shayarisms4lovers mar18 142 - Hindi Poem on Love

Hindi Poem on Love

आँखों मे प्यास हुआ करती थी, दिल में तुफान उठा करते थे, लोग आते थे गज़ल सुनने को, हम तेरी बात किया करते थे, सच समझते थे सब सपनो को, रात दिन घर में रहा करते थे, किसी विराने में तुझसे मिलकर, दिल में क्या फुल खिला करते थे, घर की दिवार सजाने की खातिर, […]

Continue Reading
pexels photo 592772 - आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

आँखें मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब

आँखें  मिलाओ ग़ैर से – मिर्ज़ा ग़ालिब कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही , सही क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही यह सुबह सुबह चेहरे की रंगत उतरी हुई कल रात तुम कहाँ थे बताना सही ,सही दिल ले के मेरा हाथ में कहती हैं मुझ से वो क्या लोगे इसका दाम बताना सही […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 125 - नए कवियों की शायरी पढ़िए

नए कवियों की शायरी पढ़िए

Poet – Kautilya Gaurav कहती सुनती बातों सी… जैसे गहरी मेरी रातों सी… ख़ामोशी से भरी भरी… ख़ाली मेरे हाथों सी… कभी कभी कहीं जो मिलती थी… ख़ामोशी सी रातों में… जाने कहाँ मुझसे गुम हुई… कुछ बातें तेरी बातों सी… Poet – Kautilya Gaurav दरिया सा एक सब्र का… बहता रहा मुझमें कहीं… बहोत […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 39 - आज की रात

आज की रात

आज की रात वो कह के चले इतनी मुलाक़ात बहुत है मैंने कहा रुक जाओ अभी रात बहुत है आँसू मेरे थम जाएं तो फिर शौक से जाना ऐसे मैं कहाँ जाओगे बरसात बहुत है वो कहने लगे जाना मेरा बहुत ज़रूरी है नहीं चाहता दिल तोडू तेरा पर मजबूरी है गर हुई हो कोई […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 52 - तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

तेरी खुशबू का एहसास – अक्स-ऐ-खुशबू हूँ उर्दू शायरी

अक्स -ऐ -खुशबू हूँ अक्स -ऐ -खुशबू हूँ बिखरने से न रोके कोई और बिखर जाऊं तो मुझे न समेटे कोई काँप उठती हूँ मैं इस तन्हाई में मेरे चेहरे पे तेरा नाम न पढ़ ले कोई जिस तरह ख्वाब मेरे हो गए रेज़ा-रेज़ा इस तरह से न कभी टूट के बिखरे कोई मैं तो […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 202 - ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

हम तो अकेले रहे हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ सदा चोट पर चोट खाता रहा मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ अकेले थे हम […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 149 - कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है

तुम ही को चाहते है तुम ही से प्यार करते है यही बरसो से आदत है और आदत कब बदलती है तुम को जो याद रखा है यही अपनी इबादत है इबादत जिस तरह की हो इबादत कब बदलती है कली का फूल बनना और बिखर जाना मुक़दर है यही कानून-ऐ-फितरत है और फितरत कब […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 56 - तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है

तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है तेरे मेहँदी लगे हाथों पे मेरा नाम लिखा है ज़रा से लफ्ज़ में कितना पैगाम लिखा है यह तेरी शान के काबिल नहीं लकिन मजबूरी है तेरी मस्ती भरी आँखों को मैंने जाम लिखा है मैं शायर हूँ ,मगर आगे न बढ़ पाया रिवायत से लबों […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 01 - हीर शायरी – वारिस शाह

हीर शायरी – वारिस शाह

लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी की मुक जाना सी वारिस शाह दा, लिखी रांझे नाम ये हीर हुंदी . वख रूह नालो रूह न हो सकदी , न दिल चो वख तस्वीर हुंदी . नशा अख दा इक वारी चढ़ जावे , पूरी इश्क़ दी फिर तासीर हुंदी . झूठा रब्ब नू तुस्सी केहन […]

Continue Reading
shayarisms4lovers June18 199 - हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला – “दाग़” उर्दू शायरी

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला – “दाग़” उर्दू शायरी

हर एक से कहते हैं क्या “दाग़ ” बेवफा निकला  तुम्हारे खत मैं नया एक सलाम किस का था न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किस का था वो क़त्ल कर के हर किसी से पूछते हैं यह काम किस ने किया है ये काम किस का था वफ़ा करेंगे निभाएंगे बात मानेंगे तुम्हें […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 12 - उर्दू ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़लें

मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने […]

Continue Reading
pexels photo 701816 - दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं – जावेद अख्तर

दर्द के फूल  दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं ज़ख्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं उस दरीचे में भी अब कोई नहीं और हम भी सर झुकाए हुए चुप -चाप गुज़र जाते हैं रास्ता रोके खडी है यही उलझन कब से कोई पूछे तो कहें क्या की किधर […]

Continue Reading
shayarisms4lovers June18 199 - एक तेरे आने से कितनी महक उठी है यह ज़िन्दगी

एक तेरे आने से कितनी महक उठी है यह ज़िन्दगी

एक तेरे आने से कितनी महक उठी है यह ज़िन्दगी , सच में , तेरे बिना कितनी अधूरी से थी ये ज़िन्दगी तेरी एक मुस्कराहट से खिल उठती है यह ज़िन्दगी तेरी आवाज़ से गूंज उठती है यह ज़िन्दगी तेरा मासूम चहेरा , तेरी भोली अदाएं , तेरा गुन -गुनाना , हाय रब्बा , किस […]

Continue Reading