रस्म-ए-उलफत सिखा गया कोई

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रस्म-ए-उलफत सिखा गया कोई
दिल की दुनिया पे छा गया कोई

ता क़यामत किसी तरह ना बुझे
आग ऐसी लगा गया कोई

दिल की दुनिया उजाड़ सी क्यूँ है
क्या यहाँ से चला गया कोई

वक़्त-ए-रुख्ह्सत गले लगा कर “दाग”
हँसते हँसते रुला गया कोई

-दाग देहलवी…

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shayarisms4lovers June18 233 - उनके एक जान-निसार हम भी हैं

उनके एक जान-निसार हम भी हैं

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उनके एक जान-निसार हम भी हैं
हैं जहाँ सौ-हज़ार हम भी हैं

तुम भी बेचैन हम भी हैं बेचैन
तुम भी हो बेक़रार हम भी हैं

ऐ फलक कह तो क्या इरादा है
ऐश के ख्वाइशगार हम भी हैं

शहर खाली किए दुकान कैसी
एक ही वादा-ख्वार हम भी हैं

शर्म समझे तेरे तगाफुल को
वह! क्या होशियार हम भी हैं

तुम अगर अपनी खु के हो माशूक़
अपने मतलब के यार हम भी हैं

जिस ने चाहा फँसा लिया हमको
दिल-बारों के शिकार हम भी हैं

कौन सा दिल है जिस में दाग नहीं
इश्क़ की यादगार हम भी हैं

-दाग देहलवी…

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