shayarisms4lovers June18 199 - Digital India hindi story

Digital India hindi story

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Motivational stories -डिजिटल इंडिया

“बापू ये डिजिटल इंडिया क्या होता है?” नन्ही सी मुन्नी ने अपने बापू से पूछी, जो की उसके पास ही बैठ कर रेडियो सुन रहे थे. और अमाचार में कोई बार-बार ‘डिजिटल इंडिया’ के बारे में बोल रहा था. मुन्नी लालटेन की टिमटिमाती लौ में पढ़ रही थी और बाल-मन ये शब्द सुन कर रोक न पाई और radio सुनते हुए बापू से पूछी.

“ये तो मुझे भी नहीं पता बिटिया, मगर सब लोग कह रहे है की अब mobile से ही सब कुछ होगा.” उसको समझाते हुए उसके बापू ने बोला- “और तुमको तो पता होगा तू तो स्कूल भी जा रही है. मास्टर जी से पूछ लेना.”

“ना बापू, स्कूल में तो अंग्रेजी पढ़ाते ही नहीं है और मास्टर जी तो कुछ बताते भी नहीं है. दिन भर ऑफिस में बैठे रहते है. उनको भी कुछ नहीं आता है.” बड़े ही मासूमियत से मुन्नी ने जवाब दिया.

“अच्छा बापू, हमारे यहाँ बिजली तो आती ही नहीं, तो mobile कैसे चलेगा.” मुन्नी ने फिर एक सवाल दागा.

“बेटी ये हमारे लिए नहीं है, जो बड़े-बड़े लोग होते है न, जो कारों से चलते है उनके लिए होता है.” उसके बापू ने फिर उसे समझाते हुए कहा.

“मैं भी बड़ा आदमी बनूँगी.” मुन्नी ने चहकते हुए कहा – “बापू मेरा भी नाम शहर में जो बड़े स्कुल होते है न उसमे लिखा दो, जिसमे जूते पहन कर जाते है और वो गर्दन में लगाते है, वो भी खरीद देना.”

उनसके बापू ने प्यार से उसके सर पर हाथ फिर और अपने मज़बूरी पर हँसते हुए कहा _”बेटा उसमे भी बड़े-बड़े आदमी के बच्चे पढ़ते है. हमलोग तो किसान है, तो हमलोग के लिए सरकार ने सरकारी स्कुल खोल रखा है.”

मुन्नी के सवाल

उस बाल-मन के मन से अभी सवाल ख़त्म नहीं हुई “हमलोग भी तो “इंडिया के ही है तो हमलोग के डिजिटल बने बिना इंडिया कैसे डिजिटल बन जाएगा?. हमलोग क्यों नहीं बड़े है ? हम क्यों नहीं बड़े स्कुल में जा सकते? हमारे यहाँ बिजली क्यों नहीं है? बापू ने ऐसा क्यों कहा ‘हम किसान है हमारे लिए सरकारी स्कुल ही है? और सरकारी स्कुल के मास्टर भी तो पढ़ाते है नहीं, आपस में बाते करते है और पेपर पढ़ते है.” उन्ही सब सवाल का जवाब अपने मन में खोज रही थी तभी उनसके माँ ने आवाज दिया.

“आ जाओ, आकर खाना खा लो नहीं तो मिटटी का तेल भी ख़त्म हो जाएगा तो अँधेरा में खाना पड़ेगा.”

“चल बिटिया खा ले और कल पढ़ लेना.” उसके बापू ने उसे उठते हुए कहा.

मुन्नी धिरे से उठी और लालटेन के लौ को धीमा कर दिया अभी कल भी तो पढना है.