shayarisms4lovers mar18 184 - ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

ज़ख़्म-ऐ -जिगर तुमको दिखाएगें किसी रोज़ – परवीन शाकिर उर्दू शायरी

इश्क़ में सच्चा चाँद पूरा दुःख और आधा चाँद हिजर की शब और ऐसा चाँद इतने घने बादल के पीछे कितना तनहा होगा चाँद मेरी करवट पर जाग उठे नींद का कितना कच्चा चाँद सेहरा सेहरा भटक रहा है अपने इश्क़ में सच्चा चाँद Ishq mein Sachcha chaand Pura dukh aur Aadha Chaand Hijr ki […]

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होंठो की जुबान यह आँसू कहते है – आँसू और दर्द की शायरी

जो दर्द न होता जो आंसू न होते आँखों में तो ऑंखें इतनी खूबसूरत न होती जो दर्द न होता इस दिल में तो ख़ुशी की कीमत पता न होती जो बेवफाई न की होती वक़्त ने हमसे तो जुदाई में जीने की आदत न होती   Jo Dard Na Hota Jo aansu na hote […]

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