shayarisms4lovers June18 131 - मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

आरज़ू-ऐ-साहिल उनकी बेरुखी में भी इल्तेफ़ात शामिल है आज कल मेरी हालत देखने के काबिल है क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी मेरे सोगवारों में आज मेरा क़ातिल है मुजतरीब हैं मौजें क्यों उठ रही हैं तूफ़ान क्यों क्या किसी सफ़ीने को आरज़ू-ऐ-साहिल है सिर्फ राहजन ही से क्यों “अमीर ” […]

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