shayarisms4lovers mar18 28 - लफ़्ज़ों की शरारत – शरारत उर्दू शायरी

लफ़्ज़ों की शरारत – शरारत उर्दू शायरी

वो शरारत भी तेरी थी वो मोहब्बत भी तेरी थी , वो शरारत भी तेरी थी अगर कुछ बेवफाई थी , तो वो बेवफाई भी तेरी थी हम छोड़ गए तेरा शहर , तो वो हिदायत भी तेरी थी आखिर करते तो किस से करते तुम्हारी शिकायत वो शहर भी तेरा था और वो अदालत भी तेरी थी शरारत न होती शरारत न होती , शिकायत न होती नैनों में किसी के , नज़ाकत न होती न होती बेकरारी , न होते हम तन्हा अगर जहाँ में कम्बख्त ये मोहब्बत न होती कोई शरारत करते तुम पास होते तो कोई शरारत करते तुझे बाँहों में भर मुहब्बत करते देखते तेरी आंखों में नींद का खुमार अपनी खोई हुई नींदो की शिकायत करते आओ एक शरारत करते हैं एक शरारत करते हैं आओ मोहब्बत करते हैं हँसती आँखों से कह दो , दरिया हिजरत करते हैं , कुछ दिल ऐसे हैं जिन पर हम भी हुकूमत करते हैं कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं कौन कहता है शरारत से तुम्हें देखते हैं जान -ऐ -मन हम तो मोहब्बत से तुम्हें देखते हैं तुम को मालूम नहीं तुम हो मुकद्दस कितने देखने वाले भी तुम्हे अकीदत से तुम्हें देखते हैं […]

Continue Reading
shayarisms4lovers mar18 127 - हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

न जाने कौन न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया … Na jane kaun Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya तुझी को पूछता रहा बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ हो गया है तू , मुझे तो जो कोई भी मिला , तुझी को पूछता रहा Tujhi ko puchta raha Bichar ke mujh se, halaq ko aziz ho geya hai tu Mujhe to jo koi mila, tujhi ko puchta raha मेरे हम-सकूँ  मेरे हम-सकूँ  का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ .. मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया … Mere hum-sukhan Mere hum-sukhan ka yeh hukm tha ke kalaam us se main kam karoon.. mere hont aise sile ke phir usey meri chup ne rula diya …. यह शब-ऐ-हिजर यह शब-ऐ-हिजर तो साथी है मेरी बरसों से जाओ सो जाओ सितारों के मैं ज़िंदा हूँ अभी Shab-ae-hizar Yeh Shab-ae-hizar To Sathi Hai Meri Barsoon Se Jao So Jao Sitaro Ke Main Zinda Hoon Abhi न आना तेरा ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे […]

Continue Reading
IMG 01802 - कोई तो जलवा खुदा के बास्ते

कोई तो जलवा खुदा के बास्ते

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो – फ़िल्मी शायरी  दीदार के काबिल कोई तो जलवा खुदा के बास्ते दीदार के काबिल दिखाई तो दे संगदिल तो मिल चुके है हजारो कोई एहले दिल तो दिखाई दे Didar Ke Kabil Koi to jalwaa khudaa ke bastee didar ke kabil dikhaee to de Sangdil to mil chuke hai hajaro koi ehle dil to dikhai de… इश्क़ आसमानो से कहो अगर हमारी उड़ान देखनी हो तो अपना कद और ऊँचा कर ले हुसन वालो से कहो अगर इश्क़ देखना हो तो हम से आके मिलें Ishq Asmanoo se kahoo agar hamari udan dekhni ho To apna kad aur unchaa kar le Husaan walo se kaho agar ishq dekhana ho to hum se ake mile… दिललगी हमने बहुत देखे हैं इश्क़ में जान देने वाले पर क्या करे हजूर आशक़ी दिललगी नहीं होती Dillagi Humne bahut dekhe hain ishq mein jaan dene wale Par kya kare hajoor ashqi dillagi nahi hoti… शमा और परवाना हूँ मैं परवाना मगर कोई शमा तो हो रात तो हो जान देने को हूँ हाजिर मगर कोई बात तो हो Shama Aur Parwana Hoon main parwana magar koi shama to ho raat to ho Jaan dene ko hoon hajir magar koi baat […]

Continue Reading
shayarisms4lovers June18 116 - हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़” यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते Pyar ki Gehraiya hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ” yahan nhi dubte to kahin aur dube hote मेरी ख़ामोशी वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़” कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था Meri Khamoshi woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ” kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha… लफ़्ज़ों की तरतीब लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब” हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है Lafzon ki Tarteeb Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB” Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai… इंतज़ार तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “ तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते . Intezar Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin” tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete… ज़ख़्म खिल उठे लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था कुछ पल उसे देख सकते अश्कों को मगर गवारा कब […]

Continue Reading
yellow natural flower - कभी याद आओ तो इस तरहं – Shayari

कभी याद आओ तो इस तरहं – Shayari

एक ग़ैर के पहलु में हमारा प्यार होगा दिल डूबता है यह सोच कर की फिर न उनका दीदार होगा जिस दिन वो रुखसत किसी और के साथ होगा नींद टूट जाती है अक्सर यह सोचकर . एक ग़ैर के पहलु में हमारा प्यार होगा . Ek Ghair Ki pehlu mein hamara yaar hoga dil doobta hai yeah soach kar ki phir na unka didar hoga jis din wo Rukhsat kisi aur ke sath hoga neend toot jati aksar yeah Sochkar. Ek Ghair Ki pehlu mein hamara pyar hoga. कभी याद आओ तो इस तरहं कभी याद आओ तो इस तरहं , कभी गुनगुनाओ तो इस तरहं , मेरा दर्द फिर से ग़ज़ल बने , कभी दिल दुखाओ तो इस तरहं , मेरी धड़कने भी लरज़ उठें , कभी भूल जाओ तो इस तरहं , न सिसक सकें न बिलख सकें , कभी छोड़ जाओ तो इस तरहं , न उजड़ सकें न सँवर सकें , कभी याद आओ तो इस तरहं …….. Kabhi yaad aao to is Tarhan Kabhi yaad aao to is tarhan, Kabhi gungunao to is tarhan, Mera dard phir se ghazal bane, Kabhi dil Dukhao to is tarhan, Meri Dharkanen bhi laraz uthen, Kabhi bhool jao […]

Continue Reading