सब को दुआओं में याद रखना आदत है मेरी

रिवायत माना के मरने वालों को भुला देती है यह दुनिया मुझे जीते जी को भुला कर तुम ने रिवायत ही बदल डाली Riwayat Maana ke Marnay Walon Ko Bhula Daiti hai yeah Dunya Mujhe Jite ji Ko Bhula Kar Tum Ne Riwayat Hi Badal Dali.. मोहब्बत भूल जाना भुला देना फ़क़त एक वेहम् ही तो है दिलों से कब निकलते हैं , मोहब्बत जिन से हो जाये Mohabbat Bhool Jana Bhula Dena Faqat Ek Weham hi to Hai, Dilon Se Kab Nikalte Hain, Mohabbat Jin Se ho jaye.. आदत है मेरी हर सुबह दुआ देना फितरत है मेरी हर एक को खुश देखना हसरत है मेरी मैं किसी को याद आऊं या न आऊं सब को दुआओं में याद रखना आदत है मेरी Adat hai meri Har Subah dua dena Fitrat hai meri har ek ko khush dekhna Hasrat hai meri mein kisi ko yaad aon ya na aon sab ko duao mein yaad rakhna Adat hai meri.. वफ़ा सारी रात तकलीफ देता रहा यही एक सवाल हमें वफ़ा करने वाले हमेशा अकेले क्यों रह जातें हैं Wafa Sari raat Takleef Deta Raha Yahi ek Sawal Humein Wafa Karnay Walay Humesha Akele Kyun Reh Jatein Hain.  

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आरजू-ऐ-गुफ़्तगू – आतिश हैदर अली की शायरी

मुझ को इस इश्क़ के बीमार ने सोने न दिया यार को मैंने मुझे यार ने सोने न दिया रात भर ताली -ऐ -बेदार ने सोने न दिया एक शब बुल _बुल -ऐ -बेताब के जागे न नसीब पहलू -ऐ -गुल में कभी खार ने सोने न दिया रात भर की दिल -ऐ -बेताब ने बातें मुझ से मुझ को इस इश्क़ के बीमार ने सोने न दिया   Mujh Ko Is Ishq Ke Biimaar Ne Sone Na Diyaa Yaar Ko maine Mujhe Yaar Ne Sone Na Diyaa Raat Bhar Taali-AE-Bedaar Ne Sone Na Diyaa Ek Shab Bul_Bul-E-Betaab Ke Jaage Na Nasiib Pahaluu-E-Gul Mein Kabhii Khaar Ne Sone Na Diyaa Raat Bhar Ki Dil-AE-Betaab Ne Baatein Mujh Se Mujh Ko Is Ishq Ke Biimaar Ne Sone Na Diyaa   तेरा फ़साना सुन तो सही जहां में है तेरा फ़साना क्या कहती है तुझ से ख़ल्क़ -ऐ -खुदा गैबाना क्या जीना सबा का ढूँढती है अपनी मुश्त -ऐ -ख़ाक बाम -ऐ -बलंद यार का है आस्ताना क्या आती है किस तरह से मेरी कब्ज़ -ऐ -रूह को देखूँ तो मौत ढूँढ रही है बहाना क्या बेताब है कमाल हमारा दिल-ऐ -अज़ीम मेहमान सराय -ऐ -जिस्म का होगा रवाना क्या   Teraa […]

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