हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं – WASI SHAH SHAYARI

हिजर हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं ज़िंदा लगते हैं मगर असल में मर जाते हैं जब कभी बोलता है हँस के किसी और से तू कितने खंज़र मेरे सीने में उतर जाते हैं Hijar Hum Tere Hijar Mein Andar Se Bikhar Jaate Hain Zindah Lagte Hain Magar Asal Mein Mar Jaate Hain Jab Kabhi Bolta Hai Hans Ke Kisi Aur Se TU Kitne Khanjar Mere Seene Mein Utar Jaate Hain.. वो वादे कसमें तोड़ कर बहुत दिन हो गए शायद सहारा कर लिया उस ने हमारे बाद भी आखिर गुज़ारा कर लिया उस ने हमारा जिकर तो उस के लबों पर आ नहीं सकता हमें एहसास है हम से किनारा कर लिया उस ने वो बस्ती ग़ैर की बस्ती वो कूचा ग़ैर का कूचा सुना है इश्क़ भी अब तो दोबारा कर लिया उस ने सुना है ग़ैर की बाँहों को वो अपना घर समझता है लगता है मेरा यह दुःख गवारा कर लिया उस ने भुला कर प्यार की कसमें वो वादे तोड़ कर “वासी ” किसी को ज़िन्दगी से भी प्यारा कर लिया उस ने Wo vade kasmein Todh Kar Bahut Din Ho Gaye Shayad Sahara Kar Liya Us Ne Hamare Baad Bhi Akhir […]

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