shayarisms4lovers mar18 206 - दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

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मुझे होश नहीं

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं

मुझ को यह भी नहीं मालुम की जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आंसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना की दिल है मेरा
बिखरे बिखरे हैं ख्यालात मुझे होश नहीं

Mujhe Hosh Nahin

kitni pee kaise kati raat mujhe hosh nahin
raat ke saath gayi baat mujhe hosh nahin

mujh ko yeh bhi nahin maalum ki janaa hai kahaan
tham le koi mera hath mujhe hosh nahin

aansuoon aur sharaabon mein guzar hai ab to
mainne kab dekhi thi barasaat mujhe hosh nahin

jaane kyaa Tuutaa hai paimaanaa ki dil hai mera
bikhare bikhare hain Khayaalaat mujhe hosh nahin


बारिश के बाद

हो गयी रूखसत घटा बारिश के बाद
एक दिया जलता रहा बारिश के बाद

मेरे बहते हुए आंसुओ को देख कर
रो पड़ी ठंडी हवा बारिश के बाद

मेरी तन्हाई का दामन थाम कर
कुछ उदासी ने कहा बारिश के बाद

याद तेरी ओढ़ कर में सो गयी
ख्वाबों का दर खुल गया बारिश के बाद

चाँद देख कर बादलों की क़ैद में
एक सितारा रो दिया बारिश के बाद

अपने घर की हर कच्ची दीवार पर
नाम तेरा लिख दिया हमने बारिश के बाद

Baarish ke Baad

Ho gayi rukhsat ghata baarish ke baad
Ek diya jalta raha baarish ke baad

Mere behte hue Aansuo ko dekh kar
Ro parri thandi hawa baarish ke baad

Meri tanhaayi ka daaman thaam kar
Kuch udaasi ne kaha baarish ke baad

Yaad teri odh kar mein so gayi
Khawaab ka daar khul gaya baarish ke baad

Chand dekh kar baadlo ki qaid mein
Ek sitaara ro diya baarish ke baad

Apne ghar ki har kachi deewaar par
Naam tera likh diya humne baarish ke baad


करते हैं वादा

चाह के भी कभी न तुमको भुला पाएंगे हम
करते हैं वादा यह निभा पाएंगे हम
खुद को फना कर देंगे इस जहाँ से हम
पर नाम तेरा न दिल से मिटा पाएंगे हम

Karte Hain Wada

Chah Ke Bhi Kabhi Na Tumko Bhula Payenge Hum
Karte Hain Wada Yeh Nibha Payenge Hum
Khud Ko Fanna Kar Denge Is Jahaan Se Hum
Par Naam Tera Na Dil Se Mita Paayenge Hum…


वो बेवफा था

मुझे मिटटी के घर बनाने का शौक़ था
उसे …

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shayarisms4lovers mar18 98 - जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

जब उठा मेरा जनाज़ा – मेरा जनाज़ा उर्दू शायरी

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मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

जब मेरा जनाज़ा इस ज़माने से निकला
मेरे जनाज़े को देखने सारा ज़माना निकला
मगर मेरे जनाज़े में वो न निकला
जिसके लिए मेरा जनाज़ा ज़माने में निकला

Mere Janaze Mein Wo Na Nikla

Jab Mera Janaza is Zamane Se Nikla
Mere Janaze Ko Dekhne Sara Zamana Nikla
Magar Mere Janaze Mein Wo Na Nikla
Jiske Liye Mera Janaza Zamane Se Nikla


मेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था तेरा हर वादे के पीछे
तू मिलेगा मुझे हर गली ,हर दरवाज़े के पीछे
पर तू तो बड़ा ही बेवफा निकला मेरी जान
एक तू ही नहीं था मेरे जनाज़े के पीछे

Mere Janaze ke Peeche

Ek wada tha tera har wade ke peeche
Tu milega muje har gali,har darwaze ke peeche
Par tu bada bewafa nikla meri jaan
Ek tu hi nahi tha mere janaze ke peeche

तेरे जनाज़े के पीछे

एक वादा था मेरा हर वादे के पीछे
मैं मिलूंगा तुझसे हर गली , हर दरवाज़े के पीछे
पर तुमने ही मुद के नहीं देखा मेरी जान
मेरा भी जनाज़ा था तेरे जनाज़े के पीछे

Tere Janaze ke Peeche

Ek wada tha mera har wade ke peeche
Main milunga tujse har gali, har darwaze ke peeche
Par tumne hi mud ke nahi dekha
Mera Bhi janaza tha tere janaze ke peeche..


मेरी अर्थी

जिस दिन मेरी अर्थी इस दुनिया से विदा होगी
एक अलग समां होगा एक अलग बात होगी
कहना उस बेवफा से मर गया तुम्हारा आशिक़
अब न हम है और न हमारी बातें होंगी

Meri Arthi

Jis Din Meri Arthi is Duniya se Vida Hogi
Ek Alag Sama Hoga Ek Alag Baat Hogi
Kehna Us Bewafa Se Mar gaya Tumhara ashiq
Ab Na Hum Hai Aur Na Hamari batain Hongi..


जब लाश होगी कफ़न में

मिलना है तो मिल इसी दुनिया के चमन में
फिर क्या मिलना होगा जब लाश होगी कफ़न में

Jab Laash Hogi Kafan Mein

Milna Hai to Mil isi Duniya Ke Chaman Mein
Phir Kya Milna Hoga Jab Laash Hogi Kafan Mein..


मेरा जनाज़ा पढ़ा गया

फ़र्क़ सिर्फ इतना सा है
तेरी डोली उठी मेरी मयत उठी
फूल तुझ पर भी पड़े फूल मुझ पर भी पड़े
तू सज के गई मुझे सजाया गया
तू उठ के गई मुझे उठाया गया
सहेलियां तेरी भी थी दोस्त मेरे भी थे
महफ़िल वहां भी थी लाग् यहाँ भी थी
उन का हँसना वहां इन का रोना यहाँ
दो बोल …

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