मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

आरज़ू-ऐ-साहिल

उनकी बेरुखी में भी इल्तेफ़ात शामिल है
आज कल मेरी हालत देखने के काबिल है

क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी
मेरे सोगवारों में आज मेरा क़ातिल है

मुजतरीब हैं मौजें क्यों उठ रही हैं तूफ़ान क्यों
क्या किसी सफ़ीने को आरज़ू-ऐ-साहिल है

सिर्फ राहजन ही से क्यों “अमीर ” शिकवा हो
मंज़िलों की राहों में राहबर भी शामिल है

Aarazuu-ae-saahil

unki berukhi mein bhi iltefaat shaamil hai
aaj kal meri haalat dekhne ke kabil hai

 

Qatal ho to mera sa maut ho to meri si
mere sog vaaron mein aaj meraa qaatil hai

muztarib hain maujen kyun uth rahe hain tuufaan kyun
kya kisi safine ko aarazuu-ae-saahil hai

sirf rahzan hi se kyon “Ameer” shikva ho
manzilon ki raahon mein raahbar bhi shaamil hai


कभी सोचा न था

जगमगाते शहर की रंगीनियों में क्या न था
ढूंढने निकला था जिस को मैं , …

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ऐ दिल है मुश्किल शायरी – आज जाने की जिद न करो

ऐ दिल है मुश्किल

जब प्यार में प्यार न हो
जब दर्द में यार न हो
जब आँसूओ में मुस्कान न हो
जब लफ़्ज़ों में जुबान न हो
जब साँसे बस यूं ही चले
जब हर दिन में रात ढले
जब इंतज़ार सिर्फ वक़्त का हो
जब याद उस कमबख्त की हो
क्यों वो हो राही जो हो किसी और की मंजिल
जब धड़कनों ने साथ छोड़ दिया
ऐ दिल है मुश्किल , ऐ दिल है मुश्किल

AE Dil Hai Muskil

jab pyar mein pyar na ho
jab dard mein yaar na ho
jab anssooao mein muskan na ho
jab lafzzo main jubaan na ho
jab sanse bas yoon hi chale
jab har din main raat dhale
jab intezaar sirf waqt ka ho
jab yaad us kambaqat ki ho
kyon wo ho raahi jo ho kisi aur ki manjil
jab dhadkno ne sath chod diya
AE dil hai muskil , …

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हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha…


लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai…


इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार …

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हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में
वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी

हर धड़कन में एक राज़ होता है

हर धड़कन में एक राज़ होता है
हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है
जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में
हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है

Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai

Har Dhadkan mein ek raaz hota hai
Har baat kehne ka ek andaaz hota hai
Jab tak thokar na lage ishq mein
Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai


धड़कन ज़रा थम जा

शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए
बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है

Dhadkan Zara Tham Ja

Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye
Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai


दिल की

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दिल तो जले मगर ‘राख ‘ न हो – महफ़िल शायरी

दिल मौजूद न था

उन को देखा तो कुछ खोने का एहसास हमे हुआ
हाथ सीने पे जो गया तो दिल मौजूद न था

Dil Maujood Na Tha

Un Ko Dekha To kush khone ka Ehsaas hume Hua
Hath Seene Pe jo gaya to Dil Maujood Na Tha


बस दुआ है

और कुछ नहीं चाहती मैं इस ज़िन्दगी में ‘मेरे रब ’
बस दुआ है के किसी के दुःख की वजह मेरी ज़ात न बने

Bas Dua Hai

Aur Kuch Nahi Chahti Main is Zindagi Mein ‘Mere Rab’
bas Dua Hai Ke Kisi Ke Dukh Ki wajha Meri Zaat Na Ho..


मुस्कराहट बनाए रखो

हर एक ख्याल को ज़ुबान नहीं मिलती
हर एक आरज़ू को दुआ नहीं मिलती
मुस्कराहट बनाए रखो तो दुनिया है साथ
आँसुओ को तो आँखों में भी पनाह नहीं मिलती

Muskurahat Banaye Rakho

Har Ek khyal Ko Zuban Nahi Milti
Har Ek Aarzu Ko Dua Nahi …

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हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं – WASI SHAH SHAYARI

हिजर

हम तेरे हिजर में अंदर से बिखर जाते हैं
ज़िंदा लगते हैं मगर असल में मर जाते हैं
जब कभी बोलता है हँस के किसी और से तू
कितने खंज़र मेरे सीने में उतर जाते हैं

Hijar

Hum Tere Hijar Mein Andar Se Bikhar Jaate Hain
Zindah Lagte Hain Magar Asal Mein Mar Jaate Hain
Jab Kabhi Bolta Hai Hans Ke Kisi Aur Se TU
Kitne Khanjar Mere Seene Mein Utar Jaate Hain..


वो वादे कसमें तोड़ कर

बहुत दिन हो गए शायद सहारा कर लिया उस ने
हमारे बाद भी आखिर गुज़ारा कर लिया उस ने
हमारा जिकर तो उस के लबों पर आ नहीं सकता
हमें एहसास है हम से किनारा कर लिया उस ने
वो बस्ती ग़ैर की बस्ती वो कूचा ग़ैर का कूचा
सुना है इश्क़ भी अब तो दोबारा कर लिया उस ने
सुना है ग़ैर की बाँहों को वो अपना घर समझता है…

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ऑंखें तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है – इश्क़ बेवफा

बड़े शौक़ से मर जाएँगे

आओ किसी रोज़ मुझे टूट के बिखरता देखो
मेरी रगो में ज़हर जुदाई का उतरता देखो
किस किस तरह से तुझे माँगा है खुद से हमने
आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो
तेरी तलाश में हम ने खुद को खो दिया है
मत आओ सामने मगर कहीं छुप के मुझे तड़पता देखो
बड़े शौक़ से मर जाएँगे हम मगर वरना
तुम सामने बैठ कर सांसों का तसलसुल टूटता देखो

Bade Shoq Se Mar Jayeinge

Aao Kisi roz Mujhe Toot Ke Bikhrta Dekho
Meri Ragon Mein Zehar Judai Ka Uterta Dekho
Kis Kis Ada Se Tujhe Maanga Hai khuda Se
Aao Kabhi Mujhe Sajdon Mein Sisakta DekHo
Teri Talaash Mein Hum Ne Khud Ko Kho Diya Hai
Mat Aao Saamne Mgar Kahin Chup Ke Mujhe Tarapta Dekho
Bade Shoq Se Mar Jaein gay Hum magar warna
Tum Saamne Baith Kar sansoon Ka Tasalsul Tootta Dekho…

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दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

मुझे होश नहीं

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं

मुझ को यह भी नहीं मालुम की जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आंसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना की दिल है मेरा
बिखरे बिखरे हैं ख्यालात मुझे होश नहीं

Mujhe Hosh Nahin

kitni pee kaise kati raat mujhe hosh nahin
raat ke saath gayi baat mujhe hosh nahin

mujh ko yeh bhi nahin maalum ki janaa hai kahaan
tham le koi mera hath mujhe hosh nahin

aansuoon aur sharaabon mein guzar hai ab to
mainne kab dekhi thi barasaat mujhe hosh nahin

jaane kyaa Tuutaa hai paimaanaa ki dil hai mera
bikhare bikhare hain Khayaalaat mujhe hosh nahin


बारिश के बाद

हो गयी रूखसत घटा बारिश के बाद
एक दिया …

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तक़दीर का अफसाना – किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है

किस्मत मैं लिखदे मेरी

किस्मत मैं मेरी चैन से जीना लिखदे
मिटा न सके कोई वो अफसाना लिखदे
जन्नत भी न-गवार है मुझे तेरे बिन
ऐ कातिब-ऐ-तक़दीर ख़ाक-ऐ-मदीना लिखदे

Kismat mein Likhde Meri

kismat main meri chain se jeena likhde
mita na sake koi wo afsana likhde
jannat bhi na-gawar hai mujhe tere bin
Ae kaatib-ae-taqdeer KHaak-e-madiina likhde..


किस्मत पर ऐतबार

किस्मत पर ऐतबार किस को है
मिल जाये ‘ख़ुशी’ इनकार किस को है
कुछ मजबूरियां हैं मेरे दोस्तों
वरना ‘जुदाई ’ से प्यार किस को है

Kismat Par Aitbaar

kismat par aitbaar kis ko ha
Mil jaye ‘KHUSHI’ inkaar kis ko hai
kuch ‘MAJBURIYAN’ hain mere dosto
warna! ‘JUDAI’ se pyar kis ko hai..


किस्मत से शिकायत

किस्मत से अपनी सबको शिकायत क्यों है
जो नहीं मिल सकता उसी से मोहब्बत क्यों है
कितने खड़े है राहो पे
फिर भी दिल को उसी की चाहत क्यों

Kismat se Shikayat

Kismat se …

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फ़राज़ की दिल फरेब उर्दू शायरी – Erratic collection of Fazar Shayari

किसी से जुदा होना

किसी से जुदा होना अगर इतना आसान होता “फ़राज़”
जिस्म से रूह को लेने कभी फरिश्ते न आते

 

Kissi Se Juda Hona

Kissi Se Juda Hona Agar Itna Asan Hota “FARAZ”
Jism Se Rooh Ko Leney Kabhi Farishtay Na Aate


प्यासे गुज़र जाते हैं

तू किसी और के लिए होगा समंदर-ऐ -इश्क़ “फ़राज़”
हम तो रोज़ तेरे साहिल से प्यासे गुज़र जाते हैं

 

Piyase Guzaar Jate Hain

Tu kisi aur ke liye hoga samander-ae-ishq “Faraz”
hum to rooz tere sahil se piyase guzaar jate hain


मिले तो कुछ कह न सके

हम उन से मिले तो कुछ कह न सके “फ़राज़”
ख़ुशी इतनी थी के मुलाक़ात आँसू पोंछते ही गुज़र गई

 

Milay To Khuch Keh na Sakay

hum un se milay to khuch keh na sakay “Faraz”
khushi itni the ke mulaqaat ansoo ponchtay hi guzaar gai


इश्क़ का नशा

कुछ इश्क़ का …

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