2 Line Shayari #208, Dorh dorh ke khud ko

दौड़-दौड़ के खुद को पकड़ के लाता हूँ,
तुम्हारे इश्क ने बच्चा बना दिया है मुझे।

दुसरों की शर्तों से सुल्तान बनने से अच्छा,
खुद की खुशी से फकी़र बनना ज्यादा बेहतर है।

घर का दरवाजा इस अंदाज से खोला उसने,
कि जैसे मैं नहीं कोई और था आने वाला।

लोग औरत को फकत जिस्म समझ लेते हैं,
रूह भी होती है इसमें, ये कहाँ सोचते हैं।

रास्ते कहाँ खत्म होते हैं ज़िन्दगी के सफर में..
मंजिल तो वही हैं जहाँ ख्वाइशै थम जायें।

घर का दरवाजा इस अंदाज से खोला उसने,
कि जैसे मैं नहीं कोई और था आने …

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2 Line Shayari #207, Gardish to chahti thi tabahi

गर्दिश तो चाहती है तबाही मेरी मगर,
मजबूर है किसी की दुआओं के सामने।

काश एक ख़्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर,
वो आके गले लगा ले मेरी इज़ाजत के बगैर।

मिली हैं रूहें तो, रस्मों की बंदिशें क्या हैं,
यह जिस्म तो ख़ाक हो जाना है, फिर रंजिशें क्या है।

करनी हो पहचान अगर गमगीन शख्स की..
दोस्तों गौर से देखना वो मुस्कुराते बहुत है।

शायरी के शौक़ ने इतना तो काम कर दिया,
जो नहीं जानते थे उनमें भी बदनाम कर दिया।

महफ़िल में चल रही थी हमारे कत्ल की तैयारी,
हम पहुँचे, तो बोलें बहुत लम्बी उम्र …

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Yaadein Shayari in Hindi on Aapko Saanso Se Yaad Karte Hain

इंतज़ार तो हम भी किया करते हैं,
आपसे मिलने की आस किया करते हैं,
मेरी याद हिचक़ियो की मोहताज़ नही,
हम तो आपको सांसो से याद करते हैं..…

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मेहरबान होके बुलालो मुझे चाहो जिस भी वक़्त – मिर्ज़ा ग़ालिब

गुजरा वक़्त – मिर्ज़ा ग़ालिब

मेहरबान होके बुलालो मुझे चाहो जिस भी वक़्त
मैं गुजरा वक़्त नहीं हूँ के फिर लौट के आ भी न सकूँ

Mehrbaan hoke bulalo mujhe chahee jis bhi waqt
Main gujra waqt Nahi hoon Ke Phir laut ke aa bhi Na Sako


खाक हो जाएंगे यह जोश-ऐ -मोहब्त ग़ालिब
जले कोई मरे कोई , अँधेरा मेरी महफ़िल में

Khak Ho jaige Yeh josh-AE-Mohabt Ghalib
jale Koi Mare Koi, andhera Meri Mehfil Mein


सजदे तो सब ने किये तेरा नया अंदाज़ है
तूने वो सजदा किया जिस पर इश्क़ को नाज़ है

Sajde to Sab Ne …

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Faiz Ahmad Faiz Shayari | N Un Ki Rasm Naii Hai

Faiz Ahmad Faiz Shayari

♥

Yun hi hamenshaN ulajhti rahi hai zulm se khalq
N un ki rasm nayi hai n apni reet nayi

Yun hi hamenshaN khilaye hein ham ne aag mein phool
N un ki haar nayi hai n apni jeet nayi

♥

یوں ہی ہمیشہ الجھتی رہی ہے ظلم سے خلق
نہ ان کی رسم نئی ہے نہ اپنی ریت نئی
یوں ہی ہمیشہ کھلائے ہیں ہم نے آگ میں پھول
نہ ان کی ہار نئی ہے نہ اپنی جیت نئی

♥

यूँही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है न अपनी रीत नई

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तारिख-ऐ-वफ़ा – Urdu Shayari

तारिख -ऐ -वफ़ा

मुझे भी याद रखना जब लिखो तारिख -ऐ -वफ़ा
के हमने भी लुटाया है मोहब्बत में सकून अपना …

Tareekh-e-Wafa

Mujhe Bhi Yaad Rakhna Jab Likho Tareekh-e-Wafa
Ke humene Bhi Lutaya Hai Mohabbat Mein Sakoon Apna


साया कोई ख़याल से गुज़रा तो रो दिए हम

पूछा किसी ने हाल किसी का तो रो दिए हम
पानी में अक्स चाँद का देखा तो रो दिए हम

उड़ता हुआ ग़ुबार सर -ऐ -राह देख कर
अंजाम हम ने इश्क़ का सोचा तो रो दिए हम

बादल फ़िज़ा में आप की तस्वीर बन गई
साया कोई ख़याल से गुज़रा तो …

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अपनी गली में अपना ही घर ढूँढ़ते हैं लोग – फ़राज़

टूट कर  चाहेगा  मुझे

सोचा था के वो बहुत टूट कर  चाहेगा  मुझे “फ़राज़”
लेकिन “चाहा ” भी हम ने और टूटे भी हम

Toot Kar  Chahayga

SOCHA Tha ke wo bahut toot kar  CHAHAYGA  mujhe  “FARAZ”
Lekin “Chaha” bhi Humne aur toote bhi  HUM


शहर

अपनी गली में अपना ही घर ढूँढ़ते हैं लोग
यह कौन शहर का नक़्शा बदल गया

Shehar

Apni gali mein apna hi ghar dhoondte hain log,
Yeh kaun shehar ka naqsha badal gaya…

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तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है – परवीन शाकिर

यह एतराफ़ भी

तेरे बदलने के बावसफ भी तुझ को चाहा है
यह एतराफ़ भी शामिल मेरे गुनाहों में है …

Yeh Eytraaf bhi

Tere badalney k bawasf b tujh ko chaha hai
Yeh eytraaf bhi shamil mere gunnah mein hai…

 


तो हर बंदा खुदा होता

ज़रुरत तोड़ देती है ग़रूर-ओ-बेनीआजी को
न होती कोई मजबूरी तो हर बंदा खुदा होता .

To har banda khuda hota

zaroorat tod daiti hai gharoor-o-beniazi ko
na hoti koi majboori to har banda khuda hota.

Hindi and urdu shayari – Parveen Shakir ki Shayari – to har banda khuda hota

नया दर्द एक

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सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़

सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़

सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़ ,
रुकता तो सफर जाता ,चलता तो बिछड़ जाता ,

मयखाना भी उसी का था ,महफ़िल भी उस की ,
अगर पीता तो ईमान जाता ,न पीता तो सनम जाता ,

सजा ऐसी मिली मुझ को ,ज़ख़्म ऐसे लगे दिल पर ,
छुपाता तो जिगर जाता ,सुनाता तो बिखर जाता ……!!!

Samne Manzil Thi Aur Peeche Us Ki Aawaaz

Samne Manzil Thi Aur Peeche Us Ki Aawaaz,
Rukta To Safar Jaata,Chalta To Bicharr Jaata,

Maikhaana Bhi Usi Ka Tha,Mehfil Bhi Us Ki,
Agar Peeta …

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Yaqeen Hai Mujh ko Wo Laut Ayega

यक़ीन है मुझ को वो लौट आएगा

अभी तो इश्क़ मैं ऐसा भी हाल होना है
के अश्क़ रोकना तुम से मोहाल होना है

हर एक लब पर है मेरी वफ़ा के अफ़साने
तेरे सितम को अभी लाजबाब होना है

तुम्हें खबर ही नहीं तुम तो लूट जाओगे
तुम्हारे हिजर मैं इक लम्हा साल होना है

हमारी रूह पे जब भी अजब उतरें है
तुम्हारी याद को इस दिल की ढाल होना है

कभी तो रोयेगा वो भी किसी की बाहों मैं
कभी तो उस की हंसी को ज़वाल होना है

 

मिलेंगे हम को भी अपने नसीब की खुशियाँ
बस …

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