shayarisms4lovers mar18 162 - तारिख-ऐ-वफ़ा – Urdu Shayari

तारिख-ऐ-वफ़ा – Urdu Shayari

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तारिख -ऐ -वफ़ा

मुझे भी याद रखना जब लिखो तारिख -ऐ -वफ़ा
के हमने भी लुटाया है मोहब्बत में सकून अपना …

Tareekh-e-Wafa

Mujhe Bhi Yaad Rakhna Jab Likho Tareekh-e-Wafa
Ke humene Bhi Lutaya Hai Mohabbat Mein Sakoon Apna


साया कोई ख़याल से गुज़रा तो रो दिए हम

पूछा किसी ने हाल किसी का तो रो दिए हम
पानी में अक्स चाँद का देखा तो रो दिए हम

उड़ता हुआ ग़ुबार सर -ऐ -राह देख कर
अंजाम हम ने इश्क़ का सोचा तो रो दिए हम

बादल फ़िज़ा में आप की तस्वीर बन गई
साया कोई ख़याल से गुज़रा तो रो दिए हम

Saayaa koi Khayaal se guzraa to ro diye

puuchaa kisi ne haal kisi kaa to ro diye
paani mein aks chaand kaa dekhaa to ro diye

udta huaa Ghubaar sar-ae-raah dekh kar
anjaam hum ne ishq kaa sochaa to ro diye

baadal fizaa mein aap ki tasviir ban gaye
saayaa koi Khayaal se guzraa to ro diye


वो बुलाएँ तो क्या तमाशा हो

वो बुलाएँ तो क्या तमाशा हो
हम न जाएँ तो क्या तमाशा हो

ये किनारों पर खेलने वाले डूब जाएँ तो क्या तमाशा हो
बन्दा -परवर जो हम पे गुज़री है हम बताएं तो क्या तमाशा हो

आज हम भी तेरी वफाओं पर मुस्कुराएं तो क्या तमाशा हो
तेरी सूरत जो इत्तेफ़ाक़ से हम भूल जाएँ तो क्या तमाशा हो

Wo bulayen to kya tamasha ho

Wo bulayen to kya tamasha ho
Hum na jayen to kya tamasha ho

Ye kinaron par khelne walay doob jayen to kya tamasha ho
Banda-parwar Jo hum pe guzri hai, Ham batayen to kya tamasha ho

Aaj hum bhi teri wafaon par, Muskurayen to kya tamasha ho
Teri surat jo Ittefaq say hum,Bhool jayen to kya tamasha ho…

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