लफ़्ज़ों की शरारत – शरारत उर्दू शायरी

वो शरारत भी तेरी थी

वो मोहब्बत भी तेरी थी , वो शरारत भी तेरी थी
अगर कुछ बेवफाई थी , तो वो बेवफाई भी तेरी थी
हम छोड़ गए तेरा शहर , तो वो हिदायत भी तेरी थी
आखिर करते तो किस से करते तुम्हारी शिकायत
वो शहर भी तेरा था और वो अदालत भी तेरी थी


शरारत न होती

शरारत न होती , शिकायत न होती
नैनों में किसी के , नज़ाकत न होती
न होती बेकरारी , न होते हम तन्हा
अगर जहाँ में कम्बख्त ये मोहब्बत न होती


कोई शरारत करते

तुम पास होते तो कोई शरारत करते
तुझे बाँहों में भर मुहब्बत करते
देखते तेरी आंखों में नींद का खुमार
अपनी खोई हुई नींदो की शिकायत करते


आओ एक शरारत करते हैं

एक शरारत करते हैं आओ मोहब्बत करते हैं
हँसती आँखों से कह दो , दरिया हिजरत करते हैं ,
कुछ दिल ऐसे हैं …

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इश्क़ करने वाले आँखों की बात समझ लेते है – नशीली आँखों की शायरी

आँखों की बात

इश्क़ करने वाले आँखों की बात समझ लेते है
सपनो में यार आए तो उसे मुलाकात समझ लेते है
रूठता तो आसमान भी है अपनी ज़मीन के लिए
यह तो लोग ही उसे बरसात समझ लेते है

Aankhon ki Baat

Ishq karnewale Aankhon ki baat samajh lete hai
Sapno mein yaar aaye Toh usse mulakat samajh lete hai
Roota to aasman bhi hai Apni zameen ke liye
Yeh to log hi usse barsaat samajh lete hai…


नशीली ऑंखें

नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं
हम घबराकर ऑंखें झुका लेते हैं
कौन मिलाए उनकी आँखों से ऑंखें
सुना है वो आँखों से अपना बना लेते है .

Nashili Ankhen

Nashili aankho se wo jab hamein dekhte hain,
hum ghabraakar ankhen jhuka leite hain,
kaun milaye unn ankhon se ankhen,
suna hai wo ankho se apna bana leite hai…


आँखों से बातें

कोई आँखों से बातें करता …

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हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में
वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी

हर धड़कन में एक राज़ होता है

हर धड़कन में एक राज़ होता है
हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में
हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है

Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai

Har Dhadkan mein ek raaz hota hai
Har baat kehne ka ek andaaz hota hai
Jab tak thokar na lage ishq mein
Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai


धड़कन ज़रा थम जा

शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए
बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है

Dhadkan Zara Tham Ja

Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye
Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai


दिल की

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मेरे मेहबूब की खूबसूरती में चुनिदां शायरी की पंक्तियाँ

नज़र इस हुस्न पर ठहरे तो आखिर किस तरह ठहरे
कभी जो फूल बन जाये कभी रुखसार हो जाये

तुम्हारा चाँद सा चेहरा

फिज़ाओ में रंग बिखेरे तुम्हारा चाँद सा चेहरा
मुझे बेचैन कर जाये तुम्हारा मासूम चाँद सा चेहरा
मेरी खातिर सँवरता है तुम्हारा चाँद सा चेहरा


ऐसी कशिश उस चेहरे में

उस हसीन चेहरे की क्या बात है
हर दिल अज़ीज़ , कुछ ऐसी उसमें बात है
है कुछ ऐसी कशिश उस चेहरे में
के एक झलक के लिए सारी दुनिया बर्बाद है


तेरा होंठो की पंखुडियो

तेरा होंठो की पंखुडियो को तू गुलाब न कहना
वो तो मुरझा जाते है
इनकी लाली को देखकर लगता है
गुलाब भी अपना रंग यही से चुरा कर लाये है


मेहबूब की तारीफ

मेरे मेहबूब की बस इतनी सी तारीफ है
चेहरा जैसे रोशन चाँद शरबती उसकी ऑंखें है ​
नाज़ुक होंठ कलियों जैसे , दाँत जैसे सफ़ेद मोती है
लंबी …

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तेरी ज़ुल्फे खुली हो जैसे – तेरी ज़ुल्फे उर्दू शायरी

मेरे मर जाने की वो सुन के खबर आई  “मोहसिन”
घर से रोते हुए वो बिन ज़ुल्फ़ सँवारे निकले

ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे

ऐसा लगता है तेरी ज़ुल्फ़ खुली हो जैसे
होके गुलशन से सबा आज चली हो जैसे
अध खुले होंठ सियाह ज़ुल्फ़ और गज़ली ऑंखें
किसी शायर ने कोई ग़ज़ल तर्ज़ की हो जैसे

Zulf khuli ho jaise

Aisa lagta hai teri zulf khuli ho jaise
Hoke Gulshan se saba aaj chali ho jaise
Adh khule hont siyah zulf aur gazali ankheN
Kisi shayar ne koi gazal tarz ki ho jaise…


ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये

यह ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाये तो अच्छा है
इस रात की तक़दीर सँवर जाये तो अच्छा है
जिस तरह से थोड़ी सी ज़िन्दगी तेरे साथ कटी है
बाकी भी उसी तरह गुज़र जाये तो अच्छा है
वैसे तो तुम्ही ने मुझे बर्बाद किया है
इल्ज़ाम किसी और के सिर …

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दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

दिल मौजूद न था

उन को देखा तो कुछ खोने का एहसास हमे हुआ
हाथ सीने पे जो गया तो दिल मौजूद न था

Dil Maujood Na Tha

Un Ko Dekha To kush khone ka Ehsaas hume Hua
Hath Seene Pe jo gaya to Dil Maujood Na Tha


बस दुआ है

और कुछ नहीं चाहती मैं इस ज़िन्दगी में ‘मेरे रब ’
बस दुआ है के किसी के दुःख की वजह मेरी ज़ात न बने

Bas Dua Hai

Aur Kuch Nahi Chahti Main is Zindagi Mein ‘Mere Rab’
bas Dua Hai Ke Kisi Ke Dukh Ki wajha Meri Zaat Na Ho..


मुस्कराहट बनाए रखो

हर एक ख्याल को ज़ुबान नहीं मिलती
हर एक आरज़ू को दुआ नहीं मिलती
मुस्कराहट बनाए रखो तो दुनिया है साथ
आँसुओ को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती

Muskurahat Banaye Rakho

Har Ek khyal Ko Zuban Nahi Milti
Har Ek Aarzu Ko Dua Nahi …

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SAAKI AUR JAAM SHAYARI – साक़ी ओर पिला की पीने पिलाने की रात है

वो पिला कर जाम

वो पिला कर जाम “लबों ” से अपनी मोहब्बत का “मोहसिन”
और , अब कहते हैं के नशे की आदत अच्छी नहीं होती ।

Wo Pila Kar “Jaam” Labon Se Apni Muhabbat Ka “Mohsin”
Aur , Ab Kehte Hain Ke Nashay Ki Aadat Acchi Nahi Hoti.


जाम पे जाम

जाम पे जाम पीने से क्या फ़ायदा
रात गुज़री तो फिर उतर जाएगी
पीना है तो किसी की आँखों से पियो
उम्र सारी नशे में गुज़र जाएगी ।

Jaam Pe Jaam Pene Se Kya Faida
Raat Guzri To Phir Utar Jayegi
Peena Hai To Kisi Ki Ankhon Se Piyo
Umar Sari Nashay Mein Guzar Jayegi.


जाम आँखों से पिलाया किसी ने

कल जो जाम आँखों से पिलाया किसी ने
मदहोश पड़ा रहा , न उठाया किसी ने

 

मुझे भी कुछ ज़्यादा शौक़ था पीने का
पीने के बाद जो हुआ , न बताया किसी ने

कभी

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फेसबुक चुनिंदा शायरी – अरज़ किया है

   मुझे ज़रा खुदा से हमकलाम होने दो …
   तुम्हारा ज़िकर भी इसी गुफ्तगू में है

मेरी शामें

खुद को खुद से हमकलाम कर के देखना
कितना मुश्किल है यह सफर तय कर के देखना
किस क़दर उदास गुज़रती हैं मेरी शामें
याद किसी को किसी शाम कर के देखना


कफ़न अगर तुम्हारा होगा

आँखें अगर तुम्हारी होगी तो आंसू हमारे होंगे
दिल अगर तुम्हारा होगा तो धड़कन हमारी होगी
ख्वाहिश है ..कफ़न अगर तुम्हारा होगा तो मयत हमारी होगी


कफ़न न डालो मेरी मयत पर

कफ़न न डालो मेरे चेहरे पे
मुझे आदत है मुस्कुराने की
कफ़न न डालो मेरी मयत पर
मुझे इंतज़ार है उसके आने का


उनके सदके जान है मेरी

शिकायत ये नहीं के वो नाराज़ है हमसे
शिकायत इस बात की है वो आज भी अनजान है हमसे
दिल तोडा , जज़्बात बिखेरे , फिर भी वो दिलजान है मेरे
मांग ले वो कभी …

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यादों का आईना – Unique Collection of Pakistani Urdu Shayari and Poetry

तेरे शोख तासुबर में

ख़ामोश थे लव और मैं गुफ़्तार में गुम थी
पलके न झमकती थी के मैं दीदार में गुम थी
तन मन ने सजाये है तेरे शोख तासुबर में
यादों का आईना था मैं सिंगार में गुम थी

 

Tere Shokh Tasubur Mein

khamosh the luv aur main guftar mein gum thi
palke na Jhamkti thi ke main didar mein ghum thi
tan man ne sajaye hai tere shokh tasubur mein
yadon ka aiina tha main shingar mein gum thi

 


जुदाई के मौसम

जुदाई के मौसम सताने लगे है
वो फिर टूट कर याद आने लगे है
तख़्युल के परवाज़ को कैसे रोकू
वो गोया मेरे घर फिर आने लगे है
निशो रोक लो वो जाने लगे है
मनाने में जिन को ज़माने लगे है

 

Judai ke Mausam

judai ke mausam satane lage hai
wo phir toot kar yaad ane lage hai
takhayul ke parwaz …

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