सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़

सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़ सामने मंज़िल थी और पीछे उस की आवाज़ , रुकता तो सफर जाता ,चलता तो बिछड़ जाता , मयखाना भी उसी का था ,महफ़िल भी उस की , अगर पीता तो ईमान जाता ,न पीता तो सनम जाता , सजा ऐसी मिली मुझ को ,ज़ख़्म ऐसे लगे दिल पर , छुपाता तो जिगर जाता ,सुनाता तो बिखर जाता ……!!! Samne Manzil Thi Aur Peeche Us Ki Aawaaz Samne Manzil Thi Aur Peeche Us Ki Aawaaz, Rukta To Safar Jaata,Chalta To Bicharr Jaata, Maikhaana Bhi Usi Ka Tha,Mehfil Bhi Us Ki, Agar Peeta To Emaan Jaata,Na Peeta To Sanam Jaata, Saza Aisi Mili Mujh Ko,Zakham Aise Lage Dil Par, Chupaata To Jigar Jaata,Sunata To Bikhar Jaata……!!!   मैं वो रात हूँ जो कटी नहीं ​ मुझे ज़िन्दगी की दुआ न दो ​ मेरे ज़िन्दगी से बनी नहीं कोई ज़िन्दगी पे करे यक़ीन ​ मेरा ज़िन्दगी पे यक़ीन नहीं ये सफर भी कैसा सफर है यारो में कभी कहीं तो कभी कहें मुझे जिस सनम की तलाश थी वो मिला मगर मिला नहीं मैं वो बात हूँ जो बनी नहीं मैं वो रात हूँ जो कटी नहीं ​ Mein Wo Raat Hoon Jo Kati […]

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