shayarisms4lovers mar18 47 - उलटे ही चलते है यह इश्क़ के कारवां

उलटे ही चलते है यह इश्क़ के कारवां

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प्यार , इनकार और इकरार

इनकार वो करते है इकरार के लिए
नफरत भी करते है तो प्यार के लिए
उलटे ही चलते है यह इश्क़ के कारवां
आँखों को बंद  करते है  दीदार के लिए

Pyar , Inkaar Aur  Ikraar

Inkaar woh karte hai ikraar ke liye,
Nafrat bhi karte hai to pyar ke liye,
Ulte hi chalte hai ye ishq karwan,
Aankhon ko bandh karte hai deedar ke liye


मोहब्बत आदत बन गई

एक तमना थी जो अब हसरत बन गई
कभी दोस्ती थी अब  मोहब्बत  बन गई
कुछ इस तरह शामिल हुए तुम ज़िंदगी में
के तुम को सोचते रहना मेरी आदत बन गई

Mohabbat Aaddat Ban Gai

Ek tamana thi jo ab hasrat ban gai,
Kabhi dosti thi ab mohabat ban gai,
Kuch is tarha shamil hue tum zindgi mein,
Ke tum ko sochte rehna meri addat ban gai.


बसा है आँखों में उसका चेहरा

बसा है आँखों में उसका चेहरा इस कदर
गुलाब से खुसबू  बसती  है जिस तरह
जान बाकि हो और साँस न चले
तेरी कमी महसूस होती है कुछ इस तरह

Basa Hai Ankhon Mein Uska Chehra

Basa Hai Ankhon mein Uska Chehra Is tarha
Gulab Se Khusbu basti hai Jis tarha
Jaan baqi ho aur sans na chale
Teri hi kami Mehsoos hoti hai Kuch Is tarha


ख्वाब – फ़राज़

वो मुझसे पूछता किस किस के ख्वाब देखते हो “फ़राज़ ”
बेखबर जानता नहीं के यादें उसकी सोने कहाँ देती हैं

Khwab – FARAZ

Wo Mujhse Pochta Ha Kis Kis K Khwab Dekhte Ho “FARAZ”
Be Khabar Janta Nahi K Yaaden Uski Soney Kahan Deti Hain..…

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shayarisms4lovers June18 279 - हम कभी मिल सकें मगर – फ़राज़ की शायरी

हम कभी मिल सकें मगर – फ़राज़ की शायरी

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हम कभी मिल सकें मगर , शायद
जिनके हम मुन्तज़र रहे, उनको मिल गए और हमसफ़र शायद

जान पहचान से भी क्या होगा
फिर भी ऐ दोस्त , गौर कर शायद, अजनबीयत की धुंध छट जाए
चमक उठे तेरी नज़र शायद

ज़िन्दगी भर लहू रुलाएगी
याद -ऐ -यारां -ऐ -बेखबर शायद

जो भी बिछड़े वो कब मिले हैं ‘फ़राज़
फिर भी तू इंतज़ार कर शायद ..!!!​

Hum Kabhi Mil SakeiN Magar, Shayad
Jinke Hum Muntazar Rahe , Unko Mil gaye Aur Humsafar Shayad

Jaan Pahchaan Se Bhi Kya Hoga
Phir Bhi Ae Dost, Gauur Kar Shayad, Ajnabeeyat ki Dhund Chhat Jaye
Chamak Utthe Teri Nazar Shayad

Zindagi Bhar Lahu Rulaayegi
Yaad-e-Yaaran-e-Bekhabar Shayad

Jo Bhi BichhRe Wo Kab Mile haiN ‘FARAZ
Phir Bhi Tu Intezaar kar Shayad..!!!​…

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shayarisms4lovers mar18 42 - किस ने की थी वफ़ा जो हम करते – Faraz Ahmed Shayari

किस ने की थी वफ़ा जो हम करते – Faraz Ahmed Shayari

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नाकामी

अपनी नाकामी का एक यह भी सबब है ” फ़राज़ ”
चीज़ जो भी मांगते हैं सब से जुदा मांगते हैं

Naakami

Apni Naakami Ka Ek Yeh Bhi Sabab Hai “Faraz”
Cheez Jo Maangte Hain Sub Se Juda Maangte Hain


बरसो के प्यासे

बस इतना ही कहा था हम बरसो के प्यासे हैं ” फ़राज़ “
होंटो को उस ने चूम कर खामोश कर दिया .

Barso ke pyase

bus itna hi kaha tha hum barso ke pyase hain “Faraz”
honto ko us ne choom kar khamosh kar diya.


बिछडने का सलीका

उस को तो बिछडने का सलीका भी नहीं आया ” फ़राज़ “
जाते हुए वो खुद को यहीं छोड़ गया

Bicharne ka Saleeka

Us ko to Bicharne ka Saleeka bhi nahi ayaa “Faraz”
Jate hue Khud ko yahin Chor gaya.


तेरे जाने के बाद

अकेले तो हम पहले भी जी रहे थे ” फ़राज़ “
क्यों तन्हा से हो गए है तेरे जाने के बाद

Tere Jane Ke Baad

Akele To Hum Pehle Bhi Ji Rahe The “Faraz”
Kyon Tanha Se Ho Gaye Hai Tere Jane Ke Baad


दो गज़ कफ़न

ऐ इंसान इब्न-ऐ -आदम से नंगा आया है तू ” फ़राज़ ”
कितना सफर किया है तूने दो गज़ कफ़न के लिये

Do Ghaz Kafan

Ae Insaan Ibn-E-Aadam Se Nanga Aya Hai To “Faraz”
Kitna Safar Kiya Hai tune do Ghaz Kafan Ke Liye.


वफ़ा

मेरे शिकवों पर उस ने हँस के कहा ” फ़राज़ “
किस ने की थी वफ़ा जो हम करते

Wafa

Mere Shikwon Par Us Ne Hans Ke Kaha
Kis Ne Ki thi Wafa Jo Hum Karte


बेवफाई का क़िस्सा

हम सुना रहे थे अपनी बेवफाई का क़िस्सा ” फ़राज़ “
अफ़सोस इस बात का है लोगो ने तो वाह वाह कहा , उन्होंने भी वाह वाह कहा

Bewafai Ka Qissa

Hum Suna Rahe The Apni Bewafai Ka Qissa “Faraz”
Afsos is Baat Ka hai logo Ne To Wah Wah kaha,Unhone Bhi Wah Wah Kaha…

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shayarisms4lovers mar18 35 - हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

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एक यार शीशे का

पत्थरों की बस्ती में कारोबार शीशे का
कोई भी नहीं करता ऐतबार शीशे का

कांच से बने पुतले कहाँ दूर चलते हैं
चार दिन का होता है यह खुमार शीशे का

बन सँवर के हरजाई आज घर से निकला है
जाने कौन होता है फिर शिकार शीशे का

दिल के आज़माने को एक संग काफी है
बार बार नहीं लेना इम्तेहान शीशे का

फ़राज़ इस ज़माने मैं झूठे हैं सब रिश्ते
हम ने भी बनाया था एक यार शीशे का

Ek Yaar Sheeshee Ka

Patharon Ki Basti Main Karobar Sheeshe Ka
Koi Bhi Nahi Karta Aitbar Sheeshe Ka

Kaanch Se Bane Putlay kahan Door Chalte Hein
Chaar Din Ka Hota Hai Yeh Khumar Sheeshe Ka

Ban Sanwar Ke Harjaai Aaj Ghar Se Nikla Hai
Jane Kon Hota Hai Phir Shikar Sheeshe Ka

Dil Ke Aazmane Ko ek Sang Kafi Hai
Bar Bar Nahi Lena Imtehan Sheeshe Ka

FARAZ Is Zamane Main jhuthe Hein Sub Rishtey
Hum Ne Bhi Banaya Tha ek Yaar Sheeshee Ka..


शाम -ऐ- आलम

अश्क़-ऐ- दौरान की लहर है और हम हैं दोस्तों
इस बे -वफ़ा का शहर है और हम हैं दोस्तों

यह अजनबी सी मंज़िलें और रफ़त -गाह की याद
तन्हाइयों का ज़हर है और हम हैं दोस्तों

लाई अब उड़ा के गए मौसमों की खुशबू
बरखा की रूट का कहर है और हम हैं दोस्तों

शाम -ऐ- आलम ढली तो चली दर्द की हवा
रात का पिछला पहर है और हम हैं दोस्तों

फिरते हैं मिसाल -ऐ -मौज -ऐ -हवा शहर शहर मैं
आवारगी की लहर है और हम हैं दोस्तों

Shaam-ae-Alam

Ashq -ae- Douraan Ki Lehar Hai Or Hum Hain Doston
Is Be-Wafa Ka Shaher Hai Or Hum Hain Doston

Yeh Ajnabi Si Manzeelain Or Raft-gaah Ki Yaad
Tanhaion Ka Zehar Hai Or Hum Hain Doston

Lai Hai Ab Uda Ke gaye Musamon Ki Baas
Barkha Ki Rutt Ka kehar Hai Or Hum Hain Doston

Shaam -ae- Alam Dhali To Chali Dard Ki Hawa
Raat Ka Pichla Pehar Hai Or Hum Hain Doston

Phirtay Hain Misaal-ae-Mouj-ae-Hawa Shaher Shaher Main
Aawargi Ki Lehar Hai Or Hum Hain Doston..…

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shayarisms4lovers mar18 60 - फ़राज़ और मोहसिन नक़वी की खूबसूरत उर्दू शायरी

फ़राज़ और मोहसिन नक़वी की खूबसूरत उर्दू शायरी

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तन्हाई और महफ़िल – फ़राज़

तन्हाई में जो चूमता है मेरे नाम के हरूफ फ़राज़
महफ़िल में  वो शख्स मेरी तरफ देखता भी नहीं ​

Tanhai Aur Mehfil – Faraz

Tanhai main jo chomta hai mere naam ke haroof  “Faraz”
Mehfil mein wo shakhas meri taraf dekhta bhi nahi​


जिंदगी और मौत – फ़राज़

कोई न आएगा तेरे सिवा मेरी जिंदगी में  “फ़राज़”
एक मौत ही है जिस का हम वादा नही करती ​

Zindgi Aur Maut – Faraz

Koi na ayega tere siwa meri zindgi main “Faraz”
Ek maut hi hai jiss ka hum wada nahi karte


मिज़ाज़ और धड़कन – फ़राज़

कितना नाज़ुक मिज़ाज़ है  उसका  कुछ न पूछिये  “फ़राज़”
नींद नही आती उन्हें धड़कन के शोर से ​

Mizaz Aur Dhadkan – Faraz

Kitna nazuk mizaz hai uska kuch na puchiay “Faraz”
Neend nhi ati unhe Dhadkan ke shor se​


खुश और उदास – फ़राज़

वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “
मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता

Khush Aur Udaas – Faraz

Wo mujh se bichad kar khush hai to usse khush rehne do “Faraz”
Mujh se mil kar us ka udass hona muje acha nai lagta


बेवफा और ज़िंदगी – फ़राज़

वो बेवफा ही सही, आओ उसे  याद कर लें  “फ़राज़”
अभी ज़िंदगी बहुत पड़ी है, उसे भुलाने के लिए ​

Bewafa Aur Zindgi – Faraz

Wo bewafa hi sahi aao usse yaad kar lein “Faraz”
Abhi zindgi bahut padi hai usse bhulane ke liye​


आँखें – मोहसिन  नक़वी 

तेरी कम गोइ के चर्चे हैं ज़माने भर में  “मोहसिन”
किस से सीखा है यूँ आँखों से बातों की वज़ाहत करना ​

Anken – Mohsin Naqvi

Teri kam goi ke charche hain zamane bhar main “Mohsin”
Kis se seekha hai yun ankhon se baton ki wazahat karna​


हाथों की लकीरें – मोहसिन  नक़वी 

अपने हाथों की लकीरें न बदल पाया  “मोहसिन”
खुशनसीबो से बहुत हाथ मिलाये हम ने ​

Hathon ki Lakeerain – Mohsin Naqvi

Apne hathon ki lakeerain na badal paya “Mohsin”
khush naseebo se bahut hath milay hum ne​…

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shayarisms4lovers June18 202 - पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है – फ़राज़

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खुश और उदास – फ़राज़

वो मुझ से बिछड़ कर खुश है तो उसे खुश रहने दो “फ़राज़ “
मुझ से मिल कर उस का उदास होना मुझे अच्छा नहीं लगता ….


पहले पहले का इश्क़ अभी याद है “फ़राज़”

दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों
मर जाए जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों

हर हुस्न -ऐ -सदा लो न दिल में उतार सका
कुछ तो मिज़ाज -ऐ -यार मैं गहराइयाँ भी हों

दुनिया के तजकरे तो तबियत ही ले बुझे
बात उस की हो तो फिर सुख आराईयां भी हों

पहले पहले का इश्क़ अभी भी याद है फ़राज़
दिल खुद यह चाहता था के रुस्वाइयाँ भी हों

Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai “Faraz”

Dil bhi bhuja ho shaam ki parchaiyan bhi hon
Mar jaiyye jo aise main tanhaiyan bhi hon

Har husn-ae-saada loh na dil main utar saka
Kuch to mizaaj-e-yaar mein gehraiyan bhi hon

Duniya ke tazkaray to tabiyat hi le bujhay
Baat us ki ho to phir sukhan aaraiyan bhi hon

Pehle pehle ka ishq abhi yaad hai Faraz
Dil khud yeh chahta tha ke ruswaiyan bhi hon…

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shayarisms4lovers mar18 205 - शायरी – अदब-ऐ-वफ़ा

शायरी – अदब-ऐ-वफ़ा

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रूह

हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आये है
तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था

Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , Rooh (रूह)

वो नज़र तो आया है

यही बहुत है की दिल उसे ढूंढ लाया है
किसी के साथ ही सही वो नज़र तो आया है

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मेरा शहर छोड़ दो

वो बात बात पर देते है परिंदों की मिसाल
साफ़ साफ़ नहीं कहते मेरा शहर छोड़ दो

Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , FARAZ (शहर)

इश्क़ में ज़िद है

अंजाम की परवाह है तो इश्क़ करना छोड़ दो
इश्क़ में ज़िद है और ज़िद में जान भी चली जाती है

Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , Ishq (इश्क़)

अदब-ऐ-वफ़ा

अदब-ऐ-वफ़ा भी सीखो मोहबत की दरगाह में
फकत यूं ही दिल लगाने से , दिलो में घर नहीं बनते

Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , मोहबत (mohabbat)

इतिफाक

अगर होता है इतिफाक तो यूँ नहीं होता
वो चले उस राह पर जो मुझपे आकर खत्म हुई

Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , इतिफाक (ittefaq)

दिल का सौदा

न कर सके हम उनसे दिल का सौदा
लूट के ले गए लोग हमे मोहबत का दिलासा दे कर

Hindi and Urdu Shayari , Shayari , शायरी , mohabbat ki Shayari , wafa ki Shayari , दिल का सौदा (dil ka soda)
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shayarisms4lovers June18 210 - सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है – फ़राज़ की शायरी

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सुना है लोग उसे – फ़राज़ अहमद

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है
तो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते है

सुना है राफत है उसे खराब हालो से
तो अपने आप को बर्बाद कर के देखते है

सुना है दर्द की गाहक है चस्मे नाज़ उसकी
तो हम भी उसकी गली से गुजर के देखते है

सुना है उसको भी है शेयर -ओ -शायरी से सराफ
तो हम भी मोईझे अपने हुनर के देखते है

सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते है
यह बात है तो चलो बात कर के देखते है

सुना है रात उसे चाँद तकता रहता है
सितारे बामे-ऐ-फलक से उतर के देखते है

सुना है दिन को उसे तितलियाँ सताती है
सुना है रात को जुगनू ठहर के देखते है

सुना है उसके बदन की तराश ऐसी है
फूल अपनी कवाएं क़तर के देखते है

रुके तो गर्दिशयें उसका तवाफ़ करते है
चले तो उसे ज़माने ठहर के देखते है

Hindi and Urdu Shayari – हुस्न की तारीफ  (Faraz Ahmed) – सुना है लोग उसे आँख भर के देखते है

Suna hai Log use – Faraz Ahmed

suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
to uske shehar mein kuch din tehar ke dekhte hai

suna hai raft hai use khrab haalo se
to apne app ko barbaad kar ke dekhte hai

suna hai dard ki gaahak hai chaasme naaz uski
to hum bhi uski gali se gujar ke dekhte hai

suna hai usko bhi hai sher-o-shayari se saraaf
to hum bhi moejhe apne hunar ke dekhte hai

suna hai bole to baaton se phool jharthe hai
yeah baat hai to chaalo baat kar ke dekhte hai

suna hai raat use chand takta rehta hai
sitare bame falak se utaar ke dekhte hai

suna hai din ko use titliya satati hai
suna hai raat ko jungu ther ke dekhte hai

suna hai uske badan ki tarash aisi hai
phhol apni kawayen katar ke dekhte hai

ruke to gardishyein uska tawaf karte hai
chale to use jamane ther ke dekhte hai

Urdu and hindi shayari – Husn – Faraz ki shayari – suna hai log use ankh bhar ke dekhte hai
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shayarisms4lovers June18 116 - हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”

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प्यार की गहराइयाँ

हमे तो प्यार की गहराइयाँ मालूम करनी थी “फ़राज़”
यहाँ नहीं डूबता तो कहीं और डूबे होते

Pyar ki Gehraiya

hume to pyar ki gehraiya maaloom karni thi “FARAZ”
yahan nhi dubte to kahin aur dube hote


मेरी ख़ामोशी

वो अब हर एक बात का मतलब पूछता है मुझसे “फ़राज़”
कभी जो मेरी ख़ामोशी की तफ्सील लिखा करता था

Meri Khamoshi

woh ab har ek baat ka matlab poochta hai mujhse “FARAZ”
kbhi jo meri khamoshi ki tafseel likha karta tha…


लफ़्ज़ों की तरतीब

लफ़्ज़ों की तरतीब मुझे बांधनी नहीं आती “ग़ालिब”
हम तुम को याद करते हैं सीधी सी बात है

Lafzon ki Tarteeb

Lafzon ki tarteeb mujhe bandhni nahi aati “GHALIB”
Hum tum ko yaad karte hain sidhi si baat hai…


इंतज़ार

तेरे जाने के बाद बस इतना सा गिला रहा हमको “मोहसिन “
तू पलट कर देख जाता तो सारी ज़िन्दगी इंतज़ार में गुज़ार देते .

Intezar

Tere jane ke bad bus itna sa gila raha humko “mohsin”
tu palat kar dekh jata to sari zindagi intezar mein guzar dete…


ज़ख़्म खिल उठे

लाज़िम था गुज़ारना ज़िन्दगी से
बिन ज़हर पिये गुज़ारा कब था

कुछ पल उसे देख सकते
अश्कों को मगर गवारा कब था

हम खुद भी जुदाई का सबब थे
उस का ही क़सूर सारा कब था

अब औरों के साथ है तो क्या दुःख
पहले भी कोई हमारा कब था

एक नाम पे ज़ख़्म खिल उठे
क़ातिल की तरफ इशारा कब था

आए हो तो रौशनी हुई है
इस बाम में कोई सितारा कब था

देखा हुआ घर था हर किसी ने
दुल्हन की तरह संवारा कब था

Zakham Khil Uthe

Lazim Tha Guzarna Zindagi Se
Bin Zehar Piye Guzara Kab Tha

Kuch Pal Use Dekh Sakte
Ashkoon Ko Mager Gawara Kab Tha

Ham Khud Bhi Judai Ka Sabab The
Us Ka Hi Qasoor Sara Kab Tha

Ab Auron Ke Sath Hai To Kya Dukh
Phele Bhi Koi Hamara Kab Tha

Ek Naam Pe Zakham Khil Uthe
Qatil Ki Taraf Eshara Kab Tha

Ayee Ho To Roshni Hui Hai
Is Baam Main Koi Setara Kab Tha

Dekha Hua Ghar Tha Har Kisi Ne
Dulhan Ki Tarah Sanwara Kab Tha…

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shayarisms4lovers mar18 205 - शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

शब-ऐ-इंतज़ार – Mirza Galib,Ahmed Faraz,Mohsin Naqvi,Raaz Sarwer Shayari

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मेरी वेहशत

इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही

Meri Wehshat

Ishq mujhko nahin wehshat hi sahi
Meri wehshat teri shohrat hi sahi
kta kijiay na taaluq hum se
kuch nahin hai to adaawat he sahi…


शब-ऐ-इंतज़ार

वो गया तो साथ ही ले गया सभी रंग उतार के शहर के
कोई शख्स था मेरे शहर में किसी दूर पार के शहर का
चलो कोई दिल तो उदास था , चलो कोई आँख तो नम थी
चलो कोई दर तो खुला रहा शब-ऐ-इंतज़ार के शहर का

Shab-ae-Intezaar

Wo Gaya To Saath Hi Le Gaya Sabhi Rang Utaar Ke Shehar Ke
Koi Shakhs Tha Mere Shehar Mein Kisi Door Paar Ke Shehar Ka
Chalo Koi Dil to Udaas Tha, Chalo Koi Aankh To Num thi
Chalo Koi Dar To Khula Raha Shab-ae-Intezaar Ke Shehar Ka…


तुम्हारे ख्याल

बहुत दिनों से मेरे ज़ेहन के दरीचे मैं
ठहर गया है तुम्हारे ख्याल का मौसम
यूं भी यकीन हो बहारें उजड़ भी सकती हैं
तो आ के देख मेरे ज़वाल का मौसम

Tumhare Khyal

Bahut Dino Se Mere Zehan Ke Darichoon Main
Thehar Gaya Hai Tumhare Khyal Ka Mausam
Jo bhi Yaqeen hio Baharain Ujar Bhi Sakti Hain
To Aa Ke Deakh Mere Zawaal Ka Mausam…


खुदा बचाए

हमारे हाल पर वो मुस्करा तो देते हैं
चलो यही सही , कुछ तो ख़याल करते हैं
खुदा बचाए तुझे इन वफ़ा के मारों से
जवाब जिस का न हो वो सवाल करते हैं

Khudaa bachaaye

hamaare Haal par wo muskura to dete hain
chalo yahi sahi, kuChh to Khayaal karte hain
Khudaa bachaaye tujhe in wafaa ke maaron se
jawab jis ka na ho wo savaal karte hain……

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shayarisms4lovers June18 239 - हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए – Hindi Shayari

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मैं अश्क़ हूँ

मैं अश्क़ हूँ मेरी आँख तुम हो
मैं दिल हूँ मेरी धडकन तुम हो
मैं जिस्म हूँ मेरी रूह तुम हो
मैं जिंदा हूँ मेरी ज़िन्दगी तुम हो
मैं साया हूँ मेरी हक़ीक़त तुम हो
मैं आइना हूँ मेरी सूरत तुम हो
मैं सोच हूँ मेरी बात तुम हो
मैं मुकमल हूँ जब मेरे साथ तुम हो
मैं तुम मैं हूँ अब तुम ही हो , अब तुम ही हो

Main ashq Hoon

Main ashq Hoon Meri ankh Tum Ho
Main Dil Hoon Meri Dharkan Tum Ho
Main jism Hoon Meri Rooh Tum Ho
Main Jinda Hoon Meri Zindagi Tum Ho
Main saya Hoon Meri Haqiqat Tum Ho
Main Aena Hun Meri Surat Tum Ho
Main soch Hoon Meri Baat Tum Ho
Main Mukmal hoon Jab Mere Sath Tum Ho
Main Tum main hoon Ab Tum hi ho , Ab Tum Hi Ho…


वादा

वादा निभाना हमारी आदत हो गयी
हमें भूलने की उनकी आदत है
उन्हें याद करने की हमारी आदत हो गयी

Wada

Wada Nibhana Humari Aadat Ho Gayi
Humein Bhulane Ki Unki Aadat Hai
Unhe Yaad Karne Ki Humari Aadat Ho Gayi…


गुनहगार

लोग पत्थर के बूतों को पूज कर भी मासूम रहे “फ़राज़”
हम ने एक इंसान को चाहा और गुनहगार हो गए

Ghunegar

Log Pathar Ke Bhuton Ko Poojh Ker Bhi Masoom Rahay “Faraz”
Hum Ne Ek Insan Ko Chaaha Aur Ghunegar Ho Gaye…


तन्हाई

तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी
किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी
महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा तुम को
बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी..

Tanhayi

Tanhayi mere dil mein samati chali gayi
Kismat bhi apna khel dikhati chali gayi
Mehkti fiza ki khusbu me jo deka tum ko
Bas yaad unki aayi aur rulati chali gayi…

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shayarisms4lovers mar18 184 - ऐ बारिश ज़रा थम के बरस – Romantic बारिश शायरी

ऐ बारिश ज़रा थम के बरस – Romantic बारिश शायरी

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ऐ बारिश

ऐ बारिश ज़रा थम के बरस
जब मेरा यार आ जाये तो जम के बरस
पहले न बरस की वो आ न सकें
फिर इतना बरस की वो जा न सकें

AE Barish

Ae barish zara tham ke baras
Jab mera yaar aa jaye to jam ke baras
Pehle na baras ki woh aa na sake
Phir itna baras ki wo ja na sake..


बारिश की बूँद

मत पूछ कितनी “मोहब्बत ” है मुझे उस से ,
बारिश की बूँद भी अगर उसे छु ले तो दिल में आग लग जाती है

Baarish Ki Boond

Mat Pooch Kitni “Mohabbat” Hai Mujhe Us Se,
Baarish Ki Boond Bhi Agar Use Chu Le To Dil Mein Aag Lag Jati Hai..


बरसात का मौसम

जब जब आता है यह बरसात का मौसम
तेरी याद होती है साथ हरदम
इस मौसम में नहीं करेंगे याद तुझे यह सोचा है हमने
पर फिर सोचा की बारिश को कैसे रोक पाएंगे हम

Barsaat Ka Mausam

Jab Jab Aata Hai Ye Barsaat Ka Mausam
Teri Yaad Hoti Hai Saath Hardam
Is Mausam Mein Nahi Karege Yaad Tujhe Ye Socha Hai Humne
Par Fir Socha Ki Barish Ko Kaise Rok Payege Hum..


ज़रा ठहरो के बारिश है

ज़रा ठहरो के बारिश है यह थम जाए तो फिर जाना
किसी का तुझ को छु लेना मुझे अच्छ नहीं लगता

Zara Thehro Ke Baarish Hai

Zara Thehro K Baarish Hai Yeh Tham Jaey To Phir Jana…
Kisi Ka Tujh Ko Choo Laina Mujhe Acha Nahi Lagta…


पहली बारिश

जब भी होगी पहली बारिश तुमको सामने पाएंगे
वो बूंदों से भरा चेहरा तुम्हारा हम कैसे देख पाएंगे

Pehli Baarish

Jab Bhi Hogi Pehli Baarish Tumko Samne Payenge
Woh Bundo Se Bhara Chehra Tumhara Hum Kaise Dekh Payenge…

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shayarisms4lovers mar18 206 - दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

दर्द की स्याही से लिखा है यह पैगाम – उर्दू शायरी

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मुझे होश नहीं

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं
रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं

मुझ को यह भी नहीं मालुम की जाना है कहाँ
थाम ले कोई मेरा हाथ मुझे होश नहीं

आंसुओं और शराबों में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नहीं

जाने क्या टूटा है पैमाना की दिल है मेरा
बिखरे बिखरे हैं ख्यालात मुझे होश नहीं

Mujhe Hosh Nahin

kitni pee kaise kati raat mujhe hosh nahin
raat ke saath gayi baat mujhe hosh nahin

mujh ko yeh bhi nahin maalum ki janaa hai kahaan
tham le koi mera hath mujhe hosh nahin

aansuoon aur sharaabon mein guzar hai ab to
mainne kab dekhi thi barasaat mujhe hosh nahin

jaane kyaa Tuutaa hai paimaanaa ki dil hai mera
bikhare bikhare hain Khayaalaat mujhe hosh nahin


बारिश के बाद

हो गयी रूखसत घटा बारिश के बाद
एक दिया जलता रहा बारिश के बाद

मेरे बहते हुए आंसुओ को देख कर
रो पड़ी ठंडी हवा बारिश के बाद

मेरी तन्हाई का दामन थाम कर
कुछ उदासी ने कहा बारिश के बाद

याद तेरी ओढ़ कर में सो गयी
ख्वाबों का दर खुल गया बारिश के बाद

चाँद देख कर बादलों की क़ैद में
एक सितारा रो दिया बारिश के बाद

अपने घर की हर कच्ची दीवार पर
नाम तेरा लिख दिया हमने बारिश के बाद

Baarish ke Baad

Ho gayi rukhsat ghata baarish ke baad
Ek diya jalta raha baarish ke baad

Mere behte hue Aansuo ko dekh kar
Ro parri thandi hawa baarish ke baad

Meri tanhaayi ka daaman thaam kar
Kuch udaasi ne kaha baarish ke baad

Yaad teri odh kar mein so gayi
Khawaab ka daar khul gaya baarish ke baad

Chand dekh kar baadlo ki qaid mein
Ek sitaara ro diya baarish ke baad

Apne ghar ki har kachi deewaar par
Naam tera likh diya humne baarish ke baad


करते हैं वादा

चाह के भी कभी न तुमको भुला पाएंगे हम
करते हैं वादा यह निभा पाएंगे हम
खुद को फना कर देंगे इस जहाँ से हम
पर नाम तेरा न दिल से मिटा पाएंगे हम

Karte Hain Wada

Chah Ke Bhi Kabhi Na Tumko Bhula Payenge Hum
Karte Hain Wada Yeh Nibha Payenge Hum
Khud Ko Fanna Kar Denge Is Jahaan Se Hum
Par Naam Tera Na Dil Se Mita Paayenge Hum…


वो बेवफा था

मुझे मिटटी के घर बनाने का शौक़ था
उसे …

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shayarisms4lovers may18 73 - मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं

मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं

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मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं

मेरे दामन में तो काँटों के सिवा कुछ भी नहीं ..
आप फूलों के खरीदार नज़र आते हैं .

कल जिन्हें छु नहीं सकती थी फरिश्तों की नज़र ..
आज वो रौनक -ऐ -बाजार नज़र आते हैं ..

हशर मैं कौन गवाही मेरी दे ग “साग़र ”
सब तुम्हारे हे तरफदार नज़र आते हैं …

 

Mere Daaman Main To Kanton Ke Siwa Kuch Bhee Nahin

Mere Daaman Main To Kanton Ke Siwa Kuch Bhee Nahin..
Aap Phoolon Ke Kharidaar Nazar Aate Hain.

Kal Jinhein Choo Nahin Sakti Thee Farishton Ki Nazar..
Aaj Wo Ronaq-e-Bazaar Nazar Aate Hain..

Hashr Main Kon Gawahi Meri De Ga “SAGHAR”
Sab Tumhare He Tarafdaar Nazar Aate Hain…


शमा और परवाना 

लोग लेते हैं यूं ही शमा और परवाने का नाम ,
कुछ नहीं है इस जहाँ में गम के अफ़साने का नाम

Shamma or parwaney

log letey hain yoon hi shamma or parwaney ka naam,
Kuch nahi hai is jahan me gum kay afsaney ka naam


आगोश- ऐ- मोहब्बत

फूल चाहे थे मगर हाथ में आए पत्थर ,
हम ने आगोश- ऐ- मोहब्बत में सुलाये पत्थर ..

Aghosh-ae-mohabbat

Phool chahey they magar hath mein aye pathar,
Hum ne aghosh-ae-mohabbat me sulaye pathar..


जश्न-ऐ-बहाराँ

उठा कर चूम ली हैं चंद मुरझाई हुई कलियाँ ,
न तुम आए  तो यूं जश्न -ऐ -बहाराँ  कर लिया मैने ..

Jashn-ae-baharan

Utha kar choom lee hain chand murjhayi huyi kaliyan,
Na tum ayee too yoon jashn-ae-baharan kar liya mene.…

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shayarisms4lovers may18 80 - कोई तो बात है उस मैं – फैज़ अहमद फैज़ शायरी

कोई तो बात है उस मैं – फैज़ अहमद फैज़ शायरी

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कोई तो बात है उस मैं “फैज़ अहमद फैज़”

अब के यूं दिल को सजा दी हम ने
उस की हेर बात भुला दी हम ने

एक एक फूल बहुत याद आया
शाख -ऐ -गुल जब वो जला दी हम ने

आज तक जिस पे वो शर्माते हैं
बात वो कब की भुला दी हम ने

शहर-ऐ-जहाँ राख से आबाद हुआ
आग जब दिल की बुझा दी हम ने

आज फिर याद बहुत आया वो
आज फिर उस को दुआ दी हम ने

 

कोई तो बात है उस मैं फ़राज़
हर ख़ुशी जिस पे लूटा दी हम ने

हिंदी और उर्दू शायरी – फैज़ अहमद फैज़ शायरी – कोई तो बात है उस मैं फ़राज़

Koi To Baat Hai Us Main “Faiz”

Ab Kay Yoon Dil Ko Saza Di Hum Nay
Us Ki Har Baat Bhula Di Hum Nay

Ek , Ek Phool Bahut Yaad Aaya
Shakh-AE-Gul Jab Wo Jala Di Hum Nay

Aaj Tak Jis Pay Wo Sharmatay Hain
Baat Wo Kab Ki Bhula Di Hum Nay

Sheher-AE-Jahan Raakh Say Abaad Hua
Aag Jab Dil Ki Bujha Di Hum Nay

Aaj Phir Yaad Bahut Aaya Wo
Aaj Phir Us Ko Dua Di Hum Nay

Koi To Baat Hai Us Main Faiz
Her Khushi Jis Pay Luta Di Hum Nay

Hindi and urdu shayari – Faiz Ahmed Faiz Shayari – Koi To Baat Hai Us Main Faiz

शब -ऐ -ग़म

दोनों जहां तेरी मुहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब -ऐ -ग़म गुज़ार के

हिंदी और उर्दू शायरी – शब -ऐ -ग़म शायरी – एक ग़ैर के पहलु में हमारा प्यार होगा

Shab-E-Gham

Dono jahaan teri muhabbat mein haar ke
wo jaa rahaa hai koi shab-e-Gham guzaar ke

Hindi and urdu shayari – Faiz Ahmed Faiz Shayari – shab-e-Gham
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