इश्क़ में यह दूरियां – दूरियाँ शायरी

इन राहों की दूरियां निगाहों की दूरियां हम राहों की दूरियां फनाह हो सभी दूरियां तेरी नज़रों से ओझल हो जायेंगे तेरी नज़रों से ओझल हो जायेंगे हम दूर फ़िज़ाओं में कहीं खो जायेंगे हम हमारी यादों से लिपट कर रोते रहोगे जब ज़मीन की मट्टी में सो जायेंगे हम Teri Nazron Se Ozhal Ho Jayenge Hum Teri Nazron Se Ozhal Ho Jayenge Hum Dur Fizaoon Mein Kahain Kho Jayenge Hum Hamari Yaadon Se Lipat Kar Rote Rahoge Jab Zameen Ki Matti Mein So Jayenge Hum कुछ दूरियां तो कुछ फासले बाकी हैं अभी कुछ दूरियां तो कुछ फासले बाकी हैं पल पल सिमटती शाम से कुछ रौशनी बाकी हैं हमें यकीन है वो देखा हुआ कल आएगा ज़रूर अभी वो हौसले वो यकीन बाकी हैं Kuch Dooriyan To Kuch Faasle Baaki Hain Abhi Kuch Dooriyan To Kuch Faasle Baaki Hain Pal Pal Simatati Shaam Se Kuch Roshni Baaki Hain Hame Yakeen Hai Wo Dekha Hua Kal Aayega Zaroor Abhi Wo Housle Wo Ummedein Baaki Hain बहुत दूर निकल आये हैं चलते चलते हम बहुत दूर निकल आये हैं चलते चलते अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते रात के बाद सहर होगी मगर किस के लिए हम भी […]

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