क्या है मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और किसानों के लिए क्यों है जरूरी ?

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Soil Health Card Scheme Information

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को लाभ पहुंचाने के मकसद से कई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की है। कोई भी वर्ग ऐसा नहीं है जिसे मोदी सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच रहा हो। मोदी सरकार की तमाम योजनाओं में से एक है मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जिसकी आज हम अपने इस लेख में बात करेंगे।

क्या है मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और किसानों के लिए क्यों है जरूरी? – Soil Health Card Scheme Information

यह योजना भारत सरकार किसानों के भले के लिए लॉन्च की है। दरअसल कई किसान ऐसे भी हैं जो अपने अनुभव से फसल तो उगा लेते हैं लेकिन अच्छी उपज नहीं होने की वजह से उन्हें इसका ज्यादा फायदा नहीं मिल पाता।

क्योंकि कई बार वे जानकारी नहीं होने की वजह से सही फसल का चुनाव नहीं कर पाते, या फिर उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं होता कि फसल की अच्छी पैदावार के लिए उनके खेत की  मिट्टी में कौन सी खाद ज्यादा चाहिए या फिर किस खाद का कम इस्तेमाल होगा।

और मिट्टी की उर्वरता शक्ति को बढ़ाने के बारे में भी किसानों की सही जानकारी नहीं होने से वे ज्यादा मुनाफा नहीं कमा पाते जितना कि वे कमा सकते हैं।और तो और कई बार इसकी वजह से उन्हें भारी नुकसान भी झेलना पड़ता है।

जिसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों के कल्याण के लिए  फरवरी, 2015 में  मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना लॉन्च की है। इस योजना के तहत सरकार किसानों के लिए एक सोइल कार्ड जारी करती है। जिसके तहत किसान अपने खेत की मिट्टी की टेस्टिंग करा सकते हैं और इसके बाद वे अपने खेत से फसल की अच्छी पैदावार कम लागत में ही प्राप्त कर सकते हैं।

आपको बता दें कि सरकार की तरफ से जारी किए गए सोइल हेल्थ कार्ड में किसानों की जमीन में किस तरह की मिट्टी है, इसकी पूरी जानकारी होती है। इसके साथ ही इस कार्ड में यह भी जानकारी होगी कि अधिकतम लाभ पाने के लिए किसानों को किसी मिट्टी में फसल पैदा करनी चाहिए।

इसके साथ ही इस कार्ड में किसानों के लिए ये भी सुझाव दिए जाएंगे कि अच्छी उपज के लिए किसानों को कौन-कौन से उपाय करना चाहिए।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इस योजना के तहत  3 साल के अंदर भारत में 14 करोड़ किसानों को यह कार्ड करने का उद्देश्य है।

जिससे किसानों को कम कीमत में अच्छी पैदावार मिल सके। इसलिए यह योजना किसानों के लिए काफी जरूरी और फायदेमंद योजना है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड में किन-किन चीजों को शामिल किया जाता है ?

मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड योजना के तहत एक मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किया जाता है। इस स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी के बारे में क्या-क्या जानकारी होती हैं। चलिए इसके बारे में बताते हैं –

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड में मिट्टी की गुणवत्ता के बारे में बताया जाएगा। इसके साथ ही ये भी बाताया जाएगा कि कौन सी गुणवत्ता वाली मिट्टी से अच्छी उपज होगी। और मिट्टी के लिए कौन सी खाद उपयुक्त होगी इसकी जानकारी भी इस कार्ड में दी जाएगी। इसके साथ ही मिट्टी की कार्यात्मक विशेषताओं के बारे में इस कार्ड में जानकारी दीजाएगी।
  • मृदा स्वास्थ कार्ड में पानी की सामग्री की जानकारी समेत मिट्टी में कई तरह की पोषक तत्व को भी शामिल किया जाएगा।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड में इस बात की जानकारी तो दी ही जाएगी कि किस तरह की मिट्टी का इस्तेमाल करना फसल की अच्छी उपज के लिए बेहतर होगा। इसके साथ ही मिट्टी के अतिरिक्त गुणों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड में किसानों को मिट्टी की खामियों को सुधारने के उपाय भी बताए जाएंगे।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड में किसान का नाम, पता, मोबाइल नंबर तथा सैंपल नंबर होगा जिसके आधार पर नमूने पेश किए जाते हैं।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की क्या आवश्यकता है ? – What is the requirement of Soil Health Card scheme?

मोदी सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत देश के किसानों के लिए की है। यह योजना उन किसानों के लिए बेहद जरूरी है कि जो किसान खेती तो कर रहे हैं लेकिन इसकी उन्हें सही से जानकारी नहीं होने की वजह से उन्हें कई बार भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है।

आपको बता दें कि देश में अशिक्षित किसानों की संख्या ज्यादा है जिन्हें अपने खेत की मिट्टी और फसलों के बारे में उचित जानकारी नहीं है। इसी वजह से भारत सरकार ने इस योजना की शुरुआत की है ताकि किसानों को उनके खेत की मिट्टी के बारे में उचित जानकारी हासिल हो सके और अच्छी पैदावार हो सके।

इस योजना के माध्यम से सरकार देश के सभी खेतों की मिट्टी के बारे में मूल्यांकन करेगी जिससे देश की आर्थिकी को भी बढा़वा मिलेगा।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मुख्य विशेषताएं – Highlights of the Soil Health Card Plan

मृदा सुवास्थ कार्ड योजना, किसानों के हित के लिए शुरु की गई योजना है। इसके तहत किसानों को कई तरह के फायदे पहुंचते हैं । इस योजना की कई विशेषताएं हैं जिनके बारे में नीचे लिखा गया है –

  • मोदी सरकार की इस योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा किसानों को देने का उद्देश्य है। इसलिए इसके तहत करीब 14 करोड़ किसानों को कवर किया जा रहा है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की पहुंच देश के हर राज्यों के कोने-कोने तक बनाई जाएगी ताकि कोई भी इस योजना के लाभ से वंचित नहीं रह सके।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की सबसे खास बात यह है कि किसानों के लिए एक स्वास्थ्य कार्ड जारी करता है, जिसमें किसानों को एक रिपार्ट दी जाएगी। इस रिपोर्ट में किसानों के खेत की मिट्टी के बारे में पूरी जानकारी होगी। जैसे कि मिट्टी की गुणवत्ता, प्रकार  और कौन सी मिट्टी किसानों के खेत के लिए उपयुक्त रहेगी।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जो भी किसान शामिल होंगे, उन किसानों को हर 3 सालों में अपने खेत को मिट्टी का कार्ड मिल जाएगा।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के उद्देश्य – Purpose of Soil Health Card Scheme

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना एक ऐसी योजना है जिसके तहत किसानों को अधिकतम लाभ पहुंचाने की गई है। इस योजना के माध्यम से सरकार देश के कोने-कोने के  किसानों की मिट्टी की जांच कर उसे बेहतर बनाने की कोशिश में जुटी हुई है।

इससे न केवल किसानों को फसल की अच्छी पैदावार से अच्छा मुनाफा होगा बल्कि देश की आर्थिकी भी मजबूत होगी। आपको बता दें कि सरकार इस योजना के तहत देश के 14 करोड़ किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जा रहे हैं। इन सोइल हेल्थ कार्ड के माध्यम से किसान जहां अपने खेत की मिट्टी की टेस्टिंग करवा सकेंगे।

इसके साथ ही इससे किसानों को मिट्टी में पोषक तत्वों के बारे में भी उचित जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके कार्ड के माध्यम से किसान अच्छी उपज के लिए मिट्टी में उपलब्ध कई खामियों को भी दूर कर सकेंगे और मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाने और इसकी उत्पादकता बढ़ाने में भी मद्द मिलेगी। चलिए आपको बतातें हैं इस योजना के मुख्य उद्देश्यों के बारे में –

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मुख्य मकसद किसानों को मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में जानकारी देना और मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाना है ताकि अच्छी फसल की पैदावार हो और उत्पादकता में बढ़ावा लाना है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उद्देश्य 3 साल में एक बार देश के सभी खेतों का मिट्टी स्वास्थ्य स्तर का मूल्यांकन करने का है ताकि मिट्टी में पोषक तत्वों की कमियों को चिन्हित कर जरूरी सुधार किया जा सके।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मकसद यह भी है कि, भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय कृषि विद्यालयों (SAUs) की क्षमता को बढ़ावा देना और कृषि विज्ञान के छात्रों को शामिल करके मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओ के क्रियाकलाप को सशक्त बनाना है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मुख्य उ देश के हर राज्यों में मिट्टी के नमूने के लिए मानकीकृत प्रक्रियाओं के साथ मृदा उर्वरता संबंधी समस्याओं का पता लगाना और विश्लेषण करना भी है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मकसद पोषक प्रबन्धन परम्पराओं को बढ़ावा देने के लिए जिला और राज्य स्तरीय कर्मचारियों के साथ-साथ प्रगतिशील किसानों की क्षमता का निर्माण करना भी है।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों के इस्तेमाल के लिए जागरूक करना और नए प्रयोगों द्धारा खेती खेती करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा खेती की अच्छी पैदावार में किसानों की मद्द करना भी है।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम के लाभ – Benefits of Soil Health Card Scheme

मृदा स्वास्थ्य कार्ड स्कीम के तहत देश के किसानों को बड़े स्तर पर लाभ पहुंचाया जा रहा है जो कि नीचे लिखे गए हैं –

  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना मुख्य रूप से किसानों के लिए चलाई गई योजना है। इसके तहत किसानों के खेतों की मिट्टी की पूरी तरह से जांच की जाएगी और इसकी रिपोर्ट किसानों को दी जाती है। हर तीन साल में एक बार किसानों को मिट्टी की जांच का पूरी विवरण दिया जाता है जिससे किसानों को यह पता लगाने में आसानी होती है कि उन्हें अपने खेत में किस फसल की पैदावार करनी चाहिए जिससे उन्हें ज्यादा से ज्यादा मुनाफा हो सके और वे कैसे गलत फसल को उगाने से होने वाले नुकसान से बच सकते हैं।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि सरकार की तरफ से अथॉरिटी नियमित आधार पर किसानों के खेत की मिट्टी की जांच करती है। जिसमें मिट्टी की लवणीयता, क्षारीयता और अम्लीयता की जांच शामिल है। आपको ता दें कि हर 3 साल में किसानों को मिट्टी की जांच से संबंधित रिपोर्ट सौंपी जाएगी। जिससे किसान मिट्टी उत्पादकता को बढ़ाकर फसलों से अच्छा मुनाफा कमा सकें। इसके साथ ही नियमित जांच होने से किसानों को लंबे समय तक मिट्टी को स्वस्थ रखने का रिकॉर्ड पाने में भी मद्द मिलेगी।
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का एक फायदा यह भी है कि सरकार लगातार मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाने की कोशिश करने के लिए प्रयासरत है। इसके साथ ही सरकार किसानों को उनके खेत की मिट्टी में सुधारात्मक उपाय भी बता रही है। जिससे किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में काफी हद तक फायदा पहुंचा है। इस तरह से मोदी सरकार की यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।
  • यही नहीं मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी किसानों को काफी फायदा पहुंचा रहा है। इसके माध्यम से न सिर्फ किसान अपने खेत की मिट्टी के बारे में जानकारी हासिल करता है बल्कि फसलों की अच्छी पैदावार के लिए भी कोशिश करता है।
  • इस योजना के तहत मिलने वाले हेल्थ कार्ड से किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि इससे उन्हें अपने खेत की मिट्टी में होने वाली कमी के बारे में जानकारी हासिल होती है, जिससे किसानों को समझने में सहायता मिलती है कि उन्हें किस फसल का निवेश करना चाहिए और किस पर नहीं। इसके साथ ही इस कार्ड की सहायता से किसानों को यह भी पता लगता है कि किसानों के खेत की मिट्टी को किस खाद की जरूरत है जिससे वे अच्छी फसल की उपज कर सके और मुनाफा कमा सके।
  • इस स्कीम के तहत मिट्टी के प्रकार के बारे में रिसर्च की जाती है, इसके साथ ही विेशेषज्ञों द्धारा इसमें जिन-जिन सुधारों की जरूरत होती है उसे उपलब्ध करवाना है। इसके साथ ही इसमें अगर कोी कमी है तो उसे पूरा करना भी है।

कैसे काम करती है मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना – How So Soil Health Card Plans Work

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत किस तरह किसानों की मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं और किस तरह मिट्टी की जांच की जाती है। इसके अलावा इस योजना के तहत किए जाने वाली सभी कामों के बारे में आइए जानते हैं –

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जो किसानों के खेतों की मिट्टी के जो सेंपल्स लिए जाते हैं। उन सेम्पल्स को अथॉरिटी सबसे पहले इकट्ठा करते हैं उसके बाद मिट्टी की जांच होती है।

इसके बाद लिए गए सैम्पल्स को अथॉरिटी जांच के लिए लैब में भेजती है। वहीं मिट्टी की टेस्टिंग के बाद ही रिपोर्ट तैयार की जाती है।

मिट्टी की जांच के बाद, जानकार जांच के परिणाम का विश्लेषण करते हैं।

इसके बाद जांच करने वाली टीम मिटटी के सैंपल की  कमजोरी और उसमे जो तत्व नहीं होते है उसके बारे में पता लगया जाता है।

वहीं अगर जांच के दौरान मिट्टी में कुछ कमी पाई जाती है तो उसके लिए उसमे सुधारत्मक उपाय के लिए भी सुझाव दिए जाते हैं जबकि इसके लिए एक लिस्ट तैयार की जाती है।

इसके बाद सरकार किसानों के लिए साइल कार्ड में फ़ोर्मेंटेड तरीके से पूरी जानकारी दाल देगी यह जानकारी ऐसे तरीके से दी जाएगी जिससे किसान इसे आसानी से और उसे सरल तरीके से अपना भी सके।

आपको बता दें कि किसानों की मिट्टी के नमून के लिए अथॉरिटी जो रिपोर्ट तैयार करती है। उन रिपोर्ट्स को एक-एक करके किसान के नाम के साथ ऑनलाइन अपलोड किया जाता है।

जिससे की किसान अपने मिटटी की रिपोर्ट जल्द से जल्द देख सकें इसके साथ ही किसानों के मोबाइल पर भी इसकी जानकारी दी जाती है। इसके अलावा किसान ऑनलाइन अपने मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड (Soil Health Card) को सामने दिए हुए लिंक पर देख सकते हैं –

https://soilhealth.dac.gov.in/

बाद में किसानों को मृदा स्‍वास्‍थ्‍य कार्ड की हार्ड कॉपी को उनके  घरों तक पहुँचाया जाता है।

इस तरह से इस योजना के तहत काम होता है जिसके बाद किसानों को उनके खेत की मिट्टी के बारे में उचित जानकारी हासिल होती है और उन्हें अपनी मिट्टी के हिसाब से खेतों में उपज करने में मद्द मिलती है।

मृदा स्वास्थ्य योजना का बजट के बारे में जानकारी – Information about the Soil Health Card Scheme

मृदा स्वास्थ्य कार्ड के लिए मोदी सरकार ने 568 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की है। आपको बता दें कि साल 2016 मे केन्द्रीय बजट में देश के हर राज्यों के हेल्थ कार्ड बनाने के लिए और मिट्टी के सैंपल के लिए लैब्स के सप अप के लिए 100 करोड़ रुपए की राशि आवंटित की गई  है।

आपको बता दें कि इस योजना के तहत 14 करोड़ सोइल हेल्थ कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन शुरुआती दौर में यह योजना काफी धीमी गति से काम कर रही थी जिसकी वजह से साल 2015 और 2016 में 84 लाख सोइल हेल्थ कार्ड जारी करने के लक्ष्य के मुकाबले, 2015 में महज 34 लाख ही सोइल हेल्थ कार्ड जारी किए गए थे।

वहीं इस स्कीम के तहत देश के सभी राज्यों के खेतों की मिट्टी की जांच करना और खेतों की उपज क्षमता को बढ़ावा दिया जाना था लेकिन जब इस स्कीम की शुरुआत हुई थी, उस समय तक अरूणाचल प्रदेश, गोवा, गुजरात, हरियाणा प्रदेश, केरल, मिजोरम, सिक्किम, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल में एक भी सोइल हेल्थ कार्ड जारी नहीं किया गया था।

वहीं इसमें 2016 तक 1.12 करोड़ की बढ़ोतरी की जानी थी। अगर हम फरवरी , 2016 की बात करें तो 104 लाख मिट्टी के सैंपल के लक्ष्य के मुकाबले राज्यों में 81 लाख मिट्टी के सैंपल की सूचना दी गई और 52 लाख मिट्टी का परीक्षण किया गया।

वहीं अब भारत सरकार की इस योजना का मकसद14 करोड़ सोइल हेल्थ कार्ड बांटना है।

इसके साथ ही आपको ये भी बता दें कि मृदा स्वास्थ कार्ड योजना के तहत सरकार मिट्टी की जांच  के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए सरकार ने हाल ही में मृदा मैनेजमेंट प्रोग्राम भी शुरु किया है। जिससे फसल की पैदावार बढ़ाने में मद्द मिलेगी।

वहीं इसका मुख्य मकसद भूमि के पोषक तत्व का सही से इस्तेमाल करना है जिससे जमीन की प्रजनन क्षमता में बढ़ोतरी की जा सके।

इसके साथ ही इस योजना के तहत मिट्टी की जांच के लिए ज्यादा से ज्यादा लैब स्थापित किए जा रहे हैं। औ किसानों के प्रशिक्षण के लिए करीब 20 ट्रेनी की भर्ती की जाएगी।

आपको बता दें कि इस योजना को सफल बनाने के लिए और उर्वरक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने कृषि विभाग के साथ मिलकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड वेब पोर्टल की भी शुरुआत की थी।

यह वेबपोर्टल एक वेब आधारित एप्लीकेशन है जिसमें मिट्टी के सैम्पल के रजिस्ट्रेशन, मिट्टी की जांच का रिपोर्ट कार्ड, वहीं मिट्टी की जांच में कमी पाई जाने पर एसटीसीआर और जीएफएआर के आधार पर उर्वरकों के सुझाव समेत मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में सुझावों के बारें में जानकारी उपलब्ध है।

आप भी अगर मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का फायदा उठाना चाहते हैं तो आप भी इस वेवपोर्टल https://soilhealth.dac.gov.in/के माध्यम से ये सभी जानकारी बड़ी आसानी से हासिल कर सकते हैं।

इसके अलावा इसके अन्य पोर्टल में फर्टिलाइजर क्वालिटी कंट्रोल सिस्टम और पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम का इस्तेमाल उर्वरक गुणवत्ता नियंण लैब्स द्धारा किया जाता है।

इस तरह मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का लोग बड़े स्तर पर फायदा ले सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्धारा शुरु की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना काफी सराहनीय योजना है। इससे न सिर्फ देश के किसानों का भला होगा बल्कि देश की आर्थिकी को भी मजबूती मिलेगी।

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