shayarisms4lovers June18 83 - दिल को तोङ गयी – Akash

दिल को तोङ गयी – Akash

क्या कसूर था इसका जो इसे अकेला छोङ गयी, नादान था मेरा दिल क्यो इसे तोङ गयी, इक अनजान राहो से ले आई प्यार के सफर पर, और इस सफर में भी अकेला छोङ गयी । रोता हूँ छुपकर रातो में तो पता चला कि ये दिल टूटा है, तेरा किया हुआ हर इक वादा झूठा है, इन कातिलो कि भीङ में तू भी कातिल मुझे अकेला छोङ गयी, नादान था मेरा दिल क्यो इसे तोङ गयी , ढलती शामो कि सुनहरी रातो कि मचलती नीदो में सुनहरे ख्वाब थे तेरे, उन ख्वाबो में भी अकेला छोङ गयी, हालात थे मेरे ऐसे या वक्त का सितम था, जब तू थी तो ना कोई गम था, गम कि बिरान राहो पर अकेला छोङ गयी, माशूका तो बनी थी मेरी , पर मेरे मासूम दिल को तोङ गयी !

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