ہیں دعائیں
عاشق کے گریبان کے ہر تار کے آنسو

وہ چھین کے ہنستا رہا مفلس کی محبّت
آنکھوں سے چھلکتے تھے مگر ہار کے آنسو

میں بھی تو ایک انسان ہوں پتھر تو نہیں ہوں
بہتے ہیں میری آنکھ سے بھی پیار کے آنسو

“سیؔد” میں اسے حال سناوں بھی تو کیوں کر
میں دیکھ نہیں سکتا ہوں غمخوار کے آنسو

♥

shayri ghazal in hindi

बाजरे मुहब्बत में बहा प्यार के आंसू
होते हैं यहाँ खर्च खरीदार के आंसू

बहते हैं शब-ओ-रोज़* मुहब्बत की गली मे
दिल थाम के बैठे हुवे दिलदार के आंसू
(शब-ओ-रोज़ = रात दिन)

छुप जाते हैं शबनम की हर एक बूँद से दब कर
जो शब* के अंधेरों मे बहे खार* के आंसू
(शब = रात) (खार = कांटे)

आबिद की निगाहों में ये नापाक हों लेकिन
अल्लाह

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