shayarisms4lovers mar18 69 - थामी है कलाई अब न छुटेगी मुझसे – चूड़ियाँ

थामी है कलाई अब न छुटेगी मुझसे – चूड़ियाँ

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यादों का इक झोंखा

यादों का इक झोंखा आया मुद्द्तों बाद
पहले इतना रोये नहीं जितना रोये बरसों बाद

लम्हां लम्हां गुजरा तो  हमे अहसास हुआ
पत्थर फैंके बरसों पहले , शीशे टूटे बरसों बाद

दस्तक ही उमीद लगाये कब से बैठे हैं हम
कल का वादा करने वाले , मिलने आए बरसों बाद..


गुजरे हुए वक़्त की यादें

सजा बन जाती है गुजरे हुए वक़्त की यादें
न जाने क्यों छोड़ जाने के लिए मोहबत करते है लोग..


टूटी थी चूड़ियाँ

थामी है कलाई अब न छुटेगी मुझसे
टूटी थी चूड़ियाँ , टूटे अब मेरी बला से..


तुझे सोचना

कोई और काम दे दो मुझे अब तुम
यह क्या तुझे सोचना और सोचते ही रहना..…

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