Hindi Story | भगवान का सत्कार

Hindi Story | भगवान का सत्कार

Hindi Story - Hindi Story | भगवान का सत्कार

एक गाँव में दामोदर नाम के एक गरीब ब्राह्मण रहा करते थे! ब्राह्मण को लोभ और लालच बिलकुल भी न था! वे दिन भर गाँव में भिक्षा व्रती करते और जो भी रुखा सुखा मिल जाता उसे भगवन का प्रशाद समझ कर ग्रहण कर लेते|

तय समय पर भ्रम्हं का विवाह संपन्न हुआ| विवाह के उपरांत ब्राह्मण ने अपनी स्त्री से कहा की देखो अब हम गृहस्थ जीवन में प्रवेश कर रहें हैं, गृहस्थ जीवन का सबसे पहला नियम होता है अतिथि सत्कार करना, गुरु आगया का पालन करना और भजन कीर्तन करना|

में चाहे घर में रहूँ न रहूँ लेकिन घर में अगर कोई अतिथि आए तो उनका बड़े अच्छे से अतिथि सत्कार करना| चाहे हम भूखे रह जाएँ लेकिन हमारे घर से कोई भी भूखा जाने न पाएं!

ब्राह्मण की बात सुनकर ब्राह्मणी ने मुस्कुराकर कहा अच्छी बात है| में इस सब बातों का ध्यान रखूंगी, आप निश्चिन्त रहें और भजन कीर्तन कर प्रभु भक्ति में ध्यान लगाए!

ब्राम्हण और ब्राह्मणी सुखी सुखी अपना जीवन यापन करने लगे! ब्राम्हण रोज सुबह अपने घर से भिक्षा व्रती के लिए आसपास के गाँव में जाते और जो कुछ भी मिलता उसे प्रभु इच्छा मानकर ग्रहण करते!

ब्राम्हण के घर की स्थिथि बहुत ही सामान्य थी| कभी-कभी तो दोनों पति पत्नी को भूखा ही सोना पड़ता! लेकिन फिर भी दोनों पति पत्नी सुखी सुखी अपना जीवन यापन कर रहे थे| मन में कोई भी द्वेष और लालच न था|

भगवान् बड़े लीलाधर हैं! वे देवलोक में बेठे-बेठे सब कुछ देखते हैं| उनकी लीला बड़ी विचित्र है| वे समय-समय पर अपने भक्तों के दुःख हरने किसी न किसी भेष में आते रहते हैं| वे हमेशा अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं|

एक दिन ब्राम्हण की भक्ति और त्याग से प्रसन्न होकर भगवान् ब्राम्हण के घर साधू का वेश धारण कर ब्राम्हण की परीक्षा लेने पहुंचे| भगवान ब्राम्हण के घर के बाहर बने चबूतरे पर बैठे और भिक्षा के लिए आवाज लगाईं|

ब्राम्हण ने जब साधू महात्मा की आवाज सुनी तो वह बाहर आया| ब्राम्हण को देख साधू महात्मा मुस्कुराए और बोले, “पुत्र आज इस रास्ते पर जाते-जाते मन किया की आज तुम्हारे घर भोजन करूँ”

ब्राम्हण ने प्रसन्नता पूर्वक साधू महात्मा को नमन किया और बोला, “महाराज ! बड़ी अच्छी और प्रसन्नता की बात है की आज आप हमारे घर भोजन करने के लिए पधारे हैं| आइये भीतर चलिए…

इतना कहकर ब्राम्हण साधू महात्मा को घर …

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