shayarisms4lovers June18 227 - हमारी उल्फ़त का यूँ न लो इम्तिहान की दुनिया हँसे हम पे

हमारी उल्फ़त का यूँ न लो इम्तिहान की दुनिया हँसे हम पे

इश्क़ का मुक़दमा हमने किया है दाखिल इश्क़ का मुक़दमा तेरे हुस्न के दरबार में अब हर रोज़ आते है यह फ़रियाद लिए की कोई आवाज़ तो देगा हमारी उल्फ़त का यूँ  न लो इम्तिहान की दुनिया हँसे हम पे एक दिन तो तुम्हे होना है मेरा यह यक़ीन है मुझे मेरे इश्क़ पर Ishq ka muqadma Humne kiya hai dakhil ishq ka muqadma tere husn ke darbar mein Ab har roz ate hai yeh fariyaad liye ki koi awaaz to dega Hamari ulfat ka yoon na lo imtihaan ki duniya hase hum pe Ek din to tumhe hona hai mera yeah yakin hai mujhe mere ishq par… यह रंज -ओ -गम क्यों न थी ख्वाइश हिजर की न माँगी खुदाई फिर यह रंज क्यों है इश्क़ बदनाम तो फिर यह तालुक क्यों यह जुस्तजू क्यों जब इश्क़ नाम है जुदाई है तो यह रंज -ओ -गम क्यों . Yeh ranj-o-gam kyon Na thi khwaish hijar ki na mangi khudai phir yeah ranj kyon Hai ishq badaam to phir yeh taluq kyon yeah justaju kyon Jab ishq naam hai judai hai to yeh ranj-o-gam kyon… बरसों तन्हाँ तेरे इश्क़ में बरसों तन्हाँ तेरे इश्क़ में हर पल का हिसाब रखा […]

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