shayarisms4lovers mar18 47 - उलटे ही चलते है यह इश्क़ के कारवां

उलटे ही चलते है यह इश्क़ के कारवां

प्यार , इनकार और इकरार इनकार वो करते है इकरार के लिए नफरत भी करते है तो प्यार के लिए उलटे ही चलते है यह इश्क़ के कारवां आँखों को बंद  करते है  दीदार के लिए Pyar , Inkaar Aur  Ikraar Inkaar woh karte hai ikraar ke liye, Nafrat bhi karte hai to pyar ke liye, Ulte hi chalte hai ye ishq karwan, Aankhon ko bandh karte hai deedar ke liye मोहब्बत आदत बन गई एक तमना थी जो अब हसरत बन गई कभी दोस्ती थी अब  मोहब्बत  बन गई कुछ इस तरह शामिल हुए तुम ज़िंदगी में के तुम को सोचते रहना मेरी आदत बन गई Mohabbat Aaddat Ban Gai Ek tamana thi jo ab hasrat ban gai, Kabhi dosti thi ab mohabat ban gai, Kuch is tarha shamil hue tum zindgi mein, Ke tum ko sochte rehna meri addat ban gai. बसा है आँखों में उसका चेहरा बसा है आँखों में उसका चेहरा इस कदर गुलाब से खुसबू  बसती  है जिस तरह जान बाकि हो और साँस न चले तेरी कमी महसूस होती है कुछ इस तरह Basa Hai Ankhon Mein Uska Chehra Basa Hai Ankhon mein Uska Chehra Is tarha Gulab Se Khusbu basti hai Jis tarha Jaan baqi ho aur sans na chale Teri […]

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shayarisms4lovers June18 279 - हम कभी मिल सकें मगर – फ़राज़ की शायरी

हम कभी मिल सकें मगर – फ़राज़ की शायरी

हम कभी मिल सकें मगर , शायद जिनके हम मुन्तज़र रहे, उनको मिल गए और हमसफ़र शायद जान पहचान से भी क्या होगा फिर भी ऐ दोस्त , गौर कर शायद, अजनबीयत की धुंध छट जाए चमक उठे तेरी नज़र शायद ज़िन्दगी भर लहू रुलाएगी याद -ऐ -यारां -ऐ -बेखबर शायद जो भी बिछड़े वो कब मिले हैं ‘फ़राज़ ’ फिर भी तू इंतज़ार कर शायद ..!!!​ Hum Kabhi Mil SakeiN Magar, Shayad Jinke Hum Muntazar Rahe , Unko Mil gaye Aur Humsafar Shayad Jaan Pahchaan Se Bhi Kya Hoga Phir Bhi Ae Dost, Gauur Kar Shayad, Ajnabeeyat ki Dhund Chhat Jaye Chamak Utthe Teri Nazar Shayad Zindagi Bhar Lahu Rulaayegi Yaad-e-Yaaran-e-Bekhabar Shayad Jo Bhi BichhRe Wo Kab Mile haiN ‘FARAZ’ Phir Bhi Tu Intezaar kar Shayad..!!!​

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shayarisms4lovers mar18 42 - किस ने की थी वफ़ा जो हम करते – Faraz Ahmed Shayari

किस ने की थी वफ़ा जो हम करते – Faraz Ahmed Shayari

नाकामी अपनी नाकामी का एक यह भी सबब है ” फ़राज़ ” चीज़ जो भी मांगते हैं सब से जुदा मांगते हैं Naakami Apni Naakami Ka Ek Yeh Bhi Sabab Hai “Faraz” Cheez Jo Maangte Hain Sub Se Juda Maangte Hain बरसो के प्यासे बस इतना ही कहा था हम बरसो के प्यासे हैं ” फ़राज़ “ होंटो को उस ने चूम कर खामोश कर दिया . Barso ke pyase bus itna hi kaha tha hum barso ke pyase hain “Faraz” honto ko us ne choom kar khamosh kar diya. बिछडने का सलीका उस को तो बिछडने का सलीका भी नहीं आया ” फ़राज़ “ जाते हुए वो खुद को यहीं छोड़ गया Bicharne ka Saleeka Us ko to Bicharne ka Saleeka bhi nahi ayaa “Faraz” Jate hue Khud ko yahin Chor gaya. तेरे जाने के बाद अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे ” फ़राज़ “ क्यों तन्हा से हो गए है तेरे जाने के बाद Tere Jane Ke Baad Akele To Hum Pehle Bhi Ji Rahe The “Faraz” Kyon Tanha Se Ho Gaye Hai Tere Jane Ke Baad दो गज़ कफ़न ऐ इंसान इब्न-ऐ -आदम से नंगा आया है तू ” फ़राज़ ” कितना सफर किया है […]

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shayarisms4lovers mar18 35 - हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

एक यार शीशे का पत्थरों की बस्ती में कारोबार शीशे का कोई भी नहीं करता ऐतबार शीशे का कांच से बने पुतले कहाँ दूर चलते हैं चार दिन का होता है यह खुमार शीशे का बन सँवर के हरजाई आज घर से निकला है जाने कौन होता है फिर शिकार शीशे का दिल के आज़माने को एक संग काफी है बार बार नहीं लेना इम्तेहान शीशे का फ़राज़ इस ज़माने मैं झूठे हैं सब रिश्ते हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का Ek Yaar Sheeshee Ka Patharon Ki Basti Main Karobar Sheeshe Ka Koi Bhi Nahi Karta Aitbar Sheeshe Ka Kaanch Se Bane Putlay kahan Door Chalte Hein Chaar Din Ka Hota Hai Yeh Khumar Sheeshe Ka Ban Sanwar Ke Harjaai Aaj Ghar Se Nikla Hai Jane Kon Hota Hai Phir Shikar Sheeshe Ka Dil Ke Aazmane Ko ek Sang Kafi Hai Bar Bar Nahi Lena Imtehan Sheeshe Ka FARAZ Is Zamane Main jhuthe Hein Sub Rishtey Hum Ne Bhi Banaya Tha ek Yaar Sheeshee Ka.. शाम -ऐ- आलम अश्क़-ऐ- दौरान की लहर है और हम हैं दोस्तों इस बे -वफ़ा का शहर है और हम हैं दोस्तों यह अजनबी सी मंज़िलें और रफ़त -गाह की याद तन्हाइयों […]

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shayarisms4lovers mar18 60 - फ़राज़ और मोहसिन नक़वी की खूबसूरत उर्दू शायरी

फ़राज़ और मोहसिन नक़वी की खूबसूरत उर्दू शायरी

तन्हाई और महफ़िल – फ़राज़ तन्हाई में जो चूमता है मेरे नाम के हरूफ फ़राज़ महफ़िल में  वो शख्स मेरी तरफ देखता भी नहीं ​ Tanhai Aur Mehfil – Faraz Tanhai main jo chomta hai mere naam ke haroof  “Faraz” Mehfil mein wo shakhas meri taraf dekhta bhi nahi​ जिंदगी और मौत – फ़राज़ कोई न आएगा तेरे सिवा मेरी जिंदगी में  “फ़राज़” एक मौत ही है जिस का हम वादा नही करती ​ Zindgi Aur Maut – Faraz Koi na ayega tere siwa meri zindgi main “Faraz” Ek maut hi hai jiss ka hum wada nahi karte मिज़ाज़ और धड़कन – फ़राज़ कितना नाज़ुक मिज़ाज़ है  उसका  कुछ न पूछिये  “फ़राज़” नींद नही आती उन्हें धड़कन के शोर से ​ Mizaz Aur Dhadkan – Faraz Kitna nazuk mizaz hai uska kuch na puchiay “Faraz” Neend nhi ati unhe Dhadkan ke shor se​ खुश और उदास – फ़राज़ वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “ मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता Khush Aur Udaas – Faraz Wo mujh se bichad kar khush hai to usse khush rehne do “Faraz” Mujh se mil kar us ka udass hona muje […]

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shayarisms4lovers June18 202 - पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

खुश और उदास – फ़राज़ वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “ मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता …. पहले पहले का इश्क़ अभी याद है “फ़राज़” दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों मर जाए जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों हर हुस्न -ऐ -सदा लो न दिल में उतार सका कुछ तो मिज़ाज -ऐ -यार मैं गहराइयाँ भी हों दुनिया के तजकरे तो तबियत ही ले बुझे बात उस की हो तो फिर सुख आराईयां भी हों पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है फ़राज़ दिल खुद यह चाहता था के रुस्वाइयाँ भी हों Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai “Faraz” Dil bhi bhuja ho shaam ki parchaiyan bhi hon Mar jaiyye jo aise main tanhaiyan bhi hon Har husn-ae-saada loh na dil main utar saka Kuch to mizaaj-e-yaar mein gehraiyan bhi hon Duniya ke tazkaray to tabiyat hi le bujhay Baat us ki ho to phir sukhan aaraiyan bhi hon Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai Faraz Dil khud yeh chahta tha ke ruswaiyan bhi hon

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shayarisms4lovers mar18 205 - शायरी – अदब-ऐ-वफ़ा

शायरी – अदब-ऐ-वफ़ा

रूह हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आये है तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , Rooh (रूह) वो नज़र तो आया है यही बहुत है की दिल उसे ढूंढ लाया है किसी के साथ ही सही वो नज़र तो आया है Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , nazar (नज़र) मेरा शहर छोड़ दो वो बात बात पर देते है परिंदों की मिसाल साफ़ साफ़ नहीं कहते मेरा शहर छोड़ दो Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , FARAZ (शहर) इश्क़ में ज़िद है अंजाम की परवाह है तो इश्क़ करना छोड़ दो इश्क़ में ज़िद है और ज़िद में जान भी चली जाती है Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , Ishq (इश्क़) अदब-ऐ-वफ़ा अदब-ऐ-वफ़ा भी सीखो मोहबत की दरगाह में फकत यूं ही दिल लगाने से , दिलो में घर नहीं बनते Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , […]

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shayarisms4lovers June18 210 - सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

सुना है लोग उसे – फ़राज़ अहमद सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है तो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है सुना है राफत है उसे खराब हालो से तो अपने आप को बर्बाद कर के देखते है सुना है दर्द की गाहक है चस्मे नाज़ उसकी तो हम भी उसकी गली से गुजर के देखते है सुना है उसको भी है शेयर -ओ -शायरी से सराफ तो हम भी मोईझे अपने हुनर के देखते है सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है यह बात है तो चलो बात कर के देखते है सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है सितारे बामे-ऐ-फलक से उतर के देखते है सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती है सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते है सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है फूल अपनी कवाएं क़तर के देखते है रुके तो गर्दिशयें उसका तवाफ़ करते है चले तो उसे ज़माने ठहर के देखते है Hindi and Urdu Shayari – हुस्न की तारीफ  (Faraz Ahmed) – सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है Suna hai Log use – Faraz Ahmed suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai to uske […]

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shayarisms4lovers June18 116 - हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

प्यार की गहराइयाँ हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़” यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते Pyar ki Gehraiya hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ” yahan nhi dubte to kahin aur dube hote मेरी ख़ामोशी वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़” कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था Meri Khamoshi woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ” kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha… लफ़्ज़ों की तरतीब लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब” हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है Lafzon ki Tarteeb Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB” Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai… इंतज़ार तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “ तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते . Intezar Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin” tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete… ज़ख़्म खिल उठे लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था कुछ पल उसे देख सकते अश्कों को मगर गवारा कब […]

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

मेरी वेहशत इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही कटा कीजिए न तालुक हम से कुछ नहीं है तो अदावत ही सही Meri Wehshat Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi Meri wehshat teri shohrat hi sahi kta kijiay na taaluq hum se kuch nahin hai to adaawat he sahi… शब-ऐ-इंतज़ार वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का Shab-ae-Intezaar Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka… तुम्हारे ख्याल बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम Tumhare Khyal Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal […]

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shayarisms4lovers June18 239 - हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

मैं अश्क़ हूँ मैं अश्क़ हूँ मेरी आँख तुम हो मैं दिल हूँ मेरी धडकन तुम हो मैं जिस्म हूँ मेरी रूह तुम हो मैं जिंदा हूँ मेरी ज़िन्दगी तुम हो मैं साया हूँ मेरी हक़ीक़त तुम हो मैं आइना हूँ मेरी सूरत तुम हो मैं सोच हूँ मेरी बात तुम हो मैं मुकमल हूँ जब मेरे साथ तुम हो मैं तुम मैं हूँ अब तुम ही हो , अब तुम ही हो Main ashq Hoon Main ashq Hoon Meri ankh Tum Ho Main Dil Hoon Meri Dharkan Tum Ho Main jism Hoon Meri Rooh Tum Ho Main Jinda Hoon Meri Zindagi Tum Ho Main saya Hoon Meri Haqiqat Tum Ho Main Aena Hun Meri Surat Tum Ho Main soch Hoon Meri Baat Tum Ho Main Mukmal hoon Jab Mere Sath Tum Ho Main Tum main hoon Ab Tum hi ho , Ab Tum Hi Ho… वादा वादा निभाना हमारी आदत हो गयी हमें भूलने की उनकी आदत है उन्हें याद करने की हमारी आदत हो गयी Wada Wada Nibhana Humari Aadat Ho Gayi Humein Bhulane Ki Unki Aadat Hai Unhe Yaad Karne Ki Humari Aadat Ho Gayi… गुनहगार लोग पत्थर के बूतों को पूज कर भी मासूम रहे “फ़राज़” […]

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shayarisms4lovers mar18 184 - ऐ बारिश ज़रा थम के बरस – Romantic बारिश शायरी

ऐ बारिश ज़रा थम के बरस – Romantic बारिश शायरी

ऐ बारिश ऐ बारिश ज़रा थम के बरस जब मेरा यार आ जाये तो जम के बरस पहले न बरस की वो आ न सकें फिर इतना बरस की वो जा न सकें AE Barish Ae barish zara tham ke baras Jab mera yaar aa jaye to jam ke baras Pehle na baras ki woh aa na sake Phir itna baras ki wo ja na sake.. बारिश की बूँद मत पूछ कितनी “मोहब्बत ” है मुझे उस से , बारिश की बूँद भी अगर उसे छु ले तो दिल में आग लग जाती है Baarish Ki Boond Mat Pooch Kitni “Mohabbat” Hai Mujhe Us Se, Baarish Ki Boond Bhi Agar Use Chu Le To Dil Mein Aag Lag Jati Hai.. बरसात का मौसम जब जब आता है यह बरसात का मौसम तेरी याद होती है साथ हरदम इस मौसम में नहीं करेंगे याद तुझे यह सोचा है हमने पर फिर सोचा की बारिश को कैसे रोक पाएंगे हम Barsaat Ka Mausam Jab Jab Aata Hai Ye Barsaat Ka Mausam Teri Yaad Hoti Hai Saath Hardam Is Mausam Mein Nahi Karege Yaad Tujhe Ye Socha Hai Humne Par Fir Socha Ki Barish Ko Kaise Rok Payege Hum.. ज़रा ठहरो के बारिश […]

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shayarisms4lovers mar18 206 - दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

मुझे होश नहीं कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं मुझ को यह भी नहीं मालुम की जाना है कहाँ थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं आंसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं जाने क्या टूटा है पैमाना की दिल है मेरा बिखरे बिखरे हैं ख्यालात मुझे होश नहीं Mujhe Hosh Nahin kitni pee kaise kati raat mujhe hosh nahin raat ke saath gayi baat mujhe hosh nahin mujh ko yeh bhi nahin maalum ki janaa hai kahaan tham le koi mera hath mujhe hosh nahin aansuoon aur sharaabon mein guzar hai ab to mainne kab dekhi thi barasaat mujhe hosh nahin jaane kyaa Tuutaa hai paimaanaa ki dil hai mera bikhare bikhare hain Khayaalaat mujhe hosh nahin बारिश के बाद हो गयी रूखसत घटा बारिश के बाद एक दिया जलता रहा बारिश के बाद मेरे बहते हुए आंसुओ को देख कर रो पड़ी ठंडी हवा बारिश के बाद मेरी तन्हाई का दामन थाम कर कुछ उदासी ने कहा बारिश के बाद याद तेरी ओढ़ कर में सो गयी ख्वाबों का दर खुल गया बारिश के बाद चाँद देख कर […]

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shayarisms4lovers may18 73 - मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं

मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं

मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं .. आप फूलों के खरीदार नज़र आते हैं . कल जिन्हें छु नहीं सकती थी फरिश्तों की नज़र .. आज वो रौनक -ऐ -बाजार नज़र आते हैं .. हशर मैं कौन गवाही मेरी दे ग “साग़र ” सब तुम्हारे हे तरफदार नज़र आते हैं …   Mere Daaman Main To Kanton Ke Siwa Kuch Bhee Nahin Mere Daaman Main To Kanton Ke Siwa Kuch Bhee Nahin.. Aap Phoolon Ke Kharidaar Nazar Aate Hain. Kal Jinhein Choo Nahin Sakti Thee Farishton Ki Nazar.. Aaj Wo Ronaq-e-Bazaar Nazar Aate Hain.. Hashr Main Kon Gawahi Meri De Ga “SAGHAR” Sab Tumhare He Tarafdaar Nazar Aate Hain… शमा और परवाना  लोग लेते हैं यूं ही शमा और परवाने का नाम , कुछ नहीं है इस जहाँ में गम के अफ़साने का नाम Shamma or parwaney log letey hain yoon hi shamma or parwaney ka naam, Kuch nahi hai is jahan me gum kay afsaney ka naam आगोश- ऐ- मोहब्बत फूल चाहे थे मगर हाथ में आए पत्थर , हम ने आगोश- ऐ- मोहब्बत में सुलाये पत्थर .. Aghosh-ae-mohabbat Phool chahey they magar hath mein […]

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shayarisms4lovers may18 80 - कोई तो बात है उस मैं – फैज़ अहमद फैज़ शायरी

कोई तो बात है उस मैं – फैज़ अहमद फैज़ शायरी

कोई तो बात है उस मैं “फैज़ अहमद फैज़” अब के यूं दिल को सजा दी हम ने उस की हेर बात भुला दी हम ने एक एक फूल बहुत याद आया शाख -ऐ -गुल जब वो जला दी हम ने आज तक जिस पे वो शर्माते हैं बात वो कब की भुला दी हम ने शहर-ऐ-जहाँ राख से आबाद हुआ आग जब दिल की बुझा दी हम ने आज फिर याद बहुत आया वो आज फिर उस को दुआ दी हम ने   कोई तो बात है उस मैं फ़राज़ हर ख़ुशी जिस पे लूटा दी हम ने हिंदी और उर्दू शायरी – फैज़ अहमद फैज़ शायरी – कोई तो बात है उस मैं फ़राज़ Koi To Baat Hai Us Main “Faiz” Ab Kay Yoon Dil Ko Saza Di Hum Nay Us Ki Har Baat Bhula Di Hum Nay Ek , Ek Phool Bahut Yaad Aaya Shakh-AE-Gul Jab Wo Jala Di Hum Nay Aaj Tak Jis Pay Wo Sharmatay Hain Baat Wo Kab Ki Bhula Di Hum Nay Sheher-AE-Jahan Raakh Say Abaad Hua Aag Jab Dil Ki Bujha Di Hum Nay Aaj Phir Yaad Bahut Aaya Wo Aaj Phir Us Ko Dua Di Hum Nay Koi To Baat Hai […]

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