आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ

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आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ
उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ

चूल्हा नहीं जलाए या बस्ती ही जल गई
कुच्छ रोज़ हो गये हैं अब उठता नहीं धुआँ

आँखों से पोंछने से लगा आँच का पता
यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमान ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ

-गुलज़ार…

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काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी

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काँटों की चुभन पाई फूलों का मज़ा भी
दिल दर्द के मौसम में रोया भी हंसा भी

आने का सबब याद ना जाने की खबर है
वो दिल में रहा और उसे तोड़ गया भी

हर एक से मंज़िल का पता पूछ रहा है
गुमराह मेरे साथ हुआ रहनुमा भी

‘गुमनाम’ कभी अपनों से जो गम हुए हासिल
कुछ याद रहे उन में कुछ भूल गया भी

-सुरेंदर मलिक गुमनाम…

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दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई

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दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई
जैसे एहसान उतरता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

पक गया है शज़र पे फल शायद
फिर से पत्थर उच्छालता है कोई

फिर नज़र में लहू के छिन्टे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई

देर से गूंजतें हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई

-गुलज़ार…

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रस्म-ए-उलफत सिखा गया कोई

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रस्म-ए-उलफत सिखा गया कोई
दिल की दुनिया पे छा गया कोई

ता क़यामत किसी तरह ना बुझे
आग ऐसी लगा गया कोई

दिल की दुनिया उजाड़ सी क्यूँ है
क्या यहाँ से चला गया कोई

वक़्त-ए-रुख्ह्सत गले लगा कर “दाग”
हँसते हँसते रुला गया कोई

-दाग देहलवी…

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poppy plant nature macro 65644 - ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा

ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा

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ज़िंदगी एक किराए का घर है एक ना एक दिन बदलना पड़ेगा
मौत जब हम को आवाज़ देगी घर से बाहर निकलना पड़ेगा

ढेर मिट्टि का हर आदमी है बाद मरने के होना यही है
या ज़मीनों में तुरबत बनेंगे या चिताओं पे जलना पड़ेगा

रात के बाद होगा सवेरा देखना है अगर तुम को दिन सुनेहरा
पावं फूलों पे रखने से पहले तुम को काँटों पे चलना पड़ेगा

ऐतबार उन के वादों का मत कर वरना आई दिल मेरे ज़िंदगी भर
तुझ को भी मोमबत्ती की तरह क़तरा क़तरा पिघलना पड़ेगा

ये जवानी है पल भर का सपना ढूंढ ले कोई महबूब अपना
ये जवानी अगर ढल गई तो उम्र भर हाथ मलना पड़ेगा

-सुरेंदर मलिक गुमनाम…

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एक ब्राह्मण ने कहा है के ये साल अच्छा है

5f8a970c857129c79d1e353c09b53368?s=200&ts=1549273893 - एक ब्राह्मण ने कहा है के ये साल अच्छा है

एक ब्राह्मण ने कहा है के ये साल अच्छा है

ज़ुल्म की रात बहुत जल्द टलेगी अब तो
आग चुल्हों में हर इक रोज़ जलेगी अब तो

भूख के मारे कोई बच्चा नहीं रोएगा
चैन की नींद हर इक सख्श यहाँ सोएगा

आँधी नफ़रत की चलेगी ना कहीं अब के बरस
प्यार की फसल उगएगी ज़मीन अब के बरस

है यहीं अब ना कोई शोर-शराबा होगा
ज़ुल्म होगा ना कहीं खून-ख़राबा होगा

ओस और धूप के सदमें ना सहेगा कोई
अब मेरे देश में बेघर ना रहेगा कोई

नये वादों का जो डाला है वो जल अच्छा है
रहनुमाओं ने कहा है के ये साल अच्छा है

दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्च्छा है

-साबिर दत्त

-साबिर दत्त…

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एक परवाज़ दिखाई दी है

5f8a970c857129c79d1e353c09b53368?s=200&ts=1549273893 - एक परवाज़ दिखाई दी है

एक परवाज़ दिखाई दी है
तेरी आवाज़ सुनाई दी है

जिस की आँखों में कटी थी सदियाँ
उस ने सदियों की जुदाई दी है

सिर्फ़ एक सफह पलट कर उस ने
बीती बातों की सफाई दी है

फिर वहीं लौट के जाना होगा
यार ने कैसी रिहाई दी है

आग ने क्या क्या जलाया है शब् पर
कितनी खुश-रंग दिखाई दी है

-गुलज़ार…

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shayarisms4lovers June18 295 - चल थोड़ी पीते है

चल थोड़ी पीते है

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समय से चुरा कर कुछ वक़्त चल जिंदगी जीते है,
चल थोड़ी पीते है

वो सपनो की चादर जो फट गयी है
नशे में ही सही आज उसको सीते है,
चल थोड़ी पीते है

उसको बता दो अब और इंतजार नहीं उसका,
उसके इंतजार में न जाने कितने दिन,
महीने और साल बीते है,
चल थोड़ी पीते है.

आज गुमनाम ही सही पर शायद
एक दिन हमारा भी एक नाम होगा,
इसी उम्मीद में रोज ये जिंदगी जीते है,
चल ना यार आज थोड़ी पीते

– गुमनाम/unknown…

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shayarisms4lovers June18 269 - दिल मे चुभने के लिए एक कसक रहने दे

दिल मे चुभने के लिए एक कसक रहने दे

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दिल मे चुभने के लिए एक कसक रहने दे
काम आएगी कभी दुख की महक रहने दै

टूट जाने की ही बस बात न किया कर तू
जिन्दगी मे कही थोड़ी-सी लचक रहने दे

एक उम्मीद पर है दुनिया ये सारी कायम
ये इत्मीनान मुझे अभी देर तलक रहने दे

मै अपनी बात दिल खोलके कह लू तुझसे
तुझपे ऐ दोस्त मेरा इतना तो हक रहने दे

– गुमनाम/unknown…

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shayarisms4lovers mar18 55 - मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी

मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी

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मस्ती भरी नज़र का नशा है मुझे अभी
ये जाम दूर रख दो पी लूँगा फिर कभी

दिल को जला के बज़्म को रौशन ना कीजिए
उस महजबीन को आने में कुछ देर है अभी

हम ने तो अश्क पी के गुज़री है सारी उम्र
हम से खफा है किस लिए आखिर ये ज़िंदगी

जाम-ए-सुबू को दूर ही रहने दे सक़िया
मुझ को उतरना है कल का नशा अभी

-सुरेंदर मलिक गुमनाम…

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shayarisms4lovers June18 284 - आदतन तुम ने कर दिए वादे

आदतन तुम ने कर दिए वादे

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आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ऐतबार किया

तेरी राहों में बारहा रुक कर
हम ने अपना ही इंतज़ार किया

अब ना माँगेंगे ज़िंदगी या रब
ये गुनाह हम ने एक बार किया

-गुलज़ार…

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shayarisms4lovers June18 209 - यारो मुझे माफ़ करो मैं नशे में हूँ

यारो मुझे माफ़ करो मैं नशे में हूँ

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यारो मुझे माफ़ करो मैं नशे में हूँ
अब दो तो जाम खाली ही दो मैं नशे में हूँ

मज़ुर हूँ जो पावं मेरे बेतरह पड़े
तुम सर-गरन तो मुझ से ना हो मैं नशे में हूँ
[मज़ुर=मजबूर; बेतरह=लड़खड़ाना ; सर-गरन=चिढ़ना]

या हाथों हाथ लो मुझे जैसे के जाम-ए-मय
या थोड़ी दूर साथ चलो मैं नशे में हूँ

-मीर तक़ी मीर…

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shayarisms4lovers June18 170 - वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने

वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने

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वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने
वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैं ने

ये सोच कर की ना हो तक में खुशी कोई
गमों की ओट में खुद को छुपा लिया मैं ने

कभी ना ख़त्म किया मैं ने रोशनी का मुहाज़
अगर चिराग बुझा, दिल जला लिया मैं ने

कमाल ये है की जो दुश्मन पे चलाना था
वो तीर अपने कलेजे पे खा लिया मैं ने

‘क़तील’ जिसकी अदावत में एक प्यार भी था
उस आदमी को गले से लगा लिया मैं ने

-क़तील शिफ़ाई…

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shayarisms4lovers June18 233 - उनके एक जान-निसार हम भी हैं

उनके एक जान-निसार हम भी हैं

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उनके एक जान-निसार हम भी हैं
हैं जहाँ सौ-हज़ार हम भी हैं

तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैन
तुम भी हो बेक़रार हम भी हैं

ऐ फलक कह तो क्या इरादा है
ऐश के ख्वाइशगार हम भी हैं

शहर खाली किए दुकान कैसी
एक ही वादा-ख्वार हम भी हैं

शर्म समझे तेरे तगाफुल को
वह! क्या होशियार हम भी हैं

तुम अगर अपनी खु के हो माशूक़
अपने मतलब के यार हम भी हैं

जिस ने चाहा फँसा लिया हमको
दिल-बारों के शिकार हम भी हैं

कौन सा दिल है जिस में दाग नहीं
इश्क़ की यादगार हम भी हैं

-दाग देहलवी…

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