कहानी उस पैरालाईज इंसान की जिसने कोटा को “कोचिंग सिटी” बनाया!

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Vinod Kumar Bansal

कोटा एक ऐसा शहर है जहाँ हर गली में आप सपने की उड़ान देख सकते है क्योकि हर साल दो लाख स्टूडेंट्स आइआइटी-मेडिकल के बड़े कालेजो में दाखिला पाने के लिए यहाँ आते है। आज कोटा को देश नहीं बल्कि दुनियाभर में जाना जाता है। पहले कोटा को औद्योगिक नगरी के नाम से जाना जाता था लेकिन एक शख्स के जूनून ने इसे कोचिंग सिटी यानी की शैक्षणिक नगरी बना दिया। वो शख्स चल नहीं सकता था लेकिन उसके सपने उड़ान लेते थे। नाम है वीके बंसल उर्फ़ विनोद कुमार बंसल – Vinod Kumar Bansal  जो की बंसल क्लासेस कोटा – Bansal Classes Kota के फाउंडर है।

कहानी उस पैरालाईज इंसान की जिसने कोटा को “कोचिंग सिटी” बनाया – Founder of Bansal Classes Kota  Vinod Kumar Bansal Biography

Vinod Kumar Bansal – विनोद बंसल का जन्म यूपी के झाँसी जिले में साल 1949 में हुआ। उनके पिता का नाम बीडी अग्रवाल और माता का नाम अंगूरी देवी था। पिता सरकारी नौकर थे लेकिन घर में पैसे अधिक नहीं थे। 1954 में पिता का ट्रान्सफर लखनऊ हो गया और वो भी यही आये और पढने लगे।

घर में लालटेन था तो पिता ने कहा की तुम टॉप करो तो घर में लाइट आ जाएगी बस इस बात ने जूनून डाल दिया और विनोद दिन-रात पढने लगे। कक्षा 6,7 और 8 लगातार टॉप करने के बाद उन्हें 372 रुपये की छात्रवृत्ति मिली जिससे लाइट भी लगी और टेबल फैन भी आया।

इसके बाद 12वीं अच्छे नम्बर आये तो बीएचयू में एडमिशन हो गया और फिर और फिर पहली नौकरी एक कंपनी में मिल गई कोटा में और वो कोटा आ गए।

बीमारी ने बनाया शिक्षक – Vinod Kumar Bansal Career

विनोद बंसल जब कोटा में एक केमिकल कंपनी में नौकरी कर रहे थे तब उन्हें शारीरिक समस्या होने लगी और उनके हाथ पांव कमजोर होने लगे। डॉक्टर से मिले तो उन्होंने कहा यह समस्या गंभीर है और आपका शरीर कुछ दिनों में काम करना बंद कर देगा अच्छा होगा आप कुछ और प्रोफेशन शुरू करे।

1983 में जब वो पूरी तरह से पैरालाइज हो गए तो डॉक्टर ने कहा की आप टीचिंग एट होम शुरू करो नहीं तो आप बोर हो जाओगे। बस तभी से कोटा में शुरू हुई बंसल क्लासेस और चल पड़ा आगे का सफ़र। शुरुआत में बिना किसी के नाम पढ़ा रहे थे लेकिन एक साल बाद इसे बंसल क्लासेस नाम दिया जो की आज दुनिया जानती है।

कोटा के बंसल क्लासेस की शुरुवात – Start of Bansal Classes Kota

विनोद बंसल कहते है की जब मैंने कोचिंग पढाना शुरू किया उस समय केवल एक बच्चा आता था और उसके बाद कई सारे बच्चे आने लगे लेकिन शरीर लगातार बिगड़ता जा रहा था। मैं पैसा भी कमाने लगा लेकिन शरीर कमजोर होता चला गया। धीरे धीरे बंसल क्लास में बच्चे आने लगे और स्टाफ भी बढ़ता चला गया।

बंसल क्लासेज की कहानी तब और रोचक बनी जब वहां से स्टूडेंट्स आइआइटी में टॉप करने लगे। डूंगराराम चौधरी, शितिकांत, अचिन बंसल जैसे टॉप करने वाले स्टूडेंट्स बंसल क्लास से ही निकले है। हालाँकि मुश्किलें बढ़ी और एक बार क्लास में पढाते पढ़ाते ही हार्ट अटैक आ गया और अस्पताल जाना पड़ा। ठीक हुए लेकिन अब दिमाग भी काम नहीं करता था।

फिर फिजियो करवाते रहे और सामान्य होने लगे और फिर क्लास में पहुच गए। उनके डॉक्टर्स कहते है की जब भी बंसल को होश आता वो कहते की उनकी क्लास लगवा दो बस जल्दी से जल्दी।

चालीस करोड़ का टैक्स- विनोद बंसल कहते थे की मेरे पास कई सारे हाईएस्ट टैक्स पेयर के सर्टिफिकेट है जो मुझे ख़ुशी देते है और मैंने एक साल चालीस करोड़ का टैक्स भी भरा है।

मुझे इनकम टैक्स वाले कहते थे की आप कुछ हमे दे दो और बाकी पैसा बचा लो लेकिन मुझे ईमानदारी से मिले पैसे में बेईमानी नहीं करनी थी। बंसल पहले ऐसे शख्स थे जिन्होंने कोटा में कोचिंग की अवधारणा दी और आज सैकड़ो कोचिंग है लेकिन सब बंसल को ही अपना गुरु मानते है।

बंसल आज हजारो करोड़ रुपये का एम्पायर हो चुका है। बंसल आज व्हीलचेयर से चलते है लेकिन उनके सपने और आँखो में क्लास लेने की चाहत आज भी है।

क्या कहते है बंसल-

बंसल ने कहा की मैंने केवल अपने काम को एन्जॉय किया और कभी पैसे के पीछे नहीं भागा। केवल वही किया जो मुझे अच्छा लगता था। लोग आत्महत्या कर लेते है लेकिन पता नहीं क्यों मैंने खुद के ऊपर कभी दया नहीं की और हमेशा झेलता चला गया और लोगो ने साथ दिया।