shayarisms4lovers June18 148 - हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

हर धड़कन में एक राज़ होता है – धड़कन उर्दू शायरी

बहुत देर कर दी तुमने मेरी धड़कन महसूस करने में वो दिल नीलाम हो गया जिस को कभी हसरत तुम्हारे दीदार की थी हर धड़कन में एक राज़ होता है हर धड़कन में एक राज़ होता है हर बात कहने का एक अंदाज़ होता है जब तक ठोकर न लगे इश्क़ में हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है Har Dhadkan Mein Ek Raaz Hota Hai Har Dhadkan mein ek raaz hota hai Har baat kehne ka ek andaaz hota hai Jab tak thokar na lage ishq mein Har kisiko apne mehboob pe naaz hota hai धड़कन ज़रा थम जा शोर न कर धड़कन ज़रा थम जा कुछ पल के लिए बड़ी मुश्किल से मेरी आँखों में उसका खवाब आया है Dhadkan Zara Tham Ja Shor Na Kar Dhadkan Zara Tham Ja Kuch Pal Ke Liye Badi Muskil Se Meri Aankhon Mein Uska Khawab Aaya hai दिल की धड़कन को धड़का गया कोई दिल की धड़कन को धड़का गया कोई मेरे ख्वाबों को जगा गया कोई हम तो अनजाने रास्तो पे यूं ही चल रहे थे अचानक ही प्यार का मतलव भी सीखा गया कोई Dil ki Dhadkan ko Dhadka Gaya Koi Dil ki dhadkan ko dhadka gaya […]

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shayarisms4lovers mar18 202 - ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

ग़ज़ल – वो मेरा हमसफ़र हुआ भी तो लम्हा भर

हम तो अकेले रहे हमेशा रहेगा यह आलम कहाँ यह महफ़िल कहाँ और यह हमदम कहाँ सदा चोट पर चोट खाता रहा मुक़द्दर में इस दिल के मरहम कहाँ कहाँ अब्र कोई कड़ी धुप में झुलसते बयाबां में शबनम कहाँ ना मस्त आँखें होंगी ना ज़ुल्फे रसा हमेशा रहेगा यह मौसम कहाँ अकेले थे हम तो अकेले रहे कोई अपना गमख्वार हो , हमदम कहाँ जहांगीर-ओ-नौशेरवां चल बसे रहा डर में अद्ल पैहम कहाँ ना अय्यूबी कोई ना खालिद कोई गया रखता अपना परचम कहाँ Hum To Akele Rahe Hamesha Rahega Yeh Aalam Kahan Yeh Mahfil Kahan aur Yeh Humdam Kahan Sada Chot Par Chot Khata Raha Muqaddar Mein Is Dil Ke Marham Kahan Kahan Abr Koi Kadi Dhoop Mein Jhulaste Bayabaan Mein Shabnam Kahan Naa Mast Aankhein Hongi Naa Zulfe Rasaa Hamesha Rahega Yeh Mausam Kahan Akele The Hum To Akele Rahe Koi Apna Ghamkhwaar , Humdam Kahan Jahangeer-O-Nausherwaan Chal Base Rahaa Daar Mein Adl Paiham Kahan Naa Ayyubi Koi Naa Khalid Koi Gaya Rekhta Apna Parcham Kahan.. दिखाई दिए यूँ दिखाई दिए यूँ की बेखुद किया हमें आप से भी जुदा कर चले जबीं सजदा करते ही करते गए हक़-ऐ-बंदगी हम अदा कर चले गई उम्र दर बंद-ऐ-फ़िक्र-ऐ-ग़ज़ल […]

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shayarisms4lovers mar18 129 - छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे – Aitbar Shayari

छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे – Aitbar Shayari

कोई तो बरसात ऐसी हो कोई तो बरसात ऐसी हो जो तेरे संग बरसे … तनहा तो मेरी आँखें हर रोज़ बरसती हैं … Koi To Barsat Aisi Ho Koi To Barsat Aisi Ho Jo Tere Sang Barsy… Tanha To Meri Aankhen Har Roz Barasti Hain… ऐतबार छोड़ दिए हम ने ऐतबार किस्मत की लकीरों पे “वासी” जो दिलों में बस जाएँ वो लकीरों में नहीं मिला करते … Aitbar Chod Dia Hum Ne Aitbar Qismat Ki Lakeeron Pe “Wasi” Jo Dilon Me Bus Jaen Wo Lakeeron Me Nahi Mila Karte… हमराज़ यूँ फ़िज़ा महकी के बदला मेरे हमराज़ का रंग यूँ सजा चाँद के झलका तेरे अंदाज़ का रंग Humraaz yun fiza mehaki kay badala mere humraaz ka rang Yun saaja chand kay jhalaka tere andaaz ka rang बरसात में काग़ज़ की तरह रहने दो अब के तुम भी मुझे पढ़ न सकोगे बरसात में काग़ज़ की तरह भीग गया हूँ मैं … Barsat Me Kaghaz Ki Tarha Rehne Do Ab K Tum Bhi Mujhe Parh Na Sako Ge Barsat Me Kaghaz Ki Tarha Bheeg Gaya Hun main… तस्वीर तस्वीर तेरी मेरे मन में इस क़दर बसी है की हर वक़्त इन आँखों में तू ही नज़र आता है […]

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shayarisms4lovers mar18 184 - ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

इश्क़ में सच्चा चाँद पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद Ishq mein Sachcha chaand Pura dukh aur Aadha Chaand Hijr ki shab aur Aisa Chaand Itne ghane Badal ke piche Kitna tanha Hoga chaand Meri karavat par Jag uthe Neend ka kitna Kachcha chaand Sehra sehra Bhatak raha hai Apne ishq mein Sachcha chaand मिन्नत -ऐ -सैयाद बहुत रोया वो हम को याद कर के हमारी ज़िन्दगी बर्बाद कर के पलट कर फिर यहीं आ जायेंगे हम वो देखे तो हमें आज़ाद करके रिहाई की कोई सूरत नहीं है मगर हाँ मिन्नत -ऐ -सैयाद कर के बदन मेरा छुआ था उसने लेकिन गया है रूह को आबाद कर के हर आमिर तोल देना चाहता है मुकर्रर-ऐ-ज़ुल्म की मीआद कर के Minnat-ae-Saiyaad Bahut roya wo hum ko yaad kar ke Hamaari zindagi barbaad kar ke Palat kar phir yahiN aajayenge hum Wo dekhe to hamain aazaad karke Rihaayi ki koi soorat nahi hai Magar haaN minnat-ae-saiyaad kar ke Badan mera chhuaa tha usne lekin Gaya hai rooh […]

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