shayarisms4lovers mar18 36 - जब बचपन याद आता है – Childhood

जब बचपन याद आता है – Childhood

< ?xml encoding="utf8mb4" ?>

बचपन का जमाना

बचपन का जमाना होता था
खुशियों का खज़ाना होता था

चाहत चाँद को पाने की
दिल तितली का दीवाना होता था

रोने की वजह न होती थी
ना हसने का बहाना होता था

खबर न थी कुछ सुबह की
न शामो का ठिकाना होता था

मट्टी के घर बनते थे
बस उनको गिरना होता था

गम ही जुबान न होती थी
ना ज़ख्मों का पैमाना होता था

बारिस में कागज़ की कस्ती
हर मौसम सुहाना होता था

वो खेल वो साथी होते थे
हर रिश्ता निभाना होता था


मन के सच्चे

वो दिन अच्छे थे
जब हम बच्चे थे
झूठ बोला करते थे
मगर मन के सच्चे थे


बचपन की नींद

वो बचपन की नींद अब ख़्वाब हो गयी
क्या उम्र थी, के रात हुई और सो गए….…

Continue Reading