shayarisms4lovers June18 199 - पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की कुछ प्रेरणादायक किताबें…

पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की कुछ प्रेरणादायक किताबें…

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Pandit Jawaharlal Nehru Books

पंडित जवाहरलाल नेहरू आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। भारत के अलावा उन्हें पूरे विश्व में एक धर्मनिरपेक्ष, मानववादी, राजनीतिज्ञ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने विश्व शांति और समाजवादी आदर्शों के लिए भी जीवन भर अपनी आवाज बुलंद की।

पंडित नेहरू ने राजनीति में एक अच्छे राजनेता के रूप में तो अपनी अमिट छाप छोड़ी ही है। इसके अलावा उनकी प्रसिद्धि एक लेखक के रूप में भी हुई है। उन्होनें साहित्य का भी अच्छा अनुभव था।

पंडित नेहरू ने अपनी दूरदर्शी सोच और नेक विचारों से कई पुस्तकों की रचनाएं की थी। काफी व्यस्त होने के बाबजूद भी वे किताबें लिखने के लिए अलग से समय निकाल लिया करते थे। उन्होनें कुछ किताबें जेल में भी लिखी हैं।

पंडित नेहरू द्धारा लिखी किताबें- विश्व इतिहास की झलकियां, आत्मकथा, और भारत की खोज को क्लासिक का दर्जा भी हासिल है।

इसके अलावा भी पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कई और किताबों की रचना की हैं। जिनसे आज की पीढ़ी प्रेरणा ले सकती है। उनकी कुछ प्रमुख किताबों के बारे में हम नीचे उल्लेख कर रहे हैं।

पंडित जवाहर लाल नेहरू जी की कुछ प्रेरणादायक किताबें – Pandit Jawaharlal Nehru Books

भारत की खोज/हिन्दुस्तान की कहानी (The Discovery of India)

जवाहर लाल नेहरू की किताब भारत की खोज उनकी अंग्रेजी में लिखी पुस्तक डिस्कवरी ऑफ इंडिया का हिंदी में अनुवाद है। उनकी इस किताब ने नेहरू की लोकप्रियता के अलग प्रतिमान रचे हैं।

डिस्कवरी ऑफ इंडिया किताब को पंडित नेहरू ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान साल 1944 में अहमदनगर के किले में अपने 5 महीने के करावास के दिनों में लिखा था। उनकी यह किताब 1946 में प्रकाशित हुई थी।

आपको बता दें कि पंडित नेहरू ने अपनी इस किताब में सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर भारत की आजादी तक विकसित हुई भारत की बहुवविध समृद्ध संस्कृति, धर्म और जटिल अतीत को वैज्ञानिक दृष्टि से विलक्षण भाषाशैली में बयान किया है।

इस किताब पर आधारित भारत एक खोज नाम से एक टेलीविजन शो भी बनाया गया था जो कि दर्शकों द्धारा खूब पसंद किया गया था।

वहीं महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के शब्दों में

”इस पुस्तक से एक महान देश के गौरवशाली अतीत और आध्यात्मिक परंपराओं की समझ हासिल होती है”

वहीं 6-7 दशक पहले पंडित नेहरू द्धारा लिखी गई यह किताब आज भी उन सभी के लिए प्रासांगिक है जो इस देश के राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास को एक ऐतिहासिक क्रमबद्धता में जानना, समझना चाहते हैं।

पिता के पत्र पुत्री के नाम – (Letters from a Father to his Daughter)

हर पिता अपनी बेटी को सीख देता है। लेकिन देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरू का अपनी बेटी इंदिरा प्रियदर्शनी को सीख देने का अंदाज बेहद निराला था। पंडित नेहरू ने अपनी बेटी इंदु के कई सवाल जो कि वे अपने पिता से अक्सर किया करती थी।

सवाल जैसे कि यह संसार कैसे बना? तरह-तरह के जीव कैसे बने? मनुष्यों की सभ्यता कैसे विकसित हुई? अलग-अलग राष्ट्र, धर्म और जातियां कैसे बनीं? आदि के जबाव पत्रों द्दारा दिए। जिन्हें आपको भी जरूर पढ़ना चाहिए।

आपको बता दें कि पंडित नेहरू ने साल 1928 को नैनीताल की जेल से लिखे अपने पत्रों के माध्यम से 10 साल की नन्हीं इंदिरा को कई बड़ी सीख भी दी।

उन्होनें अपनी पुस्तक पिता के पत्र पुत्री के नाम में लिखा कि – हम जब साथ थे तो देश-दुनिया के बारे में बहुत सारी बातें कीं। लेकिन संसार बहुत बड़ा है और रहस्यों से भरा है।

इसलिए हममें से किसी को भी ये नहीं सोचना चाहिये कि हम सब कुछ सीखकर बहुत बुद्धिमान हो गए हैं। सीखने को हमेशा बहुत कुछ बचा रहता है। इसके अलावा ऐसी ही कई और भी बातें पंडित नेहरू ने अपनी इस किताब पिता के पत्र पुत्री के नाम में दर्ज की हैं।

आपको बता दें कि यह नेहरू द्धारा लिखी मशहूर किताबों में से एक है। नेहरू की जी यह किताब नवंबर, 1929 में प्रकाशित हुई थी।

विश्व इतिहास की झलक (ग्लिंप्सेज ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री) – (Glimpses of World History) 1933

पंडित नेहरू की यह पुस्तक उनकी मशहूर पुस्तकों में से एक है। पंडित नेहरू ने इस किताब को साल 1933 में लिखा था। यह पुस्तक नेहरू की पुस्तक ग्लिंप्सेज ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री का हिन्दी अनुवाद है।

आपको बता दें कि  1931  में नए साल के दिन, जवाहरलाल नेहरू ने अपनी बेटी इंदिरा के लिए दुनिया के इतिहास बारे में बताने के लिए पत्रों की एक उल्लेखनीय श्रृंखला शुरू की थी।

उस समय इंदिरा गांधी महज 13 साल की थी। वहीं इसके अगले तीस महीनों में, नेहरू ने इस सीरीज में करीब 200 पत्र लिखे, जो कि बाद में विश्व इतिहास की झलक (ग्लिंप्सेज ऑफ़ वर्ल्ड हिस्ट्री) के रुप में प्रकाशित किए गए।

अपने मनोरम भाषा शैली के साथ, पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस पुस्तक को जेल में अपनी दूरदर्शी और काल्पनिक सोच के साथ लिखा। नेहरू ने इस किताब की रचना  उस दौरान की, जब उनके पास कारावास में जानकारी जुटाने के लिए कोई भी अन्य पुस्तक नहीं थी या फिर दूसरा कोई सोर्स नहीं था।

ये किताब पूरी तरह काल्पनिक और नेहरू के विचारों पर आधारित है। विश्व इतिहास की झलक पुस्तक में नेहरू ने अपने अनुभव के आधार पर ग्रीस और रोम से चीन और पश्चिम एशिया तक साम्राज्यों और सभ्यताओं के उदय और पतन के बारे में बताने की कोशिश की है।

इसके अलावा अशोक और चंगेज खान, गांधी और लेनिन जैसे महान योद्धाओं, युद्ध और क्रांति और लोकतंत्र का भी इस किताब में बखान किया गया है।

फिलहाल विश्व इतिहास की झलक में नेहरू ने अपने दूरदर्शी नजरिए से मानव जाति के इतिहास की व्यापक व्याख्या की है।

मेरी कहानी – An Autobiography: Toward Freedom – 1936

भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने अपनी पुस्तक मेरी कहानी/ मेरी आत्मकथा ( एन ऑटोबायोग्राफी) में अपनी आत्मकथा के बारे में लिखा है। उन्होनें इस पुस्तक की रचना साल 1936 में की थी। आपको बता दें कि इस किताब की रचना पंडित नेहरू ने अहमदनगर जेल में  जून 1934 से फरवरी 1935 तक की थी।

नेहरू जी की “मेरी आत्मकथा”  पुस्तक के बारे में भारत के पहले उपराष्टपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का मानना था कि उनकी आत्मकथा पुस्तक में आत्मकरुणा और नैतिक श्रेष्ठता को जरा भी प्रमाणित करने की चेष्टा किए बिना उनके जीवन और संघर्ष की कहानी बयान की गयी है।

आपको बता दें कि नेहरू जी की यह पुस्तक सबसे मशहूर और सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताबों में से एक है।

इन किताबों के अलावा भी नेहरू जी ने राजनीति से दूर, इतिहास के महापुरुष और राष्ट्रपिता जैसी कई किताबों की रचनाएं की है। जिन्होनें बाद में काफी प्रसिद्धि हासिल की। नेहरू जी की किताबों से न सिर्फ ढेर सारी जानकारी जुटाने में मद्द मिलती है, बल्कि जिंदगी के लिए अच्छी सीख भी मिलती है। नेहरू जी के प्रभावशाली लेखन का हमेशा सम्मान किया जाएगा।

पंडित जवाहरलाल नेहरू जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहित किया है। इसलिए उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता कहा जाता है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अगुवाई में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने आजादी की लड़ाई में अपनी अहम भूमिका निभाई।  वे स्‍वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे,और एक अच्छे लेखक भी।

उन्हें बच्चों से अत्याधिक प्रेम और स्नेह था। इसलिए बच्चे उन्हें “चाचा नेहरू” – Chacha Nehru के नाम से पुकारते हैं। वहीं इसी वजह से उनकी जयंती (14 नवंबर ) को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।