फेसबुक चुनिंदा शायरी – अरज़ किया है

   मुझे ज़रा खुदा से हमकलाम होने दो …    तुम्हारा ज़िकर भी इसी गुफ्तगू में है मेरी शामें खुद को खुद से हमकलाम कर के देखना कितना मुश्किल है यह सफर तय कर के देखना किस क़दर उदास गुज़रती हैं मेरी शामें याद किसी को किसी शाम कर के देखना कफ़न अगर तुम्हारा होगा आँखें अगर तुम्हारी होगी तो आंसू हमारे होंगे दिल अगर तुम्हारा होगा तो धड़कन हमारी होगी ख्वाहिश है ..कफ़न अगर तुम्हारा होगा तो मयत हमारी होगी कफ़न न डालो मेरी मयत पर कफ़न न डालो मेरे चेहरे पे मुझे आदत है मुस्कुराने की कफ़न न डालो मेरी मयत पर मुझे इंतज़ार है उसके आने का उनके सदके जान है मेरी शिकायत ये नहीं के वो नाराज़ है हमसे शिकायत इस बात की है वो आज भी अनजान है हमसे दिल तोडा , जज़्बात बिखेरे , फिर भी वो दिलजान है मेरे मांग ले वो कभी जान भी मेरी , उनके सदके जान है मेरी अश्क आँख से ढल गए कभी आह लब पे मचल गई कभी अश्क आँख से ढल गए वो तुम्हारे ग़म के चिराग़ हैं कभी बुझ गए कभी जल गए जो फना हुए ग़म-ऐ -इश्क़ में , उन्हें ज़िंदगी का न ग़म […]

Continue Reading