shayarisms4lovers June18 292 - ख्वाब टूटें या बिक जाएँ – ग़मगीन शायरी

ख्वाब टूटें या बिक जाएँ – ग़मगीन शायरी

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मेरे दिल में

घर बना कर वो मेरे दिल में छोड़ गया है
न खुद रहता है न किसी और को बसने देता है

Mere Dil Mein

Ghar bana kar wo mere dil mein chod gaya hai
Na khud rehta hai na kisi aur ko basne deta hai


ज़रा ठहर जाओ

थकी थकी सी फ़िज़ाएं , बुझे बुझे से तारे
बड़ी उदास गहरी रातें है , ज़रा ठहर जाओ

Zara Tehar Jao

Thaki thaki si fizaayen, bujhey bujhey se taare
Badi udaas gehri ratein hai, zara tehar jao


दस्तक की तमन्ना

उजड़े हुए घर का मैं वो दरवाज़ा हूँ “मोहसिन”
दीमक की तरह खा गयी जिसे तेरी दस्तक की तमन्ना

Dastak ki Tamanna

Ujde hue ghar ka main wo darwaaza hoon “Mohsin”
Deemak ki tarah kha gayi jise teri dastak ki tamanna


वो कितना मेहरबान था

वो कितना मेहरबान था के हज़ारों ग़म दे गया “मोहसिन”
हम कितने खुदगर्ज निकले कुछ न दे सके “मुहब्बत ” के सिवा

Wo Kitna Mehrban Tha

Wo Kitna Mehrban Tha Ke Hazaron Ghum De Gaya “Mohsin”
Hum Kitne Khudgaraz Nikle Kuch Na De Sake “MUHABBAT” Ke siva


बहलाया था दिल

मौजूद थी उदासी अभी पिछली रात की
बहलाया था दिल ज़रा सा के फिर रात हो गयी

Behlaya Tha Dil

Mojood thi udaasi abhi pichli raat ki
behlaya tha dil zara sa ke phir raat ho gayi


यकीन दिल दो

तुम मेरे हो इस बात में कोई शक नहीं
तुम किसी और के नहीं होंगे इस बात का यकीन दिल दो

Yakeen Dila Do

Tum Mere Ho Is Baat Me Koi Shak Nahi
Tum kisi Aur Ke Nahi Hoge is Baat Ka Yakeen Dila Do


पैग़ाम -ऐ -शौक

पैग़ाम -ऐ -शौक को इतना तवील मत करना ऐ “क़ासिद”
बस मुकतसर उन से कहना के आँखें तरस गयी हैं

Paigham-ae-Sauk

Paigham-ae-Sauk Ko Itna Taveel Mat Karna Ae “Qasid”
Bas Muqtasar Un Se Kehna Ke Aankhein Taras Gayi Hain


फितरत -ऐ -इंसान

गुफ़्तुगू कीजिये के यह फितरत -ऐ -इंसान है “शाकेब”
जाले लग जाते हैं जब बंद मकान होता है

Fitrat-ae-Insan

Guftugu kijiye ke yeh fitrat-ae-insan hai “Shakeb”
Jaalay lag jatay hain jab band makaan hota hai

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shayarisms4lovers mar18 153 - याद-ऐ-गम

याद-ऐ-गम

तुम याद नहीं करते हम भुला नहीं सकते
तुम हँसा नहीं सकते हम रुला नहीं सकते
दोस्ती इतनी प्यारी है हमारी
तुम जान नहीं सकते और हम बता नहीं सकते

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दिल गुमसुम जुबान खामोश क्यों है
यह आँखें आज नम क्यों है
जिन्हे कभी पाया ही न था
तो आज उन्हें हमे खोने का गम क्यों है

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