shayarisms4lovers mar18 12 - उर्दू ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़लें

मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है तेरे इख्लास से मोहब्बत की है तेरे एहसास से मोहब्बत की है तू मेरे पास नहीं है फिर भी तेरी याद से मोहब्बत की है कभी तो तूने भी मुझे याद किया होगा मैंने उन्ही लम्हात से मोहब्बत की है जिन में हों तेरी मेरी बातें , मैंने उस इंसान से मोहब्बत की है और मेह्की हों सिर्फ तेरी मोहब्बत से मैंने उन जज़्बात से मोहब्बत की है तुझसे मिलना तो अब ख्वाब सा लगता है मैंने तेरे इंतज़ार से मोहब्बत की है Tere Ikhlas Se Mohabbat Ki Hai Tere Ehsas Se Mohabbat Ki Hai Tu Mere Paas Nahi Hai Phir Bhi Teri Yaad Se Mohabbat Ki Hai Kabhi To Tune Bhi Mujhe Yad Kiya Hoga Meine Un Lamhaat Se Mohabbat Ki Hai Jin Mein Ho Teri Meri Batain Maine Us Insaan Se Mohabbat Ki Hai Aur Mehkey Ho Sirf Teri Mohabbat Se Maine Un Jazbaat Se Mohabbat Ki Hai Tujhse Milna To Ab Khawab Sa Lagta Hai Maine Tere Intezaar Se Mohabbat Ki Hai मुहब्बतों के पयाम लिखना ​ कभी किताबों में फूल रखना , कभी दरख्तों पे नाम लिखना हमें भी याद है आज तक वो , नज़र से हर्फ़-ऐ-सलाम लिखना […]

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shayarisms4lovers may18 72 - यादों का आईना – Unique Collection of Pakistani Urdu Shayari and Poetry

यादों का आईना – Unique Collection of Pakistani Urdu Shayari and Poetry

तेरे शोख तासुबर में ख़ामोश थे लव और मैं गुफ़्तार में गुम थी पलके न झमकती थी के मैं दीदार में गुम थी तन मन ने सजाये है तेरे शोख तासुबर में यादों का आईना था मैं सिंगार में गुम थी   Tere Shokh Tasubur Mein khamosh the luv aur main guftar mein gum thi palke na Jhamkti thi ke main didar mein ghum thi tan man ne sajaye hai tere shokh tasubur mein yadon ka aiina tha main shingar mein gum thi   जुदाई के मौसम जुदाई के मौसम सताने लगे है वो फिर टूट कर याद आने लगे है तख़्युल के परवाज़ को कैसे रोकू वो गोया मेरे घर फिर आने लगे है निशो रोक लो वो जाने लगे है मनाने में जिन को ज़माने लगे है   Judai ke Mausam judai ke mausam satane lage hai wo phir toot kar yaad ane lage hai takhayul ke parwaz ko kaise roku wo goya mere ghar phir ane lage hai nisho rok lo wo jane lage hai manane main jin ko jamane lage hai   ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी हम तेरी धुन मैं परेशान ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी और तू हम से गुरेजा ज़िन्दगी-ऐ-ज़िन्दगी तू कहीं साकी गली में खो गयी है और यहाँ डंस […]

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