shayarisms4lovers June18 131 - मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

आरज़ू-ऐ-साहिल उनकी बेरुखी में भी इल्तेफ़ात शामिल है आज कल मेरी हालत देखने के काबिल है क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी मेरे सोगवारों में आज मेरा क़ातिल है मुजतरीब हैं मौजें क्यों उठ रही हैं तूफ़ान क्यों क्या किसी सफ़ीने को आरज़ू-ऐ-साहिल है सिर्फ राहजन ही से क्यों “अमीर ” […]

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shayarisms4lovers mar18 98 - जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला Mere Janaze Mein Wo Na Nikla Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla Magar Mere […]

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