दुःख दे कर सवाल करते हो – उर्दू शायरी

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दुःख दे कर सवाल करते हो ,
तुम भी ग़ालिब ! कमाल करते हो ..

Dukh Day Kar Sawaal Kartay ho,
Tum Bhe GHAALiB ! Kamaal Kartay ho..

यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर ,
इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ ..

Yeah hum hi jantey hain judaai ke mod par,
Is dil ka jo bhi haal tujhe dekh kar hua..

क्या ज़रूरी है के हम हार के जीतें, ताबिश
इश्क़ का खेल बराबर भी तो हो सकता है…

Kia Zaroori Hai Ke Hum Haar Ke Jeetien Tabish
Ishq Ka Khel Baraber Bhi To Ho Sakta Hai…

तुम आज हँसते हो हँस लो मुझ पर ये आजमाइश न बार बार होगी
मैं जनता हूँ मुझे खबर है के कल फ़िज़ा खुशगवार होगी .

Tum Aj Hanste Ho Hans Lo Mujh Par Ye Ajamaish Naa Bar Bar Hogi
Main Janta Hun Mujhe Khabar Hai Ki Kal Faza Khushgawar Hogi.

लगा न दिल को क्या सूना नहीं तूने ,
जो कुछ के मीर का इस आशिक़ी ने हाल किया ..

Laga na dil ko kya sunaa nahin tu ne,
Jo kuch ke Meer ka is aashqi ne haal kiya..

इश्क़ माशूक़ इश्क़ आशिक़ है ,
यानी अपना ही मुबतला है इश्क़ .
इश्क़ है तर्ज़ -ओ -तौर इश्क़ के ताईं ,
कहीं बंदा कहीं खुदा है इश्क़ .

Ishq maashuq ishq aashiq hai,
Yaani apna hi mubtala hai ishq.
Ishq hai tarz-o-taur ishq ke taeen,
Kahin banda kahin Khuda hai ishq.

बस के दुस्बार है हर काम का आसान होना ,
आदमी को भी मुयस्सर नहीं इंसान होना ,

मेरे कत्ल के बाद उसने की जफ़ा से तौबा ,
हाय उस जोर पशेमान का पशेमान होना ,

है उस चारगिरह कपड़े की क़िस्मत ‘ग़ालिब ,
जिस की क़िस्मत में हो आशिक़ का गिरेवान होना ..!!

Bus ke Dushwaar hai har kaam ka Asaan hona,
Admi ko bhi muyassar nahin insaaN hona,

ki Mere Qatal ke baad Usne jafa se Tauba,
Haye Us zoad pasheman ka pasheman hona,

Haif us chaar girah kaprhe ki Qismat ‘GHalib,
Jis ki Qismat main ho Ashiq ka GarebaN hona..!!

जो काम आसान समझ रहे हो वो काम मुमकिन नहीं रहेगा
वफ़ा का काग़ज़ तो भीग जाएगा बदगुमानी की बारिशों में
खतों की बातें तो ख्वाब होंगी पयाम मुमकिन नहीं रहेगा
में जानती हूँ मुझे यक़ीन है अगर कभी तू मुझे भुला दे
तो तेरी आँखो में रौशनी का क़याम मुमकिन …

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