shayarisms4lovers June18 199 - Story for Kids in Hindi | एक फूंक की दुनियां

Story for Kids in Hindi | एक फूंक की दुनियां

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एक गाँव में एक बहुत बड़े त्यागी संत रहा करते थे| दिन भर भगवान का भजन करते और जो कुछ भी गाँव वालों से मिलता उस से अपना भरण-पोषण कर दिन-रात भगवान् की भक्ति में लीन रहते| गाँव भर में उनका बहुत मान सम्मान था| कभी-कभी गाँव वाले अपनी समस्याओं को लेकर उनके यहाँ आते और अपनी समस्याओं का हल पाकर प्रसन्न मन से जाते| संत के इस जीवन से एक दिन एक व्यक्ति प्रसन्न हो गया और संत का शिष्य बन गया| व्यक्ति पढ़ा-लिखा था अतः कुछ ही वर्षों में वह वेद विज्ञान का ज्ञाता हो गया और उसने गाँव वालों को व्याख्यान देना शुरू कर दिया|

धीरे-धीरे बहुत से व्यक्ति उसके पास आने लगे| संत ने उसे समझाया की व्याख्यान देना अच्छी बात नहीं है हमें इस जाल में नहीं फसना चाहिए| संत की बात सुनकर भी शिष्य नहीं मन और दुसरे गाँव में जाकर व्याख्यान देने लगा| अब दूर-दूर तक शिष्य की ख्याति होने लगी| दूर-दूर से लोग उनके व्याख्यान सुनने के लिए आने लगे, यहाँ तक की खुद राजा भी उनके व्याख्यान सुनने के लिए आने लगे|

गुरूजी को पता था की किसी दिन व्याख्यान देने की यह प्रवृति उनके शिष्य को किसी बड़ी मुसीबत में फसा सकती है| गुरूजी की अपने शिष्य पर दया आ गई| एक दिन तडके गुरूजी अपने शिष्य के पास पहुंचे तब शिष्य के प्रवचन का समाय था| शिष्य ने जैसे ही अपने गुरूजी को सभा मंडप की और आते हुए देखा तो कहा- “अरे! आज तो हमारे गुरु महाराज हमारे बिच में पधारे हें| लोगों ने जब गुरु महाराज को देखा तो बड़ी मात्रा में गुरूजी के चारों और एकत्रित हुए| गुरूजी को बड़े आदर सम्मान के साथ ऊँचे आसन पर बिठाया गया| लोगों ने गुरूजी का बड़ा आदर, सम्मान और महिमा की|

अगले ही दिन गुरूजी के सम्मान में एक बहुत बड़ी सभा आयोजित की गई जिसमें दूर -दूर से लोग गुरूजी के दर्शन को एकत्रित हुए| सभा में राज्य के राजा को भी आने का न्योता दिया गया| अगले दिन जब सभा आयोजित हुई तो गुरूजी को न जाने क्या सूझी की अपने आसन से उठे राजा के पास गए और “भर्रर्रर्रर…………….” कर के उपानवायु छोड़ दी! लोगों ने जब गुरूजी के इस व्यहवार को देखा तो कहा, “चेला तो ठीक है, लैकिन गुरूजी में कुछ नहीं है”| गुरूजी के इस व्यहवार से लोगों के साथ-साथ राजा भी नाराज हुए| तभी गुरूजी ने शाम को ही वहां से प्रस्थान करने की घोषणा की| लोग मन ही मन प्रसन्न हुए “चलो जल्दी ही आफत टली”

“हें तो महाराज के गुरूजी ही, थोडा आदर सम्मान से विदा करेंगे तो अच्छा लगेगा” बस यही सोचकर सभी लोग गुरूजी को विदा करने गाँव के बाहर तक आए| वहां एक मरी हुई चिड़िया पड़ी थी, गुरूजी ने उसे अपनी उँगलियों से पकड़कर ऊपर उठा लिया और सबको दिखाने लगे| लोग गुरूजी को देखने लगे गुरूजी यह क्या करते हैं| तभी गुरूजी ने चिड़िया के सामने जोर से फूंक मरी तो चिड़िया “फुर्रर्रर्र……….” करके उड़ गई| लोग गुरूजी के इस चमत्कार को देखकर आश्चर्यचकित हो गए| अब लोग कहने लगे गुरूजी तो बड़े सिद्ध महात्मा है और गुरूजी की चरों और जय जयकार होने लगी|

यह देख गुरूजी ने अपने शिष्य को पास बुलाया और कहा, “वत्स! तुम समझे या नहीं ?

गुरूजी की बात सुनकर शिष्य ने कहा, “क्या समझना है गुरूजी”?

गुरूजी मुस्कुराए और बोले, ” इस दुनियां की किमत समझी या नहीं तूने, यह सब दुनियां फूंक की है| एक फूंक में भाग जाए और एक फूंक में आ जाए, फूंक एक क्षण भर का होता है इसका क्या मोल है| इसलिए ऊँचे आसन पर बैठकर, व्याख्यान देने से कोई बड़ा नहीं हो जाता| इसिकिये इस मान बड़ाई में न फसकर भगवान् का भजन करो|