shayarisms4lovers June18 271 - वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

तुझसे मिलकर तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था, तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया. हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था Tujhase Milakar Tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut ronaa thaa tangii-ae-waqt-ae-mulaaqaat ne rone na diyaa Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – tujhase […]

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shayarisms4lovers June18 176 - Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे “फराज़” क्यों तन्हा हो गए तेरे जाने के बाद प्यार में एक ही मौसम है बहारों का  “फ़राज़” लोग कैसे मौसमो की तरह बदल जाते है वहां से एक पानी की बूँद न निकल सकी तमाम उम्र जिन आँखों को हम झील देखते रहे जिसे भी चाहा है […]

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