shayarisms4lovers June18 170 - वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने

वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने

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वफ़ा के शीश महल में सज़ा लिया मैं ने
वो एक दिल जिसे पत्थर बना लिया मैं ने

ये सोच कर की ना हो तक में खुशी कोई
गमों की ओट में खुद को छुपा लिया मैं ने

कभी ना ख़त्म किया मैं ने रोशनी का मुहाज़
अगर चिराग बुझा, दिल जला लिया मैं ने

कमाल ये है की जो दुश्मन पे चलाना था
वो तीर अपने कलेजे पे खा लिया मैं ने

‘क़तील’ जिसकी अदावत में एक प्यार भी था
उस आदमी को गले से लगा लिया मैं ने

-क़तील शिफ़ाई…

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