Motivational stories in hindi for boosting confidence

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काम में निरंतरता कैसे लाएं ( motivational stories in hindi )

कोई काम शुरू करने से जयादा important है उसमे निरतंरता. हम कोई काम start तो कर देते है मगर 2 या 3 या 5 दिन जाते-जाते थक जाते है. जो energy से काम शुरू किया वह energy ही खत्म.

हमारा मन कहने लगता है – छोडो यार अब नहीं करते है. क्या होगा कर के. कल से करेंगे. बहुत बोरिंग है अभी नहीं करेंगे. मन 10 तरह के बहाने बनाने लगता है. वह चाहता है कैसे भी इस काम को छोड़ दे. और हम अपने मन की बात मान भी लेते है और उस काम से अलग हो जाये है. फिर बदले में मिलती है ‘असफलता’.

Motivational story in hindi – इसको एक कहानी से समझते है –
चंदन का exam शुरू होने में अब मात्र 2 महिना समय बच गया था. कितने ही दिन से वह पढाई करने के लिए टाइम टेबल बनाने के लिए सोच रहा था. आज कल करने के चक्कर में अभी तक नहीं बना पाया और ऐसे ही पढाई करता रहा. जिससे की तैयारी ठिक नहीं चल रही थी. exam धीरे-धीरे नजदीक आ रहा था. वह परेशान हो गया. वह सोच लिया वह आज ही टाइम टेबल बनायेगा और उसी के अनुसार पढाई करेगा.

जब वह टाइम टेबल बनाने बैठा तो देखा दो महीने में काफी सिलेबस कवर करना है. सभी सिलेबस को दो महीने के हिसाब से रूटीन बनाने लगा. उस दिन वह जोश में था. वह 12 घंटे रोज पढने का रूटीन बनाया. पहले –पहले दिन से बहुत जयादा मेहनत करने लगा.

पहला दिन बहुत ही अच्छा से पढाई किया दूसरा दिन भी लगभग टाइम टेबल से ही पढाई किया. तीसरा दिन लेट पढने बैठा और समय से पहले उठ गया. चौथा दिन 1-2 schedule मिस कर दिया. 5 वे दिन सोचा आज रेस्ट करते है जबकि टाइम टेबल में रेस्ट नहीं था. अगले दिन उसने टाइम टेबल देखने की हिम्मत ही नहीं की. उसका टाइम टेबल खत्म हो गया जिस जोश के साथ उसने शुरू किया था. वह खत्म हो गया. वह पुराने ढर्रे पर फिर से आ गया जहाँ से उसने शुरू किया था.

यह समस्या केवल पढाई के क्षेत्र में नहीं है. जीवन के हर क्षेत्र में है. चाहे वह बिजनेस हो, चाहे पढाई, चाहे खेकुद या हेल्थ हो. हर जगह यही समस्या है. हम जिस बिजनेस को करना चाहते है. उसे शुरू तो कर देते है मगर थोड़े ही दिन में loss होने या ग्राहक नहीं आने पर घबडा जाते है और उस से बहार आ जाते है.

हेल्थ में भी यही समस्या है. हर कोई चाहता है फिट रहना मगर एक्सरसाइज करना कोई नहीं चाहता है. पूछने पर पता चला की ‘किया था यार कोई फायेदा नहीं हुआ तो छोड़ दिया’. ये लोग ऐसे इन्सान है जो एक ही दिन योगा के सारे आसन कर लेंगे. एक ही दिन 5 km दौड़ लेंगे. और दुसरे दिन खत्म. एक ही दिन में इनको फिट होने होता है.

इसका उपाए बहुत ही सिंपल है. अगर आप पढने के लिए टाइम टेबल बना रहे है तो एक ही दिन बहुत जयादा टाइम मत दीजिये. छोटे से शुरुआत कीजिए. 1 या 2 घंटे ही दीजिये. एक वीक तक चलने दे. फिर आपको खुद लगेगा और पढू और आपका टाइम टेबल अच्छा चलने लगेगा. पढाई के साथ खेल-कूद और मनोरंजन को भी अहमियत दे.

अगर आप हेल्थ बना चाहते है तो एक ही दिन 5 km मत भागिए या जिम में जाकर 2 घंटे पसीना मत बहाइये. हेल्थ बनाना चाहते है तो आप तेज कदमो से चलने का आदत डालिए और फिर कुछ दूर दौड़ने का फिर कुछ और आगे. जिम में जाकर पहले हलके से शुरू करे 2-4 दिन ऐसे ही चलने दे फिर आपको खुद ही इंटरेस्ट आने लगेगा और यही नियम सभी क्षेत्रो में लागु होता है.

आप कोई भी काम शुरू करना चाह रहे है तो शुरुआत छोटे से करे. ऐसा करेंगे तो खुद ही इंटरेस्ट बढेगा. उस काम को करने में आनंद आने लगेगा. फिर आप उस काम को आगे बढ़ा सकते है.

शुन्य से शिखर पर

Inspiring story इन हिंदी –

मैं आज एक ऐसे लड़के की कहानी लिख रहा हूँ. जो शून्य से शुरू हुआ. यानी उसके घर में एक समय का खाना नहीं था. वह शिखर तक गया. यानी वह IIT क्वालीफाई किया और एक बढियां सी company में नौकरी ली. सफलता किसी की गुलाम नहीं है. यह उसी का हो जाता है जो इसे पाना चाहता है. और इसे पाने के लिए लगातार मेहनत भी करता है. Inspiring story – यह बताती है की अगर आप में लगन है तो रास्ते खुद-ब-खुद बनने लगते है. अँधेरा में होते हुए भी दूर कही उजाले की रौशनी दिखाई देती है.

बरसात का समय था. काली रातें, कडकती बिजली और तेज बारिस. उस समय सभी अपने घरो में टीवी का मज़ा ले रहे थे. या फिर सो गये थे. एक घर में अभी भी सभी लोग एक ही कमरे में बैठे थे. श्याम लेटे-लेटे सोने का प्रयास कर रहा था. उसकी माँ बड़े ही आशा भरी निगाहों से उसके बापू को देखी. उसके बापू लाचार चेहरा बनाए ख़ामोशी में ही बोल रहे थे – “क्या करू मैं, मैं थोड़ी चाहता हूँ की मेरा बेटा भूखा सो जाये.”

रात के 10 बज गये. बारिस धीमी हो गई. श्याम की माँ ने उसके बापू से बोली – “बारिस धीमी हो गई है. थोड़ी चावल ही किसी से मांग कर लाते तो उसको उबाल कर खा लेते.” Moral story in hindi -एक कहानी जो आपकी जीवन बदल देगी.

उसके बापू को पता था की दुकानदार तो उधार देंगे नहीं. और इतनी रात को अब कोई दरवाजा भी नहीं खोलेगा. उन्होंने बोला – “तुम चूल्हा जलाओ और पानी को उबालो तब तक मैं कही से चावल की व्यवस्था कर के आता हूँ.

श्याम भी कब से सोने का प्रयास कर रहा था. मगर पेट तो खाना मांग रहा था.

कहाँ सोने देगा खाली पेट. उसे तो बस भरा होना चाहिए. तुम्हारे पास है या नहीं ‘खाने के लिए’. उसे क्या मतलब है. श्याम भी अपने बापू का इतंजार करने लगा. अब शायद खाना मिल जाएगा.

उसकी माँ पानी उबालकर इतंजार करने लगी. 1 घंटे हुए……………..2 हुए………….3 घंटे भी हो गये. रात के 1 बज गये मगर उसके बापू नहीं आये. श्याम तो सो गया. भूख को हराकर. मगर उसकी माँ बैठी इंतजार करती रही. अब आए…..अब आए….. मगर कोई नहीं आया. उबला हुआ पानी ठंडा हो गया और उसके साथ भूख भी.

सुबह हुआ. पुरे गावं में खलबली मच गई. खोजने के लिए चारो तरफ लोग निकल पड़े. कोई कहता जानवर ले गये, कोई कहता नक्सल, तो कोई कहता गावं छोड़ कर चले गए. कही भी कुछ पता नहीं चला. एक रात में कहा गायब हुए कुछ पता नहीं किसी को भी.

10वी में पढने वाले श्याम के मन में विद्रोह भड़क उठा. वह अब समाज को सबक सिखने की सोचने लगा. समाज उसकी नजर में विलेन हो गया था उसके चलते उसके बापू उनलोग को छोड़ के चले गये. समाज में फैली अराजकता को हटाने के लिए नक्सल गतिविधियों में शामिल होने लगा. वह उनकी विचार धारा में विश्वास रखने लगा.

उसे अब यही लगता की हथियार ही समस्या का हल निकाल सकता है. लोगो को डरा कर धमकाकर ही कुछ किया जा सकता है. उसके माँ उसके विचारों से परेशान हो गई. और उसे समझाया – “किसी भी समस्या का अंत हथियार उठाना नहीं है. अगर तुम्हे समाज की बुराइयाँ ही दूर करना है तो शिक्षा से करो. शिक्षा हासिल करो. शिक्षा से ही समाज को सुधारो.”

मगर यह इतना आसान नही था. घर में एक वक्त का खाना नसिब नहीं हो रहा था. वह पढाई का खर्च कहाँ से उठा पाएंगे. सरकारी स्कुल का हाल भी किसी से छिपा नही है. ऐसी में पढाई करे भी तो कैसे? बढ़िया स्कुल मे गार्ड देखकर ही स्कुल के अंदर घुसने नहीं देगा. वहाँ तो टाई- बेल्ट और जूते वाले ही पढ़ सकते है. हवाई चप्पल और खाली पैर वाले नहीं.

किसी के कहने पर उसकी माँ उसे पटना ले गई “सुपर थर्टी” के आनंद जी के पास. जब वह वहाँ पहुची तो उन दोनों के पैर में चपल भी नहीं था. मगर गुरु को चपल और जूते से क्या वो तो टैलेंट देखते है. उन्होंने उसका टेस्ट लिया और अपने पास रख लिया उसका सब खर्च सुपर थर्टी उठाने लगा. आनंद जी उसको पढने लगे. श्याम भी पुरे मन से पढने लगा. उसे अपने दिन याद थे भूखी राते, नंगा पैर.

उसका मेहनत रंग लाया. वह IIT में सेलेक्ट हुआ और पढाई पूरी करने के बाद company join कर लिया.

एक अनोखी मोटिवेशनल कहानी

Motivational real story in hindi – एक अनोखी शक्ति की कहानी

यह एक ऐसी कहानी है जिसे आप पढ़ कर सोच में पड़ जायेंगे. मगर यह कोई चमत्कार नहीं है. यह शक्ति हर इन्सान में है. उसे कोई use करता है और कोई use नहीं करता मगर है सभी के अंदर. तो आइये कहानी पर आते है – अगर अच्छी लगे तो अपने लाइफ में भी use कर सकते है.

मैं अपने दादा के साथ अपने पुराने मिल में काम कर रहा था. दादा जी का पुराना मिल था मैं उनके काम में हाथ बटा रहा था.

उस मिल के बगल में ही बहुत किसान रहते थे. वह हमारा खेत बटाई पर लेते और उसमे फसल उगाते थे.

उस दिन एक घटना घटी. एक किसान की लड़की जो न तो अच्छा सा कपडा पहने थी और न ही बढ़िया से बोल पा रही थी. वह आकर मिल के दरवाजे पर खड़ी हो गई. उसे देखते ही दादा जी गुस्सा हो गये और जोर से चिल्लाते हुए बोले – “भाग जा यहाँ से, यहाँ आने के लिए किसने बोला तुमको. जल्दी भाग जाओ यहाँ से.”

“मम्मी ने 100 रूपये मांगे है वह बहुत बीमार है.” वह लड़की डर के भागने के बजाये अपनी बात रख दी. बिना डर के.

“जा यहाँ से भाग जा. मेरे पास पैसे नहीं है.” दादा ने फिर डाटते हुए बोले.

“जी जाती हूँ.” दरवाजे पर खड़ी हुई लड़की ने बोला और न तो वहाँ से भागी और न ही आगे गई. वही खड़ी रही.

दादा अपने काम में व्यस्त हो गये. उन्होंने उसे देखा नहीं. वह लड़की वही खडी रही और एक टक से उनको देखते रही. कुछ देर बाद दादा जी का उसपर फिर से ध्यान गया. डाट लगते हुए बोले – “तू गई नहीं अभी तक.”

“जी जाती हूँ.” लड़की ने बोला और वही खड़ी रही.

“तू ऐसी नहीं मानेगी. तुझे पिटाई करना ही पड़ेगा.” दादा जी गुस्से में थे और एक डंडा उठा कर उस बच्ची की तरफ चल पडे. ऐसा लगा जैसे आज उस लड़की को पिट कर ही छोड़ेंगे. वह आगे बढे और लड़की के पास पहुच गये.

लड़की ऐसी ही खड़ी रही. जैसी ही दादा जी उसके पास पहुचे उसने दादा के आँखों में देखा और जोर से बोली “मम्मी को 100 रूपये चाहिए ही. वह बहुत बीमार है. उनको रूपये की जरूरत है.

उस समय एक अजीब घटना घटा. दादाजी जो की उस लड़की को मारने के लिए गये थे. उन्होंने डंडा को निचे रख दिया और अपने पॉकेट से 100 रूपये निकल कर लड़की को दे दिया.

उसके जाने के बाद तक दादा जी उसे देखते रहे. एक 10 साल की किसान की बच्ची उनको हरा दी थी. ऐसी कौन सी शक्ति थी उसमे. डंडा उठाने वाला हाथ पैसा निकल कर दे दिया.

मैं भी वह खड़ा सारा चीज देखता रहा. एक लड़की अपने आत्मविश्वास और लगन से जीत हासिल किया. अनजाने में सही उसके लगन ने उसे जीत दिला दिया.