लफ़्ज़ों की शरारत – शरारत उर्दू शायरी

वो शरारत भी तेरी थी

वो मोहब्बत भी तेरी थी , वो शरारत भी तेरी थी
अगर कुछ बेवफाई थी , तो वो बेवफाई भी तेरी थी
हम छोड़ गए तेरा शहर , तो वो हिदायत भी तेरी थी
आखिर करते तो किस से करते तुम्हारी शिकायत
वो शहर भी तेरा था और वो अदालत भी तेरी थी


शरारत न होती

शरारत न होती , शिकायत न होती
नैनों में किसी के , नज़ाकत न होती
न होती बेकरारी , न होते हम तन्हा
अगर जहाँ में कम्बख्त ये मोहब्बत न होती


कोई शरारत करते

तुम पास होते तो कोई शरारत करते
तुझे बाँहों में भर मुहब्बत करते
देखते तेरी आंखों में नींद का खुमार
अपनी खोई हुई नींदो की शिकायत करते


आओ एक शरारत करते हैं

एक शरारत करते हैं आओ मोहब्बत करते हैं
हँसती आँखों से कह दो , दरिया हिजरत करते हैं ,
कुछ दिल ऐसे हैं …

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हिंदी और उर्दू शायरी – दो लाइन शायरी – Daag , Perveen , Naqvi Shayari

न जाने कौन

न जाने कौन सा आसब दिल में बसता है
के जो भी ठहरा वो आखिर मकान छोड़ गया …

Na jane kaun

Na jane kaun sa aasaab dil mein basta hai
Ke jo bhi thehra wo aakhir makaan chod gaya


तुझी को पूछता रहा

बिछड़ के मुझ से , हलक़ को अज़ीज़ हो गया है तू ,
मुझे तो जो कोई भी मिला , तुझी को पूछता रहा

Tujhi ko puchta raha

Bichar ke mujh se, halaq ko aziz ho geya hai tu
Mujhe to jo koi mila, tujhi ko puchta raha


मेरे हम-सकूँ 

मेरे हम-सकूँ  का यह हुक्म था के कलाम उससे मैं कम करूँ ..
मेरे होंठ ऐसे सिले के फिर उसे मेरी चुप ने रुला दिया …

Mere hum-sukhan

Mere hum-sukhan ka yeh hukm tha ke kalaam us se main kam karoon..
mere hont aise sile ke phir usey meri chup ne rula diya …

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कोई तो जलवा खुदा के बास्ते

अब तुम्हारे हवाले वतन साथियो - फ़िल्मी शायरी 

दीदार के काबिल

कोई तो जलवा खुदा के बास्ते दीदार के काबिल दिखाई तो दे
संगदिल तो मिल चुके है हजारो कोई एहले दिल तो दिखाई दे

Didar Ke Kabil

Koi to jalwaa khudaa ke bastee didar ke kabil dikhaee to de
Sangdil to mil chuke hai hajaro koi ehle dil to dikhai de…


इश्क़

आसमानो से कहो अगर हमारी उड़ान देखनी हो
तो अपना कद और ऊँचा कर ले
हुसन वालो से कहो अगर इश्क़ देखना हो तो हम से आके मिलें

Ishq

Asmanoo se kahoo agar hamari udan dekhni ho
To apna kad aur unchaa kar le
Husaan walo se kaho agar ishq dekhana ho to hum se ake mile…


दिललगी

हमने बहुत देखे हैं इश्क़ में जान देने वाले
पर क्या करे हजूर आशक़ी दिललगी नहीं होती

Dillagi

Humne bahut dekhe hain ishq mein jaan dene wale
Par kya …

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हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha…


लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai…


इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार …

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कभी याद आओ तो इस तरहं – Shayari

एक ग़ैर के पहलु में हमारा प्यार होगा

दिल डूबता है यह सोच कर की फिर न उनका दीदार होगा
जिस दिन वो रुखसत किसी और के साथ होगा
नींद टूट जाती है अक्सर यह सोचकर .
एक ग़ैर के पहलु में हमारा प्यार होगा .

Ek Ghair Ki pehlu mein hamara yaar hoga

dil doobta hai yeah soach kar ki phir na unka didar hoga
jis din wo Rukhsat kisi aur ke sath hoga
neend toot jati aksar yeah Sochkar.
Ek Ghair Ki pehlu mein hamara pyar hoga.


कभी याद आओ तो इस तरहं

कभी याद आओ तो इस तरहं ,
कभी गुनगुनाओ तो इस तरहं ,
मेरा दर्द फिर से ग़ज़ल बने ,
कभी दिल दुखाओ तो इस तरहं ,
मेरी धड़कने भी लरज़ उठें ,
कभी भूल जाओ तो इस तरहं ,
न सिसक सकें न बिलख सकें ,
कभी छोड़ जाओ तो इस तरहं ,
न …

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