shayarisms4lovers mar18 16 - खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता

खुदा तो मिलता है , इंसान ही नहीं मिलता , यह चीज़ वो है जो देखी कहीं कहीं मैंने .. Khudaa to milta hai, Insaan hi nahi milta, Yeh cheez woh hai jo dekhi kahin kahin meine… जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है , उन का हर ऐब भी ज़माने को हुनर लगता है … Jin ke angan mein Ameeri ka shajar lagta hai, Un ka har aaib bhi zamane ko hunar lagta hai… तेरी बन्दा परवारी से मेरे दिन गुज़र रहे हैं न गिला है दोस्तों का , न शिकायत -ऐ -ज़माना Teri Banda Parwari Se Mere Din Guzaar Rahe Hain Na Gila Hai Doston Ka, Na Shikayat-e-Zamana… और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना Aur bhi kar daita hai Dard mein Izafa Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina

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shayarisms4lovers mar18 32 - हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी – अल्लम इक़बाल शायरी

हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी – अल्लम इक़बाल शायरी

बड़ा बे-अदब हूँ तेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता हूँ मेरी सादगी देख क्या चाहता हूँ भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी बड़ा बे-अदब हूँ , सज़ा चाहता हूँ Bada be-Adab Hoon Tairay ishq kii intehaa chahataa hoon mairi saadagii daikh kyaa chahataa hoon bharii bazm mein raaz ki baat kah di bada bai-adab hoon, sazaa chahataa hoon…. इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है बड़े इसरार पोशीदा हैं इस तनहा पसंदी में . यह मत समझो के दीवाने जहनदीदा नहीं होते . ताजुब क्या अगर इक़बाल दुनिया तुझ से नाखुश है बहुत से लोग दुनिया में पसंददीदा नहीं होते . IQBAL dunia tujh se nakhush hai Barray israr poshida hain is tanha pasnadi mein. Ye mat samjho k dewanay jahan’deeda nahi hotay. Tajub kya agar IQBAL duniya tujh se nakhush hai Bohat se log duniya mein pasanddeeda nahi hotay…. दर्द में इज़ाफ़ा और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना Dard mein Izaafa Or bhi kar daita hai Dard mein Izaafa Tere hote huwe Gairoon ka Dilasa daina…. ज़ख्मो से भर दिया सीना किसी की याद ने ज़ख्मो से भर दिया सीना हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी Zakhmoon […]

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shayarisms4lovers mar18 82 - किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी – अल्लामा इक़बाल

किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी – अल्लामा इक़बाल

किसी के इश्क़ के किसी के इश्क़ के हम-ओ-ख्याल थे हम भी कभी गुजरे ज़माने में बहुत बा-कमाल थे हम भी कभी Kisi ke Ishq ke Kisi ke Ishq ka hum-o-Khiyaal the hum bhi kabhi Gaye Dinoon mein bahut Ba-kamaal the hum bhi kabhi… ढूंढ़ता फिरता हूँ ढूंढ़ता फिरता हूँ ऐ इक़बाल अपने आप को आप ही गोया मुसाफिर आप ही मंज़िल हूँ मैं Dhoondta Firtaa Hoon Dhoondta firtaa hoon aey IQBAL apne aap ko aap hi goya musaafir aap hi manzil hoon main… उसकी फितरत उसकी फितरत परिंदों सी थी ,मेरा मिज़ाज दरख़्तों जैसा उसे उड़ जाना था और मुझे कायम ही रहना था Uski Fitraat uski Fitraat Parindoon se thi Mera Mizaaj darkhtoon jaisa use ud jana tha aur Mujhe kayam hi Rahna Tha… किसी की याद किसी की याद ने जख्मों से भर दिया है सीना अब हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी Kisi Ki Yaad Kisi Ki Yaad ne Zakhmoon se bhar Diya Seena Har ek Saans Par Shak hai k Aakhri Hogi… करे जो इश्क़ मुझ सा कोई शख्स नादान भी न हो करे जो इश्क़ कहता है नुकसान भी न हो Kare Jo IShq Mujh sa koi Shakhs Nadaan bhi na ho Kare Jo […]

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shayarisms4lovers mar18 109 - कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी – अल्लामा इक़बाल की शायरी

कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी – अल्लामा इक़बाल की शायरी

कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी आज फिर तेरी याद मुश्किल बना देगी सोने से काबिल ही मुझे रुला देगी आँख लग गई भले से , तो डर है कोई आवाज़ फिर मुझे जगा देगी Koi Awaaz Phir Mujhe Jaga Degi Aaj Pher Teri Yaad Mushkil Bana degi Sone Se kabil hi Mujhe Rula degi Aankh Lag Gai Bhale Se to Daar Hai Koi Awaaz Phir Mujhe Jaga degi.. गुनाह करता है खुद हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर गुनाह करता है खुद और लानत भेजता है शैतान पर   Gunah Karta Hai Khud Hansi Aati Hai Mujhe Hasrate Insaan Par Gunah Karta Hai Khud Aur Lanat Bhejta Hai Saitan Par.. मिटा दे अपनी हस्ती मिटा दे अपनी हस्ती को अगर खुद मर्तबा चाहे की दाना खाक में मिलकर गुल ओ गुलज़ार बनता है Mita de Apni Hasti Mita de Apni Hasti Ko Agar Khud Mrtaba Chahe Ki Dana Khak Mein Milkar Gul-O-Gulzar Banta Hai.. दाग़े मुहब्बत इस दौर की ज़ुल्मत में हर कल्बे परेशान को वो दाग़े मुहब्बत दे जो चाँद को शर्मा दे Daag-AE-Muhabbat Is Doar Ki Zulmat Mein Har Qalbe Preeshan Ko Wo Daag-AE-Mohabbat De Jo Chand Ko Sharma De

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