shayarisms4lovers mar18 38 - जब भी तेरे रुखसार की तामीर हम करते है

जब भी तेरे रुखसार की तामीर हम करते है

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जब भी तेरे रुखसार की तामीर हम करते है

जब भी तेरे रुखसार की तामीर हम करते है
हम उस वक़्त खुदा का शुक्रगुजार करते है
पाया था तुझे इबादत में खुदा की रहमतों से
न कर सके मुकमल उस फ़रियाद को याद करते है

Jab Bhi Tere Rukhsar ki Tamir Hum Karte Hai

Jab bhi tere rukhsar ki tamir hum karte hai
hum us waqt khuda ka sukargujar karte hai
paya tha tujhe ibadat mein khuda ki rehmton se
na kar sake mukamal us fariyaad ko yaad karte hai..


दर -ओ -दीवार

अब कोई नहीं है इस शहर बिरने में
न कोई दर -ओ -दीवार है इस महखाने मैं
हर कोई अजनबी सा मिलता है
बीत गए वो दिन जब गुल थे गुलज़ार
अब तो जीना भी एक सवाल लगता है

Dar-o-Diwaar

Ab koi nahi hai is shehar birane mein
na koi dar-o-diwaar hai is mehkhane main
har koi ajnabi sa milta hai
beeat gaye wo din jab gul the gulzaar
ab to jina bhi ek sawal lagta hai..


दूर रह कर भी तुम दिल से जुदा न होंगे

न रहे कोई गम गिला इस क़दर वफ़ा देंगे
तेरी एक ख़ुशी की खातिर हम सब कुछ लूटा देंगे
कभी न भुलाएंगे तेरी मोहब्बत को हम
दूर रह कर भी तुम दिल से जुदा न होंगे

Door Reh Kar Bhi Tum Dil Se Judha Na Honge

Na rahe koi gila iss qadar wafa denge
teri ek khushi ki khatir hum sab khuch lutta denge
kabhie na bhulaenge teri mohabbat ko hum
door reh kar bhi tum dil se judha na honge..


तसव्वुर

तसव्वुर में ही सही एक चेहरा तो है
तू मेरे साथ नहीं पर ख्यालों में तेरा पहरा तो है

Tasabur

tasabur mein hi sahi ek chera tou hai
tu mere saath nahi per khayalon mein tera pehra tou hai…

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यादों का इक झोंका – तेरी यादें शायरी

सजा बन जाती है गुज़रे हुए वक़्त की यादें
न जाने क्यों छोड़ जाने के लिए मेहरबान होते हैं लोग

flower line1 - यादों का इक झोंका – तेरी यादें शायरी

यादों का इक झोंका

यादों का इक झोंका आया हम से मिलने बरसों बाद
पहले इतना रोये न थे जितना रोये बरसों बाद
लम्हा लम्हा उजड़ा तो ही हम को एहसास हुआ
पत्थर आये बरसों पहले शीशे टूटे बरसों बाद

Yaadon Ka Ik Jhonka

Yaadon Ka Ik Jhonka Aaya Hum Se Milne Barson Baad
Pehle Itna Roye Na The Jitna Roye Barson Baad
Lamha Lamha Ujdaa To Hi Hum Ko Ihsaas Hua
Pathar Aaye Barson Pehle Sheshe Tote Barson Baad


इन यादों को ले जाना

यादें तेरी रख दी है सँभालकर
दूर कहीं इस दिल से निकाल कर
सब कुछ तो वापिस ले लिया है तुमने दूर जाकर
इन यादों को भी ले जाना किसी रोज़ आ कर

In Yaadon Ko Le Jana

Yaaden teri rakh di hai sambhalkar
Dur kahin is dil se nikalkar
Sab kuch to wapis le liya hai tumne dur jaakar
In yaadon ko bhi le jana kisi roz aakar..


किसी की याद में बेकरार

ऐ दिल किसी की याद में होता है बेकरार क्यों
जिस ने भुला दिया तुझे , उस का है इंतज़ार क्यों
वो न मिलेगा अब तुझे , जिस की तुझे तलाश है
राहों में आज बे-कफ़न तेरी बेवफ़ाई की लाश है

Kisi Ki Yaad Mein Beqarar

Ae Dil Kisi Ki Yaad Mein Hota Hai Beqarar Kiyun
Jis Nay Bhula Diya Tujhe,Us Ka Hai Intezar Kiyun
Wo Na Milaga Ab Tujhe Jis Ki Tujhe Talash Hai
Raahon Mein Aaj Be-Kafan Teri Bewfai Ki Laash Hai


याद तेरी जब भी आई

याद तेरी जब भी आई वफ़ा रोती रही
आँखों से बरसा वो बादल के इन्तहा होती रही
तेरे मिलने की दुआ के लिए जब भी हाथ उठाए मैंने
मेरी इस मासूम ख्वाहिश पे न जाने क्यों दुआ रोती रही

Yaad Teri Jab Bhi Aayi

Yaad teri jab bhi aayi wafa roti rahi
Aankho se Barsa wo baadal ke intaha hoti rahi
Tere milne ki dua ke liey jab bhi hath uthaey mainne
Meri is masoom khwahish pe najany kyun dua roti rahi


उस की याद ने रुला दिया

फासलों ने दिल की क़ुर्बत को बढ़ा दिया
आज उस की याद ने बे हिसाब रुला दिया
उस को शिकायत है के मुझे उस की याद नहीं
हम ने जिस की याद में खुद को भुला दिया

Us Ki Yaad Ne Rula Diya

Fasloon …

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इश्क़ में यह दूरियां – दूरियाँ शायरी

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इन राहों की दूरियां
निगाहों की दूरियां
हम राहों की दूरियां
फनाह हो सभी दूरियां

तेरी नज़रों से ओझल हो जायेंगे

तेरी नज़रों से ओझल हो जायेंगे हम
दूर फ़िज़ाओं में कहीं खो जायेंगे हम
हमारी यादों से लिपट कर रोते रहोगे
जब ज़मीन की मट्टी में सो जायेंगे हम

Teri Nazron Se Ozhal Ho Jayenge Hum

Teri Nazron Se Ozhal Ho Jayenge Hum
Dur Fizaoon Mein Kahain Kho Jayenge Hum
Hamari Yaadon Se Lipat Kar Rote Rahoge
Jab Zameen Ki Matti Mein So Jayenge Hum


कुछ दूरियां तो कुछ फासले बाकी हैं

अभी कुछ दूरियां तो कुछ फासले बाकी हैं
पल पल सिमटती शाम से कुछ रौशनी बाकी हैं
हमें यकीन है वो देखा हुआ कल आएगा ज़रूर
अभी वो हौसले वो यकीन बाकी हैं

Kuch Dooriyan To Kuch Faasle Baaki Hain

Abhi Kuch Dooriyan To Kuch Faasle Baaki Hain
Pal Pal Simatati Shaam Se Kuch Roshni Baaki Hain
Hame Yakeen Hai Wo Dekha Hua Kal Aayega Zaroor
Abhi Wo Housle Wo Ummedein Baaki Hain


बहुत दूर निकल आये हैं चलते चलते

हम बहुत दूर निकल आये हैं चलते चलते
अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते
रात के बाद सहर होगी मगर किस के लिए
हम भी शायद न रहें रात के ढलते ढलते

Bahut Dur Nikal Aaye Hain Chaltay Chaltay

Hum Bahut Dur Nikal Aaye Hain Chaltay Chaltay
Ab Thehar Jayen Kahin Sham Ke Dhaltay Dhaltay
Raat Ke Baad Sehar Hogi Magar Kis Ke Liye
Hum Bhi Shayad Na Rahain Raat Ke Dhaltay Dhaltay


दूर निगाहों से बार बार जाया न करो

दूर निगाहों से बार बार जाया न करो
दिल को इस कदर तड़पाया न करो
तुम बिन एक पल भी जी न सकेंगे हम
यह एहसास बार बार हमे दिलाया न करो

Dur Nighaon Se Baar Baar Jaya Na Karo

Dur Nighaon Se Baar Baar Jaya Na Karo
Dil Ko Iss Kadar Tadpaya Na Karo
Tum Bin Ek Pal Bhi Jee Na Sakenge Hum
Yeh Ehssas Baar Baar Hume Dilaya Na Karo


उनके दूर जाने के साथ

उनके दूर जाने के साथ आंखे नम थी
ज़िन्दगी उनसे शुरू उन पर खत्म थी
वो रूठ के दूर रहने लगे हमसे
शायद हमारी मोहब्बत में ही कमी थी

Unke Dur Jane Ke Sath

Unke Dur Jane Ke Sath Ankhe Namm Thi
Zindagi Unse Shuru Unpar Khatam Thi
Wo Rooth Ke Dur Rehne Lage Humse
Shayad Hamari Mohabbat mein Hi Kami Thi


चले गए हो दूर

चले …

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shayarisms4lovers mar18 215 - जिंदगी की रंग-ओ-बू – Shayari of Life

जिंदगी की रंग-ओ-बू – Shayari of Life

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मंजूर कब थी हमको वतन से दूरियां

आईना-ऐ-ख़ुलूस-ऐ-वफ़ा चूर हो गए
जितने चिराग-ऐ-नूर थे बे नूर हो गए
मालूम यह हुआ की वो रास्ते का साथ था
मंज़िल करीब आई और हम दूर हो गए
मंजूर कब थी हमको वतन से यह दूरियां
हालात की जफ़ाओं से मजबूर हो गए
कुछ आ गयी हमे एहले-ऐ-वफ़ा ऐ दोस्तों
कुछ वो भी अपने हुस्न पे मगरूर हो गए
चरागों की ऐसी इनायत हुई हफ़ीज़
के जो ज़ख़्म भर चले थे वो नासूर हो गए

Manzoor Kab Thi Humko Watan Se Dooriyan

Aaina-AE-Khuloos-E-Wafa Churr Ho Gaye
Jitne Chirag-AE-Noor The Benoor Ho Gaye
Malum Yeh Hua Ki Wo Raaste Ka Sath Tha
Manzil Kareeb Aayi aur Hum Door Ho Gaye,
Manzoor Kab Thi Humko Watan Se Yeh Dooriyan
Haalaat Ki Jafaoon Se Majboor Ho Gaye
Kuch Aa Gayi Hume Ahl-AE-Wafa Mein Ae dosto
Kuch Wo Bhi Apne Husn Pe Magroor Ho Gaye
Charagon Ki Aisi Inayaat Hui Hafeez
Ke Jo Zakham Bhar Chale the Wo Nasoor Ho Gaye

 


ऐ इंसान जरा संभल के चल

कल रात हम गुनगुनाते निकले दिल में कुछ अरमान थे
एक तरफ थे जंगल , एक तरफ श्मशान थे
रस्ते में एक हड्डी पैरो से टकराई , उस के यह बयान थे
ऐ इंसान जरा संभल के चल , वरना कभी हम भी इंसान थे

Ae insaan jara sambhal ke chal

Kal raat hum gungunate nikle dil mein kuch armaan the
Ek taraf thi jangal the, ek taraf shmshan the
Raste mein ek haddi paon se takrai, us ke ye bian the
Ae insaan jara sambhal ke chal, warna kabhi hum bhi insaan the

 


मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

ज़िन्दगी क़ैद-ऐ-मुसलसल के सिवा कुछ भी नहीं
किया था जुर्म-ऐ-वफ़ा इस के सिवा कुछ भी नहीं
जीने की आरज़ू में रोज़ मर रहे हैं
दवा तेरी मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
खींचती है अपनी तरफ गुलशन की रंग-ओ-बू
ख्वाइश फूलों मैं खुशबू के सिवा कुछ भी नहीं
भूल जाना एक नय्मत है खुदा की इसलिए
भूलना तेरा हकीकत के सिवा कुछ भी नहीं
थोड़ा है फ़र्क़ बस इंसान और हैवान में
बाकि इस दुनिया में मुहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं

Mohabbat ke siwa kuch bhi nahi

Zindagi qaid-ae-musalsal ke siwa kuch bhi nahi
Kiya tha jurm-ae-wafa iss ke siwa kuch bhi nahi
Jeenay ki arzo main roz mar rahey hain
Dawa teri mohabbat ke siwa kuch bhi nahi
Khinchti hai apni taraf gulshan ki rang-o-bu
Khwaish …

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