shayarisms4lovers June18 131 - मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का – Ameer Qazalbash Shayari

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आरज़ू-ऐ-साहिल

उनकी बेरुखी में भी इल्तेफ़ात शामिल है
आज कल मेरी हालत देखने के काबिल है

क़त्ल हो तो मेरा सा मौत हो तो मेरी सी
मेरे सोगवारों में आज मेरा क़ातिल है

मुजतरीब हैं मौजें क्यों उठ रही हैं तूफ़ान क्यों
क्या किसी सफ़ीने को आरज़ू-ऐ-साहिल है

सिर्फ राहजन ही से क्यों “अमीर ” शिकवा हो
मंज़िलों की राहों में राहबर भी शामिल है

Aarazuu-ae-saahil

unki berukhi mein bhi iltefaat shaamil hai
aaj kal meri haalat dekhne ke kabil hai

 

Qatal ho to mera sa maut ho to meri si
mere sog vaaron mein aaj meraa qaatil hai

muztarib hain maujen kyun uth rahe hain tuufaan kyun
kya kisi safine ko aarazuu-ae-saahil hai

sirf rahzan hi se kyon “Ameer” shikva ho
manzilon ki raahon mein raahbar bhi shaamil hai


कभी सोचा न था

जगमगाते शहर की रंगीनियों में क्या न था
ढूंढने निकला था जिस को मैं , वही चेहरा न था

रेत पर लिखे हुए नामों को पढ़ कर देख लो
आज तनहा रह गया हूँ कल मगर ऐसा न था

हम वही तुम भी वही मौसम वही मंज़र वही
फासला बढ़ जाएगा इतना कभी सोचा न था

Kabhi Socha na Tha

Jagmagaate shehar ki ranginiyon mein kya na tha
dhundhane nikala tha jis ko main wahi chehara na tha

ret pe likhe huye naamon ko padh kar dekh lo
aaj tanhaa reh gayaa hoon kal magar aisa na tha

hum wahi tum bhi wahi mausam wahi manzar wahi
fasla bad jaayega itana kabhi socha na tha


तू एक दरिया

आज की रात भी गुज़री है मेरी कल की तरह
हाथ आये न सितारे तेरे आँचल की तरह

रात जलती हुई इक ऐसी चिता है जिस पर
तेरी यादें हैं सुलगते हुए संदल की तरह

तू एक दरिया है मगर मेरी तरह प्यासा है
मैं तेरे पास चला आऊंगा बादल की तरह

मैं हूँ इक ख्वाब मगर जागती आँखों का “अमीर ”
आज भी लोग छोड़ दे न मुझे कल की तरह

To Ek Dariya Hai

Aaj ki raat bhi guzari hai meri kal ki tarah
haath aaye na sitaare tere aanchal ki tarah

raat jalti hui ik aisi chitaa hai jis par
teri yaadein hain sulagate huye sandal ki tarah

to ek dariyaa hai magar meri tarah pyaasa hai
main tere paas chalaa aaunga baadal ki tarah

main hoon ik khwab magar jaagati ankhon ka “Ameer”
aaj bhi log chod de na mujhe kal ki tarah…

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shayarisms4lovers mar18 98 - जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

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मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला
मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला
मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला
जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

Mere Janaze Mein Wo Na Nikla

Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla
Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla
Magar Mere Janaze Mein Wo Na Nikla
Jiske Liye Mera Janaza Zamane Se Nikla


मेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे
तू मिलेगा मुझे हर गली ,हर दरवाज़े के पीछे
पर तू तो बड़ा ही बेवफा निकला मेरी जान
एक तू ही नहीं था मेरे जनाज़े के पीछे

Mere Janaze ke Peeche

Ek wada tha tera har wade ke peeche
Tu milega muje har gali,har darwaze ke peeche
Par tu bada bewafa nikla meri jaan
Ek tu hi nahi tha mere janaze ke peeche

तेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था मेरा हर वादे के पीछे
मैं मिलूंगा तुझसे हर गली , हर दरवाज़े के पीछे
पर तुमने ही मुद के नहीं देखा मेरी जान
मेरा भी जनाज़ा था तेरे जनाज़े के पीछे

Tere Janaze ke Peeche

Ek wada tha mera har wade ke peeche
Main milunga tujse har gali, har darwaze ke peeche
Par tumne hi mud ke nahi dekha
Mera Bhi janaza tha tere janaze ke peeche..


मेरी अर्थी

जिस दिन मेरी अर्थी इस दुनिया से विदा होगी
एक अलग समां होगा एक अलग बात होगी
कहना उस बेवफा से मर गया तुम्हारा आशिक़
अब न हम है और न हमारी बातें होंगी

Meri Arthi

Jis Din Meri Arthi is Duniya se Vida Hogi
Ek Alag Sama Hoga Ek Alag Baat Hogi
Kehna Us Bewafa Se Mar gaya Tumhara ashiq
Ab Na Hum Hai Aur Na Hamari batain Hongi..


जब लाश होगी कफ़न में

मिलना है तो मिल इसी दुनिया के चमन में
फिर क्या मिलना होगा जब लाश होगी कफ़न में

Jab Laash Hogi Kafan Mein

Milna Hai to Mil isi Duniya Ke Chaman Mein
Phir Kya Milna Hoga Jab Laash Hogi Kafan Mein..


मेरा जनाज़ा पढ़ा गया

फ़र्क़ सिर्फ इतना सा है
तेरी डोली उठी मेरी मयत उठी
फूल तुझ पर भी पड़े फूल मुझ पर भी पड़े
तू सज के गई मुझे सजाया गया
तू उठ के गई मुझे उठाया गया
सहेलियां तेरी भी थी दोस्त मेरे भी थे
महफ़िल वहां भी थी लाग् यहाँ भी थी
उन का हँसना वहां इन का रोना यहाँ
दो बोल …

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