shayarisms4lovers June18 199 - आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ

आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ

आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ चूल्हा नहीं जलाए या बस्ती ही जल गई कुच्छ रोज़ हो गये हैं अब उठता नहीं धुआँ आँखों से पोंछने से लगा आँच का पता यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ आँखों से आँसुओं के मरासिम […]

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shayarisms4lovers June18 199 - दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई

दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई

दिन कुछ ऐसे गुज़रता है कोई जैसे एहसान उतरता है कोई आईना देख के तसल्ली हुई हम को इस घर में जानता है कोई पक गया है शज़र पे फल शायद फिर से पत्थर उच्छालता है कोई फिर नज़र में लहू के छिन्टे हैं तुम को शायद मुघालता है कोई देर से गूंजतें हैं सन्नाटे […]

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shayarisms4lovers June18 199 - एक परवाज़ दिखाई दी है

एक परवाज़ दिखाई दी है

एक परवाज़ दिखाई दी है तेरी आवाज़ सुनाई दी है जिस की आँखों में कटी थी सदियाँ उस ने सदियों की जुदाई दी है सिर्फ़ एक सफह पलट कर उस ने बीती बातों की सफाई दी है फिर वहीं लौट के जाना होगा यार ने कैसी रिहाई दी है आग ने क्या क्या जलाया है […]

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shayarisms4lovers June18 284 - आदतन तुम ने कर दिए वादे

आदतन तुम ने कर दिए वादे

आदतन तुम ने कर दिए वादे आदतन हम ने ऐतबार किया तेरी राहों में बारहा रुक कर हम ने अपना ही इंतज़ार किया अब ना माँगेंगे ज़िंदगी या रब ये गुनाह हम ने एक बार किया -गुलज़ार

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