shayarisms4lovers June18 271 - वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी – फैयाज़ शायरी

तुझसे मिलकर तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था, तंगी-ए-वक़्त-ए-मुलाक़ात ने रोने न दिया. हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – तुझसे मिलकर हमें रोना था बहुत रोना था Tujhase Milakar Tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut ronaa thaa tangii-ae-waqt-ae-mulaaqaat ne rone na diyaa Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – tujhase milakar hamene ronaa thaa bahut वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर, चंद घड़ियाँ यही हैं जो आज़ाद हैं, इन को खो कर अभी जान-ए-जाँ, उम्र भर न तरसते रहो. – फैयाज़ हिंदी और उर्दू शायरी – वक़्त शायरी – वक़्त की क़ैद में ज़िन्दगी है मगर Waqt ki Qaid Mein Zindagi waqt ki qaid mein zindagi hai magar chand ghadiyaan yahi hain jo aazaad hai In ko khoo kar abhi jaan-e-jaaN umar bhar na taraste raho – –Faiyaz Hindi and urdu shayari – Waqt Shayari – waqt ki qaid mein zindagi hai magar

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shayarisms4lovers June18 176 - Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

Ahmad Faraz Shayari – Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The

अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे “फराज़” क्यों तन्हा हो गए तेरे जाने के बाद प्यार में एक ही मौसम है बहारों का  “फ़राज़” लोग कैसे मौसमो की तरह बदल जाते है वहां से एक पानी की बूँद न निकल सकी तमाम उम्र जिन आँखों को हम झील देखते रहे जिसे भी चाहा है शिदद्त से चाहा है सिलसिला टुटा नहीं दर्द की ज़ंज़ीर का वो जो शख्स कहता रहा तू न मिला तो मर जाऊंगा वो जिन्दा है यही बात किसी और से कहने के लिए कुछ ऐसे हादसे भी ज़िन्दगी में होते है  “फ़राज़“ इंसान तो बच जाता है पर ज़िंदा नहीं रहता   ऐसा डूबा हूँ तेरी याद के समंदर में दिल का धड़कना भी अब तेरे कदमो की सदा लगती है एक ही ज़ख्म नहीं सारा बदन ज़ख़्मी है दर्द हैरान है की उठूँ तो कहाँ से उठूँ तुम्हारी दुनिया में हम जैसे हज़ारों है हम ही पागल थे की तुम को पा के इतराने लगे तमाम उम्र मुझे टूटना बिखरना था  “फ़राज़” वो मेहरबाँ भी कहाँ तक समेटा मुझे शायरी – अहमद फ़राज़ Akele To Hum Pehle Bhi Jee Rahe The “Fazar“ Kyon Tanhaa Ho Gaye Tere Jane Ke Baad Pyar Mein Ek Hi […]

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